हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की ग्रंथियां (glands) मौजूद होती हैं । इन्हीं glands में एक ग्रंथि हमारे गले में भी मौजूद होती है जिसे थायराइड ग्रंथि या अवटु ग्रंथि भी कहा जाता है । यह ग्रंथि तितली के आकार की होती है तथा गले के सामने वाले हिस्से में मौजूद होती है । इस ग्रंथि से विभिन्न प्रकार के हार्मोन उत्सर्जित होते हैं जो शरीर की विभिन्न चपापचय क्रियाओं एवं अन्य विकास कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं ।
यदि थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाए तो हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के रोग पैदा हो जाते हैं । इन रोगों में थायराइड रोग मुख्य होता है । थायराइड रोग का कारण अस्वस्थ खानपान, रहन सहन एवं तनावपूर्ण जीवन को माना जाता है । जब किसी व्यक्ति के शरीर में मौसम परिवर्तन के कारण वात, पित्त एवं कफ का संतुलन बिगड़ जाता है तो थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ जाता है तथा व्यक्ति को थाईरॉयड हो जाता है ।
आयुर्वेद में इस रोग का सफल उपचार मौजूद है । बहुत से एलोपैथिक डॉक्टर इस रोग को दूर करने के लिए स्टेरॉइड्स का सेवन करते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक होता है । दोस्तों , आज इस लेख में हम आपको थॉयरॉइड बीमारी के बारे में विस्तार से बात करेंगे । इस लेख को पढ़ने के बाद आपको इस बीमारी के बारे में काफी अच्छी जानकारी मिलेगी ।
थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले विभिन्न हारमोंस
Thyroid ग्रन्थि Tri–iodothyronin (T3) और Thyrocalcitonin नामक हार्मोन स्रावित करती है । ये होर्मोनेस हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं को संतुलित रखने में मददगार होते हैं । आइये पहले थाइराइड ग्रंथि के कार्यों के बारे में जानते हैं ।
थायराइड ग्रंथि के कार्य
थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर में निम्न उपापचय क्रियाओं के लिए जिम्मेदार होती है ।
- थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन उपापचय की दर को बढ़ाते हैं जो शरीर के विकास के लिए लाभदायक है ।
- यह ग्रंथि कोशिका ऑक्सीकरण के द्वारा शरीर में ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ाती है जिससे व्यक्ति स्वस्थ महसूस करता है ।
- यह ग्रंथि ग्लूकोस के अवशोषण, प्रोटीन संश्लेषण व शरीर के तापमान में वृद्धि करती है ।
- यह ग्रंथि शारीरिक विकास एवं विभेदन के लिए आवश्यक है ।
- यह ग्रंथि एड्रीनलीन व नारियल की क्रिया विधि को बढ़ाती है ।
- यह ग्रंथि हृदय स्पंदन व शवसन की दर में वृद्धि करती है ।
- यह रक्त में मौजूद चीनी, कोलेस्ट्रोल तथा फास्फोलिपिड की मात्रा को नियंत्रित रखती है ।
- यह महिलाओं में दूध के उत्पादन को बढ़ाती है ।
थायराइड रोग के प्रकार
थायराइड रोग थायराइड ग्रंथि में बनने वाले हार्मोन की स्थिति पर निर्भर करता है जो कि इस प्रकार है ।
- थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता
- थायराइड ग्रंथि की अल्प सक्रियता
थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता
जब थायराइड ग्रंथि बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाती है तो थायराइड ग्रंथि द्वारा बनने वाले t3 अधिक मात्रा में बनने लगता है । हार्मोन का अधिक मात्रा में उत्पादन होने पर शारीरिक ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में होता है । इस स्थिति को ही हाइपरथाइरॉयडिज़्म कहा जाता है । यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती है । इस रोग के लक्षण इस प्रकार है ।
- थायरॉइड हार्मोन (Thyroid harmone) की अधिकता के कारण शरीर में चयापचय यानी मेटाबोलिज्म (Metabolis) बढ़ जाता है, और हर काम तेजी से होने लगता है।
- घबराहट
- चिड़चिड़ापन
- अधिक पसीना आना।
- हाथों का काँपना।
- बालों का पतला होना एवं झड़ना।
- अनिद्रा (नींद ना आने की परेशानी)
- मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना।
- दिल की धड़कन बढ़ना।
- बहुत भूख लगने के बाद भी वजन घटता है।
- महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता देखी जाती है।
- ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो जाता है, जिसकी वजह से हड्डी में कैल्शियम (Calcium) तेजी से खत्म होता है।
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थायराइड ग्रंथि की अल्प सक्रियता
जब थायराइड ग्रंथि की सक्रियता कम हो जाती है तो हार्मोन उत्पादन कम मात्रा में होता है । इस समस्या के लक्षण इस प्रकार है:
- धड़कन की धीमी गति।
- हमेशा थकान बना रहना।
- अवसाद (Depression)
- सर्दी के प्रति अधिक संवेदनशील होना।
- मेटाबोलिज्म धीमा पड़ने के कारण वजन बढ़ना।
- नाखूनों का पतला होना एवं टूटना।
- पसीने में कमी।
- त्वचा में सूखापन आना और खुजली होना।
- जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न होना।
- बालों का अधिक झड़ना।
- कब्ज
- आँखों में सूजन।
- बार-बार भूलना।
- कन्फ्यूज रहना, सोचने-समझने में असमर्थ होना।
- मासिक धर्म में अनियमितता होना। 28 दिन की साइकिल का 40 दिन या इससे अधिक दिन का होना।
- चेहरे और आँखों में सूजन।
- खून में कोलेस्ट्रॉल (Cholestrol) का स्तर बढ़ जाना।
- महिलाओं में इसके कारण बांझपन आ सकता है।
थायराइड रोग होने के कारण
आइए अब हम जानते हैं कि थायराइड होने के कौन कौन से कारण होते हैं ।
- थायराइड होने का सबसे मुख्य कारण खराब जीवनशैली एवं बहुत ज्यादा तनाव में रहना है । यदि आप बहुत अधिक तनावपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है । अधिक तनाव से हमारे गुर्दे एवं थायराइड ग्रंथि बुरी तरह प्रभावित होती हैं जिस कारण थायराइड की समस्या होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है ।
- यदि आप अपने भोजन में आयोडीन की मात्रा बहुत ज्यादा कम या बहुत ज्यादा लेते हैं तो दोनों ही स्थितियों में इसका सीधा प्रभाव आपकी थायराइड ग्रंथि पर पड़ता है तथा आप थायराइड रोग से ग्रसित हो सकते हैं ।
- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में विभिन्न प्रकार के चपापचय परिवर्तन होते हैं जिस कारण महिलाओं के शरीर में हारमोंस का संतुलन कभी-कभी बिगड़ जाता है । इसी का परिणाम थायराइड की समस्या भी हो सकती है ।
- इन सभी कारणों के अलावा थायराइड रोग अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है । यदि आपके परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही हो तो यह समस्या आपको भी हो सकती है ।
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थायराइड रोग होने के अन्य कारण
थायराइड रोग होने के कुछ और भी कारण हो सकते हैं जो कि इस प्रकार हैं ।
हाशिमोटो रोग
इस रोग के कारण थायराइड ग्रंथि का कुछ भाग निष्क्रिय हो जाता है, जिससे हाइपोथायराइड की समस्या हो सकती है ।
थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाना
थायराइड ग्रंथि में सूजन आने के कारण थायराइड ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है जिस कारण थायराइड की समस्या हो सकती है ।
ग्रेव्स रोग के कारण
इस रोग में व्यक्ति की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ ऐसे एंटीबॉडीज का निर्माण करने लगती है जो शरीर में टीएसएच को बढ़ा देते हैं जिस कारण व्यक्ति थायराइड रोग से ग्रसित हो जाता है । वास्तव में यह एक अनुवांशिक रोग है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में चलता है ।
गंडमाला रोग
यह भी थायराइड का एक कारण होता है । विटामिन b12 के कारण थायराइड की समस्या पैदा हो जाती है ।
थायराइड रोग के घरेलू इलाज
अभी तक हमने थायराइड रोग के लक्षण एवं इसके बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त की हैं । आइए अब हम जानते हैं कि थायराइड रोग को दूर करने के लिए कौन कौन से घरेलू उपाय होते हैं, जिन्हें आप अपना कर इस बीमारी की संभावना को काफी हद तक कम कर सकते हैं ।
थायराइड के लिए लाभदायक काली मिर्च
काली मिर्च थायराइड रोग में बहुत अधिक फायदा करती है । यदि आप अपने भोजन में नियमित रूप से काली मिर्च शामिल करते हैं तो आप इस बीमारी से बचे रहेंगे और यदि आपको थायराइड की समस्या है तो आप को काफी लाभ मिलेगा ।
थायराइड के लिए लाभदायक लौकी
यदि आप लौकी का जूस खाली पेट पीते हैं तो यह थायराइड रोग में काफी अच्छा फायदा पहुंचाता है । इसलिए आप मौसम में मिलने वाली लौकी का जरूर प्रयोग करें ।
थायराइड के लिए लाभदायक हल्दी वाला दूध
दूध में हल्दी मिलाकर पीने से जहां शरीर में होने वाला दर्द कम होता है वहीं दूसरी ओर यह दूध थायराइड रोग में भी बहुत अच्छा फायदा पहुंचाता है । थायराइड के रोगियों को हल्दी वाला दूध नियमित रूप से पीना चाहिए ।
थायराइड के लिए लाभदायक त्रिफला
त्रिफला चूर्ण जहां एक और पेट की बीमारियों को दूर करता है वहीं दूसरी ओर यह अन्य कई बीमारियों में लाभदायक होता है । इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है थायराइड । यदि आप प्रतिदिन एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करते हैं तो यह इस रोग में बहुत अधिक फायदेमंद होता है ।
थायराइड के लिए लाभदायक हरा धनिया
हरा धनिया थायराइड की समस्या के लिए काफी फायदेमंद होता है । आप अपने भोजन में हरा धनिया का नियमित रूप से सेवन करें । इसके अलावा थोड़े से हरे धनिया को पीसकर पानी में मिलाकर आप नियमित रूप से सेवन करें इससे थायराइड में काफी अच्छा आराम मिलता है ।
थायराइड का घरेलू उपचार है तुलसी
यदि आप दो चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा के रस मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें तो कुछ ही दिनों में थायराइड की समस्या में आपको सकारात्मक लाभ देखने को मिलेंगे ।
थायराइड का घरेलू उपचार है अश्वगंधा
अश्वगंधा विभिन्न प्रकार के मानसिक एवं शारीरिक रोगों को दूर करने की लाजवाब औषधि है । अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करने से थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन का संतुलन नियमित होता है जिससे यह रोग दूर हो जाता है । रात को सोते समय एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण का गाय के दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने पर बहुत अच्छा आराम मिलता है ।
थायराइड का घरेलू उपचार है मुलेठी
मुलेठी में ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड पाया जाता है जो थायराइड कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है । आप अपने खानपान में मुलेठी को भी शामिल करने की आदत डालें इससे आपको निश्चित रूप से लाभ मिलेगा ।
थायराइड के रोगियों का खान पान
यदि आपको लगता है कि आप थायराइड की बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं या आप इस बीमारी से पहले से ही पीड़ित हैं तो आपको अपने खान-पान में परिवर्तन करना आवश्यक है । यहां हमने थायराइड के रोगियों के लिए खानपान से संबंधित कुछ विशेष बातें बताइ हैं ।
- थायराइड के रोगियों को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिनमें चिकनाई अर्थात वसा बहुत कम हो ।
- आप अपने भोजन में अधिक से अधिक फलों एवं हरी सब्जियों का सेवन करें ।
- ज्यादा तली हुई चीजें ना खाएं ।
- हरी पत्तेदार सब्जियां अधिक से अधिक खाय, क्योंकि इन सब्जियों में आयरन बहुत अधिक होता है जो थायराइड के रोगियों के लिए लाभदायक होता है ।
- ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें जिनमें मिनरल्स एवं विटामिन की पर्याप्त मात्रा मौजूद हो ।
- आयोडीन युक्त पदार्थों का सेवन करें लेकिन ध्यान रखें आयोडीन की अधिक मात्रा भी आप को नुकसान पहुंचा सकती हैं ।
- अपने नाश्ते में बदाम, काजू एवं सूरजमुखी के बीजों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें क्योंकि इनमें आयोडीन पर्याप्त मात्रा में होता है जो थायराइड के लिए लाभदायक होता है ।
- अपने नाश्ते में दूध को शामिल करें तथा दोपहर के भोजन में दही का अधिक से अधिक सेवन करें ।
- विटामिन A थायराइड के रोगियों के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है । इसके लिए गाजर या अन्य ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिनमें विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो ।
- अधिक से अधिक साबुत अनाज का सेवन करें क्योंकि इनमें फाइबर, प्रोटीन एवं विटामिन पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं ।
- घर के भोजन का ही अधिक से अधिक सेवन करें । बाजार की चीजों को ना खाने की आदत डालें ।
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थायराइड के रोगियों के लिए आहार विहार एवं जीवन शैली
थायराइड के रोगियों को अपने आहार विहार का विशेष ध्यान रखना परम आवश्यक है । यदि आप अपने आहार विहार का ध्यान नहीं रखेंगे तो यह रोग धीरे-धीरे असाध्य हो जाएगा तथा आप संकट में आ सकते हैं ।
- थायराइड के रोगियों को काम से लौटने के पश्चात अधिक से अधिक समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहिए ।
- टीवी देखें, कोई इंडोर गेम खेलें एवं अपने आप को अधिक से अधिक व्यस्त रखें ।
- किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव अपने ऊपर हावी ना होने दें, हो सके तो परिवार के साथ कहीं घूमने चले जाएं ।
- अपनी आदत सुधार करें, रात को जल्दी सोए एवं सुबह जल्दी सो कर उठे ।
- पानी खूब पिए, नशीले पदार्थों जैसे धूम्रपान एवं अल्कोहल इत्यादि का बिल्कुल सेवन न करे ।
- अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें जैसे कि हमने ऊपर बताया ।
थायराइड के रोगियों के लिए योग एवं प्राणायाम
थायराइड के रोगियों को योग एवं प्राणायाम नियमित रूप से करना चाहिए । बाबा रामदेव ने बहुत से थायराइड के रोगियों को बिना किसी दवाई के केवल योग एवं परिणाम के माध्यम से बिल्कुल स्वस्थ कर दिया है जो कि योग एवं प्राणायाम का चमत्कार ही है । यदि आप इस बीमारी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यूट्यूब पर बाबा रामदेव की वीडियो को देख सकते हैं । नीचे हमने कुछ योगासन दिए हैं आप इन को नियमित रूप से करें, आप निश्चित ही इस बीमारी को हरा देंगे ।
- सूर्य नमस्कार करें।
- पवनमुक्तासन करें।
- सर्वांगासन करें।
- उष्ट्रासन करें।
- हलासन करें।
- मत्स्यासन करें।
- भुजंगासन करें।
तो दोस्तों , इस प्रकार हमने इस लेख में थाइराइड बीमारी के बारे में विस्तार से बताने की पूरी कोशिश की है। लेकिन यदि फिर भी आपका कोई प्रश्न हो तो आप हमारे से कमेंट में पूछ सकते हैं।