अश्वनी मुद्रा करने का तरीका एवं इसके फायदे Ashwani Mudra Benefits in Yoga

By | February 23, 2020

अश्वनी मुद्रा क्या है What is Ashwani Mudra

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करेंगे अश्विनी मुद्रा (Ashwani Mudra) के बारे में । दोस्तों अश्विनी मुद्रा एक ऐसी योग मुद्रा है जिसे नियमित रूप से करने पर हमारे शरीर के अनेक प्रकार के रोग दूर होते हैं । आज इस लेख में हम आपको अश्वनी मुद्रा से संबंधित समस्त जानकारी देंगे ।

अश्वनी मुद्रा को करने की विधि How to do Ashwani Mudra

आपने देखा होगा गाय, भैंस या घोड़ा मल त्याग करने के पश्चात अपने गुदाद्वार को बार-बार सिकुड़ते हैं तथा ढीला करते हैं । ठीक उसी प्रकार यदि हम अपने गुदाद्वार को सिकोड़ें एवं ढीला करें तो इस क्रिया को ही अश्वनी मुद्रा कहा जाता है ।

देखने और सुनने में यह मुद्रा बहुत आसान लगती है लेकिन इस मुद्रा को करने में कुछ सावधानियां भी रखनी आवश्यक होती हैं ।

अश्विनी मुद्रा करने का तरीका Mehod of doing Ashwani Mudra

अश्विनी मुद्रा करने के लिए आप जमीन या तख्त पर कोई चटाई या कंबल आदि बिछाकर उस पर बैठ जाएं । अब आप सांस को बाहर की तरफ छोड़ दें तथा पेट को तीन से चार बार अंदर बाहर करें और इसके पश्चात गुदा को सिकोड़ कर थोड़ी देर रोकें और फिर तीन चार सेकेंड बाद छोड़ दें ।

इसके बाद सांस लें तथा इसी क्रिया को दोहराएं । इस क्रिया को आप अपनी शक्ति के अनुसार ही करें । शक्ति से ज्यादा इस क्रिया को आप ना करें । एक बार में आप 20 से 25 बार इस क्रिया को कर सकते हैं । बाद में आप एक बार में 100 बार तक भी इस क्रिया को कर सकते हैं ।

अश्विनी मुद्रा करने के चिकित्सकीय लाभ Medical Benefits of doing Ashwani Mudra

1. अश्विनी मुद्रा को लगातार करने से गुदा से संबंधित रोग जैसे बवासीर (piles), गुदा में दर्द होना आदि में लाभ मिलता है । 
2. अश्विनी मुद्रा के लगातार अभ्यास से मूत्र संस्थान से संबंधित बीमारियां जैसे बार-बार पेशाब आना, रुक रुक कर पेशाब आना, पेशाब में जलन, स्वपनदोष (night fall), धातु गिरना ,शीघ्रपतन (premature ejaculation) आदि समस्याओं में लाभ मिलता है । मूत्र रोग के लिए आप अश्वनी मुद्रा के साथ साथ चंद्रप्रभा वटी का सेवन भी कर सकते हैं ।
3. अश्विनी मुद्रा करने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है । जीवनी शक्ति बढ़ती है एवं व्यक्ति निरोग रहता है ।
4. अश्विनी मुद्रा के अभ्यास से नपुंसकता (impotency) की समस्या दूर होती हैं ।
5. अश्विनी मुद्रा लगातार करने से कब्ज (constipation) एवं पाचन संस्थान की समस्याओं में लाभ मिलता है ।
6. अश्विनी मुद्रा से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है ।

अश्वनी मुद्रा का आध्यात्मिक लाभ Spritual benefits of Ashwani Mudra

अश्वनी मुद्रा करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है । माना जाता है की अश्वनी मुद्रा के निरंतर अभ्यास से मूलाधार केंद्र जागृत होता है तथा कुंडलिनी शक्ति मूलाधार केंद्र से ऊपर की ओर उठती है । और यही कारण है की अश्विनी मुद्रा से व्यक्ति की भक्ति भजन कीर्तन में रुचि पैदा होती है ।

अश्विनी मुद्रा करते समय सावधानियां Precautions while doing Ashwani Mudra

1. अश्विनी मुद्रा करते समय यदि मल मूत्र का वेग हो तो कभी भी इस वेग को नहीं रोकना चाहिए ।
2. संभव हो तो पहले आप मल मूत्र का त्याग करें उसके पश्चात ही खाली पेट आप अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करें ।
3. यदि गुदा मार्ग में कोई गंभीर बीमारी हो तो आप किसी योग्य गुरु की देखरेख में इस अभ्यास को करें ।

अश्विनी मुद्रा कब करें एवं कितनी देर करें How and When do Ashwani Mudra

अश्विनी मुद्रा आप दिन में किसी भी समय कर सकते हैं । लेकिन ध्यान केवल इस बात का रखें कि आप जब भी अश्विनी मुद्रा करें आप खाली पेट करें एवं किसी तख्त या जमीन पर आसन बिछाकर ही आप इस मुद्रा को करें और ताकत से अधिक इस मुद्रा को ना करें अन्यथा लाभ की जगह हानि हो सकती है ।

शुरुआत में एक बार में आप २० से २५ बार इस मुद्रा को करें एवं गुदा को ३ से ४ सेकंड से ज्यादा न सिकोड़े ।   बाद में अभ्यास होने पर १०० बार तक इस मुद्रा को कर सकते हैं । 

दोस्तों अंत में हम केवल इतना कहेंगे अश्विनी मुद्रा एक ऐसी योग मुद्रा है जिसको निरंतर करने से आपको बहुत अधिक ऊर्जा और ताकत मिलेगी । माना जाता है कि अश्वनी मुद्रा को निरंतर करने से व्यक्ति में घोड़े जैसी ताकत आ जाती है । इसलिए अश्विनी मुद्रा खुद भी करें एवं औरों को भी करने के लिए प्रेरित करें । नमस्कार ।

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