परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने का तरीका और फायदे Parivrtta Parsvakonasana (Revolved Side Angle Pose) in Hindi

By | May 13, 2020

परिवृत्त पार्श्वकोणासन क्या है? Parivrtta Parsvakonasana kya hai?

नमस्कार दोस्तों आज हम परिवृत्त पार्श्वकोणासन के बारे में बात करेंगे । परिवर्तित पश्चिम कोणासन 3 शब्दों के योग से मिलकर बना है परिवृत्त, पाश्चरव एवं कोण । परिवृत्त का अर्थ होता है चारों ओर का भाग, पार्श्व का अर्थ होता है साइड वाला भाग । यहां पासचरव से अर्थ हमारे शरीर के दाएं एवं बाई ओर से हैं तथा कोण का अर्थ होता है झुका हुआ ।

इस प्रकार इस आसन का अर्थ इस प्रकार है वह आसन जिसमें शरीर के दोनों ओर झुका जाता है परिवृत्त पश्चिम कोणासन कहलाता है । यह आसन अन्य आसनों की तुलना में करने में थोड़ा कठिन है, इसलिए इस योगासन को करने में सावधानी की आवश्यकता है ।

यदि आप योगा करने में ज्यादा अभ्यस्त नहीं है एवं आपके शरीर में लचीलापन भी बहुत कम है या कहें कि आपका वजन ज्यादा है एवं शरीर मोटा एवं थुलथुला है तो इस स्थिति में आप इस योगासन को ना करें ।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने का तरीका Parivrtta Parsvakonasana karne ka tarika

  1. सबसे पहले आप ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं । इसके पश्चात अपने दोनों पैरों को लगभग 4 फुट तक फैला लीजिए ।
  2. अब आप दाहिनी ओर इस प्रकार मुड़े कि आपके दोनों पैर एक ही सीध में रहे ।
  3. इसके पश्चात दाहिने पैर के घुटने को तब तक आगे की ओर मोड़े जब तक घुटना एवं पैरों का टखना एक ही सीधी में ना आ जाए, यह करना थोड़ा कठिन हो सकता है ।
  4. यदि आप योगा के बहुत ज्यादा अभ्यस्त हैं एवं आपके शरीर में लचीलापन भी है तो आप अपनी दाहिनी जांग को धरातल के समांतर भी कर सकते हैं ।
  5. इसके पश्चात अपने बाएं पैर को भी 90 डिग्री से मोड़कर दाहिने और ही कर ले । इस स्थिति में आपके दोनों पैर की एड़ियां एक ही सीध में होनी चाहिए ।
  6. अब आप श्वास को अंदर भरते हुए बाएं हाथ के पंजे को दाहिने पैर के पंजे के बाहर की ओर जमा दे तथा दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर सीधा करलें ।
  7. अंत में अपने मुंह को ऊपर उठाएं तथा दाहिने हाथ की उंगलियों को देखें, इस स्थिति में आप 5 सेकेंड से 10 सेकंड तक बने रहे । इस प्रकार परिवृत्त पाश्चर कोणासन संपन्न हो जाता है ।

सामान्य स्थिति में आने के लिए सबसे पहले दाएं हाथ को सामान्य स्थिति में लाएं । इसके पश्चात बाएं हाथ को सामान्य स्थिति में लाएं तथा अंत में कूल्हे से धीरे धीरे ऊपर उठे एवं अंत में सीधी स्थिति में आ जाएं । इसके पश्चात दोनों पैरों को मिलाकर ताड़ासन की स्थिति में आ जाएं । इस प्रकार यह आसन कंप्लीट हो जाता है ।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन करते समय सावधानियां Parivrtta Parsvakonasana karte samay saavdhaaniya

  • इस आसन को किसी योग्य एवं अनुभवी प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए, क्योंकि यह आसन अन्य आसनों की तुलना में काफी कठिन है ।
  • यदि आपकी रीड की हड्डी में चोट लगी हो या आपके पेट में दर्द रहता हो तो आपको यह आसन नहीं करना चाहिए ।
  • जिन लोगों को सिर में दर्द या रक्तचाप की समस्या हो उन्हें भी इस आसन को नहीं करना चाहिए ।
  • हृदय रोगियों को इस आसन को करने में थोड़ी शिथिलता बरतनी चाहिए, जैसे लास्ट मैं दाहिने हाथ एवं सिर को ऊपर ना करके नीचे ही रखा जाए ।
  • यदि आपकी गर्दन में अकडाहट या दर्द रहता हो तो अपनी गर्दन को ऊपर ना करें गर्दन को नीचे ही रखें ।
  • अंत में हम यही कहेंगे कि यह आसन थोड़ा कठिन है, इसलिए इस आसन को किसी योग्य ट्रेनर की देखरेख में ही करें एवं अतिरिक्त ऊर्जा का प्रयोग करने से बचें ।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन से पहले किए जाने वाले आसन Parivrtta Parsvakonasana se pahle kiye jane wale aasan

परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने से पहले आप यह आसन कर सकते हैं इनसे आपकी हॅम्स्ट्रिंग, कूल्हे और जांघे पर्याप्त मात्रा में खुल जाएँगे।

  • पादंगुष्ठासन (Padungasthasana or Big Toe Pose)
  • पादहस्तासन (Padahastasana or Hand to Foot Pose)
  • उत्थित त्रिकोणासन (Utthita Trikonasana or Extended Triangle Pose)
  • परिवृत्त त्रिकोणासन (Parivrtta Trikonasana or Revolved Triangle Pose)
  • उत्थित पार्श्वकोणासन (Utthita Parsvakonasana or Extended Angle Pose)

परिवृत्त पार्श्वकोणासन के बाद में किए जाने वाले आसन Parivrtta Parsvakonasana ke baad kiye jaane wale aasan

  • प्रसारित पादोत्तासन (Prasarita Padottanasana or Wide-Legged Forward Bend)
  • पर्श्वोत्तनासन (Parsvottanasana or Intense Side Stretch Pose)
  • उत्थित हस्त पादंगुष्ठासन (Utthita Hasta Padangusthasana or Extended Hand-To-Big-Toe Pose)
  • अर्ध बद्ध पद्मोत्तासन (Ardha Baddha Padmottanasana or Half Bound Lotus Standing Forward Bend)

परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने के फायदे Parivrtta Parsvakonasana ke fayde

  • इस आसन को करने से टांगे, घुटनों एवं जांघों में खिंचाव आता है जिससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं ।
  • यह आसन छाती एवं फेफड़ों में खिंचाव लाता है जिससे छाती एवं फेफड़ों में रक्त का परिसंचरण बढ़ जाता है जोकि एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।।
  • यह आसन पेट पर भी खिंचाव पैदा करता है, जिससे पेट की मसाज होती है ।
  • इस आसन को करने से यकृत एवं लीवर से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं ।
  • सिर में रक्त का परिसंचरण बढ़ने से सिर दर्द, अनिद्रा एवं अन्य मानसिक रोग दूर होते हैं ।
  • इस आसन को करने से कब्ज, पेट गैस, अपच, साइटिका, कमर दर्द आदि समस्याओं में आराम मिलता है ।
  • इस आसन को करने से महिलाओं के गर्भाशय को बल मिलता है, जिससे प्रदर रोग एवं बांझपन की बीमारी में भी आराम मिलता है ।

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