मरिच्यासन कैसे करें एवं इसके लाभ Marichyasan Kaise karen in hindi

By | May 10, 2020

मरिच्यासन क्या है?marichyasana kya hai?

मरिचयासन की खोज ऋषि मरीचि ने की थी । यह ऋषि मरीचि वही थे जिन्होंने राक्षसों का नाश करने के लिए देवताओं को अपनी अस्थियों को भी दे दिया था । इस आसन को करने के अनेकों लाभ होते हैं । इस लेख में हम मरीचि आसन के बारे में विस्तार से बात करेंगे, सबसे पहले हम इस आसन को करने का तरीका जानते हैं ।

मरिच्यासन करने का तरीका marichyasana kaise karen

  • सबसे पहले आप चित्र के अनुसार दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं । दोनों टांगों को सीधा फैला ले एवं कमर को बिल्कुल सीधा रखें ।
  • इसके पश्चात सास को अंदर की ओर ले एवं दाहिनी टांग को मोड कर छाती तक ले आए, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । आपका दूसरा पैर जमीन पर सीधा ही रहना चाहिए ।
  • इसके पश्चात सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके । झुकते समय ध्यान रखें कि आप कमर से ना झुक कर कूल्हों के जोड़ों से झुके । झुकते समय आपकी दाईं टांग धड़ से बाहर होनी चाहिए ।
  • दाएं हाथ को दाई टांग को जकड़ते हुए कमर की तरफ ले जाएं तथा दोनों हाथों को कमर की तरफ से पकड़ ले । इस अवस्था में आप 10 सेकंड से लेकर 60 सेकंड तक अपनी शक्ति के अनुसार झुके रहे ।
  • ध्यान रखें अधिक शक्ति का प्रयोग बिल्कुल ना करें । इसके पश्चात आप हाथ छोड़ दें तथा धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं ।
  • इसके पश्चात आप अपनी दाहिनी टांग को सीधा करलें तथा पूर्ववत अवस्था में आ जाएं । अब आप इसी प्रकार बाई टांग के साथ इसी क्रिया को दोहराएं । यह आपका एक चक्र पूरा हुआ ।
  • इस प्रकार आप शुरुआत में केवल पांच चक्र ही इस आसन के करें, अभ्यस्त होने पर 20 चक्र तक आप इस आसन को कर सकते हैं ।

मरिच्यासन करते समय सावधानियां marichyasana karte samay savdhaniya

  • यह आसन करते समय आप अतिरिक्त ऊर्जा एवं बल का प्रयोग बिल्कुल ना करें ।
  • शुरुआत में आपसे आगे की ओर बिल्कुल भी नहीं झुका जाएगा या बहुत कम झुका जाएगा, इसलिए ताकत लगाकर ना झुके ।
  • जितना झुका जाए उतना ही झुके । कुछ समय बाद आप आगे झुकने में स्वयं ही अभ्यस्त हो जाएंगे ।
  • जिन लोगों को पेट के निचले हिस्से में दर्द रहता हो उन्हें इस आसन को नहीं करना चाहिए ।
  • यदि आपको कभी कंधे में चोट लगी हो तो भी इस आसन को नहीं करना चाहिए ।
  • जिन लोगों के घुटनों में दर्द रहता हो या जिन्होंने कुछ समय पहले ही घुटने की सर्जरी कराई हो उन्हें इस आसन को नहीं करना चाहिए ।
  • यदि आपको दस्त या दमा श्वास की समस्या हो तो इस आसन को ना करें ।
  • इस आसन को करते समय अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक बल प्रयोग ना करें ।

मरिच्यासन करने से पहले किए जाने वाले आसन marichyasana se pahle kiye jane wale asan

मरीच्यासन करने से पहले आप यह आसन कर सकते हैं इनसे आपकी हॅम्स्ट्रिंग, कूल्हे, और जांघे पर्याप्त मात्रा में खुल जाएँगे।

  • दंडासन (Dandasana or Staff Pose)
  • पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana or Seated Forward Bend)
  • पूर्वोतानासन (Purvottanasana or Upward Plank Pose)
  • अर्ध बद्ध पद्मा पश्चिमोत्तानासन (Ardha Baddha Padma Paschimottanasana or Half Bound Lotus Seated Forward Bend)
  • त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन (Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana or Three-Limbed Forward Bend)
  • जानुशीर्षासन (Janu Sirsasana or Head-to-Knee Forward Bend)

मरिच्यासन करने के पश्चात किए जाने वाले आसन marichyasana ke baad kiye jane wale asan

  • नावासन (Navasana or Boat Pose)
  • भुजपीडासन (Bhuja Pidasana or Shoulder Pressing Pose)
  • कूर्मासन (Kurmasana or Turtle Pose)
  • सुप्तकूर्मासन (Supta Kurmasana or Sleeping Turtle Pose) 

मरिच्यासन करने के फायदे marichyasana ke fayde

  • इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर दर्द एवं कमर की मांसपेशियों के दर्द में रात मिलती है ।
  • यह आसन रीड की हड्डी को मजबूत बनाता है, जिससे व्यक्ति का शरीर तना हुआ रहता है ।
  • यह दिमाग को शांत करता है एवं मानसिक तनाव को दूर करता है ।
  • इस आसन को करने से सिर दर्द एवं माइग्रेन की बीमारी में लाभ मिलता है ।
  • यह आसन पाचन संस्थान की समस्याओं जैसे पेट गैस, कब्ज, एसिडिटी आदि में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाता है ।
  • इस आसन को करने से कंधे एवं कमर मजबूत होते हैं ।
  • यह आसन किडनी एवं लीवर पर भी अपना सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे किडनी एवं लीवर की बीमारियां दूर होती हैं ।
  • यह आसन शरीर में जमी हुई अतिरिक्त चर्बी को दूर करता है एवं वजन घटाने में मदद करता है ।

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