कपालभाति प्राणायाम कैसे करें और इसके फायदे और नुकसान kapalbhati pranayama benefits in hindi

By | May 8, 2020

कपालभाति प्राणायाम क्या है? What is kapalbhati pranayam?

कपालभाति प्राणायाम अनुलोम विलोम प्राणायाम की तरह ही एक नाड़ी शोधन प्राणायाम है । कपालभाति प्राणायाम को करने से हमारे शरीर की 72 करोड़ 72 लाख 10210 नाडिया शुद्ध होती हैं तथा इन नाड़ियों मैं रक्त का प्रवाह संतुलित होता है ।

यदि हम कपालभाति प्राणायाम के नाम की व्याख्या करें तो इस शब्द की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है । कपाल का अर्थ होता है मस्तक अर्थात सिर तथा भांति का अर्थ होता है चमकना या चमकदार होना । इस प्रकार कपालभाति प्राणायाम का अर्थ है ऐसा प्राणायाम जिसको करने से कपाल अर्थात मस्तक चमकने लगता है ।

यहां चमकने से अर्थ है शरीर की बीमारियों का नष्ट होना, क्योंकि यदि शरीर की समस्त बीमारियां ही नष्ट हो जाएंगी तो शरीर में वीर्य शुद्ध होगा एवं सप्तधातु पुष्ट हो जाएंगी, जिससे चेहरे पर तेज और रौनक बढ़ेगी एवं माथा चंद्रमा की भांति चमकने लगेगा । कपालभाति प्राणायाम षट्कर्म में से एक है।।

कपालभाति प्राणायाम करने से शरीर में से 80% तक विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे तवचा एवं रक्त के अनेकों रोग अपने आप ही ठीक हो जाते हैं । इतना ही नहीं कपालभाति प्राणायाम करने से बैड कोलेस्ट्रॉल भी खत्म होता है एवं शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बनता है, जिससे हृदय भी स्वस्थ रहता है । आइए अब हम जानते हैं कपालभाति प्राणायाम कैसे करते हैं, इसके बाद कपालभाति प्राणायाम के फायदों के बारे में बात करेंगे ।

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें? how to do kapalbhati pranayama in hindi?

कपालभाति प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आप सिद्धासन, पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं । यदि आप सिद्धासन या पद्मासन में नहीं बैठ सकते तो ही सुखासन में बैठे, अन्यथा प्रयास करें सिद्धासन या पद्मासन में बैठने का ।

आप अपना आसन फर्श पर या किसी तखत तख्त पर ही लगाएं । यदि आपको फर्श या तख्त पर बैठने में समस्या है तो आप किसी कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं । यह प्राणायाम करते समय रीड की हड्डी बिल्कुल सीधी तनी हुई रहनी चाहिए अन्यथा प्राणायाम करते समय पेट में झटके लग सकते हैं । प्राणायाम शुरू करने से पहले अनुलोम विलोम प्राणायाम करके फेफड़ों को वार्म अप कर ले । अब आप कपालभाति प्राणायाम शुरू करें ।

सांसो को बड़ी तेजी के साथ बाहर निकाले तथा पेट को यथासंभव अंदर की ओर खींचें, जिससे पेट कमर से जा लगे । जब आप सांसो को जोर से बाहर निकालेंगे तो अगले ही क्षण सास स्वयं ही अंदर आ जाएगा क्योंकि यह एक नेचुरल प्रक्रिया है ।

इस प्रकार आप एक चक्र में 20 बार सांसों को तेजी के साथ बाहर निकाले । एक चक्र के पश्चात 1 मिनट तक आराम करें तथा लंबी गहरी सामान्य सांसे ले । इसके पश्चात आप कपालभाति प्राणायाम को 5 मिनट से लेकर 30 मिनट तक कर सकते हैं । शुरुआत में आप केवल 5 मिनट ही इस प्राणायाम को करें तथा धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाते हुए 30 मिनट तक पहुंचे ।

कपालभाति के प्रकार Types of kapalbhati pranayama

कपालभाति प्राणायाम निम्न तीन प्रकार का होता है ।

  • वातकृपा कपालभाति
  • विमुक्त कर्म कपालभाति
  • शीतकर्मा कपालभाति

वातकृपा कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम के समान ही होता है । इस प्राणायाम को करते समय सांस रोकना और छोड़ने की क्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाता है ।

विमुक्त कर्म कपालभाति प्राणायाम में नाक के माध्यम से पानी लिया जाता है और मुंह से बाहर निकाला जाता है ।

शीतकर्मा कपालभाति प्राणायाम विमुक्त कर्म कपालभाति प्राणायाम के बिल्कुल विपरीत होता है । इस प्राणायाम में पानी मुंह से लेकर नाक के द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है ।

कपालभाति प्राणायाम करते समय सावधानियां kapalbhati pranayama precautions

  • कपालभाति प्राणायाम करते समय आपको कुछ सावधानियां रखना भी आवश्यक है, अन्यथा आपको नुकसान भी हो सकते हैं ।
  • कपालभाति प्राणायाम करते समय कमर बिल्कुल सीधी रखें अन्यथा पेट में झटके लग सकते हैं एवं पेट दर्द हो सकता है ।
  • इस प्राणायाम को खाली पेट ही करना चाहिए । भोजन के पश्चात कदापि यह प्राणायाम ना करें ।
  • इस प्राणायाम का सबसे उत्तम समय सुबह-सुबह का होता है । यदि किसी कारणवश आपको सुबह समय ना मिलता हो तो आप इस प्राणायाम को शाम के समय खाली पेट कर सकते हैं ।
  • प्राणायाम करते समय अधिक शक्ति का प्रयोग ना करें । सास केवल उतनी ही शक्ति से बाहर निकाले जितनी शक्ति से आप सहन कर सकते हैं । अतिरिक्त ऊर्जा एवं शक्ति का प्रयोग ना करें ।
  • बीच-बीच में ब्रेक लेते रहे ताकि फेफड़ों एवं मस्तिष्क को आराम मिलता रहे । यह प्राणायाम करने के तुरंत बाद ठंडा पानी ना पिए । प्राणायाम के पश्चात 5 मिनट शवासन में लेट जाएं ।
  • गर्भावस्था में प्रवेश कर चुकी महिलाओं को इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए, ऐसा करना उनके लिए खतरनाक हो सकता है ।
  • मासिक धर्म के दौरान इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए ।
  • यदि आप हर्निया, मिर्गी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द आदि के मरीज हैं तो भी इस प्राणायाम को ना करें ।
  • जिन लोगों की पेट की सर्जरी हुई है उन्हें भी इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए ।
  • संभव हो तो शुरुआत में इस प्राणायाम को किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें ।

कपालभाति प्राणायाम के लाभ kapalbhati pranayama benefits in hindi

कपालभाति प्राणायाम का सबसे प्रमुख फायदा कोलेस्ट्रोल एवं वजन को कम करना होता है । कपालभाति प्राणायाम करने से हमारे शरीर में बनने वाला बैड कोलेस्ट्रॉल टीएलसी बन्ना बंद हो जाता है एवं शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बनता है । परिणाम स्वरूप इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे हृदय पर पड़ता है ।

इस प्राणायाम को करने से हमारे शरीर में जमी हुई अतिरिक्त वसा जिसे आम भाषा में चर्बी या फैट कहा जाता है जलकर पिघल जाती है एवं मूत्र मार्ग से शरीर से बाहर निकल जाती है, जिससे धीरे धीरे व्यक्ति का वजन कम होने लगता है एवं कुछ ही समय में सामान्य हो जाता है ।

कपालभाति प्राणायाम करने से फेफड़े बहुत ज्यादा मजबूत हो जाते हैं, जिससे फेफड़ों से जुड़ी हुई बीमारियां जैसे दम्मा श्वास, टीवी आदि में बहुत ज्यादा लाभ मिलता है । जिन लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो उन्हें कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करने से बहुत ज्यादा लाभ मिलता है । सांस के मरीजों को कपालभाति प्राणायाम करने में शुरुआत में थोड़ी समस्या हो सकती है लेकिन लगातार अभ्यास से लाभ मिल जाएगा ।

कपालभाति प्राणायाम करने से शुगर अर्थात डायबिटीज में आशातीत लाभ मिलता है । जिन रोगियों का शुगर लेवल खाली पेट 250 या उससे भी ज्यादा रहता है उन्हें कपालभाति प्राणायाम करने से शुगर में बिल्कुल लाभ मिल जाता है ।

कपालभाति प्राणायाम करने से हमारे शरीर की करोड़ों नाडिया शुद्ध होती हैं तथा उन में रक्त का परिसंचरण संतुलित हो जाता है, जिससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है एवं हमें बीमारियों से लड़ने के लिए ऊर्जा मिलती है ।

कपालभाति प्राणायाम करने से मस्तिष्क की नाडिया ऊर्जावान होती हैं जिससे मस्तिष्क के रोग जैसे कि अनिद्रा, स्मृति भ्रम, याददाश्त की कमजोरी एवं सिर में दर्द जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है । इस प्राणायाम को करने से पेट की चर्बी कम होती है ।

जिन लोगों की तोंद निकली होती है उन्हें कपालभाति प्राणायाम करने से बहुत ज्यादा लाभ मिलता है । इसके अतिरिक्त यह प्राणायाम मन को शांत करता है जिससे मन पूजा पाठ में भी लगता है ।

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