अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ एवं चमत्कार Anulom Vilom pranayam benefits in hindi

By | May 8, 2020

अनुलोम विलोम प्राणायाम क्या है? What is anulom vilom pranayam?

 
अनुलोम विलोम प्राणायाम नाड़ी शोधन प्राणायाम है जो हमारे शरीर की नाड़ियों का शोधन करता है । यह प्रणायाम करने में बहुत ही सरल है एवं इसके हमारे शरीर पर अनेकों सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जिससे हमारा शरीर कई बीमारियों से मुक्त हो जाता है ।
 
अनुलोम का अर्थ होता है सीधा जबकि विलोम का अर्थ होता है उल्टा । यहां सीधा और उल्टा होने का संबंध नासिका के छिद्रों से है । नासिका के दाएं छिद्र को अनुलोम जबकि बाएं छिद्र को विलोम कहा जाता है अर्थात अनुलोम विलोम प्राणायाम योग की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बाय नाक के द्वारा सांस ली जाती है तथा उसे दाई नाक के द्वारा छोड़ा जाता है ।
 
इसी प्रकार इस प्रक्रिया को उल्टे क्रम में दोहराते हैं अर्थात दाई नाक से सांस लेते हैं एवं बाईं नाक से सांस को छोड़ देते हैं । इसे ही अनुलोम विलोम प्राणायाम कहा जाता है । अनुलोम विलोम प्राणायाम को ही नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहा जाता है । इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन हो जाता है ।

 

अनुलोम विलोम कैसे करें? How to do anulom vilom pranayam?

  • अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आप अपनी सुविधा अनुसार पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं एवं कमर सीधी होनी चाहिए ।
  • यदि आपको पद्मासन या सिद्धासन में बैठने में परेशानी हो या सख्त आसन पर बैठने में परेशानी हो तो आप किसी आरामदायक कुर्सी पर भी बैठ कर इस प्राणायाम को कर सकते हैं ।
  • अब आप आंखें बंद कर ले एवं वृकुटी की तरफ ध्यान से देखें ।
  • इसके पश्चात दाएं हाथ के अंगूठे से दाई नासिका को दबाकर बंद करें तथा धीरे धीरे एक लंबा सांस लें ।
  • सांस को 3 से 4 सेकेंड तक रोके तथा दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली से बाई नासिका को दबाकर दाहिनी नासिका से सास को धीरे-धीरे छोड़ दें ।
  • इसी प्रकार दाहिनी नासिका से सांस को धीरे-धीरे खींचे तथा सास को 3 से 4 सेकंड तक रोक कर रखें ।
  • इसके पश्चात दाहिने हाथ के अंगूठे से ही दाहिनी नासिका को दबाकर रखें तथा बाईं नासिका से सास को छोड़ दें, यह अनुलोम विलोम का एक चक्र पूरा हुआ ।
  • इसी प्रकार आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार 5 से 15 मिनट तक इस प्राणायाम को सहजता के साथ करें ।
  • ध्यान रखें इस प्राणायाम को केवल उतनी ही देर करें जितनी देर आपका शरीर इसके लिए सहमत हो । कभी भी प्राणायाम करते समय अतिरिक्त ऊर्जा एवं बल का प्रयोग ना करें ।

अनुलोम विलोम प्राणायाम करते समय सावधानियां Precautions while doing anulom vilom

अनुलोम विलोम प्राणायाम करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें जैसे, सांस लेते समय जोर से सांस ना ले । सास इतनी आराम से लें कि पास बैठे हुए व्यक्ति को यह पता ना चले कि आप सांस ले रहे हैं या नहीं । सांस लंबी और गहरी होनी चाहिए ।

सांस जितनी लंबी और गहरी होगी नाड़ी शोधन उतना ही ज्यादा होगा एवं इस प्राणायाम का उतना ही ज्यादा लाभ आपको मिल सकेगा । प्राणायाम करते समय अपना ध्यान दोनों आंखों के बीच आज्ञा चक्र, जिस स्थान पर महिलाएं बिंदी लगाती हैं पर रखें ।

एक विशेष बात हम आपको और बताते हैं कि हमारी बाईं नासिका से ठंडी वायु शरीर में जाती है इसीलिए बाई नाडी का को चंद्र नाड़ी कहा जाता है जबकि दाहिनी नासिका से गरम वायु शरीर में जाती है इसीलिए दाहिनी नासिका को सूर्य नाड़ी कहा जाता है ।

इस प्रकार इस प्राणायाम के करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है एवं हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है ।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे एवं चमत्कार Anulom vilom pranayam benefits in hindi

  • अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारे शरीर की 72 करोड 72 लाख 10,210 सूक्ष्म नाडिया खुल जाती हैं एवं उनमें रक्त का संचार सही होने से वह बिल्कुल शुद्ध हो जाती हैं ।
  • इस प्राणायाम को करने से हार्ट की ब्लॉकेज दूर होती है, इसलिए हार्ट के पेशेंट के लिए यह प्राणायाम सर्वोत्तम है । हार्ट के पेशेंट को यह प्राणायाम प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिए ।
  • इस प्राणायाम को करने से हाई एवं लो दोनों ही प्रकार का रक्तचाप सही हो जाता है ।
    इस प्राणायाम से गठिया बाई एवं जोड़ों में दर्द की समस्या में लाभ मिलता है ।
  • खराब कोलेस्ट्रोल कम होता है एवं अच्छा कोलेस्ट्रॉल बनता है ।
  • शरीर में से विषय ले पदार्थ एवं इंटोक्सिंस बाहर निकल जाते हैं ।
  • किडनी सही हो जाती है एवं जो लोग डायलिसिस कि मशीन पर जाने वाले हैं यदि ऐसे रोगी प्रतिदिन सुबह शाम 15-15 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम को करें तो उन्हें डायलिसिस जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी ।
  • प्रणायाम को करने से सर्दी, खांसी, जुखाम नजला एवं इस प्रकार की सभी एलर्जी दूर होती है ।
  • इस प्राणायाम को करने से मस्तिष्क को बल मिलता है एवं याददाश्त तेज होती है ।
  • यह प्रणायाम इतना प्रभावी है कि इसको करने से ब्रेन ट्यूमर भी ठीक हो जाता है ।
  • मधुमेह अर्थात डायबिटीज की बीमारी में बहुत ज्यादा लाभ मिलता है ।जिन लोगों का शुगर लेवल 400 या 500 रहता हो उनका शुगर लेवल भी इस प्रणायाम को करने से सामान्य हो जाता है ।
  • शरीर में ठंडी एवं गरम हवा प्रवेश करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है ।
  • यह प्रणायाम फेफड़ों को बल प्रदान करता है इसलिए इस प्रणायाम को करने से दमा श्वास की बीमारी में लाभ मिलता है । इसके अतिरिक्त इस प्राणायाम के अनेकों फायदे हैं ।

यदि आपके इस योग से सम्बंधित कोई भी प्रश्न हो तो हमें कमेन्ट के माध्यम से पूछ सकते हैं, धन्यवाद ।

 

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