महुआ खाने के फायदे और नुकसान Mahua Ke Tel ke Fayde in Hindi

By | September 14, 2020

महुआ क्या है?

महुआ भारतीय आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध जड़ी बूटी है । आपने भी महुआ का नाम तो कहीं ना कहीं सुना ही होगा । भारत में महुआ के पेड़ विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं । महुआ के पेड़ की छाल, महुआ का तेल एवं इसके पत्ते सभी आयुर्वेद में प्रयोग किए जाते हैं । आज इस लेख में हम आपको महुआ और इसके बीजों का तेल खाने के फायदों के बारे में विस्तार से बताएंगे ।

  • वैज्ञानिक नाम: मधुका लोंगिफोलिया
  • कुल: सेपोटेसी
  • सामान्य नाम: महुवा, महआ, माहवा, मोहूलो, लुप्पई और इप्पा
  • अंग्रेजी नाम: बटरनट ट्री
  • हिस्से: छाल, बीज और फूल

महुआ के वृक्ष ज्यादातर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाते हैं, जिनमें भारत, नेपाल, श्रीलंका एवं म्यामार जैसे देश शामिल हैं । भारत में महुआ के पेड़ मध्य भारत एवं उत्तर भारत में पाए जाते हैं । महुआ का वैज्ञानिक नाम मधुका लॉन्गीफोलिया है ।

महुआ के पेड़ की ऊंचाई 12 मीटर से लेकर 15 मीटर तक होती है । महुआ के पेड़ पर मार्च के महीने में सफेद रंग के छोटे-छोटे फूल आते हैं । महुआ के फूलों का मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की औषधियों को बनाने में प्रयोग किया जाता है ।

मध्य भारत के लोग तो महुआ के फूलों का उपयोग महुआ वाइन (mahua alcohol) बनाने में करते हैं जो कि मध्य भारत का बहुत ही प्रसिद्ध पेय पदार्थ भी है । यदि हम महुआ के चिकित्सक़िय संकेतों की बात करें तो इस वृक्ष की छाल एवं फूल का उपयोग विभिन्न समस्याओं जैसे बुखार, मौसमी फ्लू, मिर्गी एवं कैंसर जैसी समस्याओं में किया जाता है ।

यदि हम महुआ को आयुर्वेद का वरदान करें तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा । तो आइए महुआ के बारे में और विस्तार से जानते हैं ।

महुआ में मौजूद पोषक तत्व

सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि महुआ में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद होते हैं । नीचे हमने महोबा के पोषक तत्व के बारे में बताया है ।

प्रत्येक 100 ग्राम के महुआ में पोषक तत्व

  • कुल वसा: 50 से 31 फीसदी
  • प्रोटीन: 16.9 फीसदी
  • कार्बोहाइड्रेट: 22 फीसदी
  • फाइबर: 3.2 फीसदी

महुआ को इस्तेमाल करने की विधि

आइए अब हम जानते हैं कि महुआ को इस्तेमाल कैसे किया जाता है ।

  • महुआ की छाल, फूल एवं महुआ के बीज तीनों का ही प्रयोग विभिन्न समस्या में किया जाता है ।
  • महुआ के बीजों से मक्खन बनाया जाता है जोकि प्रोटीन एवं विभिन्न पोषक तत्वों का भंडार होता है ।
  • इस मक्खन का उपयोग विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों को बनाने तथा विभिन्न फार्मेसियों के द्वारा मिलावट के लिए प्रयोग किया जाता है ।
  • चॉकलेट, घी एवं कोको बटर में महुआ के मक्खन का उपयोग मिलावट के लिए काफी पुराने समय से किया जाता है ।
  • महुआ के बीजों को सुखाकर व पीसकर इसका आटा बनाया जाता है जिसे मौसमी अनाज के रूप में प्रयोग किया जाता है । इस आटे की रोटियां एवं पूरी इत्यादि बनायी जा सकती हैं ।
  • महुआ  के फूलों में पर्याप्त मात्रा में शर्करा (चीनी) मौजूद होती है । जिस कारण महुआ के फूलों का उपयोग परंपरागत मिठाइयों को बनाने में किया जाता है ।
  • महुआ के फूलों और फलों से शराब भी बनाई जाती है । मध्य भारत में इस शराब को महुआ वाइन कहा जाता है जो इस क्षेत्र का प्रसिद्ध पेय पदार्थ है ।
  • महुआ के फूलों एवं पत्तों को घरेलू पशुओं जैसे गाय एवं भैंस को चारे के रूप में भी दिया जाता है । महुआ के फूल एवं पत्ते इन पशुओं के लिए बहुत अधिक लाभदायक होते हैं तथा इनका सेवन करने से पशुओं का दूध भी बढ़ जाता है ।

महुआ के फायदे

महुआ के पेड़ के लगभग लगभग सभी भागों को आयुर्वेद में प्रयोग किया जाता है जैसे कि महुआ की छाल, फूल, फल तथा बीज इत्यादि । महुआ के फूलों का रस हृदय रोग, लिकोरिया एवं मूत्र संस्थान से संबंधित समस्याओं इत्यादि में लाभदायक होता है ।

महुआ के फूलों का सेवन करने से लिकोरिया एवं मासिक धर्म के समय होने वाला अनियमित रक्त स्राव ठीक हो जाता है । जिन लोगों को बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है उन्हें भी महुआ के फूलों का सेवन कराने से बहुत अच्छा मिलता है । इसके अलावा के फूल ब्रोंकाइटिस एवं टॉन्सिलाइटिस जैसी समस्याएं में भी लाभदायक होते हैं ।

इसी प्रकार महुआ के छाल बहुत अधिक लाभदायक होती है । इसका प्रयोग क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, मधुमेह, ब्लीडिंग डिसऑर्डर्स, गठिया एवं बवासीर जैसी समस्याओं में किया जाता है ।

महुआ की छाल भी कुछ कम फायदेमंद नहीं होती है । यह सूजन, दर्द एवं बुखार को दूर करने की क्षमता रखती है । इस प्रकार हम कह सकते हैं की मौके का उपयोग विभिन्न बीमारियों में किया जाता है । आइए अब हम विभिन्न बीमारियों में महुआ के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं ।

पेप्टिक अल्सर में लाभदायक महुआ

यदि पेट में एसिड बहुत अधिक बनता हो तो अत्यधिक एसिड बनने के कारण पेट की म्यूकस लाइनिंग को खतरा हो सकता है । म्यूकस लाइनिंग एक परत होती है जो पेट की भीतरी दीवार की पाचक रसों से सुरक्षा करती है ।

ज्यादा एसिड बनने के कारण म्यूकस लाइनिंग में जख्म हो सकते हैं जिस कारण रोगी को छाती में एवं पेट में भयंकर जलन एवं पीड़ा होती है । इस समस्या को पेप्टिक अल्सर कहा जाता है । महुआ में अल्सर रोधी गुण मौजूद होते हैं ।

महुआ का सेवन करने से हिस्टामाइन का स्तर नियंत्रित रहता है । हिस्टामाइन एक रसायन होता है जो पेट में एसिड के उत्पादन को नियंत्रित रखता है जिस कारण महोबे का सेवन करने से पेट में अत्यधिक एसिड की मात्रा नहीं बनती है तथा पेप्टिक अल्सर में आराम मिलता है ।

इसके अतिरिक्त महुआ पेट में मौजूद म्यूकस मेंब्रेन के ऊपर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है जिससे म्यूकस लाइनिंग को अतिरिक्त सुरक्षा मिल जाती है ।

दांतों के रोगों में लाभदायक महुआ

महुआ का उपयोग दातों एवं मसूड़ों से संबंधित विभिन्न रोगों एवं समस्याओं में किया जाता है । दातों में टॉन्सिलाइटिस की समस्या एक आम समस्या हो गई है । इस स्थिति से निपटने के लिए महुआ के ताजे छाल का 4 मिलीलीटर रस प्राप्त कर लें तथा इसमें 300 मिलीलीटर पानी मिलाएं ।

अब इस मिश्रण से आप कुल्ला करें एवं गरारे भी करें । इस पानी से कुल्ला करने पर मसूड़ों से निकलने वाले खून की समस्या एवं टॉन्सिलाइटिस की समस्या में बहुत जल्दी आराम मिलता है । इसके अलावा यदि आपके गले में सूजन है जिसे फैरिंजाइटिस भी कहा जाता है तो ऐसी स्थिति में इस पानी से गरारे करने पर आपको बहुत लाभ मिलेगा ।

ब्रोंकाइटिस में लाभदायक महुआ

महुआ के फूल में एंटी ऑक्सीडेंट एवं सूजन को दूर करने वाले गुण मौजूद होते हैं जिस कारण महुआ के फूलों का उपयोग ब्रोंकाइटिस में किया जाता है ।

ब्रोंकाइटिस एक गंभीर रोग है, इस रोग में रोगी की श्वास नली, मुंह एवं नाक में सूजन आ जाती है जिससे रोगी को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है । रोगी की छाती में बलगम जमा हो जाता है, जिससे छाती से घड़घड की आवाज आती है तथा रोगी बार-बार खांसता रहता है ।

महुआ के फूल का सेवन कराने से छाती में जमा हुआ बलगम पतला होकर बाहर निकल जाता है जिससे रोगी को बहुत अच्छा आराम मिलता है ।

महुआ के फूल के सेवन की विधि: दो या तीन फूलों का रस निकाल ले तथा एक गिलास गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करें ।

मिर्गी में लाभदायक महुआ

महुआ की पत्तियों में मेथेनॉल मौजूद होता है, इसलिए यदि मिर्गी के मरीज को महुआ की पत्तियों का अर्क जो कि मेथेनॉलिक होता है, दिया जाए तो रोगी के शरीर में गामा एमिनोब्यूटीरिक (GABA) का उत्पादन बढ़ जाता है । GABA एक प्रकार का न्यूरोट्रांसमीटर्स होता है जो मिर्गी के मरीजों में न्यूरॉनल एक्टिविटी को रोकता है । इस प्रकार मिर्गी के दौरों में एवं तीव्रता में काफी कमी आ जाती है ।

मिर्गी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से संबंधित रोग होता है तथा इस रोग में व्यक्ति को बार बार दौरे पड़ते हैं । वैसे तो इस बीमारी का उपचार किसी कुशल डॉक्टर से ही कराना चाहिए । लेकिन यदि आप इस प्रयोग को भी करेंगे तो आप को सकारात्मक रिजल्ट ही मिलेंगे ।

त्वचा रोगों में लाभदायक महुआ

महुआ के फूल और पत्तियां दोनों को ही विभिन्न प्रकार की त्वचा संबंधी समस्याओं में प्रयोग किया जा सकता है । यदि चेहरे पर पिंपल्स हो गए हो तो महुआ के फूलों का रस दूध में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है ।

महुआ में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं जिस कारण यह है त्वचा को युवा बनाए रखता है । इसके अलावा महुआ की पत्तियों का उपयोग दाद, खाज, खुजली एवं एग्जिमा में भी किया जाता है ।

महुआ की पत्तियों पर तिल का तेल लगाकर इसे थोड़ा गर्म कर लें और प्रभावित स्थान पर लगा कर ऊपर से पट्टी बांधे । लगभग 1 घंटे बाद इन पत्तों को उतार दें । कुछ ही समय में दाद एवं एक्जिमा की समस्या से राहत मिल जाती है ।

बुखार में लाभदायक महुआ

बुखार में रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी पावर) तथा प्लेटलेट्स दोनों ही घट जाती हैं । महुआ की छाल में एंटीबायोटिक एवं एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं जिस कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बहुत अधिक बढ़ा देता है ।

महुआ की छाल में ज्वर रोधी, सूजन रोधी एवं दर्द निवारक गुण मौजूद होते हैं । इसलिए बुखार एवं शरीर में दर्द होने पर महुआ की छाल का रस रोगी को सेवन कराने से लाभ मिलता है तथा रोगी को ताकत भी मिलती है जिससे रोगी बहुत अच्छा महसूस करता है ।

डायबिटीज में लाभकारी महुआ

विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान एवं अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकला है कि महुआ की छाल का अर्क इंसुलिन की कमी को दूर करता है एवं रक्त में ग्लूकोस के बढ़ने के कारण पैदा होने वाले खतरों को भी दूर करने में मदद करता है ।

महुआ की छाल का अर्क डायबिटीज रोग से जुड़े रोग नेफ्रोपैथी में भी लाभदायक होता है । डायबिटीज को एक लाइलाज बीमारी कहा जाता है क्योंकि इस बीमारी में रोगी के शरीर में बनने वाली इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है जिसे दवाइयों के द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है ।

लेकिन यदि आप डायबिटीज का आयुर्वेदिक या प्राकृतिक उपाय ढूंढ रहे हैं तो आपको महोबा का सेवन करने से लाभ हो सकता है । लेकिन ध्यान रखें, इस योग को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।

कृमि संक्रमण में लाभकारी महुआ

यदि पेट में कीड़े हो जाए तो इससे रोगी दिन-ब-दिन कमजोर होता चला जाता है जिससे रोगी को एनीमिया अर्थात खून की कमी तथा आंतों से जुड़ी हुई समस्याएं हो सकती हैं । इसलिए इस समस्या का निदान करना बहुत अधिक आवश्यक होता है ।

महुआ की छाल के अर्क में मेथेनॉलिक तथा एथनोलिक गुण मौजूद होते हैं जिस कारण यह पेट में मौजूद कीड़ों को नष्ट करने में मददगार होता है ।

लीवर के लिए लाभदायक महुआ

महुआ का सेवन करने से लीवर को विशेष ताकत मिलती है । लीवर अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक आवश्यकता है । यदि आपका लीवर सही नहीं है तो आपको पाचन संस्थान से जुड़ी हुई समस्याएं जैसे कब्ज, अरुचि, अजीर्ण, पेट गैस इत्यादि की समस्या शुरू हो जाएगी ।

जिस कारण आपको अन्य कई समस्याएं भी घेर सकती है। आपका लीवर जहां आपके शरीर को स्वस्थ रखने में आपकी मदद करता है वही यह खून में पहुंचने वाले विभिन्न विषैले रसायनों को भी रोकता है । महुआ का सेवन करने से लीवर की कार्यप्रणाली अच्छी होती है, लीवर में सूजन दूर होती है तथा लीवर स्वस्थ रहता है ।

हृदय रोगों में लाभदायक महुआ

आज के आधुनिक समय में खानपान बहुत ज्यादा खराब हो गया है । हृदय रोगों के लिए मुख्य रूप से हमारी रसोई में मौजूद तेल ही जिम्मेदार होता है । क्योंकि यदि आप खराब किस्म का तेल या रिफाइंड प्रयोग करेंगे तो इससे आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल पैदा होगा जो हृदय रोगों के लिए उत्तरदाई होता है ।

इसके विपरीत महुआ के बीजों में मोनोसैचुरेटेड तथा पोली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो आपके हृदय के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है । महुआ के बीजों में ऑलिक एसिड मौजूद होता है जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है ।

यह बैड कोलेस्ट्रॉल ही आपको हृदय का रोगी बनाता है । इसलिए आप अच्छी किस्म का तेल का ही प्रयोग करें । महुआ का तेल ताड़ के तेल और कोकम के मक्खन से भी ज्यादा लाभदायक होता है ।

महुआ के विभिन्न फायदे

इन सब रोगों के अलावा महुआ के निम्न फायदे होते हैं ।

  1. महुआ के ताजा फूलों के रस का सेवन करने से सिर दर्द, साइनस, आंखों में जलन जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है ।
  2. महुआ के पत्तों का इस्तेमाल करने से स्तनपान कराने वाली माताओं का दूध बढ़ जाता है ।
  3. महुआ के फूलों का रस हिचकी, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) एवं खांसी जैसी समस्याओं में लाभ पहुंचाता है ।
  4. यह पुरुषों की समस्याओं जैसे शीघ्रपतन एवं अल्प शुक्राणुओं की समस्या को भी दूर करता है ।
  5. महुआ की छाल मूत्र संक्रमण जैसे बार-बार पेशाब आना या पेशाब में जलन होना जैसी समस्याओं में लाभदायक होती है ।
  6. महुआ की छाल का काढ़ा पेट दर्द एवं इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या में लाभदायक होता है ।
  7. महुआ की छाल गठिया, जोड़ों का दर्द, सूजन, रूमेटाइड अर्थराइटिस आदि समस्याओं में लाभदायक होती है ।

महुआ के नुकसान एवं साइड इफेक्ट

वैसे तो महुआ का सेवन करने से कोई सामान्य नुकसान या साइड इफेक्ट नहीं होता है, लेकिन यदि आप महुआ का लंबे समय तक प्रयोग करते हैं तो इसका सेवन करने से पुरुषों में नपुंसकता तथा महिलाओं में बांझपन की समस्या हो सकती है ।

क्योंकि महुआ ब्लड शुगर के स्तर को घटा देता है इसलिए यदि आपको ब्लड शुगर है तथा आप इसकी दवा ले रहे हैं तो महुआ का सेवन करते समय अपना ब्लड लेवल शुगर लेवल नियमित रूप से जांच कराते रहे ।

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