गिलोय के ओषधीय गुण, फायदे, नुस्कान एवं पहचान

By | March 11, 2020

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गिलोय का परिचय



दोस्तों आपने गिलोय के बारे में काफी कुछ जरूर सुना होगा । आपने सोशल मीडिया पर भी गिलोय के बारे में काफी कुछ पढ़ा होगा कि गिलोय हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है और आप गिलोय के थोड़े बहुत फायदे भी जानते होंगे ।

लेकिन दोस्तों आप गिलोय के बारे में विस्तार से नहीं जानते होंगे । क्योंकि गिलोय आयुर्वेद की एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसके अनुपम और अद्भुत फायदे हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं । दोस्तों आज इस लेख में हम आपको गिलोय के बारे में वह सब बातें बताएंगे जो आपको आज तक किसी ने नहीं बताई होंगी ।

आयुर्वेद में गिलोय को रसायन कहा गया है । रसायन का अर्थ होता है एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, आयुर्वेदिक योग जो प्राकृतिक रूप से हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है तथा एक प्रकार से अमृत के समान होता है ।



गिलोय का पौधा

 



आइए जानते हैं आयुर्वेद में गिलोय के बारे में क्या-क्या बताया गया है । दोस्तों यदि हम गिलोय की बात करें तो गिलोय के पत्ते स्वाद में काफी कसैले और तीखे होते हैं । गिलोय का उपयोग शरीर की तीनों प्रकृतियों जैसे वात, पित्त एवं कफ को ठीक करने में जाना जाता है ।



गिलोय के ओषधीय गुण

 



गिलोय पाचन क्रिया के लिए बहुत ही सरल होता है । इससे भूख बढ़ती है और हमारी आंखों के लिए भी यह बहुत अधिक लाभ दायक होता है । गिलोय का प्रयोग अनेक प्रकार की बीमारियों जैसे कि वीर्य दोष, बुद्धि को बढ़ाने में, ज्वर, उल्टी, सुखी या सामान्य खांसी, बवासीर एवं मूत्र संस्थान की अनेक प्रकार की समस्याओं में किया जा सकता है ।

इस जड़ी बूटी का प्रयोग महिलाओं की समस्याओं में भी किया जा सकता है । आइए सबसे पहले जानते हैं कि गिलोय क्या है ।

दोस्तों गिलोय को विस्तार से जानने के लिए गिलोय की पहचान, गिलोय देखने में कैसा लगता है और उसके औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से जानने की जरूरत है । तो आइए इस लेख में इस बारे में विस्तार से जानतेे हैं ।

दोस्तों गिलोय अमृता, अमृत बल्ली अर्थात एक ऐसी बेल या लता है जो कभी भी नहीं सूखती है । यदि इसकी बनावट की बात करें तो इसका तना देखने में रस्सी की तरह लगता है जो कि बहुत कोमल होता है ।

और इस पौधे के कोमल तने तथा शाखाओं से जड़े निकलती हैं । गिलोय के पौधे पर पीले व हरे रंग के फूल लगते हैं । इस पौधे के पत्ते बहुत ही कोमल तथा पान के आकार के होते हैं और इस पौधे के फल मटर के दाने के समान लगते हैं ।

गिलोय की एक बहुत बड़ी विशेषता हम आपको बता रहे हैं । गिलोय का पौधा जिस पेड़ पर भी चढ़ता है उस पेड़ के औषधीय गुण गिलोय में आ जाते हैं । यही कारण है की नीम के पेड़ पर चढ़ने वाली गिलोय को सबसे अधिक प्रभावी और लाभदायक माना जाता है ।

क्योंकि इस गिलोय में नीम के गुण भी आ जाते हैं और यह गिलोय नुकसानदायक बैक्टीरिया और पेट के कीड़ों को खत्म करती हैं । यह गिलोय ऐसे बैक्टीरिया को हमारे शरीर में बढ़ने से रोकती हैं जो टी बी बनाते हैं ।

यह गिलोय आंख और यूरिनल सिस्टम पर अपना बहुत अच्छा प्रभाव डालती हैं । गिलोय की कुछ प्रजातियां इस प्रकार है ।

 

गिलोय के विभिन्न नाम 

 



दोस्तों गिलोय एक सार्वभौमिक पौधा है जिसके अलग-अलग भाषाओं में तथा स्थान के आधार पर अलग-अलग नाम होते हैं । यहां हमने कुछ विशेष नामों की लिस्ट दी है, आइए जानते हैं ।

 

गिलोय के फायदे

 



दोस्तों जैसे कि हमने आपको बताया गिलोय का पौधा परमात्मा ने हमें अमृत के समान एक सौगात के रूप में दिया है । इसकी देखभाल करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य हैं, क्योंकि गिलोय से इतनी अधिक बीमारियां ठीक होती हैं जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।

आइए जानते हैं गिलोय से कौन-कौन सी बीमारी ठीक होती हैं तथा इस का हमारी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है ।

 

आँखों के रोग में फायदेमंद गिलोय

 




गिलोय आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद जड़ी बूटी है । आंखों की बीमारी में गिलोय को निम्न प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं ।

10 मिलीलीटर गिलोय के रस में एक 1 ग्राम शहद एवं सेंधानमक मिलाकर मिश्रण को अच्छी तरीके से मिलाकर तैयार कर लें । अब इस मिश्रण को काजल की तरह आंखों में लगाने से आंखों की समस्याओं जैसे आंख के सामने अंधेरा सा छा जाना, आंख में जाला आना, आंख में दर्द होना आदि समस्याओं में लाभ होता है ।

इतना ही नहीं यदि आंख में काला या सफेद मोतियाबिंद हो तो भी इस प्रयोग से बहुत अधिक लाभ होता है ।

एक और प्रयोग जान लीजिए गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बना लीजिए । 15 से 20 मिलीलीटर इस मिश्रण में 1 ग्राम पिपली चूर्ण व 8 से 10 बूंदे शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी में बहुत अधिक फायदा होता है ।

 

कान की बीमारियों में फायदेमंद गिलोय

 



गिलोय कान की अनेक प्रकार की बीमारियों में फायदा करता है । यदि कान में बहुत ज्यादा मैल भर गई हो एवं सुनाई कम देने लगा हो या कान में दर्द रहता हो तो निम्न प्रयोग करने से बहुत अधिक लाभ होता है ।

गिलोय के तने को पीसकर पानी में अच्छी तरह मिला लें तथा इस पानी को थोड़ा सा गुनगुना कर ले । अब जिस कान में समस्या हो उस कान में 2 से 3 बार डालने पर बहुत अधिक फायदा होता है ।

कान की मैल निकल जाती है, कान में दर्द होना जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है । यदि गिलोय का सही तरीके से सेवन किया जाए तो ही गिलोय के फायदे मिल सकते हैं ।

 

हिचकी को रोकने में लाभकारी गिलोय

 



यदि किसी व्यक्ति को हिचकी आने की समस्या हो तथा बार बार हिचकी आती हो तो ऐसी स्थिति में गिलोय का सेवन निम्न प्रकार से करने पर हिचकी आने की समस्या में बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

गिलोय तथा सोंठ के चूर्ण को नसवार की तरह लेने पर हिचकी बंद हो जाती है । इसके अलावा आप एक प्रयोग कर सकते हैं । गिलोय चूर्ण एवं सोंठ के चूर्ण की चटनी बना लीजिए इस चटनी को दूध के साथ लेने पर भी हिचकी आनी बंद हो जाती है ।
टीबी रोग में फायदेमंद गिलोय

गिलोय टीवी अर्थात राज्यक्षमा में बहुत अधिक फायदेमंद सिद्ध हुआ है । टीबी में गिलोय का प्रयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है ।

गिलोय के साथ-साथ अश्वगंधा, शतावर, दशमूल, अडूसा, पोकर मूल तथा अतीश । इन सभी जड़ी बूटियों को बराबर बराबर मात्रा में लेकर इन सभी का काढ़ा बना लें ।

बीस एमएल काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से टीवी की समस्या में बहुत अधिक फायदा होता है । यह काड़ा लेने के बाद आप दूध का सेवन अवश्य करें क्योंकि सही इस्तेमाल से ही आपको गिलोय के फायदे मिल पाएंगे ।

 

उलटी रोकने में लाभकारी गिलोय

 



यदि बहुत ज्यादा गैस बन रही हो या एसिडिटी हो गई हो और अपच के कारण उल्टी आ रही हो तो ऐसे में लगभग 10 से 15 मिलीलीटर गिलोय रस में 5 ग्राम मिश्री चूर्ण मिला लें ।

इसे दो से तीन बार लेने पर उल्टी बंद हो जाती है । यदि उल्टी बुखार के कारण हो रही हो तो ऐसी स्थिति में लगभग 30 मिलीलीटर गिलोय के रस में 10 से 15 बूंद शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करें ।

ऐसा करने से बुखार के कारण होने वाली उल्टी में फायदा होता है । गिलोय के फायदे उठाने के लिए नुस्खे का प्रयोग सही तरीके से करें ।

 

कब्ज में लाभकारी गिलोय

 



गिलोय कब्ज यानी कॉन्स्टिपेशन में भी फायदेमंद जड़ी बूटी है । यदि कब्ज की समस्या हो तो गिलोय का सेवन इस प्रकार से किया जा सकता है ।

लगभग 20 से 25 मिलीलीटर गिलोय के रस का गुड के साथ सेवन करने से कब्ज में बहुत अधिक फायदा होता है । सोंठ, गिलोय, अतीस इन सभी जड़ी-बूटियों को पानी में उबाल लीजिए तथा छानकर रख लीजिए ।

इस काढे को लगभग 30 मिलीलीटर सुबह और 30 मिलीलीटर शाम को पीने से कब्ज की समस्या में बहुत अधिक फायदा मिलता है ।

 

बवासीर में लाभकारी गिलोय

 



गिलोय बवासीर यानी पाइल्स की प्रॉब्लम में बहुत अधिक फायदेमंद होती है । बवासीर में गिलोय का प्रयोग इस प्रकार किया जा सकता है ।

20 ग्राम हरड़, 20 ग्राम गिलोय तथा 20 ग्राम धनिया इन तीनों को लगभग आधा लीटर पानी में पका लें । जब पानी एक चौथाई रह जाए तो इस काढ़े को छानकर रख लें ।

इस काढ़े में गुड़ डालकर सुबह-शाम सेवन करें । 2 से 3 महीने तक सेवन करने से बवासीर की बीमारी में लाभ होता है ।आजमाया हुआ प्रयोग है ।

 

पीलिया में लाभकारी गिलोय

 



गिलोय पीलिया में अपना चमत्कारिक असर दिखाने वाली जड़ी बूटी मानी जाती है । यदि गिलोय का सही मायने में फायदा उठाना हो तो इसे इस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है ।

गिलोय का लगभग 30ml रस ले तथा उसमें एक या दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है । गिलोय के 15 से 20 पत्ते ले ले तथा उन्हें अच्छी तरह पीसकर एक गिलास छाछ जिसे मट्ठा भी कहते हैं में अच्छी तरह मिला ले । अब आप इसे छानकर सुबह-शाम पियें । पीलिया में आपको काफी आराम मिलेगा ।

अगला उपाय गिलोय केे छोटे-छोटे टुकड़े कर लीजिए तथा इसकी माला बना लीजिए । इस माला को पीलिया के मरीज को पहनाने से भी काफी लाभ मिलता है । अब हम आपको इसका काढ़ा बनाने की विधि बता रहे हैं । यदि आप इसका काढ़ा बना कर पिएंगे तो पीलिया में काफी लाभ मिलेगा ।

पुनर्नवा, नीम की छाल, पटोला, शॉर्टकट की गिलोय, दारू,हल्दी तथा हरड़ । इन सब को 20:20 ग्राम ले ले तथा 350 मिलीलीटर पानी में पकाकर इसका काढ़ा बना लें । इस काढ़े को छानकर किसी कांच के बर्तन में सुरक्षित रखले ।

अब आप इस काढ़े को 20 से 25 एम एल सुबह और इतनी ही मात्रा में शाम को पिय । पीलिया में कुछ दिनों में लाभ मिल जाएगा ।

 

लीवर के लिए फायदेमंद गिलोय

 



गिलोय लीवर के लिए भी बहुत ही उत्तम टॉनिक है । जिस प्रकार आपने ऊपर पड़ा होगा की गिलोय कब्ज के लिए बहुत ही उत्तम जड़ी बूटी है बिल्कुल उसी प्रकार लीवर के लिए भी हम गिलोय का उपयोग कर सकते हैं ।

आप 20 ग्राम गिलोय के रस में गुड़ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें । कुछ ही दिनों में आपकी लीवर की समस्या जैसे कि बहुत ज्यादा एसिडिटी बनना, गैस बनना या अपच की जो परेशानी है उसमें आप को बहुत अधिक लाभ मिलेगा ।

 

डायबिटीज़ में लाभकारी गिलोय

 



गिलोय डायबिटीज के लिए बहुत ही उत्तम और रामबाण जड़ी बूटी है । डायबिटीज यानी मधुमेह की समस्या के लिए गिलोय को इस प्रकार से प्रयोग कर सकते हैं । सबसे पहले आप नीचे दी गई औषधियों को बराबर बराबर मात्रा में ले ले । जैसे या तो सभी दवाइयां 20 ग्राम ले ले या लगभग 50 50 ग्राम । सामग्री इस प्रकार है ।

गिलोय,खास, पठानी लोद, अंजन, लाल चंदन, नागर मोथा, आमला, हरण, परवल की पत्ती, नीम की छाल तथा पदम कास्ट । इन सभी औषधियों को लेकर धूप में सुखाकर अच्छी तरह साफ करके कूट पीसकर मिलाकर छानकर रख लें ।

इस मिश्रण को 10 ग्राम की मात्रा में लें तथा शहद के साथ दिन में दो से तीन बार सेवन करें । इससे डायबिटीज में आप को बहुत अधिक लाभ मिलेगा ।

दूसरा प्रयोग गिलोय का लगभग 20 एमएलए रस ले तथा दो चम्मच शहद इसमें मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करें । इससे भी डायबिटीज यानी शुगर में लाभ मिलता है । तीसरा प्रयोग आप बाजार से पतंजलि का गिलोय सत ले आइए ।

अब 1 ग्राम गिलोय सत में लगभग 3 से 4 ग्राम शहद मिलाकर सुबह लगभग 3 से 4 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें । इससे भी डायबिटीज में लाभ मिलता है । चौथा प्रयोग 10 मिलीलीटर गिलोय के रस को सुबह-शाम पीने से डायबिटीज में लाभ मिलता है ।गिलोय के फायदे सही तरीके से उठाने के लिए आप दिए गए प्रयोग को सही तरीके से करें ।

 

मूत्र क्रछ्ता रुक रुक कर पेशाब आना में लाभकारी गिलोय 

 



जिन भाइयों बहनों को मूत्र क्रचता यानी बार-बार पेशाब का आना या रुक रुक कर पेशाब का आना कि समस्या होती है उन्हें गिलोय का प्रयोग कराया जा सकता है । इसके लिए गिलोय का रस 20 मिलीलीटर ले, 2 ग्राम पाषाणभेद चूर्ण और इन दोनों में लगभग एक चम्मच शहद मिला लें ।

अब इस मिश्रण को आप दिन में तीन से चार बार सेवन करें । 2 से 3 दिन में ही इस समस्या में बहुत ज्यादा आराम मिल जाता है ।

गठिया में लाभकारी गिलोय



गिलोय गठिया बाय यानी अर्थराइटिस की समस्या के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है । इसके लिए केवल गिलोय का ही प्रयोग किया जा सकता है ।

गिलोय को किसी भी प्रकार से जैसे की गिलोय का रस, गिलोय का चूर्ण, गिलोय का पेस्ट या गिलोय का काढा प्रयोग किया जा सकता है । नीचे तालिका में बताया गया है की गिलोय को किस रूप में व कितनी मात्रा में लिया जा सकता है ।

गिलोय का रस 5:00 से 10:00 एम एल, गिलोय का चूर्ण 5 ग्राम, गिलोय का पेस्ट 15 से 20 ग्राम, गिलोय का काढ़ा । इस प्रकार कुछ दिनों तक सेवन करने से गठिया बाय में बहुत अधिक फायदा मिलता है ।

कुष्ठ रोग में लाभकारी गिलोय



गिलोय कुष्ठ रोग में भी बहुत अधिक लाभकारी होता है । इसके लिए 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय को दिन में दो से तीन बार कुष्ठ रोगी को पिलाएं ।

यह प्रयोग लगातार पांच से छह महीने तक करना चाहिए । नियमित रूप से इस प्रयोग को करने से कुष्ठ रोग में बहुत अधिक फायदा मिलता है ।

बुखार उतारने के लिए लाभदायक गिलोय



यदि हम बाकी सभी बीमारियों की बात तो करें लेकिन बुखार की बात ना करें तो गिलोय के लाभ अधूरे ही रह जाएंगे क्योंकि गिलोय बुखार उतारने के लिए सर्व श्रेष्ठ औषधि होती है ।

अगर हम यह कहें कि गिलोय का सबसे प्रमुख और पहला उपयोग ज्वर नाश करना ही है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा । नीचे कुछ प्रयोग दिए गए हैं । आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी प्रयोग को बुखार उतारने के लिए कर सकते हैं ।

लगभग 50 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह धोकर एक मिट्टी के बर्तन जैसे घड़ा इत्यादि में डाल दें तथा इसमें ढाई सौ से 300 मिलीलीटर पानी भर दें । अब इस मिट्टी का बर्तन को कम से कम एक रात के लिए ढक कर रखें ।

अगले दिन गिलोय को अच्छी तरह मसल कर निकाल ले तथा शेष पानी को छान कर किसी बर्तन में रख ले । गिलोय के पानी को 20 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में दो से तीन बार पीने से बुखार में लाभ मिलता है ।

दूसरा प्रयोग – 25 मिलीलीटर गिलोय के रस में 1 से 2 ग्राम पिपली चूर्ण तथा एक चम्मच शहद मिला लें । इस मिश्रण को सुबह शाम कुछ दिनों तक सेवन करने से पुराना बुखार तथा बुखार के कारण उत्पन्न कफ, खांसी एवं भूख ना लगना जैसी समस्याओं में आराम मिलता है ।

अब हम आपको एक काढ़ा बनाना बता रहे हैं । इस काढ़े से भी बुखार में बहुत जल्दी लाभ मिलता है । विधि इस प्रकार है । बेल, अरणी, गम भरी, सोना पाठा, पाडल की जड़ की छाल, गिलोय, आमला, धनिया ।

इन सभी की बराबर बराबर मात्रा ले ले जैसे 50 50 ग्राम । इन सभी को पानी में उबालकर इनका काढा तैयार कर लें । इस काढ़े को 20 से 30 मिलीलीटर प्रतिदिन दिन में दो से तीन बार सेवन करने से कितना ही पुराना बुखार क्यो न हो, बहुत जल्दी ठीक हो जाता है ।

अगला प्रयोग – मुनक्का, गिलोय, गम भरी, क्राइम आर्ट तथा सारिवा । इन सभी जड़ी-बूटियों को बराबर बराबर मात्रा में लें तथा इनको पानी में उबालकर काढ़ा बनालें । पानी लगभग ढाई सौ से 300ml ले सकते हैं ।

इस काढ़े को 20 से 25 एम एल गुड के साथ लेने पर बुखार में आराम मिलता है । अगला प्रयोग – गिलोय तथा शतावरी का रस 10-10ml की मात्रा में ले, तथा इस मिश्रण को गुड़ मिलाकर पीने से बुखार में आराम मिलता है ।

लगभग 25 से 30 मिलीलीटर गिलोय के रस में 1 ग्राम पिपली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है ।

अगला प्रयोग – छोटी कटेरी शॉर्ट का चूर्ण गुडुची का गिलोय का काढ़ा लगभग 20 से 30 एमएम, पीपली चूर्ण 2 ग्राम इन सब को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बुखार, बदन दर्द तथा खांसी में आराम मिलता है ।

लगभग 50 ग्राम गिलोय की चटनी बना ले तथा इस चटनी में मिश्री को पीसकर मिला लें और सुबह सुबह नाश्ते के साथ सेवन करें । ऐसा करने से बुखार में लाभ मिलता है ।

अगला प्रयोग – गिलोय, सारिवा, लोद, नील कमल, आमला तथा पपेट । इन सब को बराबर मात्रा में ले लें तथा इनका काढ़ा बना लें । इस काडे में चीनी मिलाकर पीने से बुखार में लाभ मिलता है ।

गिलोय, नीम तथा आंवला को बराबर बराबर मात्रा में लें तथा इसका काढ़ा बना ले । इस काडे को लगभग 20 से 25 एम एल 25 की मात्रा में लें तथा इसमें शहद मिलाकर पीने से बुखार में फायदा होता है ।

अगला प्रयोग – 100 ग्राम गिलोय का चूर्ण ले तथा इसे अच्छी तरह छान ले । इसमें 20 ग्राम गुड़, 20 ग्राम गाय का घी तथा 20 ग्राम शुद्ध शहद डालकर अच्छी तरह गूंद ले तथा इसके छोटे-छोटे लड्डू बना ले ।

लड्डू को अपनी पाचन क्षमता के अनुसार सुबह-शाम सेवन करें । इससे पुराने बुखार के साथ साथ शरीर दर्द तथा अन्य कई बीमारियों में फायदा होता है । इससे याददाश्त में भी फायदा होता है ।

गिलोय, कथा व्रत, पंचमूल को बराबर बराबर मात्रा में लें तथा इसका काढ़ा बना ले । इस काडे कि 40 मिलीलीटर मात्रा ले, इसमें 1 ग्राम पिपली चूर्ण तथा 10 ग्राम शहद मिलाएं । अब इस मिश्रण का सुबह-शाम सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है ।

अगला प्रयोग गिलोय का काढ़ा बना ले । इस काडे में एक चौथाई मात्रा में शहद मिलाएं । इसका सेवन करने से भी बुखार में लाभ मिलता है ।

25 मिलीलीटर गिलोय का रस लें, 500 मिलीग्राम तथा इसमें 5 ग्राम शहद मिला लें । इस मिश्रण को सुबह शाम सेवन करने से पुराना बुखार, सुखी खांसी, शारीरिक दिमाग की कमजोरी जैसी समस्याओं में आराम मिलता है ।

गिलोय का काढ़ा बना ले तथा इसमें पीपली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बुखार में सबसे अधिक फायदा मिलता है ।

यदि आप बुखार के रोगी हैं तो आपको गिलोय की पत्तियों को भी सब्जी के रूप में अवश्य ही प्रयोग करना चाहिए । इसके अतिरिक्त आप पतंजलि की गिलोय घन वटी का प्रयोग भी कर सकते हैं ।

एसिडिटी में लाभकारी गिलोय



गिलोय एसिडिटी की समस्या को दूर करता है । इसके लिए आप गिलोय को निम्न प्रकार से प्रयोग कर सकते हैं । गिलोय का रस 15 से 20 एमएलए तथा इसे गुड़ या मिश्री के साथ सुबह-शाम सेवन करें । इससे भी आराम मिलता है ।

अगला प्रयोग गिलोय का काढ़ा 25ml अथवा गिलोय की चटनी भी ले सकते हैं लगभग 20 ग्राम तथा इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से एसिडिटी में लाभ मिलता है ।

अगला प्रयोग गिलोय डोसा डोसा की छाल छोटी कटोरी को बराबर बराबर मात्रा में ले ले अब इसे पानी में पकाकर इसका काढ़ा बना लें 20 एमएलए में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें इसके सेवन करने से बुखार सूखी खांसी सांस फूलना घबराहट बेचैनी आदि समस्याओं में लाभ मिलता है

कैंसर में लाभकारी गिलोय



गिलोय एक ऐसी होती है जो कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी में अपना चमत्कारी असर दिखाती है इसके लिए आप निम्न प्रयोग कर सकते हैं |

2 फुट लंबी तथा 2 से ढाई इंच मोटी गिलोय का तना ले इस के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें 10 ग्राम गेहूं की हरी पत्तियां ले इस पूरे मिश्रण में थोड़ा सा पानी मिलाकर इसे अच्छी तरह पीस लें और किसी सूती कपड़े में डालकर इस पूरे मिशन को छोड़कर इसका रस निकालने

एक कप इस मिश्रण को सुबह उठकर खाली पेट पीने से कैंसर जैसी भयानक बीमारी में चमत्कारी लाभ देखे गए आप इसका प्रयोग अवश्य करें हो सके इस प्रयोग को किसी अनुभवी वेद करें



कितनी मात्र में सेवन करें

 



गिलोय का गिलोय का सेवन का डे के रूप में विश्व 30ml रस के रूप में 20ml चटनी के रूप में 20 ग्राम से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए

गिलोय के सेवन करने का तरीका जिले को गिलोय को आप काढा रस चूर्ण या चटनी के रूप में पप में प्रयोग कर सकते हैं

 


गिलोय के नुक्सान

 



एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसके नुकसान यह साइड इफेक्ट ना के बराबर ही हैं यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज यानी शुगर की समस्या नहीं है तो ऐसे लोगों को गिलोय का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि गिलोय शुगर के स्तर को कम करता है साथी गर्भावस्था के दौरान भी गिलोय का प्रयोग ना करें

दोस्तों इस प्रकार इसलिए हमने आपको गिलोय के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है यदि गिलोय से संबंधित आप ही कुछ प्रश्न है तो आप कमेंट के माध्यम से हमारे से पूछा यदि आपको एक अच्छा लगा है तो आप हमारे लिए तो लाइक कर सकते हैं नमस्कार

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