कफ (बलगम) बनने का कारण लक्षण एवं इसका घरेलु उपचार Phlegm home remedies in Hindi

कफ (बलगम) बनने का कारण लक्षण एवं इसका घरेलु उपचार Phlegm home remedies in Hindi

बरसात के दिनों में या मौसम परिवर्तन होने पर कभी-कभी गले में एवं छाती में गाढ़ा एवं चिपचिपा पदार्थ बन जाता है जिसे आम भाषा में बलगम या कफ कहा जाता है । बलगम या कफ हमारी गर्दन या नाक के पिछले हिस्से में जमा हो जाता है तथा व्यक्ति को बहुत ज्यादा परेशान करता है ।

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कफ के कारण व्यक्ति को खाने पीने में एवं सांस लेने में भी कठिनाई होने लगती है । कफ म्यूकस मेंब्रेन के द्वारा बनाया जाता है । हमारी छाती एवं गले में बहुत कम मात्रा में कफ हमेशा ही रहता है जो श्वसन तंत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक होता है ।

लेकिन जब यह कफ बहुत अधिक मात्रा में बन जाता है तो इससे हमें बहुत अधिक परेशानी होती है । म्यूकस मेंब्रेन जो कि कफ बनाने के प्रति जिम्मेदार होती है, हमारे शरीर के निम्न अंगो में मौजूद होती है ।

  1. मुंह
  2. नाक
  3. गला
  4. फेफड़े

गले व नाक की ग्रंथियां सबसे ज्यादा कफ का उत्पादन करती हैं तथा कुछ विशेष स्थितियों में यह उत्पादन 1 से 2 लीटर तक भी हो सकता है । यदि किसी व्यक्ति के गले या नाक में कफ का उत्पादन बहुत अधिक हो तो इससे कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे बेचैनी होना, सांस लेने में दिक्कत होना, बार-बार नाक या गला साफ करने की इच्छा होना एवं खांसी होना इत्यादि ।

ऐसी स्थिति में कफ दूर करने के लिए आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक उपाय करना आवश्यक हो जाता है । कफ को दूर करने के लिए त्रिफला, कांचनार गुग्गुल, लवंगादि वटी, व्योषादी वटी एवं कफ केतु रस जैसे औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है । इसके अलावा इस रोग को दूर करने के कुछ घरेलू उपाय भी हैं जो आगे चलकर हम आपको बताएंगे ।

कफ अर्थात बलगम के लक्षण Phlegm Symptoms in Hindi

आइए अब हम बात करते हैं की यदि आपके शरीर में कफ या बलगम ज्यादा मात्रा में बनता है तो उसके क्या लक्षण हो सकते हैं ।

  • यदि आपके गले में ज्यादा बलगम बनता है तो आपकी आवाज भारी हो सकती हैं तथा आपकी सांस में दुर्गंध भी आ सकती है क्योंकि बलगम में दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया होते हैं ।
  • यदि आपके गले एवं नाक की ग्रंथियों के द्वारा बहुत अधिक कफ का उत्पादन कर दिया जाए तो यह कफ आपके गले एवं नाक के पीछे एकत्रित हो जाता है तथा वायु मार्ग को अवरुद्ध करना शुरू कर देता है । जिससे आपको सांस लेने में परेशानी होने लगती है ।
  • अत्यधिक कफ बनने के कारण आपकी नाक बंद हो जाती है जिससे आपको बहुत अधिक परेशानी महसूस होने लगती हैं ।
  • यदि कफ बहुत अधिक मात्रा में बन जाए तो यह आपके फेफड़ों में जमुना शुरू हो जाता है और परिणाम स्वरूप आपको खांसी आनी शुरू हो जाती है ।
  • खांसते समय बहुत सारा बलगम आपके मुंह में आ जाता है जिसको आप बार बार थूकना पड़ता है ।
  • यदि आप किसी प्रकार के बैक्टीरिया या वायरल इन्फेक्शन से संक्रमित हैं तो आपके गले में बनने वाला कफ का रंग हल्के पीले या हल्के हरे रंग का हो जाता है, जिससे आपको समझ लेना चाहिए कि आपको किसी प्रकार का संक्रमण हो गया है तथा आपको तुरंत उपचार की आवश्यकता है ।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए

एक बहुत ही इंपॉर्टेंट प्रश्न पैदा होता है कि आपको अत्यधिक कफ बनने की स्थिति में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए । देखिए जैसा कि हमने आपको पर बताया कि गले एवं नाक की ग्रंथियों के द्वारा कफ का उत्पादन लगातार होता रहता है जो कि गले एवं नाक को नम बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है ।

यदि यह कफ न बने तो गला तथा नाक सूख जाएंगे जिससे और भी समस्या पैदा हो सकती हैं । इसलिए पर्याप्त मात्रा में कफ का बनना आवश्यक होता है लेकिन यदि यह बहुत अधिक मात्रा में बन जाए तो आपको कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं ।

इस स्थिति में आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं तथा परामर्श ले सकते हैं । यदि कफ काफी लंबे समय तक आपकी छाती में जमा होता रहे तो इसके कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं, जैसे छाती में दर्द होना, सांस लेने में दिक्कत होना या सांस फूलना, घबराहट या बेचैनी महसूस होना, बहुत अधिक खांसी आना एवं खांसी के साथ खून आना ।

कफ का हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव एवं इसके दुष्प्रभाव phlegm effect on our health in hindi

देखिए जब व्यक्ति स्वस्थ होता है तो म्यूकस मेंब्रेन के द्वारा बनने वाला कफ पतला होता है तथा सामान्य रंग का होता है । लेकिन जब व्यक्ति किसी वायरल से संक्रमित हो जाता है तो ऐसी स्थिति में म्यूकस मेंब्रेन के द्वारा बनने वाला कफ गाढ़ा हो जाता है ।

इसका कारण होता है व्यक्ति के शरीर में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस के द्वारा वातावरण में मौजूद कणों को अवशोषित कर लेना । इस स्थिति में कफ का रंग भी बदल सकता है तथा यह गहरा पीला या हरे रंग का भी हो सकता है ।

यदि आपको लगता है कि आपका कफ का रंग बदल गया है तथा गाढ़ा हो गया है तो आप को चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता है । यदि आपको मौसमी परिवर्तन के कारण या किसी अन्य कारण से सर्दी खांसी जुखाम की समस्या है तो ऐसी स्थिति में भी कफ गाढ़ा हो जाता है तब कफ का रंग बदल जाता है ।

इन दोनों ही स्थितियों में आपको चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है । आइए अब हम जानते हैं की अत्यधिक कफ बनने के क्या क्या कारण होते हैं तथा इससे क्या समस्या पैदा हो सकती हैं ।

कफ (बलगम) बनने का कारण Reason of phlegm in hindi

संक्रमण के कारण आपके गले या नाक में बलगम की अत्यधिक मात्रा जमा हो सकती है तथा यह कफ आपकी छाती में जमा हो जाता है, जिससे फेफड़ों में अवरोध उत्पन्न होता है । यह अवरोध ही खांसी का कारण बनता है ।

यदि इस समस्या का सही समय पर उपचार न कराया जाए तो यही समस्या आगे चलकर गंभीर रूप धारण कर लेती है तथा अन्य अनेक बीमारियों को जन्म देती है । जुखाम या फ्लू के दौरान नाक या गले में सामान्य प्रकार के कफ का निर्माण होता है ।

लेकिन यदि आपके शरीर में वायरस का प्रभाव है तो यह बलगम धीरे-धीरे गाढ़ा होता चला जाता है तथा इसका रंग भी बदल जाता है तथा यह पीले या गाढ़े हरे रंग का हो जाता है ।

मौसम के कारण होने वाली एलर्जी

कुछ लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति ज्यादा मजबूत नहीं होती है जिस कारण ऐसे लोग मौसम के परिवर्तन को झेल नहीं पाते हैं । मौसम परिवर्तन के कारण या वातावरण में मौजूद धूल मिट्टी या अन्य किसी कारण से इन लोगों को कफ की शिकायत हो जाती है ।

साथ ही नाक से संबंधित एलर्जी भी हो जाती है, जिसके प्रमुख लक्षण छींकना, खांसना एवं आंख में खुजली होना, नाक में पानी आना, छाती में बलगम जमा हो जाना आदि होते हैं । ऐसे लोगों को यह समस्याएं होती हैं ।

इस स्थिति में सबसे पहले तो किसी योग्य चिकित्सक से इस समस्या का समाधान कराना चाहिए तथा बाद में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए चवनप्राश, आंवले का मुरब्बा, सितोपलादि चूर्ण इत्यादि प्राकृतिक वस्तुओं का सेवन भी करना चाहिए ।

खाद्य पदार्थों के कारण

बहुत से खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में भी कफ पैदा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जैसे चावल, दही, पनीर इत्यादि । इन सबके अलावा भी कुछ अन्य ऐसे पदार्थ हो सकते हैं जिनको खाने से हमारे शरीर में कफ का निर्माण बहुत अधिक मात्रा में होता है ।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श की विशेष आवश्यकता नहीं होती है बल्कि गरम पानी, काली मिर्च वाली चाय, अजवाइन एवं काली मिर्च का मिश्रण जैसे घरेलू उपाय करके भी इस समस्या से निजात पाई जा सकती है ।

गर्भावस्था के कारण

गर्भावस्था में महिलाओं को कफ एवं बलगम से संबंधित समस्याएं ज्यादातर घर के रखती हैं क्योंकि यह गर्भावस्था में बहुत ही सामान्य लक्षण होते हैं । गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की नाक बंद हो जाना, खांसी एवं छाती में बलगम जमा हो जाना इत्यादि समस्याएं हो जाती हैं ।

अन्य कारण

इन सब कारणों के अलावा कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं जिससे हमारे शरीर में कफ पैदा हो सकता है, जैसे कि सिगरेट या तंबाकू का अत्यधिक सेवन करना, वायु प्रदूषण इत्यादि ।

अत्यधिक कफ बनने के दुष्प्रभाव

यदि हमारे शरीर में अत्यधिक कफ बनता है तो निसंदेह हमें अनेक प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं । नीचे हमने इन्हीं समस्याओं की तालिका दी है ।

  1. टॉन्सिल या गलसुओ की सूजन
  2. स्ट्रैप थ्रोट
  3. सर्दी खांसी जुखाम
  4. लैरिंजाइटिस
  5. चिकन पॉक्स
  6. खसरा
  7. मोनोन्यूक्लियोसिस
  8. काली खांसी इत्यादि

कफ पैदा करने वाले रोग

बहुत से ऐसे रोग हैं जिनके कारण भी हमारे शरीर में अत्यधिक कफ या बलगम का निर्माण होता है । यह रोग इस प्रकार हैं ।

  1. एसिड रिफ्लक्स
  2. एलर्जी
  3. अस्थमा
  4. सिस्टिक फाइब्रोसिस
  5. क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस
  6. फेफड़ों से संबंधित अन्य समस्याएं

कफ या बलगम से बचाव के घरेलू उपाय home remedy for cough with phlegm in hindi

आइए अब हम जानते हैं एक कफ या बलगम से बचाव के क्या-क्या उपाय हो सकते हैं, ताकि इस समस्या को शुरू होते ही इसका समाधान किया जा सके ।

उबले पानी की भाप लेना

गले या नाक में कफ को ढीला करने के लिए उबले हुए पानी की भाप लेना एक प्राचीन और अत्यंत असरदायक उपाय है । उबले हुए पानी की भाप लेने से गले एवं नाक में जमा हुआ कफ ढीला हो जाता है तथा पिंघल कर बाहर निकल जाता है ।

यदि साइनस की समस्या हो तो इस स्थिति में भी यह उपाय बहुत असरदार होता है । गरम पानी की भाप लेने के अलावा आप गर्म पानी से स्नान भी कर सकते हैं तथा पीने का पानी भी गर्म करके ही पिए, इससे आपको बहुत अच्छा लाभ मिलेगा ।

अधिक से अधिक पानी पिय

यदि आप कफ की समस्या से लगातार पीड़ित रहते हैं तो ऐसे में आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए प्रतिदिन । 8 से 10 गिलास गर्म पानी पीने से आपको इस समस्या में बहुत अच्छा आराम मिलने लगेगा ।

नमक वाले पानी के गरारे करें

कफ को ढीला करने के लिए आप एक गिलास पानी गर्म कर ले तथा इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला लें । इसमें आप एक चौथाई चम्मच हल्दी भी मिला सकते हैं । हल्दी एंटीबैक्टीरियल होती है तथा बहुत अच्छी कफ नाशक की होती हैं । पानी इतना गर्म होना चाहिए जिसे आप सहन कर सके । इसके पश्चात इस पानी से आप गरारे करें । यह प्रक्रिया आप दिन में दो से तीन बार दोहरा सकते हैं ।

खान-पान का ध्यान रखें

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया डेयरी उत्पाद, तला हुआ भोजन तथा गरिष्ठ भोजन कफ पैदा करने का एक मुख्य कारण होता है । इसलिए यदि आपकी इम्यूनिटी पावर ज्यादा मजबूत नहीं है तथा अब बार-बार बलगम या कफ से पीड़ित हो जाते हैं तो आपको तला हुआ भोजन जैसे छोले भटूरे, समोसे एवं खटाई वाली चीजें कम खाने चाहिए ।

त्रिकटु का काढ़ा पिए

बलगम दूर करने के लिए त्रिकटु एक रामबाण उपाय है । त्रिकटु का काढ़ा बनाना बहुत ही आसान है । इसके लिए सोंठ, काली मिर्च एवं पिपली का संभाग मिश्रण ले ले तथा कूटकर एक गिलास पानी में लगभग 20 ग्राम डालकर पकाएं ।

जब पानी आधा रह जाए तो इसे छान लें तथा इसे घुट घुट भर के पिए । स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा गुड़ भी डाल सकते हैं क्योंकि गुड भी श्वास नलिका को साफ करने में मददगार होता है । आप को बाजार से बना बनाया त्रिकटु चूर्ण भी मिल जाएगा ।

विटामिन सी का सेवन करें

मेडिकल साइंस के अनुसार विटामिन सी में सर्दी खांसी जुखाम एवं बलगम को दूर करने वाले गुण मौजूद होते हैं । इसलिए विटामिन सी से युक्त खाद्य पदार्थों जैसे संतरा, अमरूद, निंबू इत्यादि का सेवन करना चाहिए ।

आयुर्वेदिक उपाय

कफ दूर करने के लिए आप कुछ आयुर्वेदिक उपाय भी कर सकते हैं । इसके लिए आप त्रिफला चूर्ण का सेवन कर सकते हैं । इसके अलावा व्योशादी वटी, कफकेतु रस एवं कांचनार गुग्गुल है ।

गरम तरल पदार्थों का सेवन करें

कफ दूर करने के लिए आप गर्म तासीर के तरल पदार्थों का सेवन कर सकते हैं । इसके लिए आप टमाटर सूप पी सकते हैं । यदि आप नॉनवेज खाते हैं तो आप चिकन सूप का सेवन भी कर सकते हैं । चिकन सूप तासीर में बहुत ज्यादा गर्म होता है तथा यह कफ को पिंघलाकर शरीर से बाहर निकाल देता है । इसके अतिरिक्त आप गरम नींबू का पानी या बिना कैफीन की चाय का सेवन भी कर सकते हैं ।

विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करें

हमारे घर में बहुत से खाद्य पदार्थ ऐसे मौजूद होते हैं जो कफ को दूर करने में मददगार होते हैं जैसे नींबू, अदरक, लहसुन इत्यादि । इसके अतिरिक्त हमारी रसोई में लाल मिर्च, काली मिर्च, अजवाइन एवं गरम मसाले मौजूद होते हैं जो कफ का निवारण करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ।

आप सामान्य सर्दी खांसी, जुखाम या बलगम होने पर अदरक की चाय का सेवन भी कर सकते हैं तथा इस चाय में थोड़ी सी काली मिर्च एवं तुलसी के पत्ते डालकर इसकी क्वालिटी को और अच्छा कर सकते हैं । इसे हम हर्बल टी कह सकते हैं ।

नीलगिरी के तेल का इस्तेमाल करें

नीलगिरी का तेल तासीर में गर्म होता है तथा यह बहुत ही अच्छा होता है । यह तेल आपकी छाती में जमा हुए बलगम को पिंघलाकर आपके शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है । इसके लिए आप नीलगिरी के तेल की अपनी छाती पर खूब अच्छी तरह मसाज करवा सकते हैं ।

इतना ही नहीं आप नीलगिरी के तेल की भाप भी ले सकते हैं या किसी ऐसे बाम का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें नीलगिरी का तेल का प्रयोग किया गया हो ।

OTC दवाओं का प्रयोग करना

यदि आप कफ या बलगम से बहुत ज्यादा परेशान है तथा तुरंत ही आराम प्राप्त करना चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में आप over-the-counter (OTC) दवाओं का प्रयोग भी कर सकते हैं । बाजार में ऐसी बहुत सी मेडिसिन अवेलेबल है जो आपकी कफ एवं सामान्य सर्दी खांसी की समस्या को तुरंत दूर करने में प्रयोग की जाती हैं । कफ नाशक दवाओं को डीकन्जेस्टेंट कहा जाता है । डीकन्जेस्टेंट दवाएं निम्न रूप में मौजूद होती है ।

  1. टेबलेट
  2. कैप्सूल
  3. सिरप
  4. फ्लेवर पाउडर
  5. प्रिसक्रिप्शनल मेडिसिंस

नेबुलाइजर द्वारा इलाज करना

छोटे बच्चे जिनकी आयु 5 वर्ष से कम है तथा जो ज्यादा मेडिसिन या घरेलू उपाय नहीं कर सकते हैं उन्हें नेबुलाइजर के द्वारा ट्रीटमेंट दिया जाता है । इसके लिए आप अपने आसपास किसी अच्छे डॉक्टर से मिले तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार 5 वर्ष या कम आयु के बच्चों को नेबुलाइजर से ट्रीटमेंट से, जिससे उन्हें तुरंत आराम मिल जाएगा ।

कफ का परीक्षण

रोग का पता लगाने के लिए परीक्षण करना अत्यंत आवश्यक होते हैं । आपके शरीर में कफ किस कारण पैदा हुआ है इसके लिए कफ का परीक्षण करना जरूरी होता है । कफ का रंग, उसका गाढ़ापन तथा उसमें मौजूद कोई विशेष तत्व रोग की तरफ इशारा कर सकता है, जिस कारण कफ पैदा हुआ है । अलग-अलग रोगों एवं संक्रमण के कारण कफ की स्थिति अलग अलग हो सकती है ।

सफेद रंग का कफ

जो लोग बिल्कुल स्वस्थ होते हैं उनका कफ बिल्कुल सफेद होता है जिसे आम भाषा में थूक कहा जाता है । स्वस्थ होने पर जब आप ठोकते हैं तो कफ सफेद रंग का ही होता है, जिसका हमें आभास नहीं हो पाता है क्योंकि इसमें गाढ़ापन और चिपचिपापन बहुत कम होता है ।

यदि आपको किसी भी प्रकार का संक्रमण हो गया है तो ऐसी स्थिति में आपके कफ का रंग हल्का पीला या गहरा पीला हो सकता है । दोनों ही स्थितियों में आपको समझ जाना चाहिए कि आपको संक्रमण हो गया है तथा आपको तुरंत इसका उपचार कराना चाहिए ।

हरे रंग का कफ

हरे रंग का कफ निमोनिया के कारण होता है । यदि आपका कफ हरे रंग का हो गया है तो आपको समझ जाना चाहिए कि आप निमोनिया के शिकार हो सकते हैं ।

भूरे रंग का कफ

जो लोग बहुत अधिक धूम्रपान करते हैं उनके कफ का रंग भूरा हो जाता है ।

लाल रंग का कफ

यदि किसी रोगी को ब्रोंकाइटिस या फेफड़ों से संबंधित कोई गंभीर रोग है तो कफ का रंग लाल हो सकता है । यह कफ में खून आने के कारण होता है ।

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