व्योषादि वटी के गुण उपयोग फायदे घटक और नुकसान Vyoshadi Vati (vatakam) ke fayde or nuksan

By | June 16, 2020

व्योशादी वटी (Vyoshadi Vati or Vyashadi Vatakam) एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से खांसी, नजला जुखाम, पीनस,क गला बैठना एवं श्वसन तंत्र के संक्रमण को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है । यह औषधि स्वभाव में गर्म होती है इसलिए यह औषधि फेफड़ों में जमे हुए बलगम को दूर करती है व फेफड़ों को नई ताकत एवं ऊर्जा प्रदान करती है ।

इस औषधि का सेवन करने से दमा श्वास, जीर्ण प्रतिष्याय, कफ के कारण होने वाला बुखार, भूख की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता में बहुत अच्छा फायदा मिलता है । शादी वटी को हम रसायन की संज्ञा दे सकते हैं, क्योंकि यह औषधि कफ रोग की सर्वोत्तम औषधियों में से एक है ।

यह श्वास मार्ग कफ को साफ करती है, जिससे रोगी को सांस लेने में आसानी रहती है तथा यह बार बार छींक आना जैसी समस्या को भी दूर करने में लाभदायक होती है । इसके साथ-साथ यह औषधि अजीर्ण एवं अपच में भी आंशिक रूप से लाभ पहुंचाती है । यदि नजला जुखाम एवं खांसी ज्यादा हो तो इस ओषधि के साथ सहायक ओषधि के रूप में सितोपलादि चूर्ण का सेवन भी किया जा सकता है ।

व्योषादि वटी के घटक द्रव्य Vyoshadi Vati (vatakam) ke ghatak dravy in hindi

  • कालीमिर्च
  • पीपल
  • अम्लवेत
  • चव्य
  • तालीसपत्र
  • चित्रक मूल
  • जीरा
  • इमली
  • दालचीनी
  • तेजपात
  • इलायची
  • गुड

व्योषादि वटी बनाने की विधि Vyoshadi Vati (vatakam) kaise banaye

व्योशादी वटी को बनाना बहुत ही आसान है तथा यदि आप थोड़ा सा प्रयास करेंगे तो आप इस औषधि को सरलता पूर्वक घर पर भी बना सकते हैं । इस औषधि को बनाने की विधि इस प्रकार है ।

  1. सबसे पहले सोंठ, काली मिर्च, पीपल, चव्य, तालीसपत्र, चित्रक की छाल तथा इमली का 1 – 1 भाग लेकर कूट पीसकर के कपड़े छन करके रख लीजिए ।
  2. इसके पश्चात दालचीनी, तेजपात तथा इलायची के 3 – 3 भाग लेकर अलग से कूट पीसकर के कपड़े छन करके रख लीजिए । गुड 25 भाग लेना है ।
  3. इसके पश्चात सभी जड़ी बूटियों के चूर्ण को आपस में मिला लें तथा अंत में इसमें गुड मिला दे और अच्छी प्रकार से आटे की तरह गूंद ले ।
  4. अंत में 4 – 4  रत्ती की गोलियां बना लें एवं छाया में सुखा लें । इसे ही व्योशादी वटी कहते हैं ।

व्योषादि वटी के गुणधर्म Vyoshadi Vati (vatakam) ke gun in hindi

व्योषादिवटी में निम्न औषधीय गुण मौजूद होते हैं ।

  1. कास रोधक
  2. एंटीवायरल
  3. एंटीबैक्टीरियल
  4. एंटीएलर्जीक
  5. क्षुधा वर्धक
  6. पाचक
  7. उत्तेजक
  8. डीकन्जेस्टेंट

व्योषादि के चिकित्सक के उपयोग Vyoshadi Vati (vatakam) ke upyog in hindi

व्योषादि वटी को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है ।

  1. सामान्य सर्दी जुखाम
  2. नाक की एलर्जी जैसे सुबह उठकर नाक में से पानी आना, नाक में खाज होना एवं बार-बार छींके आना
  3. गले की खराश एवं दर्द
  4. खांसी
  5. फेफड़ों का संक्रमण
  6. फेफड़ों में कफ का जमना
  7. सांस लेने में कठिनाई होना
  8. दमा श्वास
  9. एनीमिया
  10. अजीर्ण
  11. अपच
  12. हृदय रोग

व्योषादि वटी के फायदे Vyoshadi Vati (vatakam) ke fayde in hindi

  • व्योषादि वटी को मुख्य रूप से नजला जुकाम एवं खांसी में प्रयोग किया जाता है ।
  • यह औषधि छाती में जमे हुए बलगम को दूर करती है ।
  • यह फेफड़ों को नई ऊर्जा एवं बल प्रदान करती है ।
  • यह नाक में होने वाली एलर्जी को दूर करती है ।
  • यह सांस लेने में होने वाली तकलीफ को दूर करती है ।
  • यह अजीर्ण एवं अपच को दूर करती है ।
  • यह औषधि हृदय को बल प्रदान करती है ।
  • यह गले तथा नासिका मार्ग को शुद्ध करती है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

एक से दो गोली सुबह एवं शाम को गुनगुने पानी या दूध के साथ भोजन करने के पश्चात् या चिकित्सक के परामर्श अनुसार ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

चिकित्सक की देखरेख एवं निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर व्योषादि वटी का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह औषधि पित्त को बढ़ा सकती है जिससे निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं ।

  • छाती में जलन
  • पेट में जलन
  • मूत्र में जलन

Recommended products for you based on customer reviews and price:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *