वृद्धिवाधिका वटी के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Vridhivadhika Vati ke fayde or nuksan

By | June 12, 2020

वृद्धिवाधिका वटी क्या है? Vridhivadhika Vati kya hai?

वृद्धिवाधिका वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से शरीर के किसी अंग या ग्रंथि के अनियमित रूप से होने वाली वृद्धि को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है ।

वृद्धिवाधिका वटी में कई प्रकार की जड़ी बूटियां एवं भसमे मौजूद होती हैं । इस औषधि में धातु तथा मिनरल्स की अधिक मात्रा मौजूद होती हैं इसलिए इस औषधि का प्रयोग बहुत ही कम मात्रा में या चिकित्सक की देखरेख में ही किया जाता है ।

वृद्धिवाधिका वटी का सेवन करने से थायराइड, हर्निया तथा हाइड्रोसील जैसी बीमारियों में बहुत अच्छा फायदा देखने को मिलता है । यह औषधि अनावश्यक रूप से बने हुए ऊतकों को नष्ट करती है, इसीलिए इस औषधि को गुल्म (ट्यूमर) को नष्ट करने के लिए प्रयोग कराया जाता है ।

जिन लोगों के अंडकोष में पानी भर गया हो या किसी अन्य कारण से अंडकोष फूल कर मोटे मोटे हो गए हो, उन्हें वृद्धिवाधिका वटी का सेवन कराया जाता है । कदंब या अरंड के पत्ते पर घी लगाकर तथा उन्हें सेक कर अंडकोष पर लपेटा जाता है जिससे लाभ बहुत अधिक होता है ।

वृद्धिवाधिका वटी के घटक द्रव्य Vridhivadhika Vati ke ghatak dravy

  • शुद्ध पारद १ भाग
  • शुद्ध गंधक 1 भाग
  • लौह भस्म 1 भाग
  • ताम्र भस्म 1 भाग
  • कांस्य भस्म 1 भाग
  • वंग भस्म 1 भाग
  • शुद्धा हरताल 1 भाग
  • शुद्धा तूतीया १ भाग
  • शंख भस्म 1 भाग
  • कौड़ी कपारिका भस्म 1 भाग
  • सोंठ 1 भाग
  • काली मिर्च 1 भाग
  • पिप्पली १ भाग
  • हरिताकी 1 भाग
  • विभूति 1 भाग
  • अमलकी 1 भाग
  • चाव्य १ भाग
  • विदंग १ भाग
  • विधारा मूल 1 भाग
  • कचूर 1 भाग
  • पिप्पला मूल 1 भाग लहसुन 1 भाग
  • हापुशा 1 भाग
  • वचन १ भाग
  • इलाची का बेज 1 भाग
  • देवदारो १ भाग
  • काल नमक 1 भाग
  • विद नमक 1 भाग
  • समुंद्र लवन 1 भाग
  • सांभर लवण 1 भाग

वृद्धिवाधिका वटी के चिकित्सकीय उपयोग Vridhivadhika Vati ke upyog in hindi

वृद्धिवाधिका वटी निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

  1. अंडकोष में वायु, रक्त या पानी का बढ़ना
  2. आंत वृद्धि (हर्निया)
  3. गुल्म (ट्यूमर)
  4. थायराइड
  5. हाथीपांव (फाइलेरिया)

वृद्धिवाधिका वटी के फायदे Vridhivadhika Vati ke fayde in hindi

  • यह औषधि शरीर में बनने वाली अनावश्यक कोशिकाओं एवं उतको को नष्ट करती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से अंडकोष में पानी भरना, रक्त भरना या वायु भरना जैसी समस्याएं दूर होती है ।
  • यह गुल्म अर्थात ट्यूमर को नष्ट करती है ।
  • यह हाथीपांव अर्थात फाइलेरिया में लाभदायक होती है ।
  • यह बड़ी आंतों की वृद्धि अर्थात हर्निया में अच्छा फायदा पहुंचाती है ।
  • इसका सेवन करने से थायराइड की बीमारी में लाभ होता है ।
  • यह औषधि पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।
  • इस औषधि में खनिज लवण मौजूद होते हैं इसलिए इसका सेवन करने से शरीर में मिनरल्स की कमी दूर होती है ।
  • यह औषधि वात एवं कफ को नियंत्रित करती है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

वृद्धिवाधिका वटी को एक रत्ती से लेकर 3 रत्ती तक दिन में दो बार सुबह एवं शाम को भोजन करने के पश्चात ले सकते हैं । एक रत्ती 125 मिलीग्राम के बराबर होती है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

  1. वृद्धिवाधिका वटी तासीर में गर्म होती है, इसलिए इस औषधि को गर्भवती महिलाओं के द्वारा नहीं लेना चाहिए ।
  2. किसी भी प्रकार के ब्लीडिंग डिसऑर्डर्स (अनियंत्रित खून का स्राव) की समस्या में इस औषधि को नहीं लेना चाहिए ।
  3. इस औषधि में धातु एवं खनिज लवण मौजूद होते हैं, इसलिए इसे अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए ।
  4. इसको चिकित्सक की देखरेख में एक निश्चित समय के लिए ही सेवन करना चाहिए ।
  5. यह औषधि पित्त वर्धक होती है, इसलिए जिन लोगों को पित्त की समस्या हो उन्हें इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  6. इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए ।
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