बिल्वादि गुलिका या गुटिका के फायदे नुक्सान और दुष्प्रभाव Vilwadi Bilwadi Gulika Uses Benefits & Side Effects in Hindi

By | October 7, 2020

बिल्वादि गुलिका या गुटिका क्या है?

बिल्वादि गुलिका एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे विल्वादि अगद, विल्वादि वटी, बिल्वादि गुटिका जैसे नामों से भी जाना जाता है । यह औषधि मुख्य रूप से सांप काटने, बिच्छू के डंक, मकड़ी के काटने, चूहे के काटने, आंख के रोगों, हैजा एवं बुखार के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

इसका प्रयोग मनुष्य के शरीर में किसी भी प्रकार से पहुंचने वाले जहर को दूर करने के लिए किया जाता है । यह दवा रक्त में मौजूद विषाक्त प्रभाव को दूर कर देती हैं ।

बिल्वादि गुलिका या गुटिका के घटक द्रव्य

बिल्वादि गुलिका में निम्नलिखित घटक द्रव्यों है:

बिल्व (भारतीय बेल) Aegle Marmelos एक भाग
तुलसी पत्ती Ocimum Sanctum एक भाग
करंज फल – Pongamia Pinnata एक भाग
तगर – Valeriana Wallichii एक भाग
देवदारु – Cedrus Deodara एक भाग
हरीतकी या हरड़  – Terminalia Chebula एक भाग
बिभीतकी (बहेड़ा) – Terminalia Bellirica एक भाग
अमला (Amla – India Gooseberry) – Phyllanthus Emblica एक भाग
सोंठ (Ginger Rhizome) – Zingiber Officinale एक भाग
काली मिर्च (Black Pepper) – Piper Nigrum एक भाग
पिप्पली (Long Pepper) – Piper Longum एक भाग
हल्दी (Turmeric) – Curcuma Longa एक भाग
दारुहल्दी – Berberis Aristata एक भाग
बस्थामुत्र आवश्यकतानुसार
संदर्भ: अष्टांग हृदय, उत्तर स्थान, अध्याय 36, सर्प विष प्रतिषेध अध्याय, छंद: 84 – 85

बिल्वादि गुलिका या गुटिका निर्माण विधि

बिल्वादि वटिका को बनाना ज्यादा कठिन नहीं है । यदि आपको आयुर्वेद का थोड़ा बहुत ज्ञान है तो आप इस औषधि को घर पर ही बना सकते हैं । इस ओषधि को बनाने की विधि इस प्रकार हैं ।

  • सबसे पहले ऊपर दी गई सभी जड़ी बूटियों को अच्छी तरह साफ कर ले एवं सुखा लें ।
  • सभी जड़ी बूटियों का अलग-अलग चूर्ण बना लें तथा कपड़े से छान के रख ले ।
  • इसके पश्चात ऊपर दी गई तालिका में वजन के अनुसार सभी जड़ी बूटियों के चूर्ण को लेकर उन्हें मिश्रित कर लें ।
  • इसके बाद इस मिश्रण को पत्थर की खरल में डालकर बस्थामुत्र के साथ 2 से 3 घंटे तक अच्छी तरह खरल करें तथा 500 मिलीग्राम की गोली बनाकर सुरक्षित रख लें ।
  • इन गोलियों को सुखा कर किसी पात्र को सुरक्षित रख लें ।

बिल्वादि गुलिका या गुटिका के औषधीय गुण

विल्वादि गुलिका में निम्नलिखित औषधीय गुण होते हैं।

  1. विषनाशक
  2. विषमारक
  3. सर्प विष नाशक
  4. दाहप्रशम
  5. आमपाचक
  6. हैजा नाशक
  7. ज्वरनाशक
  8. पाचन उत्तेजक
  9. कब्जहर

बिल्वादि गुलिका या गुटिका के आयुर्वेदिक गुणधर्म

यह ओषधि वातदोष एवं कफदोष में सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।

बिल्वादि गुलिका या गुटिका के चिकिसीय संकेत

विल्वादि गुलिका निम्नलिखित स्वास्थ्य की स्थितियों में लाभदायक है।

  1. सर्प दंश
  2. बिच्छू का डंक
  3. मकड़ी के काटने पर
  4. कृंतक (rodent) के काटने पर
  5. आंत्रशोथ
  6. हैजा
  7. अपच
  8. ज्वर

बिल्वादि गुलिका या गुटिका के फायदे

जैसा कि हमने आपको बताया कि यह औषधि मुख्य रूप से विषैले जीव जंतुओं के काटने से शरीर में मौजूद विषाक्तता को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है । इस ओषधि को निम्न परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है ।

सांप के काटने पर

यदि सांप काट ले ओर रोगी के शरीर में धीरे-धीरे शरीर जहर जा रहा हो तो इस स्थिति में दो गोली बिल्वादि वटीका (1000 मिलीग्राम) को पीसकर शहद में मिलाकर प्रत्येक 15 मिनट के बाद रोगी को देते रहें ।

यदि रोगी की स्थिति गंभीर हो तो प्रत्येक 15 मिनट के बाद रोगी को सेवन कराए । यदि रोगी थोड़ा सामान्य स्थिति में आ जाए प्रत्येक 30 मिनट के बाद इस नुस्खे को रोगी को सेवन कराते रहें । यह प्रयोग तब तक करते रहे जब तक रोगी के शरीर में से जहर के लक्षण समाप्त ना हो जाए तथा रोगी सामान्य ना हो जाए ।

बिच्छू या अन्य विषैले जीव जंतु के काटने पर

जिस प्रकार सांप के काटने पर इस औषधि का प्रयोग किया जाता है बिल्कुल उसी प्रकार बिच्छू यह किसी अन्य जीव जंतु के काटने पर इस विधि का प्रयोग कराया जाता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

विल्वादि गुलिका की सामान्य खुराक इस प्रकार है:

बच्चे 250 से 500 मिली ग्राम या 1/2 से 1 गोली
वयस्क 1000 मिली ग्राम या 2 गोलियां

विल्वादि गुलिका कैसे लें

खुराक (मुझे कितनी बार लेना चाहिए?) लागू नहीं है; विषाक्तता के मामले में, रोगी के स्थिर हो जाने तक या गंभीर लक्षणों से राहत मिलने तक खुराक को लगातार दोहराया जा सकता है। अन्य मामलों में, खुराक दिन में 2 से 3 बार हो सकती है।
सही समय (मुझे कब लेना चाहिए?) विषाक्तता के मामले में जब भी आवश्यकता हो; अन्यथा, भोजन के बाद।
सह-औषध – अनुपान (किस के साथ लें?) शहद, गर्म पानी

दुष्प्रभाव एवं सावधानियां

पित्त प्रधान प्रकृति के रोगियों को इस औषधि का सेवन कराने से उनके शरीर में पित्तदोष और अधिक बढ़ सकता है जिससे निम्न दुष्परिणाम प्रकट हो सकते हैं ।

  • छाती में जलन
  • हाइपर एसिडिटी
  • पेट में जलन इत्यादि

यदि उपरोक्त समस्या प्रकट हो ऐसी स्थिति में इस औषधि के साथ प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी या मुक्ताशुक्ति पिष्टी का प्रयोग किया जा सकता है ।

गर्भावस्था एवं स्तनपान

गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए बिलवादी गुटिका का सेवन करना सुरक्षित नहीं होता है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं ।

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