विडंगारिष्ट के फायदे और नुक्सान Vidangarishta ke fayde or nuksaan

By | May 22, 2020

विडंगारिष्ट क्या है? Vidangarishta kya hai?

विडंगारिष्ट एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पेट के कीड़ों एवं बड़ी आंत के कीड़ों को नष्ट करने के लिए कृमि नाशक के रूप में प्रयोग की जाती है । इसके अलावा यह औषधि पैरों एवं जांघों के दर्द, गुल्म, प्रमेह रोग, गंडमाला एवं भगंदर में भी प्रभावशाली होती है ।

यह औषधि पूर्णता प्राकृतिक एवं सुरक्षित औषधि है तथा सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । जैसा कि इस औषधि के नाम से ही पता चलता है कि इस औषधि का प्रमुख घटक द्रव्य विडंग होता है ।

विडंग एक कृमि नाशक जड़ी बूटी है जो पेट एवं आंतों कीड़ों को नष्ट करने के लिए कृमि नाशक के रूप में प्रयोग की जाती है । यह जड़ी बूटी फीता कृमि, ईकोलाई एवं अन्य कर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है । विडंग में फैटी एसिड्स, अल्कलॉइड के अलावा कुछ तेल, टैनिन एवं रेजिन मौजूद होते है ।

कृमि नाशक के अलावा विडंग बुखार को उतारने एवं त्वचा रोगों को दूर करने में भी प्रयोग की जाती है । कुछ वैद्य विडंग का काढ़ा बनाकर अपने मरीजों को सेवन कराते हैं ।

विडंगारिष्ट के घटक द्रव्य

  • विडंग (Fr.) 240 g
  • पिप्पली मूल (Rt.) 240 g
  • रसना (Rt./Lf.) 240 g
  • कुटज छाल (St. Bk.) 240 g
  • कुटुज फल (Sd.) 240 g
  • पाठा (Rt.) 240 g
  • एलावालुका (St. Bk.) 240 g
  • आमला (P.) 240 g
  • काढ़ा बनाने के लिए पानी 98.304 लीटर reduced to 12.288 लीटर
  • शहद 14.400 kg
  • धातकी (Fl.) 960 g
  • त्वाक (St. Bk.) 96 g
  • छोटी इलाइची (Sd.) 96 g
  • तेजपत्ता (Lf.) 96 g
  • प्रियांगु (Fl.) 48 g
  • कचनार (St. Bk.) 48 g
  • लोध्र (St. Bk.) 48 g
  • सोंठ (Rz.) 384 g
  • मरिचा /काली मिर्च (Fr.) 384 g
  • पिप्पली (Fr.) 384 g

Lf. =Leaf; P. =Pericarp; Rt. =Root; Fr. =Fruit; Rz. =Rhizome; Sd.= Seeds; St. =Stem; St. Bk.= Stem Bark; Fl. Bd. =Flower Bud.

विडंगारिष्ट के फायदे

  • यह औषधि पेट के कीड़ों एवं आंतों के कीड़ों को नष्ट करती है ।
  • यह बहुत ही अच्छी कृमि नाशक है ।
  • यह पाचन तंत्र की समस्या को दूर करती है एवं भूख बढ़ाती है ।
  • यह औषधि गंडमाला में लाभदायक है ।
  • यह बवासीर एवं भगंदर में भी फायदा करती है ।
  • पेशाब का बार बार आना या रुक रुक कर आना जैसी समस्या में यह लाभकारी है ।
  • यह औषधि उरुस्तंभ अर्थात पैरों एवं जांघों में दर्द एवं जकड़न में लाभकारी है ।
  • पेट में कीड़े हो जाने से पेट में दर्द रहना, पेशाब में दर्द होना, शरीर में कमजोरी आ जाना, मुंह से लार बहना, हमेशा थकावट बनी रहना, खून की कमजोरी होना एवं सोते समय दांत किटकिटाना जैसी समस्याएं हो जाती हैं ।अतः इस औषधि का सेवन करने से यह सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
  • यह गुल्म अर्थात पेट दर्द के लिए बहुत ही अच्छी औषधि है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 5 से 10 मिलीलीटर
वयस्क 12 से 24 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

सामान्यतः इस दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन हम आपको यही सलाह देंगे की आप इस दवा को अपने डॉक्टर की सलाह से ही लें । गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यह दवा अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए ।

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