त्रिवंग भस्म के फायदे और नुक्सान Trivang Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 30, 2020

त्रिवंग भस्म क्या है? Trivang Bhasma kya hai?

त्रिवंग भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जो 3 धातुओं सीसा,  टिन एवं जिंक से बनाई जाती है । तीन धातु से मिलकर बनी होने के कारण ही इस औषधि को त्रिवंग भस्म कहा जाता है । यह औषधि डायबिटीज, प्रमेह, मूत्र संस्थान के रोगों, स्वपनदोष, गर्भाशय की कमजोरी, शारीरिक कमजोरी एवं अन्य कई रोगों में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

इस औषधि का सेवन करने से शरीर में आवश्यक खनिज लवण एवं पोषक तत्वों की कमी दूर होती है । इस औषधि का सेवन बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है । यह औषधि जीवनी शक्ति बढ़ाती है एवं एक टॉनिक के रूप में कार्य करती है ।

इन सभी रोगों के अलावा त्रिवंग भस्म नपुंसकता, महिलाओं के लिकोरिया एवं बार-बार होने वाले गर्भपात में बहुत ही अच्छा फायदा पहुंचाती है । यह गर्भाशय को इतना बल प्रदान करती है कि महिला गर्भधारण करने योग्य हो जाती है । यह प्रजनन तंत्र एवं मूत्र संस्थान को बल प्रदान करती है । इस दवा में एंटीसेप्टिक गुण भी मौजूद होते हैं जिस कारण यह जख्म को जल्दी ठीक करने में भी प्रयोग की जाती है ।

त्रिवंग भस्म के घटक द्रव्य Trivang Bhasma ke ghatak dravy

  • वंग (टिन) भस्म
  • नाग (सीसा) भस्म
  • यशद (जस्ता) भस्म

त्रिवंग भस्म के चिकित्सीय गुण

त्रिवंग भस्म को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

  • नपुंसकता
  • स्वपनदोष
  • वीर्य का पतलापन
  • बार-बार होने वाला गर्भपात
  • प्रदर रोग
  • अविकसित स्तन
  • पेशाब में शर्करा जाना (डायबिटीज)
  • मूत्र संक्रमण एवं लगातार पेशाब आना

त्रिवंग भस्म के फायदे Trivang Bhasma ke fayde

  • त्रिवंग भस्म महिलाओं एवं पुरुषों दोनों के लिए ही एक शक्तिवर्धक टॉनिक के रूप में कार्य करती है ।
  • यह औषधि महिलाओं के गर्भाशय से संबंधित रोगों जैसे गर्भाशय की कमजोरी, बार-बार गर्भ का गिर जाना, बांझपन आदि रोगों में फायदा करती है ।
  • वहीं दूसरी ओर पुरुषों के रोगों जैसे नपुंसकता, स्वपनदोष, वीर्य का बहुत ज्यादा पतला होना आदि समस्याओं में भी फायदा पहुंचाती है ।
  • यह औषधि मधुमेह के रोगियों को सेवन कराने से अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी पावर) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है एवं व्यक्ति का शरीर संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए सक्षम हो जाता है ।
  • यह हड्डियों एवं मांसपेशियों को मजबूत करती है ।
  • यह मधुमेह के साथ-साथ 20 प्रकार के प्रमेह रोगों को दूर करती है एवं उनसे पैदा होने वाली समस्याओं को दूर करती है ।
  • यह पुरुषों में शुक्राणुओं एवं महिलाओं में अंडाणु से जुड़े हुए रोगों को दूर करती है ।

रोग एवं अनुपान

त्रिवंग भस्म अलग-अलग रोगों में अलग-अलग औषधियों के साथ प्रयोग करने पर ही सही लाभ पहुंचाती है । हमने आपकी सुविधा के लिए नीचे एक टेबल दी है, जिसमें हमने आपको बताया है कि यह औषधि किन किन औषधियों के साथ सेवन करने से किन किन रोगों में फायदा पहुंचाती है ।

प्रमेह में त्रिवंग भस्म को शिलाजीत और शहद में लें
नपुंसकता में त्रिवंग भस्म को मक्खन / मलाई के साथ लें
शीघ्र पतन में त्रिवंग भस्म को प्रवाल पिष्टी, शहद और आंवले के रस के साथ लें
गर्भाशय की कमजोरी और गर्भस्राव में त्रिवंग भस्म को मुक्तापिष्टी, च्यवनप्राश और गाय के दूध के साथ लें
डिंबक्षरण में त्रिवंग भस्म को फल घृत (हर्बल घी) के साथ लें
खांसी, कफ, दमा आदि में त्रिवंग भस्म को अरुसा रस के साथ लें
स्वप्नदोष के लिए त्रिवंग भस्म को आंवले के मुरब्बे और इसबगोल की भूसी के साथ लें

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions

त्रिवंग भस्म का प्रयोग चिकित्सक की देख रेख में ही करें।

त्रिवंग भस्म की सामान्य खुराक निम्नानुसार है।
बच्चे निर्दिष्ट नहीं है
वयस्क 65 से 250 मिलीग्राम *
गर्भस्थ संस्तुत नहीं (नॉट रेकमेंडेड)
स्तनपान कराने वाली संस्तुत नहीं (नॉट रेकमेंडेड)
अधिकतम संभव खुराक 500 मिलीग्राम प्रति दिन (विभाजित खुराकों में)
* दिन में दो बार शहद, आंवला मुरब्बा, गाय के दूध या गाय के घी के साथ
औषधि कब खाएं: भोजन के बाद

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

  • त्रिवंग भस्म को किसी योग्य एवं अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही सेवन करना चाहिए ।
  • इस औषधि को अपनी मर्जी से सेवन करने पर गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं ।
  • इस औषधि को कभी भी 6 से 8 सप्ताह से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • ज्यादा लंबे समय तक इस औषधि का सेवन करने से रक्त में विषैले पदार्थ (टॉक्सिंस) की अधिकता हो सकती है जिससे आपको अन्य परेशानियां हो सकती हैं ।
  • गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली महिलाओं एवं बच्चों को इस औषधि का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए ।
  • इस औषधि का सेवन केवल वयस्क महिलाओं एवं पुरुषों को ही कराना चाहिए ।
  • इस औषधि को ठंडी एवं सुखी जगह पर रखें एवं बच्चों की पहुंच से दूर रखें ।

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