त्रिफला चूर्ण के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Triphala Churna ke fayde or nuksaan

By | June 3, 2020

त्रिफला चूर्ण क्या है? Triphala Churna kya hai?

आयुर्वेद ने मनुष्य को सैकड़ों हजारों जड़ी बूटियां एवं औषधियां प्रदान की हैं जो मनुष्य जाति के लिए किसी वरदान से कम नहीं है । आज के इस आधुनिक समय में लोग एलोपैथी एवं होम्योपैथी चिकित्सा की ओर भाग रहे हैं जबकि हमारे आयुर्वेद में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां और औषधियां विद्यमान हैं जो हमें निरोगी रखने और हमारा कायाकल्प करने की सामर्थ्य रखती हैं ।

इन्हीं औषधियों में एक औषधि है जिसका नाम है त्रिफला । जी हां दोस्तों आज हम त्रिफला की बात करेंगे । त्रिफला मात्र एक औषधि नहीं है बल्कि यह एक रसायन है जो हमारे शरीर के रोगों को दूर करता है एवं जीवनी शक्ति को बढ़ाकर हमें स्वस्थ रखने में हमारी मदद करता है ।

त्रिफला चूर्ण इन हिंदी Triphala Churna in hindi

सबसे पहले हम जानते हैं कि वास्तव में त्रिफला चूर्ण किसे कहते हैं तथा यह कैसे बनता है । यदि हम त्रिफला शब्द की बात करें तो यह शब्द 2 शब्दों त्री एवं फला से मिलकर बना होता है । त्रि का अर्थ होता है तीन तथा फला का अर्थ होता फल ।

इस प्रकार त्रिफला का अर्थ हुआ एक ऐसा मिश्रण जो 3 फलों से मिलकर बना होता है । यह तीन फल होते हैं हरड, बहेड़ा एवं आमला । आइए सबसे पहले हम इन तीनों फलों के बारे में बात करते हैं ।

हरड़ (हरीतकी) harad (haritaki) in hindi

हरड़ जिसे संस्कृत में हरितकी की भी कहा जाता है, यह साबुत हल्दी के आकार की गांठों के जैसा काले रंग का होता है । यह पक कर पीले रंग का हो जाता है । हरड़ में निम्नलिखित औषधीय गुण पाए जाते हैं ।

  • हरड़ पाचन तंत्र से संबंधित रोगों के लिए लाभदायक होता है ।
  • यह नेत्र रोगों एवं आंखों की सूजन को दूर करने में लाभदायक होता है ।
  • यह दांतों के रोगों, पायरिया एवं मसूढ़ों से बहने वाले खून को कम करने में फायदेमंद होता है ।
  • इसमें दर्द निवारक गुण मौजूद होते हैं ।
  • यह घावों को भरने की क्षमता रखता है ।
  • इसका सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है एवं भूख लगती है ।
  • यह यकृत अर्थात लीवर को बल प्रदान करता है ।

बहेड़ा (विभितकी) Baheda (Vibhitaki) in hindi

बहेड़ा जिसे विभितकी भी कहा जाता है, त्रिफला का दूसरा प्रमुख घटक द्रव्य है । बहेड़ा में निम्नलिखित औषधीय गुण मौजूद होते हैं ।

  • बहेड़ा दर्द निवारक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
  • यह दस्त एवं डायरिया में अच्छा फायदा करता है ।
  • इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जिससे यह संक्रामक रोगों को दूर करने की योग्यता रखता है ।
  • यह बालों के रोगों को दूर करता है ।
  • यह बुखार को कम करता है एवं जख्म को सही करने में मदद करता है ।
  • इसका सेवन करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति अर्थात इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है ।

आमला (आमलकी) Amla (Amalki) in hindi

आमला जिसे संस्कृत में आमलकी भी कहा जाता है त्रिफला का तीसरा प्रमुख घटक द्रव्य है । आंवले का नाम अपने सुना ही होगा । आंवले को लोग अचार एवं मुरब्बे के रूप में प्रयोग करते हैं । बाजार में आपको आंवले से बनी हुई आयुर्वेदिक औषधि आमलकी रसायन भी मिल जाएगी, जो अनेक रोगों में फायदा करती है ।

आंवले में विटामिन सी एवं एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है । यह त्वचा एवं नेत्र रोगों के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता है । यह पाचन शक्ति को बढ़ाकर भूख बढ़ाता है। आंवले में निम्नलिखित आयुर्वेदिक गुण मौजूद होते हैं ।

  • विटामिन सी युक्त होने के कारण यह रोग प्रतिरोधक शक्ति (immunity power) बढ़ाने में मदद करता है ।
  • यह खून की कमी (एनीमिया) में लाभदायक होता है ।
  • इसमें शरीर को डिटॉक्सिफाई करने की योग्यता होती है ।
  • इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह शरीर का को ठंडा रखने में मदद करता है ।
  • यह यकृत एवं फेफड़ों के लिए एक टॉनिक की तरह कार्य करता है ।

तो इस प्रकार आपने देखा कि त्रिफला के तीनों ही घटको हरड़, बहेड़ा एवं आंवले में कितने ज्यादा औषधीय गुण मौजूद होते हैं । अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की त्रिफला में कितने औषधीय गुण मौजूद हो सकते हैं । आइए अब हम त्रिफला के फायदे के बारे में बात करते हैं ।

त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि Triphala Churna kaise banaye

चूर्ण को बनाना बहुत ही आसान है तथा आप इसे घर पर ही बना सकते हैं । इसके लिए आप हरड, बहेड़ा एवं आमला, इन तीनों को 1:2:3 में ले लीजिए । अर्थात 100 ग्राम हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा एवं 300 ग्राम आमला ले लीजिए ।

इसके पश्चात इन तीनों को अच्छी तरह साफ करके एवं सुखाकर कूट पीसकर छानकर किसी प्लास्टिक या कांच के जार में भरकर रख लीजिए । इसे त्रिफला चूर्ण कहते हैं ।

कुछ विद्वान हरड़ बहेड़ा एवं आमला का अनुपात 1:2:4 बताते हैं । जिससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता है।। आप दोनों में से कोई भी अनुपात चुन सकते हैं । 1:2:4 लेने पर आमला की अधिकता हो जाएगी जिससे यह त्रिफला बालों, त्वचा एवं नेत्र रोगों के लिए ज्यादा प्रभावी हो जाता है ।

त्रिफला चूर्ण के फायदे Triphala Churna ke fayde

त्रिफला चूर्ण को हम कल्प या रसायन कह सकते हैं क्योंकि यह जहां एक और हमें विभिन्न रोगों से बचाता है वही हमारी इम्यूनिटी पावर को भी बहुत अधिक बढ़ा देता है । National centre for biotechnology information के अनुसार त्रिफला में वजन को घटाने एवं डायबिटीज जैसी बीमारी को दूर करने की योग्यता होती है ।

पाचन तंत्र के लिए लाभदायक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde pachan tantra ke liye

आज के समय में गलत खानपान एवं आहार-विहार के कारण लोगों का पाचन तंत्र बहुत ज्यादा खराब हो गया है । जो लोग बहुत ज्यादा तली भुनी चीजें या बाजार की चीजें जैसे चाऊमीन, टिक्की, बर्गर, सैंडविच, छोले भटूरे इत्यादि का अत्यधिक सेवन करते हैं उनका पाचन तंत्र बहुत ज्यादा खराब हो जाता है तथा उन्हें अपच, पेट गैस, कब्ज, एसिडिटी एवं बवासीर जैसी समस्याएं हो जाती हैं, क्योंकि यह सभी समस्याएं पाचन तंत्र की खराबी के कारण होती हैं ।

त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से यकृत को बल मिलता है जिससे यकृत पाचक रसों का सही मात्रा में स्राव करता है जिससे भोजन सही तरीके से हजम होता है एवं कब्ज तथा पेट गैस जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है । यदि आप अपना आहार विहार एवं दिनचर्या सही रखेंगे तो आपको बिना त्रिफला चूर्ण के ही पेट की समस्याओं से निजात मिल जाएगी ।

नेत्र रोगों में फायदेमंद त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde netra rog ke liye

त्रिफला चूर्ण नेत्र रोगों के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है । वैज्ञानिक अनुसंधान में यह बात स्पष्ट हुई है कि त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से आंखों के लेंस में ग्लूटाथिओन नामक रसायन का स्तर बढ़ता है ।

यह रसायन एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट होता है जो नेत्र ज्योति बढ़ाने एवं नेत्र रोगों को दूर करने के लिए आवश्यक होता है । इतना ही नहीं त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से मोतियाबिंद जैसी भयानक समस्या में भी काफी हद तक आराम मिलता है । त्रिफला चूर्ण को ग्लूकोमा एवं मोतियाबिंद के शुरुआती चरण में प्रयोग करने से काफी लाभ मिल सकता है

यदि किसी व्यक्ति की आंखों में जलन हो, आंखें लाल हो या आंखों से चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता हो तो त्रिफला चूर्ण से आंखों को धोकर साफ भी किया जा सकता है । इसके लिए त्रिफला चूर्ण को रात भर पानी में भिगोकर रख दें । एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को आधा गिलास पानी में भिगोकर रखा जा सकता है । सुबह इस पानी को अच्छी तरह छान लें तथा इसी पानी से रुई का फॉर्म लेकर आंखों को अच्छी तरह साफ करें या आंखों में इस पानी के छपके भी मारे जा सकते हैं ।

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वजन घटाने में लाभदायक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde motapa door karne ke liye

गलत आहार-विहार एवं दिनचर्या के कारण कुछ लोगों का वजन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है । जो लोग जरूरत से ज्यादा मात्रा में कैलोरी लेते हैं लेकिन योगा, प्राणायाम या व्यायाम के द्वारा इस एक्स्ट्रा कैलोरी को बर्न नहीं करते हैं, धीरे धीरे उनका शरीर स्थूल हो जाता है एवं उनका वजन बढ़ जाता है ।

ऐसे लोग अपना वजन घटाने के लिए विभिन्न औषधियों का सेवन करते हैं । उन्हीं औषधियों में एक औषधि है त्रिफला चूर्ण । त्रिफला चूर्ण वजन को घटाने एवं फैट बर्न करने के लिए बहुत अच्छा कार्य करती है ।

वजन को घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण को एक एक चम्मच दिन में दो से तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है । लेकिन आप एक बात का विशेष ध्यान रखें कि आप वजन घटाने के लिए केवल त्रिफला या किसी अन्य औषधि पर ही निर्भर ना रहें । अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें एवं प्रतिदिन नियमित रूप से योगा एवं व्यायाम भी करें ।

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कब्ज नाशक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna kabj nashak

यदि हम त्रिफला चूर्ण के फायदे के बारे में बात करें एवं कब्ज की बात ना करें तो त्रिफला के फायदे अधूरे ही रह जाएंगे । क्योंकि त्रिफला कब्ज निवारण के लिए मुख्य औषधियों के रूप में प्रयोग किया जाता है । त्रिफला में हरड़ बहेड़ा एवं आमला तीनों ही औषधियों में विरेचक गुण पाए जाते हैं जो कब्ज को तो दूर करते ही हैं साथ ही पाचन तंत्र की अन्य समस्याओं को भी दूर करते हैं ।

त्रिफला में पैनिक तथा गैलिक एसिड मौजूद होता है जो कब्ज को दूर कर पेट को निरोगी रखने में मददगार होता है । कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए त्रिफला चूर्ण को प्रतिदिन रात्रि में खाना खाने के पश्चात सोने से पहले एक से दो चम्मच गर्म पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है ।

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रक्तचाप कोलेस्ट्रोल एव ह्रदय रोगों में लाभदायक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna for cholesterol and heart problems in hindi

त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से रक्त चाप नियंत्रित रहता है । इस चूर्ण का नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर सामान्य बना रहता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है ।

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वायरल एवं बैक्टीरियल संक्रमण दूर करने में लाभकारी त्रिफला चूर्ण Triphala Churna sankraman me faydemand

त्रिफला चूर्ण में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल एवं एंटीपायरेटिक गुण मौजूद होते हैं । एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण यह हमारे शरीर को जीवाणुओं के संक्रमण से दूर रखता है । एंटीवायरल गुण युक्त होने के कारण यह हमारे शरीर को विषाणु अर्थात वायरल इनफेक्शन से बचाता है, वहीं दूसरी ओर एंटीपायरेटिक गुणों से युक्त होने के कारण यह हमें बुखार होने से बचाता है । साथ ही यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को भी बढ़ा देता है जिससे हमें बैक्टीरियल या वायरल इनफेक्शन नहीं होता है ।

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रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में लाभकारी त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde rog pratirodhak shakti badhane ke liye

त्रिफला चूर्ण हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने की योग्यता रखता है । इस दवा में विभिन्न तत्व मौजूद होते हैं जैसे कि गैलिक एसिड, एलेजिक एसिड इत्यादि । यह सभी तत्व हमारे शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं, जिससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यूनिटी पावर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है एवं हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिल जाती है ।

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शुगर अर्थात डायबिटीज में लाभकारी त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde diabetes bhagane ke liye

त्रिफला चूर्ण में टाइप टू डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए पोषक तत्व मौजूद होते हैं । इस औषधि में एंटी डायबिटिक एवं हाइपोग्लाइसेमिक गुण मौजूद होते हैं, जिससे त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य रहता है ।

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त्वचा रोगों में लाभदायक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde tvcha rogon me

त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से विभिन्न त्वचा रोगों में लाभ मिलता है । त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से त्वचा में चमक आती है तथा यह डेड सेल्स अर्थात मृत कोशिकाओं को नष्ट करता है एवं नई कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में मदद करता है ।

यह चूर्ण त्वचा के छिद्रों की सफाई करता है एवं त्वचा की कोशिकाओं में रक्त के संचरण को नियमित करता है जिससे आपकी त्वचा में एक अलग ही निखार एवं रंगत आ जाती है । यह त्वचा पर दाग, धब्बों, चक्ततों, कील मुहांसों एवं सनबर्न जैसी छोटी-बड़ी समस्याओं को भी दूर करता है ।

त्रिफला चूर्ण रक्त में से विषैले पदार्थों टॉक्सिंस को दूर करता है, जिसका सीधा प्रभाव आपकी त्वचा पर पड़ता है एवं आपकी त्वचा साफ-सुथरी और चमकदार हो जाती है । त्रिफला में आमला मौजूद होता है जो आपके शरीर में कॉलेजन के निर्माण में सहायक होता है, जबकि बहेड़ा स्किन से पिगमेंटेशन (दाग धब्बों) को दूर करने में मदद करता है ।

यदि त्रिफला चूर्ण को शहद के साथ इस्तेमाल किया जाए तो यह त्वचा रोगों में कमाल का फायदा करता है । त्रिफला चूर्ण में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है और आप जानते होंगे कि विटामिन सी हमारी त्वचा के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है ।

विटामिन सी होने के कारण इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण आ जाते हैं जो त्वचा के रूखे पन और सूखेपन को दूर करने में मददगार होते हैं ।

दांतों के रोगों में लाभकारी त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde daant dard me

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया त्रिफला चूर्ण में एंटी इन्फ्लेमेटरी एवं एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं जिस कारण यह दांतों के रोगों में भी बहुत अच्छा फायदा हो जाता है । यदि किसी व्यक्ति के दांतों में कीड़े लग गए हो, मसूड़ों से खून आता हो या मसूड़े सूज गए हो, जाड़ में दर्द रहता हो, दांतों पर बहुत ज्यादा मैल जम गई हो तो इन सभी रोगों में त्रिफला चूर्ण को सेवन किया जा सकता है ।

इन रोगों में त्रिफला चूर्ण को सेवन करने की विधि इस प्रकार है । सबसे पहले आप एक गिलास पानी ले तथा उसमें एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को भिगोकर रख दें । सुबह उठकर इस पानी को छान लें तथा इस पानी को मुंह में भर कर कुछ देर तक रखें और उसके पश्चात कुल्ला कर दें ।

इसी प्रकार बाकी पानी के साथ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं । इस प्रक्रिया को आप तब तक करें जब तक आप को पूरा लाभ ना हो जाए । यह इतना अच्छा प्रयोग है कि इस प्रयोग को करने से आपके दांत और मसूड़े बहुत ज्यादा मजबूत हो जाएंगे तथा बुढ़ापे तक भी खराब नहीं होंगे । इस प्रयोग से मुंह के छाले एवं मुंह से बदबू आना जैसी समस्या भी दूर हो जाती है।।

यदि आपके मुंह से या दांतों से बहुत ज्यादा बदबू आती हो तो आप सुबह दोपहर शाम भोजन के पश्चात आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण को शहद के साथ चाट लें । इससे आपके मुंह से बदबू का आना काफी हद तक कम हो जाएगा ।

बालों के रोगों में लाभदायक त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde balon ke rogon me

बालों के रोगों का मुख्य कारण शरीर में प्रोटीन, विटामिन सी, आयरन एवं एंटीऑक्सीडेंट की कमी का होना माना जाता है । यदि हम त्रिफला चूर्ण की बात करें तो त्रिफला चूर्ण में विटामिन सी एवं एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं ।

इसलिए बालों के झड़ने, टूटने, दो मुंह वाले होने एवं गंजेपन जैसे रोगों में त्रिफला चूर्ण का सेवन कराने से बहुत अधिक लाभ मिलता है । त्रिफला चूर्ण के अलावा आप अपने भोजन में प्रोटीन युक्त वस्तुओं का अधिक से अधिक सेवन करें जैसे दूध, पनीर, मछली, दालें, सोयाबीन के बीज इत्यादि ।

आयरन की कमी को दूर करने के लिए आप लौह भस्म या आयरन टेबलेट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं । इससे आपके शरीर में बालों से संबंधित सभी पोषक तत्वों की कमी दूर हो जाएगी एवं आपके बाल लंबे घने एवं काले हो जाएंगे ।

त्रिफला में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है, जिस कारण त्रिफला में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं । त्रिफला खून को भी साफ करता है जिसका सीधा प्रभाव आपके बालों पर पड़ता है ।

त्रिफला से आप अपने बाल भी धो सकते हैं । इसके लिए आप त्रिफला का पेस्ट बना लें एवं सिर धोने से आधा या एक घंटा पहले इस पेस्ट को अपने सिर में लगा ले । फिर किसी अच्छे साबुन या शैंपू से बाल धो लें । इससे आपके बाल मजबूत होंगे व बालों का झड़ना कम हो जाएगा । बालों को झड़ने से रोकने के लिए 2 से 3 ग्राम त्रिफला पाउडर को सुबह-शाम पानी के साथ सकते हैं ।

शरीर शोधन में लाभकारी त्रिफला चूर्ण Triphala Churna ke fayde shareer shodhan ke liye

त्रिफला चूर्ण को शरीर का शोधन करने के लिए एक रसायन की तरह प्रयोग किया जा सकता है । इसके लिए आप रात्रि में भोजन के पश्चात एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करें ।

एक तांबे के लोटे में पानी भरकर रख दें, तथा उसमें दो से तीन चम्मच त्रिफला चूर्ण भिगोकर रख दें । सुबह उठे एवं खाली पेट कुल्ला मंजन करने के पश्चात इस पानी को छानकर दो से तीन गिलास जितना भी हो सकें इस पानी को पी जाएं ।

इसके पश्चात आप मॉर्निंग वॉक कर सकते हैं या शौच आदि से निवृत हो सकते हैं । नाश्ते के पश्चात आप आधा चम्मच से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को ताजे पानी के साथ सेवन करें । यह प्रयोग आप कम से कम 4 से 5 महीने तक करें । इस प्रयोग का लाभ इस प्रकार होगा ।

सबसे पहले आपकी बड़ी आत की सफाई होगी । आपकी बड़ी आत में वर्षों से जमा हुआ मल कट कट कर आपके शरीर से बाहर निकल जाएगा, जिससे आपकी बड़ी आत स्वस्थ एवं निरोगी हो जाएगी ।

यकृत को बल मिलेगा एवं यकृत से पाचक रसों का सही मात्रा में स्राव होगा।। जिससे कब्ज, पेट गैस, एसिडिटी, बदहजमी, अफारा एवं बवासीर जैसी समस्याओं में बहुत ज्यादा लाभ मिलेगा । इस प्रयोग से शरीर में जितने भी विषैले पदार्थ हैं वह मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाएंगे ।

आपका रक्त एवं त्वचा साफ-सुथरी एवं निरोगी हो जाएगी । जिसका सीधा प्रभाव आपके दांतों बालों एवं आंखों पर पड़ेगा और आपका आपके पूरे शरीर का कायाकल्प हो जाएगा । यह प्रयोग आप कम से कम 4 महीने तक करें । उसके बाद आप स्वयं महसूस करेंगे कि आपके शरीर में कितना अधिक सकारात्मक परिवर्तन आया है ।

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त्रिफला चूर्ण के अन्य फायदे Triphala Churna ke any fayde

  • त्रिफला में एंटीबैक्टीरियल एवं एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते हैं, जिस कारण त्रिफला चूर्ण घावों को जल्दी भरने में लाभदायक होता है ।
  • त्रिफला चूर्ण के काढ़े से जख्म को धोने से घाव जल्दी भर जाते हैं ।
  • त्रिफला त्रिदोष नाशक होता है । अर्थात इसका सेवन करने से कफ पित्त एवं वायु तीनों दोष संतुलित रहते हैं ।
  • यह हाइपर एसिडिटी, मुंह के छालों एवं अल्सर में बहुत अधिक प्रभावशाली है ।
  • यह बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है एवं शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है, जिससे यह ह्रदय का गुड फ्रेंड कहलाता है ।
  • यह अनियमित रक्तचाप हाई एवं लो दोनों को ही नियमित करता है ।
  • यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है एवं डायबिटीज में लाभ पहुंचाता है ।
  • यह संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया एवं विषम ज्वर में लाभदायक है ।
  • यह डेंगू एवं अन्य वायरल बुखार में लाभदायक होता है ।
  • यह रोग प्रतिरोधक शक्ति अर्थात इम्यूनिटी पावर बढ़ाता है, जिससे सर्दी खांसी जुखाम जैसे संक्रमण नियंत्रित रहते हैं ।
  • वात दोष के कारण सिर दर्द में आधा चम्मच त्रिफला ताजे पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है ।
  • यह मूत्र संक्रमण में लाभकारी है । मूत्र संक्रमण में त्रिफला को शहद के साथ चाटकर ऊपर से गर्म पानी पीना चाहिए ।
  • पीलिया में त्रिफला चूर्ण को गिलोय, नीम की छाल के चूर्ण, वासा, चिरायता एवं कुटकी की बराबर मात्रा के साथ पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पीने से लाभ मिलता है ।

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions in hindi

त्रिफला चूर्ण को दिन में दो बार सुबह एवं शाम को नाश्ते के पश्चात एवं भोजन के पश्चात लिया जाता है । यदि त्रिफला चूर्ण को सुबह नाश्ते के बाद लिए जाए तो यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करता है ।

सुबह के समय त्रिफला चूर्ण सेवन सेवन करने से शरीर में विटामिन, आयरन एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी पूरी होती है तथा सुबह के समय यह पोषक की तरह व्यवहार करता है । सुबह आप इसे नाश्ते के पश्चात शहद के साथ या ताजे पानी के साथ ले सकते हैं ।

रात्रि में त्रिफला चूर्ण को भोजन करने के पश्चात गर्म पानी से लिया जाता है तथा रात्रि में यह रेचक की भांति कार्य करता है अर्थात इसका सेवन करने से पाचन तंत्र के रोगों में खासकर कब्ज, गैस एवं एसिडिटी में लाभ मिलता है । रात्रि में इसे गर्म पानी या गर्म दूध के साथ सेवन किया जाता है ।

नेत्र रोगों एवं सिर दर्द की समस्या में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को आधा गिलास पानी में भिगो दें तथा सुबह इस पानी को छानकर पीने से सिर में दर्द होता है एवं इस पानी से आंखों को धोने से आंखों के रोगों में लाभ मिलता है ।

त्रिफला चूर्ण कितनी मात्रा में लें Triphala Churna kitni matra me len

त्रिफला चूर्ण को सुबह-शाम पांच 5 ग्राम से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए ।

त्रिफला चूर्ण की तासीर Triphala Churna ki tasir

त्रिफला चूर्ण की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस चूर्ण का सेवन नहीं करना चाहिए ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects in hindi

  • त्रिफला चूर्ण शरीर में लीवर से संबंधित कोशिकाओं में पाए जाने वाले एंजाइम साइटोक्रोम P450 को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर की कई गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं ।
  • त्रिफला रक्त में शुगर के स्तर को कम करता है, इसलिए जिन लोगों का शुगर स्तर पहले से ही कम है उन्हें इस औषधि का सेवन ध्यानपूर्वक डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए ।
  • त्रिफला चूर्ण की अधिक मात्रा लेने पर दस्त या डायरिया की शिकायत हो सकती है ।

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