त्रिभुवन कीर्ति रस के गुण उपयोग फायदे घटक एवं प्राइस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde or nuksaan

By | June 15, 2020

त्रिभुवन कीर्ति रस क्या है? Tribhuvan Kirti Ras kya hai?

त्रिभुवन कीर्ति रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से सर्दी, खांसी, जुखाम, इनफ्लुएंजा, नए एवं पुराने बुखार, दमा श्वास, अस्थमा, वात एवं कफ से संबंधित बुखार इत्यादि में प्रयोग की जाती है ।

त्रिभुवन कीर्ति रस आयुर्वेदिक औषधि में वत्सनाभ (बच्छनाग) , त्रिकटु एवं पिपली मूल सहित अन्य कुछ औषधियां मौजूद होती हैं । वत्सनाभ (बच्छनाग) विषेली प्रकृति की जड़ी बूटी है, इसलिए इस औषधि का सेवन केवल किसी अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए । 

त्रिभुवन कीर्ति रस इन हिंदी Tribhuvan Kirti Ras in hindi

बच्छ्नाग में वात एवं कफ नाशक, ज्वरनाशक एवं विष नाशक गुण मौजूद होते हैं,इसलिए त्रिभुवन कीर्ति रस ज्वरनाशक के रूप में प्रमुख औषधियों के रूप में प्रयोग की जाती है ।

त्रिभुवन कीर्ति रस में जवरघन अर्थात बुखार को नष्ट करने वाले व कफ का नाश करने वाले गुण मौजूद होते हैं । यह औषधि ठंड लगकर आने वाले शीत ज्वर, सतत ज्वर एवं 13 प्रकार के सन्निपात रोगों का नाश करने वाली होती है ।

त्रिभुवन कीर्ति रस के घटक द्रव्य Tribhuvan Kirti Ras ke ghatak dravy

  • शुद्ध हिंगुल – 10 ग्राम,
  • वच्छनाग – 10 ग्राम,
  • त्रिकटु – 10 ग्राम,
  • पिप्पली मूल – 10 ग्राम,
  • टंकण शुद्ध – 10 ग्राम।

त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे Tribhuvan Kirti Ras ke fayde in hindi

बुखार उतारने में लाभदायक त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde bukhar me

यदि रोगी को वात दोष या कफ दोष की विकृति के कारण बुखार हो गया हो, नजला जुखाम रहता हो,  ठंड लगने वाला शीत ज्वर हो गया हो, मलेरिया हो गया हो या इसके अलावा किसी भी प्रकार का बुखार हो गया हो तो ऐसी स्थिति में त्रिभुवन कीर्ति रस की एक एक गोली शहद या तुलसी के रस के साथ एक एक घंटे के अंतराल पर देने से बुखार जल्दी उतर जाता है ।

सहायक औषधियों के रूप में सितोपलादि चूर्ण, प्रवाल भस्म, मृग श्रंग भस्म का सेवन कराने से जल्दी लाभ मिलता है ।

सन्निपात में लाभकारी त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde sannipat rog me

सन्निपात रोग की वह अवस्था है जिसमें रोगी का वात, पित्त एवं कफ तीनों ही बिगड़ जाते हैं एवं रोगी बुखार से पीड़ित हो जाता है । इस अवस्था में त्रिभुवन कीर्ति रस को शहद या अदरक स्वरस के साथ देने से बुखार में जल्दी आराम मिलता है ।

सहायक औषधियों के रूप में कस्तूरी भैरव रस, कल्पतरू रस, बिल्वादि पंच मूल क्वाथ एवं दशमूल क्वाथ इत्यादि का सेवन कराने से भी जल्दी लाभ मिलता है ।

पोलियो में लाभदायक त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde polio me

पोलियो एक अत्यंत भयंकर बीमारी है जो बालक के जीवन को अंधकार की ओर धकेल देती है । पोलियो एवं पक्षाघात (पैरालाइसिस) दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है । अंतर केवल इतना है की पक्षाघात प्रौढ़ावस्था या वृद्धावस्था में वात विकार के कारण होता है जबकि पोलियो बाल्यावस्था में कफ दोष के कारण होता है ।

बाल्यावस्था में जब बालक के शरीर में कफ की वृद्धि होती है एवं कफ दोष उत्पन्न हो जाता है तो यह कफ बालक के शरीर में नाड़ी संस्थान में अवरोध उत्पन्न कर देता है, जो पोलियो का रूप धारण कर लेता है । ऐसी स्थिति में त्रिभुवन कीर्ति रस को मधु एवं तुलसी के रस के साथ या केवल शहद के साथ ही बालक को सेवन कराएं तो बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

सहायक ओषधियां के रूप में कल्पतरू रस, श्वास चिंतामणि रस, श्वास कुठार रस, वृहद वात चिंतामणि रस एवं योगेंद्र रस जैसी औषधियों का सेवन भी कराया जा सकता है ।

विशेष नोट: पोलियो की चिकित्सा करना हर किसी वैद्य के बस की बात नहीं है । इसके लिए बहुत अधिक अनुभव एवं शास्त्रीय ज्ञान का होना अति आवश्यक है । बालक को किस अनुपान में औषधि देनी है तथा कितने समय तक देनी है एवं आहार-विहार का क्या क्या ध्यान रखना है यह अत्यंत आवश्यक होता है । इसलिए पोलियो की चिकित्सा कराते समय वैद्य की योग्यता एवं अनुभव का ध्यान रखना परम आवश्यक है ।

गले की खराश एवं टॉन्सिल्स में लाभकारी त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde tonsils me

गले में खराश एवं टॉन्सिल्स या तो बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होते हैं या शरीर में कफ प्रकोप के कारण । यदि गले की खराश या टॉन्सिल्स का कारण कफ या बलगम है तो ऐसी स्थिति में त्रिभुवन कीर्ति रस का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

इस रोग में रोगी के गले में खराश होती है, दर्द होता है । पानी पीते समय, भोजन करते समय या थूक निगलते समय गले में बहुत अधिक दर्द होता है । इस स्थिति में त्रिभुवन कीर्ति रस को शहद के साथ चटाने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

इस रोग में सहायक औषधियों के रूप में कल्पतरू रस, चंद्रशेखर रस, कांचनार गुग्गुल, गंडमाला कंडक रस, किशोर गूग्गुल आदि औषधियों का सेवन भी कराया जा सकता है ।

महिलाओं के सोम रोग में लाभकारी त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde mahilao ke rog me

त्रिभुवन कीर्ति रस केवल बुखार की ही औषधि नहीं है, बल्कि इसे महिलाओं के सोम रोग में भी सफलतापूर्वक सेवन कराया जाता है । इस रोग में महिलाओं एवं बालिकाओं की योनि से मैं से सफेद रंग का पानी जैसा पदार्थ निकलता है ।

इस पदार्थ में चिकनाई नहीं होती है और ना ही इस में से किसी प्रकार की बदबू आती है और ना ही महिला या स्त्री को किसी प्रकार का कोई कष्ट होता है । ऐसी स्थिति में महिलाओं या कन्याओं को त्रिभुवन कीर्ति रस की एक या दो गोली सुबह शाम शहद के साथ देने से 8 से 10 दिनों में ही अच्छा लाभ मिल जाता है ।

मोटापा दूर करने में लाभदायक त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde motapa kam karne me

त्रिभुवन कीर्ति रस को मोटापा दूर करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है । त्रिभुवन कीर्ति रस में कफ नाशक गुण मौजूद होते हैं एवं हम आपको बता दें कि जब तक कफ का नाश नहीं होगा तब तक मोटापे का भी नाश नहीं हो पाता है ।

इसलिए रोगी को मेद नाशक औषधियों के साथ-साथ कफ नाशक औषधि का सेवन कराना भी आवश्यक होता है । अतः इस रोग में त्रिभुवन कीर्ति रस की एक एक गोली सुबह दोपहर एवं शाम को भोजन के आधा घंटा पश्चात गर्म पानी से ली जाती है ।

सहायक औषधियों के रूप में मेदोहर गुग्गुल, अग्निकुमार रस, चंद्रशेखर रस एवं आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन भी कराया जाता है ।

दाढ़ की सूजन एवं दर्द में लाभकारी त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde dadh dard me

यदि 5 से 10 वर्ष तक के बालक को अथवा 25 वर्ष तक की आयु के किशोरों की दाढ़ में सूजन या दर्द की समस्या हो, तो त्रिभुवन कीर्ति रस को दिन में दो से तीन बार शहद के साथ देने से बहुत अच्छा आराम मिलता है ।

इस रोग में सहायक औषधियों के रूप में लक्ष्मी विलास रस नारदीय, कल्पतरू रस, कैशोर गुग्गुल एवं दशांग लेप आदि औषधियों का सेवन कराने से जल्दी लाभ मिलता है ।

सर्दी खांसी इनफ्लुएंजा में लाभकारी त्रिभुवन कीर्ति रस Tribhuvan Kirti Ras ke fayde sardi khansi me

त्रिभुवन कीर्ति रस को सर्दी, खांसी, इनफ्लुएंजा एवं फ्लू जैसी समस्याओं में बहुत ही शक्तिशाली औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है । इन सभी समस्याओं में त्रिभुवन कीर्ति रस मुख्य औषधियों के रूप में प्रयोग की जाती है ।

नोट: हमने इस लेख में यथासंभव त्रिभुवन कीर्ति रस के बारे में विस्तार से बताने का प्रयास किया है,  लेकिन इस सब के बावजूद भी हम अंत में यही कहेंगे कि त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे एवं इसके गुण इससे कहीं ज्यादा हैं,  जिनका वर्णन हम या नहीं कर सकते ।

यदि आप इस औषधि के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो इसके लिए आपको शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन करना होगा या किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ से संपर्क करना होगा तभी आपको संपूर्ण जानकारी मिल पाएगी ।

मात्रा एवं सेवन विधि

इस औषधि में वत्सनाभ मौजूद होती है इसलिए इस औषधि की बहुत ही कम मात्रा ली जाती है । एक समय की मात्रा 60 मिलीग्राम से 125 मिलीग्राम तक होती है । 125 मिलीग्राम से अधिक एक समय में इस औषधि को नहीं लेना चाहिए ।

इस औषधि को शहद के साथ, अदरक के रस या तुलसी के रस के साथ ले सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें एवं इस औषधि को बिना डॉक्टर की सलाह के ना लें ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

त्रिभुवन कीर्ति रस को बिना किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख के नहीं लेना चाहिए । जिन लोगों को अम्लपित्त की समस्या हो उन्हें इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए । यदि इस औषधि का सेवन करना आवश्यक हो तो साथ में प्रवाल पिष्टी का सेवन अवश्य करना चाहिए ताकि अम्लपित्त पर नियंत्रण रखा जा सके ।

कुछ रोगियों को इस औषधि का सेवन करने से बहुत अधिक पसीना आना, दिल घबराना, रक्तचाप का गिर जाना, सिर घूमने लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं । ऐसी स्थिति में इस औषधि का सेवन तुरंत बंद कर दें एवं कुछ समय पश्चात आधी मात्रा के साथ दोबारा उपचार शुरू करना चाहिए ।

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