ताम्र भस्म के फायदे और नुकसान Tamra Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 30, 2020

ताम्र भस्म क्या है? Tamra Bhasma kya hai?

ताम्र भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे तांबे से बनाया जाता है । यह औषधि अनेकों रोगों में फायदा पहुंचाती है । इस औषधि को जलोदर अर्थात पेट में जल भर जाना, यकृत के रोगों, अस्थमा, रक्ताल्पता, श्वसन तंत्र के रोगों, यकृत एवं स्प्लीन का बढ़ जाना, पीलिया, कोलेस्ट्रोल बढ़ जाना, संग्रहणी, ट्यूमर एवं पुराने कफ से संबंधित रोगों में प्रयोग किया जाता है । इस औषधि की तासीर गर्म होती है इसलिए यह औषधि फेफड़ों से संबंधित रोगों में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है ।

ताम्र भस्म के घटक द्रव्य Tamra Bhasma ke ghatak dravy

  • शुद्ध तांबा
  • एलोवेरा या नींबू का रस

तांबे से ताम्र भस्म बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल है । इस प्रक्रिया में सबसे पहले तांबे का शोधन किया जाता है, तत्पश्चात तांबे का मारण करके अलग-अलग विधियों के द्वारा ताम्र भस्म बनाई जाती है ।

यहां हम ताम्र भस्म बनाने की विधि इसलिए नहीं दे रहे हैं क्योंकि यहां इस विधि को देने का कोई औचित्य नहीं है । क्योंकि यह विधि इतनी जटिल है की सामान्य जनों को इस विधि को समझने में काफी कठिनाई होगी ।

ताम्र भस्म को आयुर्वेद विशेषज्ञों के द्वारा जटिल प्रक्रिया के द्वारा बनाया जाता है । इसलिए हम आपको यही सलाह देंगे कि आप इस औषधि को बनी बनाई बाजार से ही खरीद लें ।

ताम्र भस्म के चिकित्सकीय गुण

  • ताम्र भस्म निम्नलिखित रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।
  • यह अम्लतवनाशक है अर्थात एसिडिटी को दूर करती है ।
  • यह कफ नाशक है एवं पाचन शक्ति बढ़ाने वाली है ।
  • यह रक्त में लाल रक्त कणिकाओं का पुनर्निर्माण करती है ।
  • यह रक्त में बिलीरुबिन के स्तर को कम करती है ।
  • यह वसा नाशक है अर्थात इसका सेवन से करने से पेट कम होता है ।
  • यह यकृत एवं तिल्ली की वृद्धि में लाभकारी है ।

ताम्र भस्म के फायदे Tamra Bhasma ke fayde

यकृत एवं प्लीहा वृद्धि मैं लाभकारी ताम्र भस्म

ताम्र भस्म यकृत एवं प्लीहा वृद्धि को सही करने के लिए एक सुप्रसिद्ध औषधि है । इस रोग में ताम्र भस्म को आरोग्यवर्धिनी वटी एवं सूतशेखर रस के साथ देने से बहुत ही अच्छा फायदा होता है । इस औषधि का सेवन करने से यकृत एवं प्लीहा में आई हुई सूजन कम हो जाती है एवं व्यक्ति निरोगी हो जाता है ।

उदर रोगों में लाभकारी ताम्र भस्म

पाचन तंत्र से संबंधित रोगों जैसे अपच, अम्लता, खट्टी डकार आना, पेट एवं छाती में जलन रहना, पेट में अफारा हो जाना इत्यादि समस्याओं में ताम्र भस्म का सेवन करने से लाभ मिलता है । इस औषधि का सेवन करने से पेट की समस्याएं दूर होती हैं एवं भूख बढ़ती है । इन रोगों में ताम्र भस्म को आमला पाउडर के साथ दिया जाता है ।

ताम्र भस्म अनेकों रोगों में फायदा करने वाली एक सुप्रसिद्ध औषधि है । यदि हम इन सभी रोगों का वर्णन अलग अलग करेंगे तो यह लेख इतना बड़ा हो जाएगा कि आपके लिए भी पूरा लेख पढ़ना आसान नहीं होगा । इसलिए आपकी सुविधा के लिए हमने नीचे एक टेबल बनाई है जिसमें हमने एक और रोग तथा दूसरी और अनुपान दिया है । इस टेबल को पढ़कर आप आसानी से जान जाएंगे की ताम्र भस्म किन किन रोगों में फायदा पहुंचाती है ।

रोग सहायक औषधि
हिचकी नींबू का रस, लंबी काली मिर्च पाउडर
बलगम निर्वहन के साथ चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) सूखा अदरक और शहद
बलगम निर्वहन के साथ पतले दस्त लंबी काली मिर्च और आंवला पाउडर या सूखा अदरक और छाछ
यकृत में जलन अनार का रस
भूख ना लगना या अपच लंबी काली मिर्च और शहद या अदरक का रस और शहद
कब्ज शहद और फिर गेहूं के बीज या जौ के बीज खाएं
अपच के साथ अम्लता गुड़, मुनक्का और शहद
पित्ती हल्दी, काली मिर्च और शहद या बाबची बीज
प्लीहा या जिगर वृद्धि लंबी काली मिर्च और शहद या पुनर्नवा पाउडर या पुनर्नवारिष्ट
पित्ताशय की पथरी करेला के पत्ते का रस
उन्माद में ब्राह्मी का रस, बच, कूठ, शंखपुष्पी, मिश्री
बुद्धि वृद्धि बच
कान्ति वृद्धि पद्मकेसर चूर्ण
पुनरयौवन/तारुण्य शंखपुष्पी चूर्ण
राजयक्ष्मा मक्खन, मिश्री, शहद
उल्टी आना, दस्त-अतिसार, पेट के कीड़े, अरुचि, उबकाई शुद्ध सोनागेरू, मोती पिष्टी के साथ शहद में मिला कर
क्षय, आतिसार दाड़िमावलेह
दाह शमन मिश्री
नेत्रों की निर्बलता पुनर्नवा चूर्ण
जीर्ण नेत्रदाह मुक्तापिष्टी और गिलोय सत्व
श्वास त्रिकुट और घी
भयंकर प्रदर चौलाई की जड़ का अर्क, घृत और शहद
खांसी हल्दी, पीपल का चूर्ण और शहद
जीर्णकास द्राक्षासव के साथ
सुजाक और मूत्रकच्छ छोटी इलायची, कर्पूर, मिश्री का चूर्ण
रजोधर्म शुद्धिकरण मकोय का अर्क

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions

सबसे सुरक्षित खुराक (पूरक खुराक) 1 to 2 मिलीग्राम
अधिकतम अति सुरक्षित दैनिक खुराक (पूरक खुराक) 5 मिलीग्राम
चिकित्सीय खुराक 5 से 15 मिलीग्राम
अधिकतम दैनिक चिकित्सीय खुराक 30 मिलीग्राम
उपयोग की अधिकतम अवधि 45 दिन से कम

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

  • ताम्र भस्म को केवल किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में निर्धारित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए ।
  • इस औषधि को अधिक मात्रा में सेवन करने से गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं ।
  • इस औषधि को अधिक मात्रा में सेवन करने से पेशाब में जलन हो सकती है ।
  • जो लोग पित्त प्रधान प्रकृति के होते हैं तथा जिन्हें एसिडिटी के प्रॉब्लम होती है उन्हें इस औषधि का सेवन करने से पेट में जलन हो सकती है तथा भयंकर हाइपर एसिडिटी हो सकती है ।
  • इस औषधि का अधिक मात्रा में सेवन करने से गुदा में दरार, नाक से खून गिरना, पीरियड्स में बहुत ज्यादा खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।
  • इसके अलावा रोगी को चक्कर आना, रक्तचाप कम हो जाना एवं सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं ।
  • हमेशा अच्छी कंपनी की भस्म का ही प्रयोग करें जो सही प्रकार से बनी हुई हो । कच्ची या अधपकी भस्म का सेवन करना प्राणघातक हो सकता है ।
  • इससे आपके शरीर में विषैले पदार्थों (टॉक्सिंस) की अधिकता हो सकती है ।
  • यदि ताम्र भस्म का सेवन करने से आपको किसी भी प्रकार की कोई समस्या हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।
  • गर्भावस्था में इस औषधि का सेवन करने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं एवं गर्भपात भी हो सकता है । इसलिए गर्भावस्था में इस औषधि का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए ।

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