तालिसादि चूर्ण के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Talisadi Churna uses and benefits in hindi

By | जून 5, 2020

तालिसादि चूर्ण क्या है? What is talisadi churna in hindi

तालिसादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक एवं सुरक्षित औषधि है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र से संबंधित रोगों, बुखार एवं पाचन तंत्र के रोगों में प्रयोग की जाती है । जैसे कि इस औषधि के नाम से ही पता चलता है कि इस औषधि का प्रमुख घटक द्रव्य तालीसपत्र होता है । इस चूर्ण में तालीसपत्र के अतिरिक्त सात अन्य जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं ।

तालीसादी चूर्ण तासीर में गर्म होता है जिस कारण यह फेफड़ों में जमे हुए बलगम को निकाल देता है तथा दमा श्वास, पुरानी खांसी, दमा श्वास एवं खांसी के कारण होने वाला पुराना बुखार, अरुचि, पेट फूलना, भूख ना लगना, गुर्दों का इन्फेक्शन, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आदि रोगों में प्रयोग किया जाता है । तालिसादि चूर्ण को बनाना बहुत ही आसान है । आप इस चूर्ण को घर पर भी बड़ी आसानी से बना सकते हैं ।

तालिसादि चूर्ण के घटक द्रव्य Talisadi Churna ingredients in hindi

1. तालिसपत्र   –  12 ग्राम


2. मरिच (कालीमिर्च) – 24 ग्राम


3. सोंठ (शुण्ठी) – 36 ग्राम


4. पीपल (पिप्पली) – 48 ग्राम


5. वंशलोचन – 60 ग्राम


6. एला (इलाइची) – 6 ग्राम


7. त्वक – 6 ग्राम


8. मिश्री – 384 ग्राम

तालिसादि चूर्ण को बनाने की विधि

तालिसादि चूर्ण बनाने के लिए सबसे पहले आप मिश्री को छोड़कर शेष सभी जड़ी बूटियों को साफ करके धूप में अच्छी तरह सुखा लें ताकि इन जड़ी-बूटियों में मौजूद नमी दूर हो जाए। इसके पश्चात इन्हें अच्छी तरह कूट पीसकर कपड़ छन कर ले तथा अंत में मिश्री को अच्छी तरह पीसकर इस मिश्रण में मिला दें । मिश्रण को खूब अच्छी तरह मिलाकर किसी प्लास्टिक या कांच के पात्र में भरकर रख लें, इसे ही तालिसादि चूर्ण कहते हैं ।

तालिसादि चूर्ण के फायदे Talisadi Churna uses in hindi

  • तालिसादि चूर्ण में जितनी भी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं यह सभी श्वसन तंत्र के संक्रामक रोगों को दूर करने में फायदेमंद होती हैं ।
  • यह चूर्ण फेफड़ों में जमे हुए कफ एवं बलगम को दूर करता है तथा फेफड़ों को नया जीवन प्रदान करता है ।
  • यह सूखी खांसी, कफ वाली खांसी एवं काली खांसी (talisadi churna for dry cough) में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाता है ।
  • बच्चो में होने वाली सूखी एवं काली खांसी (talisadi churna for babies) में तालिसादी चूर्ण से बहुत अच्छा फायदा मिलता है ।
  • यह दमा श्वास में (talisadi churna for asthma) लाभ पहुंचाता है । दमा श्वास एवं फेफड़ों के संक्रमण के कारण होने वाले पुराने बुखार में इस चूर्ण का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • यह चूर्ण पाचन तंत्र पर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है ।
  • इस चूर्ण का सेवन करने से पाचन तंत्र के रोग जैसे अरुचि, अग्निमांद, अपच, पेट गैस इत्यादि में लाभ मिलता है ।
  • यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आईबीएस जैसे पेट के रोगों में फायदा पहुंचाता है ।
  • यह प्लीहा रोग एवं ग्रहणी रोग में लाभ पहुंचाता है ।
  • यह कफ नाशक है, इस कारण यदि कफ रोग बिगड़ जाए तो ऐसी स्थिति में तालिसादि चूर्ण का सेवन कराने से लाभ मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि Dosage & Directions

तालिसादि चूर्ण को 2 से 3 ग्राम दिन में दो से तीन बार देसी घी या शहद में मिलाकर चाट लें तथा ऊपर से मिश्री मिला हुआ गुनगुना दूध पी ले । ध्यान रखें घी तथा शहद को एक साथ नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि घी और शहद को एक साथ मिलाने से जहर बन जाता है ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यतः तालिसादि चूर्ण का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । यदि आप इसे निर्धारित मात्रा में सेवन नहीं करते हैं तो छाती में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं । इसलिए हमेशा किसी भी ओषधि को निर्धारित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए ।

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