स्वर्ण माक्षिक भस्म के फायदे और नुकसान Swarna Makshik Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 30, 2020

स्वर्ण माक्षिक भस्म क्या है? Swarna Makshik Bhasma kya hai?

स्वर्ण माक्षिक भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जो सोनामक्खी नामक खनिज से तैयार की जाती है । सोना मक्खी एक उपधातु है जिसमें मुख्य रूप से लोहा मौजूद होता है, इसलिए स्वर्ण माक्षिक भस्म में लोहे की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है ।

इस औषधि को स्वर्ण माक्षिक भस्म इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस भस्म में सोने का अल्पांश मौजूद होता है तथा इसमें सोने जैसी चमक होती है । कुछ विद्वान स्वर्ण मासिक भसम एवं स्वर्ण भस्म दोनों के गुणों को एक समान मानते हैं लेकिन यह बिल्कुल गलत है । क्योंकि स्वर्ण माक्षिक भस्म में मुख्य घटक लोहा होता है तथा इसे लोहा भसम के सौम्य विकल्प में रूप में प्रयोग किया जाता है ।

यह औषधि विभिन्न बीमारियों जैसे ह्रदय रोगों, दिल का अनियमित रूप से धड़कना, रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया, बुखार, उल्टी, चक्कर, सिर दर्द, डायबिटीज, त्वचा रोगों एवं पाचन तंत्र के रोगों में प्रयोग की जाती है ।

स्वर्ण माक्षिक भस्म के घटक द्रव्य Swarna Makshik Bhasma ke ghatak dravy

स्वर्ण माक्षिक भस्म में को बनाने में एवं इसका शोधन करने में निम्न घटक द्रव्यों की आवश्यकता पड़ती है ।

  • स्वर्ण माक्षिक (सोनामक्खी खनिज)
  • कुलथी का काढ़ा
  • अरंडी का तेल
  • छाछ

स्वर्ण माक्षिक भस्म का रासायनिक संगठन

स्वर्ण माक्षिक भस्म में निम्नलिखित तत्व मौजूद होते हैं ।

  • लोहा (मुख्य घटक)
  • तांबा
  • गंधक

स्वर्ण माक्षिक भस्म के औषधीय गुण

  • स्वर्ण माक्षिक भस्म में निम्नलिखित औषधीय गुण मौजूद होते हैं ।
  • यह रक्त कण रंजक है अर्थात इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ जाता है ।
  • यह लाल रक्त कणिकाओं कब पुनर्गठन करती है एवं पीलिया रोग में बहुत अच्छा कार्य करती है ।
  • यह सर्वांगशोथ में लाभकारी है ।
  • अम्ल पित्त नाशक है ।
  • कृमि नाशक है ।
  • मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद को दूर करती है ।
  • उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करती है ।
  • जख्म को शीघ्र भरने में सहायक है ।
  • किसी भी प्रकार का बुखार दूर करने में सहायक है ।

स्वर्ण माक्षिक भस्म के फायदे Swarna Makshik Bhasma ke fayde

इस औषधि का सेवन करने से सिरः शूल अर्थात सिर दर्द में लाभ होता है । इस रोग में इस औषधि को सूतशेखर रस के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है ।

नेत्र रोग में लाभकारी स्वर्ण माक्षिक भस्म

यदि नेत्र रोग पित्त की अधिकता के कारण हो तो इस औषधि का सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

क्षय रोग में लाभकारी स्वर्ण माक्षिक भस्म

स्वर्ण मासिक भसम को क्षय रोग में स्वर्ण वसंत मालती, प्रवाल भस्म, चवनप्राश एवं शहद के साथ देने से बहुत उत्तम लाभ होता है । क्षय रोग में व्यक्ति को जोर-जोर से खांसी आती है तथा खांसते खांसते रोगी बहुत ज्यादा कष्टदायक स्थिति में पहुंच जाता है । ऐसी स्थिति में इस औषधि का सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

पित्त विकारों में लाभदायक स्वर्ण मासिक भस्म

यदि रोगी को पित्त बहुत अधिक बनता हो एवं दूषित हो गया हो एवं दूषित पित्त के कारण रक्त वाहिनी एवं हृदय वाहनिया दूषित हो गई हो तो इससे अन्य रोग भी उत्पन्न होते हैं । ऐसी स्थिति में स्वर्ण माक्षिक भसम को देने से लाभ मिलता है ।

अम्लपित्त में लाभकारी स्वर्ण माक्षिक भस्म

यदि रोगी को अम्लपित्त बहुत ज्यादा बनता हो जिससे रोगी के पेट में एवं छाती में बहुत ज्यादा जलन रहती हो, उदर शूल रहता हूं तो ऐसी स्थिति में स्वर्ण माक्षिक भस्म का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

जीणज्वर में लाभकारी स्वर्ण माक्षिक भस्म

यदि रोगी को लंबे समय से बुखार रहा हो जिससे धातु क्षीणता हो गई हूं एवं व्यक्ति बहुत ज्यादा ज्यादा कमजोर हो गया हो तथा रोगी को चलने फिरने में भी दिक्कत होती हो तो ऐसी स्थिति में स्वर्ण माक्षिक भस्म को प्रवाल भस्म एवं सितोपलादि चूर्ण के साथ मिलाकर शहद के साथ देने से लाभ मिलता है ।

रोग एवं अनुपान

स्वास्थ्य की स्थिति   सह-औषधि
चेचक कांचनार काढ़ा
रक्ताल्पता शहद
पीलिया पिप्पली + शहद या मूली का रस
स्वप्नदोष मिश्री
जीर्ण ज्वर सितोपलादि चूर्ण या मिश्री + शहद
मतली और उल्टी जीरा, मिश्री + शहद
अनिद्रा आमला मुरब्बा
कमजोरी और दुर्बलता गाय का दूध

मात्रा एवं सेवन विधि

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु और बच्चे प्रति किलो वजन का 2.5 मिलीग्राम, लेकिन अधिकतम खुराक प्रति दिन 250 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।
वयस्क (19 से 60 वर्ष) 125 से 375 मिलीग्राम
वृद्धावस्था (60 वर्ष से ऊपर) 125 से 375 मिलीग्राम
गर्भावस्था 125 मिलीग्राम
स्तनपान 125 से 375 मिलीग्राम
अधिकतम संभावित खुराक प्रति दिन 750 मिलीग्राम (विभाजित मात्रा में)

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?)  सह-औषध के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यतः यदि आप स्वर्ण माक्षिक भस्म को चिकित्सक की सलाह के अनुसार लेते हैं तो इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । इस औषधि को अधिक मात्रा में लेने पर गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। इसलिए इस औषधि को केवल अपने डॉक्टर के परामर्श अनुसार ही सेवन करें ।

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