सूतशेखर रस के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Sutshekhar Ras ke fayde or nuksan

By | June 11, 2020

सूतशेखर रस क्या है? Sutshekhar Ras kya hai?

सूतशेखर रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों एवं भस्मों के सहयोग से बनाया जाता है । इस औषधि में शुद्ध गंधक एवं शुद्ध पारा मौजूद होता है, जिसे कज्जली कहा जाता है । पारा और गंधक दोनों में ही विषैले गुण पाए जाते हैं, इसलिए सबसे पहले इन दोनों रसायनों का शोधन किया जाता है तथा उसके पश्चात ही इन्हें प्रयोग में लाया जाता है ।

सूतशेखर रस दो प्रकार का होता है । सूतशेखर रस साधारण तथा सूतशेखर रस स्वर्ण युक्त या सूतशेखर रस नंबर 1 । सूतशेखर रस स्वर्ण युक्त सूतशेखर रस साधारण से ज्यादा प्रभावी होता है । सूतशेखर रस का प्रयोग मुख्य रूप से अम्लपित्त के उपचार में किया जाता है ।

इस औषधि का सेवन करने से पित्त की अधिकता के कारण होने वाले रोगों, अम्लपित्त, मंदाग्नि, पेट दर्द, चक्कर आना,  उल्टी आना, डायरिया, पेट का फूल जाना एवं हिचकी जैसे रोगों में बहुत अच्छा फायदा मिलता है ।

सूतशेखर रस के घटक द्रव्य Sutshekhar Ras ke ghatak dravy

  • शुद्ध सूत (शुद्धा परद) 1 Part
  • शुद्ध गंधक 1 Part
  • स्वर्ण भस्म 1 Part
  • रौप्य भस्म 1 Part
  • शुद्धा सुहागा 1 Part
  • शुंठी (Rz.) 1 Part
  • मरीचा (Fr.) 1 Part
  • पिप्पली (Fr.) 1 Part
  • उन्मत्त बीजा (शुद्ध धत्तुरा) (Sd.) 1 Part
  • ताम्र भस्म 1 Part
  • दालचीनी 1 Part
  • पत्र (तेजपत्र) (Lf.) 1 Part
  • एला (Sd.) 1 Part
  • नागकेशर (Adr.) 1 Part
  • शंख भस्म 1 Part
  • बिल्व मज्जा (बिल्व) (Fr.P.) 1 Part
  • ककरका (कर्चूर) (Rz.) 1 Part
  • भृंगराज स्वरस (Pl.) Q. S. for मर्दन

सूतशेखर रस के चिकित्सकीय उपयोग Sutshekhar Ras ke upyog in hindi

सूतशेखर रस को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है ।

  1. अम्ल पित्त
  2. शूल
  3. ग्रहणी
  4. अतिसार
  5. अग्निमांद्य्य
  6. हिचकी
  7. उदावर्त
  8. राज्यक्षमा
  9. सिर दर्द
  10. मासिक धर्म की गड़बड़ी

सूतशेखर रस के फायदे Sutshekhar Ras ke fayde in hindi

वात एवं पित्त रोगों में लाभकारी सूतशेखर रस Acidity me labhkari Sutshekhar Ras

यह औषधि वात एवं पित्त दोषों के कारण पैदा होने वाली समस्याओं को दूर करती है । पित्त के कारण पैदा होने वाली समस्याएं जैसे एसिडिटी, हाइपरएसिडिटी या आमाशय में पित्त का कमजोर पड़ जाना, जिसके कारण भोजन सही प्रकार से हजम ना होता हो जैसी समस्याओं में इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

इसके अलावा यदि अम्ल पित्त के कारण खट्टी खट्टी उल्टी आती हो, पेट में दर्द रहता हो, गैस बनती हो या पित्त विकृति के कारण कोई अन्य समस्या पैदा हो गई हो तो ऐसी स्थिति में सूतशेखर रस फायदा पहुंचाता है । अम्लपित्त में सूतशेखर रस को कामदुधा रस एवं शहद के साथ सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

डायरिया नाशक सूतशेखर रस Diarrhea me labhkari Sutshekhar Ras

सूतशेखर रस में मल को बांधने के गुण मौजूद होते हैं । यह औषधि दस्त को बांधने वाली होती है, इसलिए संग्रहणी तथा अतिसार जैसे रोगों में इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

राज यक्ष्मा में लाभकारी सूतशेखर रस TB me labhkari Sutshekhar Ras

सूतशेखर रस फेफड़ों के संक्रमण, कफ दोष, सुखी खांसी एवं राज्यक्षमा (टीवी) जैसी बीमारियों में लाभदायक होता है । इन सभी समस्याओं में सूतशेखर रस को सितोपलादि चूर्ण या तालीसदी चूर्ण के साथ सेवन कराने से बहुत ही अच्छा फायदा होता है तथा यह सभी समस्याएं बहुत जल्दी दूर हो जाती हैं ।

पेट दर्द में लाभकारी सूतशेखर रस Pet dard me labhkari Sutshekhar Ras

यदि पित्त विकृत हो जाए तो इससे कई समस्याएं पैदा होती हैं जैसे पेट में दर्द इसका प्रधान लक्षण है । यदि पेट दर्द पित्त की विकृति के कारण हो तो इसमें सूतशेखर रस को देने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

अम्ल पित्त बढ़ने से वात प्रकोप एवं पित्त प्रकोप दोनों ही प्रभावी हो जाते हैं । जहां वात प्रकोप बढ़ने से पेट में दर्द होता है वहीं दूसरी ओर पित्त प्रकोप बढ़ने से रोगी को खट्टी खट्टी उल्टी आती है । सूतशेखर रस वात और पित्त प्रकोप के कारण पैदा हुए इन दोनों विकारों को दूर करता है तथा अम्लपित्त को भी नष्ट कर देता है ।

हृदय बलवर्धक सूतशेखर रस Heart problems me labhkari Sutshekhar Ras

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि अम्ल पित्त की अधिकता होने पर रोगी के शरीर में वायु एवं पित्त दोनों का ही प्रकोप बढ़ जाता है।। ऐसी स्थिति में अम्लपित्त वात वाहिनी एवं रक्त वाहिनी शिराओं को प्रभावित करता है । जिससे हृदय की धड़कन बढ़ जाती है तथा रोगी की नाडी बहुत तेज चलने लगती है ।

इस स्थिति में इस औषधि का सेवन करने से वात वाहिनी एवं रक्त वाहिनी शांत होती हैं तथा हृदय की गति नियंत्रित हो जाती है । जिस कारण यह हृदय को बल प्रदान करती है तथा हृदय रक्षक के रूप में कार्य करती है ।

सन्निपात में लाभकारी सूतशेखर रस Sannipat rog me labhkari Sutshekhar Ras

जब रोगी के शरीर में पित्त की अधिकता हो जाती है तो इसके कई लक्षण नजर आते हैं, जैसे रोगी के सिर में दर्द रहता है, रोगी बड़बड़ करता रहता है, रोगी को नींद सही प्रकार से नहीं आती, प्यास ज्यादा लगती है, दस्त का रंग पीला हो जाता है, ब्लड प्रेशर ज्यादा हो जाता है एवं पेशाब में पीलापन आ जाता है । ऐसी स्थिति में सूतशेखर रस को प्रवाल चंद्रपुटी एवं गिलोय सत्व के साथ देने से पित्त शांत होता है तथा उपरोक्त सभी लक्षण दूर हो जाते हैं ।

मासिक धर्म की गड़बड़ी में लाभकारी सूतशेखर रस Masik dharma ki samasya me labhkari Sutshekhar Ras

कुछ स्त्रियों को प्रसव के उपरांत चक्कर आने की समस्या पैदा हो जाती है । कभी-कभी यह समस्या मासिक धर्म की गड़बड़ी के कारण भी हो जाती है ।

महिलाओं को रुक रुक कर चक्कर आता है, इसके अलावा महिलाओं में कुछ और लक्षण भी नजर आते हैं जैसे गर्भाशय में दर्द होना, पेट में दर्द होना, घबराहट एवं बेचैनी महसूस होना, कमजोरी महसूस होना, कभी-कभी उल्टी आना इत्यादि ।

इन सभी लक्षणों में महिला को सूतशेखर रस का सेवन कराने से यह सभी प्रकोप दूर हो जाते हैं, क्योंकि यह सभी लक्षण वात एवं पित्तदोष के कारण होते हैं ।

मात्रा एवं सेवन विधि

आधी गोली से एक गोली दिन में दो बार सुबह एवं शाम को सेवन करें । एक गोली 250 मिलीग्राम की होती है । इस औषधि को गाय के घी, शहद, अनार के रस या आंवले के मुरब्बे के साथ ले सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में चिकित्सक के परामर्श अनुसार इस औषधि का सेवन करने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है । इस औषधि का सेवन कभी भी अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए,  हमेशा चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए । इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए ।

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