स्मृति सागर रस के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Smriti Sagar Ras ke fayde or nuksan

By | June 21, 2020

स्मृति सागर रस क्या है? Smriti Sagar Ras kya hai?

स्मृति सागर रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क रोगों को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है । यह औषधि मस्तिष्क की गंभीर समस्याओं जैसे मिर्गी, याददाश्त की कमी, स्मृति भ्रम, पागलपन एवं हिस्टीरिया में बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती है ।
इतना ही नहीं यह औषधि लकवा तथा पैरालाइसिस जैसी समस्याओं को भी दूर करने में प्रयोग की जाती है, क्योंकि इन रोगों का संबंध भी हमारे मस्तिष्क से होता है । कुल मिलाकर स्मृति सागर रस को तंत्रिका तंत्र से संबंधित जुड़े हुए जटिल एवं गंभीर रोगों में ही प्रयोग किया जाता है । इस औषधि को सामान्य याददाश्त की कमी एवं दिमागी कमजोरी में प्रयोग नहीं किया जाता है ।

आज के समय में लोगों का खान-पान एवं उनका रहन-सहन बहुत ज्यादा खराब हो गया है । लोग ना तो समय पर सोते हैं और ना ही समय पर उठते हैं । पूरे दिन भर परिश्रम करते हैं एवं मानसिक रूप से बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं ।

स्मृति सागर रस इन हिंदी Smriti Sagar Ras in hindi

यह तनाव सभी वर्ग के लोगों में पाया जाता है । ज्यादातर व्यापारी एवं प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने वाले लोगों में मानसिक तनाव बना रहता है, साथ ही वे अपने खानपान एवं जीवन शैली का भी सही प्रकार से ध्यान नहीं रखते हैं, जिस कारण धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं और यह डिप्रेशन उन्हें अनेक प्रकार के गंभीर मानसिक रोगों की ओर धकेल देता है ।
इसका उदाहरण है मिर्गी, याददाश्त की कमी होना, पागलपन के दौरे उठना, हिस्टीरिया यहां तक कि पैरालाइसिस का भी यही कारण माना जाता है । इसीलिए कहते हैं कि अपने खानपान एवं जीवन शैली का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है ।
स्मृति सागर रस को हम गंभीर मानसिक रोगों में मुख्य ओषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं । स्मृति सागर रस में ताम्र भस्म, स्वर्ण माक्षिक भस्म, ब्राह्मी, हऱताल एवं मैनसिल सहित अन्य बहुत सी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जो मस्तिष्क रोगों में बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती है ।
स्मृति सागर रस का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथ योगरत्नाकर के अपस्मार चिकित्सक खंड में किया गया है । यह औषधि वात, पित्त एवं कफ तीनों को ही संतुलित करती है । इस औषधि में पारा, गंधक एवं आर्सेनिक मौजूद होता है, इसलिए इस औषधि का सेवन बहुत ही कम मात्रा में बहुत ही कम समय के लिए तथा किसी अनुभवी वैद्य के संपर्क में ही किया जाना उचित रहता है ।

स्मृति सागर रस के घटक द्रव्य Smriti Sagar Ras ke ghatak dravy

  • कज्जली (शुद्ध पारा एवं गन्धक) – 50 ग्राम
  • शुद्ध हरताल – 50 ग्राम
  • शुद्ध मेनसिल – 50 ग्राम
  • ताम्र भस्म – 50 ग्राम
  • स्वर्ण माक्षिक भस्म – 50 ग्राम
  • बच – 250 ग्राम
  • ब्राह्मी – 250 ग्राम
  • मालकांगनी तेल – 25 ग्राम

स्मृति सागर रस को बनाने की विधि Smriti Sagar Ras kaise banaye

यहां हम अपने पाठकों के लिए स्मृति सागर रस को बनाने की विधि बता रहे हैं । लेकिन हम आपको पहले ही सावधान कर देते हैं की इस औषधि को बनाना सरल नहीं है तथा यह औषधि अनुभवी आयुर्वेदाचार्य के संपर्क में रहकर ही बनानी उचित रहती है ।
लेकिन फिर भी हम अपने पाठकों की रुचि का ध्यान रखते हुए यहां स्मृति सागर रस को बनाने की विधि बता रहे हैं । स्मृति सागर रस को बनाने की विधि इस प्रकार है ।
  1. सर्वप्रथम ब्राह्मी, मालकांगनी एवं बच को छोड़कर शेष सभी जड़ी बूटियों को खरल में डालकर खूब अच्छी तरह घोटे ।
  2. इसके पश्चात मालकांगनी का तेल डालकर उन्हें अच्छी तरह घुटाई करें ।
  3. ब्राह्मी को मोटा मोटा कूट लें तथा इसका काढ़ा तैयार करले एवं घुटाई किए गए द्रव्य को इस काढ़े की 21 भावना दे ।
  4. अंत में एक एक रत्ती की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें । इसे ही स्मृति सागर रस कहा जाता है ।
इस औषधि को बनाना सरल इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें पारा व गंधक इत्यादि द्रव्य मौजूद होते हैं तथा पारा एवं गंधक को शुद्ध करना हर किसी के बस की बात नहीं होती है । इसके लिए शास्त्रीय अनुभव एवं ज्ञान आवश्यक होता है । इसलिए आप इस औषधि को बना बनाया ही बाजार से प्राप्त कर ले ।

स्मृति सागर रस के चिकित्सकीय उपयोग Smriti Sagar Ras ke upyog in hindi

स्मृति सागर रस को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है । मिर्गी याददाश्त की कमी तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं पागलपन के दौरे उठना हिस्टीरिया पैरालाइसिस लकवा

स्मृति सागर रस के फायदे Smriti Sagar Ras ke fayde in hindi

  1. स्मृति सागर रस का सेवन करने से स्मरण शक्ति बहुत अच्छी हो जाती है ।
  2. यह औषधि मस्तिष्क से जुड़ी हुई तंत्रिकाओं पर बहुत ही अच्छा प्रभाव डालती है तथा उन्हें शांत करती है, जिससे मिर्गी, हिस्टीरिया एवं पागलपन के दौरे नहीं उठते हैं ।
  3. स्मृति सागर रस उन्माद एवं मनोरोग की बहुत ही अच्छी औषधि है ।
  4. इस रोग में व्यक्ति अपने आप ही बड़बडाता रहता है तथा व्यक्ति का अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण खो जाता है ।
  5. कभी-कभी मानसिक रोग पित्त की वृद्धि के कारण भी होते हैं ।
  6. पित्त की वृद्धि के कारण रक्त में अचानक से गर्मी बढ़ जाती है एवं मस्तिष्क की नाडिया बहुत अधिक प्रभावित हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति अपना आपा खो देता है एवं पागलपन जैसी हरकतें करने लगता है ।
  7. इस स्थिति में स्मृति सागर रस का सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

स्मृति सागर रस में पारा, गंधक एवं आर्सेनिक जैसे विषैले रसायन मौजूद होते हैं, इसलिए इस औषधि की बहुत ही कम मात्रा बहुत ही कम समय के लिए दी जाती है । इस औषधि की एक समय की मात्रा 60 मिलीग्राम से एक 100 मिलीग्राम तक होती है । इस औषधि को भोजन करने के पश्चात दूध एवं ब्राह्मी घृत के साथ लिया जा सकता है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

  • निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है ।
  • इस औषधि में पारा, गंधक एवं आर्सेनिक जैसे विषैले पदार्थ मौजूद होते हैं, इसलिए इस औषधि को बहुत ही कम समय के लिए लेना चाहिए ।
  • गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • यदि किसी व्यक्ति को सामान्य यादाश्त की कमजोरी हो तो ऐसी स्थिति में स्मृति सागर रस का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि सामान्य प्रयोग की जाने वाली औषधियां जैसे शंखपुष्पी, ब्राह्मी वटी इत्यादि का सेवन करना ज्यादा उचित होता है ।

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