सितोपलादि चूर्ण के गुण, फायदे उपयोग, दुष्प्रभाव Sitopaladi churna Uses, Benefits and Side Effects

By | February 27, 2020


सितोपलादि चूर्ण क्या है ? What is Sitopaladi Churna in Hindi


दोस्तों, आज इस लेख में हम आपको सितोपलादि चूर्ण के गुण फायदे उपयोग एवं दुष्प्रभाव sitopaladi churna Uses Benefits and Side Effects of के बारे में हिंदी में बताएँगे । दोस्तों इस लेख में हमने सितोपलादि चूर्ण के बारे में जो भी जानकारी दी है वो सभी प्रसिद्द ब्रांड्स जैसे dabur Zandu Baidyanath Patanjali के लिए एक जैसी ही है ।

सितोपलादि चूर्ण(Sitopadi Churna) एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसमें अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां पड़ी होती हैं । सितोपलादि चूर्ण का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि बहुत से ऐसे रोग होते हैं जो केवल सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग करने से ही समूल नष्ट होते हैं ।

सितोपलादि में मिश्री, छोटी हरी इलायची, दालचीनी एवं अन्य ऐसी जड़ी बूटियां होती हैं जो हमारे फेफड़ों के साथ-साथ हमारे संपूर्ण श्वसन तंत्र के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होती हैं ।

इसलिए हमने सितोपलादि चूर्ण के गुण फायदे (Sitopladi Churna Benefits in Hindi) उपयोग एवं दुष्प्रभाव का विस्तृत वर्णन किया है । आइए अब हम सितोपलादि चूर्ण के बारे में विस्तार से बात करेंगे ।



सितोपलादि चूर्ण के घटक द्रव्य Sitopaladi Churna Ingredients
 

सितोपलादि चूर्ण (Sitopadi Churna) में वंशलोचन, मिश्री, पीपल, छोटी इलायची तथा दालचीनी इन पांच आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग किया जाता है । वंशलोचन 100 ग्राम, मिश्री 200 ग्राम, पीपल 50 ग्राम, छोटी इलायची 25 ग्राम एवं दालचीनी 15 ग्राम ।

सर्वप्रथम इन सभी दवाइयों को सुखा लें एवं इसके बाद कूट पीसकर के अच्छी तरह मिलाकर किसी प्लास्टिक या कांच के बर्तन में सुरक्षित रखले ।  सितोपलादि चूर्ण बनकर तैयार है ।

सितोपलादि चूर्ण के लाभ Benefits of Sitopladi Churna

Sitopladi Churna एक ऐसी आयुर्वेदिक दवा है जिसका उपयोग अनेक रोगों में किया जाता है । हम यहां सितोपलादि चूर्ण के बारे में विस्तार से आपको बता रहे हैं ।

खांसी में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopaladi Churna benefits in Cough


सितोपलादि चूर्ण में दालचीनी, छोटी इलायची, वंशलोचन, मिश्री एवं पीपल जैसी देसी जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती है । जिस कारण सितोपलादि चूर्ण में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण आ जाते हैं ।

सितोपलादि चूर्ण किसी भी प्रकार की खांसी को दूर करने में लाभदायक सिद्ध होता है । यदि किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान खांसी कि शिकायत हो तो ऐसे में Sitopladi Churna का प्रयोग कराया जा सकता है ।

सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग करने से बार बार खांसी का उठना, छाती में दर्द होना, जकड़न होना एवं कफ से संबंधित बुखार में भी आराम मिलता है ।

गले की खराश में लाभकारी Sitopladi Churna Benefits in Throat Infection


सितोपलादि चूर्ण यदि गले में खराश की समस्या हो एवं दर्द भी हो रहा हो तो सितोपलादि चूर्ण के साथ गंधक रसायन, यशद भस्म एवं प्रवाल पिष्टी का प्रयोग कराया जा सकता है । लेकिन ध्यान रखें, गंधक रसायन का प्रयोग करने से पहले किसी अनुभवी एवं योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य करें ।

सितोपलादि चूर्ण के प्रभाव से गले का किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन दूर हो जाता है, क्योंकि सितोपलादि चूर्ण में एंटीमाइक्रोबॉयल तथा एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं  ।इसलिए गले की खराश में इस चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है ।

टॉन्सिल में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Tonsils

यदि गले में टॉन्सिल हो गए हो तथा कुछ खाते पीते समय गले में बहुत ज्यादा दर्द होता हो तो ऐसी स्थिति में भी सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग गंधक रसायन, प्रवाल पिष्टी, यशद भस्म एवं लोकनाथ रस के साथ कराया जा सकता है ।

इस दवा के प्रयोग से टॉन्सिल पैदा करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं तथा व्यक्ति का गला बहुत ही कम समय में बिल्कुल ठीक हो जाता है ।

तपेदिक में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in tuberculosis

सितोपलादि चूर्ण तपेदिक जैसी घातक बीमारी में बहुत अधिक लाभदायक होता है । तपेदिक बीमारी टीवी का ही एक प्रारंभिक रूप मानी जाती है ।

इस बीमारी में व्यक्ति को बहुत जल्दी थकान हो जाती हैं, भूख बहुत कम लगती है, रात्रि के समय पसीना बहुत अधिक आता है तथा व्यक्ति बार-बार खासता है ।जिस कारण व्यक्ति के फेफड़ों में बहुत ज्यादा दर्द बना रहता है ।

तपेदिक रोग माइकोबैक्टेरियम नमक रोगाणु के कारण होता है । सितोपलादि चूर्ण इन बैक्टीरिया को तुरंत नष्ट कर देता है । यदि तपेदिक बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में सितोपलादि चूर्ण का सही अनुपान में सेवन कराया जाए तो तपेदिक बीमारी ठीक हो जाती है ।

सितोपलादि चूर्ण शरीर में बुखार पैदा करने वाले खतरनाक विषाणु एवं जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है । इस चूर्ण के सेवन करने से खांसी के साथ-साथ कफ के कारण पैदा हुआ बुखार भी दूर हो जाता है ।

साथ ही अनेक छोटे-मोटे लक्षण जैसे थकान होना, भूख ना लगना एवं शरीर कमजोरी
दूर हो जाती है, और व्यक्ति अपने आप को काफी स्वस्थ और एक्टिव महसूस करता है ।

साइनस में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Sinus

सितोपलादि चूर्ण साइनस जैसी बीमारी में लाभकारी होता है । साइनस में व्यक्ति को बहुत ज्यादा जुखाम रहता है, जुकाम तथा एलर्जी रहती है तथा नाक के आसपास सूजन आ जाती है । इस स्थिति में सितोपलादि चूर्ण का लाभ कराने से बहुत जल्दी आराम मिलता है ।

अस्थमा में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Asthma

सितोपलादि चूर्ण अस्थमा जैसी बीमारी के लिए एक रामबाण औषधि है । यदि हम यह कहें कि सितोपलादि चूर्ण अस्थमा के लिए एक विशेष ओषधि होती है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा ।

सितोपलादि चूर्ण में ऐसी जड़ी बूटियां डाली जाती हैं जो हमारे फेफड़ों तथा श्वसन तंत्र को बहुत ज्यादा मजबूती एवं ऊर्जा प्रदान करती हैं । अस्थमा श्वसन तंत्र की ही एक बीमारी है जिसमें व्यक्ति के फेफड़े कमजोर हो जाते हैं तथा व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत महसूस होती है ।

थोड़ा सा चलने फिरने में ही सांस फूल जाता है और दिल घबराने लगता है । ऐसी स्थिति में सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग करने से बहुत ज्यादा आराम मिलता है, क्योंकि सितोपलादि चूर्ण फेफड़ों को नई ऊर्जा प्रदान करता है ।

मधुमेह में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Diabetes

सितोपलादि चूर्ण मधुमेह रोग की विशेष दवा है । सितोपलादि चूर्ण का यदि सही विधि के साथ सेवन किया जाए तो यह शरीर से ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है ।

सितोपलादि चूर्ण रक्त में मौजूद स्टार्ट एवं शर्करा को कंट्रोल करता है । सितोपलादि चूर्ण के सेवन से पोस्ट हाइपोग्लाइसीमिया कंट्रोल रहता है जिस कारण मधुमेह यानी डायबिटीज में काफी आराम मिलता है ।

एनीमिया में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna benefits in Anemia

हमारे शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो आयरन की कमी से एनीमिया रोग हो जाता है । जिस कारण आंखों के सामने अंधेरा छाना, भूख ना लगना, थकावट महसूस करना तथा शारीरिक कमजोरी महसूस करना जैसी समस्याएं महसूस होती है ।

दालचीनी, भृंगराज, अदरक के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ जैसे कि तांबा तथा चांदी इत्यादि पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं । जिस कारण सितोपलादि चूर्ण एनीमिया जैसी बीमारी से 
लड़ने में मददगार सिद्ध होता है ।

एलर्जी दूर करने में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Allergy

सितोपलादि चूर्ण श्वसन तंत्र की एलर्जी को तो दूर करता ही है साथ ही यह नाक से संबंधित हर प्रकार की एलर्जी को भी दूर करने में सहायक होता है । सितोपलादि चूर्ण के सही अनुपान में सेवन करने से नाक में खाज होकर छींक आना, आंखों से पानी आना, नजला जुखाम रहना, गले में खराश होना आदि संक्रमण में लाभ मिलता है ।

पाचन तंत्र में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Digestive System

सितोपलादि चूर्ण में जो जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती हैं वे हमारे श्वसन तंत्र को तो लाभ पहुंचाती ही हैं साथ ही हमारे पाचन तंत्र को अर्थात हमारे मैटो मेटाबॉलिज्म को भी स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होती हैं । सितोपलादि चूर्ण के नियमित सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं तथा हमारा मेटाबॉलिज्म स्वस्थ रहता है ।

माइग्रेन दूर करने में सहायक Sitopladi Churna Benefits in Migraine

सितोपलादि चूर्ण माइग्रेन को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है । माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को आधे सिर में या पूरे सिर में दर्द होता है । दर्द की तीव्रता बहुत तेज होती है तथा यह दर्द 4 से 5 घंटे तक लगातार बना रहता है ।

ज्यादातर यह दर्द दोपहर को 2:00 से 5:00 के बीच होता है । माइग्रेन में सितोपलादि चूर्ण को प्रयोग करने से काफी लाभ मिलता है । माइग्रेन की समस्या में सितोपलादि चूर्ण के साथ साथ शिरः शुलादी वज्र रस तथा अन्य दवाइयां भी प्रयोग की जा सकती हैं

सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग कैसे करें How to use Sitopladi Churna

सितोपलादि चूर्ण को अलग-अलग बीमारियों में सेवन करने की विधि, मात्रा एवं अनुपान अलग-अलग होता है । आइए अब हम बात करते हैं कि अलग-अलग बीमारियों में सितोपलादि चूर्ण को किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है, ताकि आपको सितोपलादि चूर्ण का पूरा लाभ मिल सके ।

बुखार में सितोपलादि चूर्ण को लेने कि विधि How to use Sitopladi Churna in Feve ?

बुखार में सितोपलादि चूर्ण को इस प्रकार लिया जा सकता है । 2 ग्राम सितोपलादि चूर्ण, 1 ग्राम शहद, 250 मिलीग्राम प्रवाल पिष्टी तथा 25 मिलीग्राम यशद भस्म । इन चारों को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है । उपरोक्त खुराक एक समय की है ।

सूखी खांसी में सितोपलादि चूर्ण को लेने की विधि How to use Sitopladi Churna in Dry Cough

सूखी खांसी के लिए सितोपलादि चूर्ण को इस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है । 5 ग्राम सितोपलादि चूर्ण, 2.5 ग्राम शहद । दोनों को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से सूखी खांसी में लाभ मिलता है ।

कफ में सितोपलादि चूर्ण को लेने की विधि How to use Sitopladi Churna in Cough

5 ग्राम सितोपलादि चूर्ण तथा 5 ग्राम शहद में मिलकर सुबह शाम चाटें ।  साथ में दूध का सेवन करने से कफ में लाभ मिलता है । 

सितोपलादि चूर्ण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण प्रश्न Some Important Questions regarding Sitopladi Churna

सितोपलादि चूर्ण को भोजन से पहले लिया जा सकता है ?

जी नहीं । सितोपलादि चूर्ण को भोजन करने के पश्चात ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि भोजन करने से पहले सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से छाती में जलन होने की संभावना होती है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण को खाली पेट लिया जा सकता है ?

जी नहीं सितोपलादि चूर्ण को खाली पेट नहीं लेना चाहिए ।

क्या सितोपलादि चूर्ण को ताजे पानी के साथ लिया जा सकता है ?

देखिए, आप सितोपलादि चूर्ण को ताजे पानी के साथ भी सेवन कर सकते हैं । लेकिन यदि आप सितोपलादि चूर्ण का पूर्ण लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो इस चूर्ण को कभी भी पानी के साथ नहीं लेना चाहिए । इस चूर्ण को शहद या घी के साथ ही प्रयोग करें  ।

क्या सितोपलादि चूर्ण गर्भवती महिलाओं को दिया जा सकता है ?

जी हाँ । सितोपलादि चूर्ण को गर्भवती महिलाओं को दिया जा सकता है । यह गर्भवती महिलाओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण स्तनपान करने वाली माताओं को प्रयोग कराया जा सकता है ?

जी हां । सितोपलादि चूर्ण स्तनपान करने वाली माताओं को प्रयोग कराया जा सकता है । यह पूर्ण रूप से सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण को ड्राइविंग से पहले प्रयोग किया जा सकता है ?

जी हां । ड्राइविंग से पहले सितोपलादि चूर्ण को प्रयोग किया जा सकता है । क्योंकि इससे किसी प्रकार का चक्कर आना, उल्टी आना, नींद आना जैसी समस्याएं नहीं होती हैं ।

क्या सितोपलादि चूर्ण का सेवन शराब के साथ किया जा सकता है ?

जी नहीं ।
सितोपलादि चूर्ण का सेवन शराब के साथ नहीं करना चाहिए ।क्योंकि इससे हमारे शरीर में केमिकल रिएक्शन हो सकता है ।

क्या इस चूर्ण का सेवन करने से नशे की आदत पड़ सकती है ?

जी नहीं । 
सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से किसी भी प्रकार की नशे की लत नहीं पड़ती है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से व्यक्ति मदहोश हो सकता है ?

जी नहीं । सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से व्यक्ति मदहोश नहीं होता है । क्योंकि इसमें इस प्रकार का कोई तत्व नहीं पाया जाता है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण की ज्यादा मात्रा ली जा सकती है ?

जी नहीं । सितोपलादि चूर्ण को एक निश्चित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए । ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपको गैस्ट्राइटिस की प्रॉब्लम हो सकती है ।

यदि किसी बच्चों को खांसी हो तो क्या उसे सितोपलादि चूर्ण दिया जा सकता है ?

जी हां । बच्चों को खांसी की समस्या हो तो बच्चों को सितोपलादि चूर्ण दिया जा सकता है । लेकिन ध्यान रखें बच्चों को यह चूर्ण बहुत ही नियंत्रित मात्रा में दिया जाता है ।आप बच्चों को प्रतिदिन 500 से 1000 मिलीग्राम यानी आधा से 1 ग्राम सितोपलादि चूर्ण शहद के साथ दे सकते हैं । साथ में दूध का सेवन अवश्य कराए । 


क्या सितोपलादि चूर्ण ब्रोंकाइटिस की समस्या में फायदा करता है ?

 

जी हां । सितोपलादि चूर्ण ब्रोंकाइटिस की समस्या में बहुत अधिक फायदा करता है  ।
सितोपलादि चूर्ण में ऐसी जड़ी बूटियां डाली जाती हैं जो फेफड़ों को ताकत और ऊर्जा प्रदान करती है । जिससे ब्रोंकाइटिस बहुत जल्दी ठीक हो जाता है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से लगातार 
छीकने व् नाक से पानी आने कि समस्य में लाभ मिलता है ?

छीकने व् नाक से पानी बहना एक प्रकार का संक्रमण है तथा सितोपलादि चूर्ण इस प्रकार के संक्रमण को तुरंत दूर कर देता है । सितोपलादि चूर्ण के सेवन करने से नाक का किसी भी प्रकार का इंफेक्शन हो बहुत जल्दी ठीक हो जाता है ।

क्या खांसी में सितोपलादि चूर्ण का सेवन किया जा सकता है ?

जी हां खांसी में सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से बहुत आराम मिलता है तथा सितोपलादि चूर्ण का किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है । व्यस्को को खांसी में 2 से 4 ग्राम सितोपलादि चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटना चाहिए ।

सितोपलादि चूर्ण का सेवन रोग में आराम पाने के लिए कितने समय तक किया जा सकता है ?

इस बारे में आप अपने चिकित्सक से संपर्क करें । लेकिन किसी भी अवस्था में 1 महीने से ज्यादा नहीं करना चाहिए ।

सितोपलादि चूर्ण को दिन में कितनी बार लिया जा सकता है ?

सितोपलादि चूर्ण को दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है ।

क्या सितोपलादि चूर्ण में चीनी होती है ?

जी हां । सितोपलादि चूर्ण में मिश्री होती है जो कि चीनी का ही एक रूप है ।

सितोपलादि चूर्ण कौन-कौन सी कंपनियां बनाती हैं ?

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