शुक्रमातृका वटी के फायदे गुण उपयोग एवं नुकसान Shukramatrika Vati ke fayde or nuksan

By | July 4, 2020

शुक्रमातृका वटी क्या है? Shukramatrika Vati kya hai?

शुक्रमातृका वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पुरुषों के वीर्यदोष एवं प्रमेह रोग की एक सफल औषधि है । इस औषधि का सेवन करने से पुरुषों की खोई हुई शक्ति वापस प्राप्त होती हैं । यह औषधि वीर्यदोष के अतिरिक्त पाचन तंत्र पर भी अपना बहुत अच्छा प्रभाव डालती है । उसका कारण यह है कि, इस औषधि में हरड़, बहेड़ा, आंवला सहित धनिया, जीरा एवं अन्य बहुत सी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जो हमारे पाचन तंत्र के लिए लाभदायक होती है ।

यह औषधि जठराग्नि प्रदीप्त करती है, शरीर में रहने वाले मंद मंद ज्वर को नष्ट करती है तथा पुरुष को बिल्कुल निरोगी बना देती है । यह औषधि वीर्य को गाढ़ा करती है तथा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या और उनकी क्वालिटी को भी बेहतर करती हैं । यह औषधि वीर्य वाहिनी नाड़ियों एवं गुर्दे पर सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।

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शुक्रमातृका वटी के घटक द्रव्य Shukramatrika Vati ke ghatak dravy

  • शुद्ध पारा – ४० ग्राम
  • शुद्ध गन्धक – ४० ग्राम
  • अभ्रक भस्म – ४० ग्राम
  • लोहभस्म – ४० ग्राम
  • छोटी इलायची के दाने – २० ग्राम
  • गोखरू – २० ग्राम
  • हरड़ – २० ग्राम
  • बहेड़ा – २० ग्राम
  • आंवला – २० ग्राम
  • तेजपात – २० ग्राम
  • रसौत – २० ग्राम
  • धनियां – २० ग्राम
  • चव्य – २० ग्राम
  • जीरा – २० ग्राम
  • तालीस पत्र – २० ग्राम
  • सोहागे का फूला – २० ग्राम
  • मीठे अनार के दाने – २० ग्राम
  • शुद्ध गुग्गुलु – १० ग्राम

शुक्रमातृका वटी को बनाने की विधि Shukramatrika Vati kaise banaye

इस औषधि को बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध गंधक एवं शुद्ध पारे को पत्थर के खरल में डालकर अच्छी तरह घोटते हैं तथा कज्जली बना लेते हैं । इसके पश्चात शेष सभी द्रव्यों को अलग-अलग अच्छी तरह कूट पीसकर तथा छानकर इस द्रव्य में डालकर खूब अच्छी तरह घुटाई करते हैं । अंत में अनार के रस या गोखरू के काढ़े के साथ घुटाई करते हुए 2-2 रत्ती की गोलियां बना ली जाती हैं । इन गोलियों को छाया में सुखा या जाता है, इसे ही शुक्रमातृका वटी कहते हैं ।

शुक्रमातृका वटी के फायदे Shukramatrika Vati ke fayde

यह औषधि वीर्यवाहिनी नाड़ियों मूत्र संस्थान एवं गुर्दे से संबंधित रोगों में बहुत अच्छा फायदा करती है । यहां हमने इस औषधि के फायदों के बारे में वर्णन किया है ।

स्वप्नदोष में लाभकारी शुक्रमात्रिका वटी

जिन युवकों ने बचपन की गलतियों के कारण बहुत अधिक हस्तमैथुन, गुदामैथुन या अप्राकृतिक मैथुन करके अपना सत्यानाश कर लिया हो तथा जिन का वीर्य पानी की तरह पतला हो गया हो तथा जिन्हें सप्ताह में तीन से चार बार स्वपनदोष होता ही । उन्हें इस औषधि का सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

इस औषधि के साथ सहायक औषधि के रूप में चंद्रप्रभा वटी का सेवन भी अवश्य करना चाहिए । स्वपनदोष के रोगियों को एक विशेष बात का ध्यान रखना चाहिए वह यह है कि, ऐसे रोगियों को अपना पेट और दिमाग दोनों ही बिल्कुल साफ रखने चाहिए ।

यदि रोगी को कब्ज होगी, पेट में गैस बनेगी, तो भी रात को स्वप्नदोष होने की संभावना बन जाती है । यदि मन में कामुक एवं गंदे विचार आते रहेंगे तो भी औषधि अपना सही काम नहीं कर पाएगी ।

शीघ्रपतन में लाभकारी शुक्रमातृका वटी

जिन युवकों का अत्यधिक स्त्री मैथुन, बढ़ती आयु, मानसिक थकान या किसी अन्य कारण से शीघ्रपतन की समस्या हो गई हो उन्हें शुक्रमात्रिका वटी की एक एक गोली सुबह शाम सेवन कराने से लाभ मिलता है ।

इस रोग में सहायक औषधि के रूप में काम चूड़ामणि रस की एक एक गोली, हिमालय कॉन्फिडो की एक-एक गोली तथा चरक नियो की एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यदि इंद्री (लिंग) में ढीलापन आ गया हो तथा लिंग में सही प्रकार से तनाव ना आता हो तो ऐसी स्थिति में किसी अच्छी कंपनी का oil जैसे कि हमदर्द का तीला अलमास या तिला डायनामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है ।

नपुंसकता में लाभकारी शुक्रमातृका वटी

यदि नपुंसकता जन्मजात नहीं है तो इसका इलाज संभव है । यदि बहुत अधिक हस्तमैथुन, गुदामैथुन, अप्राकृतिक मैथुन के कारण नपुंसकता की स्थिति आ गई हो तो ऐसी स्थिति में शुक्रमातृका वटी एक एक गोली को काम चूड़ामणि रस की सेवन करने से लाभ मिलता है ।

मूत्र संक्रमण में लाभकारी शुक्रमातृका वटी

यह औषधि मूत्र संस्थान एवं गुर्दों से संबंधित संक्रमण को भी दूर करती है । यदि गुर्दे में या मूत्र मार्ग (यूरिन पाइप) में पथरी हो तो उस स्थिति में यह औषधि लाभकारी सिद्ध होती है । इस औषधि का विशेष प्रभाव वात वाहिनी नाड़ियों एवं मूत्र संस्थान पर पड़ता है।। यह इन अंगों की कमजोरी को दूर कर इन्हें ताकत प्रदान करती है ।

शुक्रमातृका वटी के अन्य लाभ

यह औषधि वीर्य को गाढ़ा करती है । यह रक्त में हिमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है तथा रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि करती है । यह वात एवं पित्त के कारण उत्पन्न होने वाले प्रमेह रोग को दूर करने में मददगार होती है । यह मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालती है जिससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है, तनाव दूर होता है तथा रात को नींद भी अच्छी आती है । यह औषधि मूत्र मार्ग के इन्फेक्शन जैसे पेशाब की जलन आदि में बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती हैं ।

शुक्रमातृका वटी की मात्रा एवं सेवन विधि

इस औषधि की एक-एक गोली सुबह एवं शाम को भोजन के पश्चात अनार के रस, बकरी के दूध या पानी के साथ ले सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

इस औषधि को योग्य चिकित्सक की सलाह एवं देखरेख में ही लेना चाहिए । सेक्स संबंधी समस्याओं में इस औषधि का सेवन करते समय खानपान एवं आहार-विहार का विशेष ध्यान रखना परम आवश्यक है अन्यथा इस औषधि का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा । रोगी को सेक्सी एवं गंदे विचारों से दूर रहना चाहिए, अश्लील किताबें पढ़ना या अश्लील वीडियो देखना नहीं चाहिए । यदि कब्ज की समस्या हो तो पंचसकार चूर्ण या त्रिफला चूर्ण का सेवन किया जा सकता है ।

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