मृग श्रृंग भस्म के फायदे नुक्सान उपयोग विधि एवं सेवन विधि Shring (Shringa) Bhasma Uses Benefits & Side Effects in Hindi

By | August 18, 2020

मृग श्रृंग भस्म क्या है? What is Shring (Shringa) Bhasma in hindi

मृग श्रृंग भस्म (Mrig Shring (Shringa) Bhasma) जिसे श्रृंग भस्म भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जो मुख्य रूप से निमोनिया, बलगम वाली खांसी, समान्य सर्दी जुखाम, इनफ्लुएंजा, सीने का दर्द, हार्ट का दर्द, बुखार, टीबी कारण होने वाला बुखार, रिकेट्स, हड्डियों से संबंधित रोग, सूखा रोग, तपेदिक ज्वर, पायरिया आदि रोगों में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

यदि हम इस औषधि के नाम के बारे में बात करें तो इस औषधि के नाम में दो शब्द आते हैं मृग एवं श्रंग । मृग का अर्थ होता है हिरण तथा श्रृंग का अर्थ होता है हिरण के सींग । इस प्रकार इस औषधि का नाम का अर्थ है कि यह ओषधि हिरण के सिंह को भस्म बनाकर बनाई जाती है । इसको बनाने के लिए बारहसिंघा के टूटे हुए सींगो का प्रयोग किया जाता है ।

इस भस्म को अंग्रेजी में Deer Horn Ash भी कहा जाता है । हम आपको बता दें की इस भस्म को बनाने के लिए हिरण को मारना कानूनी अपराध है । इसलिए जब हिरन आपस में लड़ते हैं एक दूसरे को सींग मारते हैं, जिससे उनके सींग टूट कर गिर जाते हैं । इनको टूटे हुए सींगो का ही आयुर्वेदिक भस्म बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है ।

श्रृंग भस्म के घटक द्रव्य Shring (Shringa) Bhasma ingredients in hindi

  • बारहसिंघा के टूटे हुए सींग
  • आक के पत्ते

श्रृंग भस्म बनाने की विधि How to prepare Shring (Shringa) Bhasma in hindi

वैसे तो बाजार में श्रृंग भस्म बनी बनाई ही मौजूद है तथा इसे बैद्यनाथ, डाबर तथा अन्य कंपनियों के द्वारा बनाया जाता है । लेकिन अपने पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए हम यहां श्रृंग भस्म को बनाने की विधि बता रहे हैं ।

  1. सबसे पहले बारहसिंघा के शुद्ध एवं सूखे टुकड़ों को प्राप्त कर ले तथा इनके वजन से 4 गुना ज्यादा आक के पत्ते कूटकर उनकी लुग्दी बना लें ।
  2. एक सूती कपड़ा जमीन पर बिछाय तथा उस पर आक के पत्तों की लुगदी को बिछा दे ।
  3. इस परत के ऊपर सींग के टुकड़ों को अलग-अलग इस प्रकार रखें कि यह टुकड़े आपस में ना मिल पाए ।
  4. इन टुकड़ा के ऊपर लुगदी की दूसरी परत बिछा दें ।
  5. इस कपड़े की पोटली बना लें तथा पोटली को मिट्टी से अच्छी तरह कवर करदे, ताकि इसमें वायु प्रवेश न कर पाए ।
  6. कपडमिट्टी सूखने पर गजपुर करने पर सफेद रंग की मुलायम भसम प्राप्त हो जाती है ।
  7. यदि भस्म में कोई टुकड़ा काला या कच्चा रह जाए तो उसे आक के रस में 3 घंटे तक खरल करके टिकिया बनाले तथा दोबारा संपुट करने के पश्चात गज फुट करें, जिससे उत्तम क्वालिटी की भस्म बन जाती है ।

नोट: हम आपको सलाह देते हैं कि आप बाजार से बनी बनाई श्रंग भसम प्राप्त कर लें ।

श्रृंग भस्म की रासायनिक संरचना

श्रृंग भस्म का निर्माण करते समय हिरण के सींग की रासायनिक संरचना में परिवर्तन हो जाता है । लेकिन इस सब के पश्चात भी श्रृंग भस्म में कैलशियम, मैग्निशियम, जस्ता एवं अमीनो अम्ल मौजूद होते हैं ।

श्रृंग भस्म औषधीय गुण Shring (Shringa) Bhasma Ayurvedic Properties in hindi

श्रृंग भस्म मुख्य रूप से कफ निस्सारक और कफ भंजक के रूप में काम करता है। श्रृंग भस्म के औषधीय गुणों की सूची नीचे दी गई है:

  1. कफ निस्सारक
  2. कफ भंजक
  3. कासरोधक
  4. जीवाणुस्तम्भन
  5. जीवाणुरोधी
  6. रोगाणुरोधी
  7. सौम्य पीड़ा-नाशक
  8. सौम्य ज्वर-नाशक

श्रृंग भस्म के चिकित्सकिय संकेत Shring (Shringa) Bhasma Medical Uses in Hindi

श्रृंग भस्म को बलगम वाली खांसी, घरघराहट, छाती में कफ जमाव, सीने में जकड़न, सीने में दर्द या ज्वर के साथ जुड़े हुए श्वसन विकारों में उपयोग किया जाता है। इसके मुख्य उपचारात्मक संकेतों में शामिल है:

  1. बलगम वाली खाँसी
  2. ब्रोंकाइटिस (श्वसनीशोध)
  3. परिफुफ्फुसशोथ
  4. निमोनिया
  5. पसलियों के बीच का तंत्रिका शूल
  6. इन्फ्लुएंजा (श्‍लैष्मिक ज्‍वर)
  7. सामान्य शीत
  8. छाती में दर्द
  9. हृद्‍शूल
  10. क्षय रोग में ज्वर या जीर्ण ज्वर
  11. सूखा रोग
  12. पायरिया
  13. वृक्कगोणिकाशोध

श्रृंग भस्म के फायदे एवं उपयोग Shring (Shringa) Bhasma Benefits in Hindi

श्रंग भस्म का उपयोग विभिन्न रोगों खास करके श्वसन रोगों, ह्रदय रोगों एवं अस्थि विकारों में किया जाता है । आइए इस भस्म के उपयोगों के बारे में विस्तार से जानते हैं ।

बलगम वाली खांसी में लाभदायक

श्रृंग भस्म बलगम वाली खांसी मैं बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है । खांसी के अलावा यह ओषधि फेफड़ों के संक्रमण एवं सांस लेने में समस्या मैं भी लाभ पहुंचाती है । इन समस्याओं में श्रृंग भस्म को प्रयोग करने की विधि इस प्रकार है ।

उपचार मात्रा
सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna) 2 ग्राम *
श्रृंग भस्म – Shring Bhasma 125 मिलीग्राम *
टंकण भस्म (Tankan Bhasma) 250 मिलीग्राम *
प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti) 125 मिलीग्राम *
* दिन में दो बार शहद के साथ

इस नुस्खे का प्रयोग करने से छाती में जमी हुई मोटी से मोटी बलगम भी पिंघल कर बाहर निकल जाती है । जिससे फेफड़े बहुत हल्के फुल्के हो जाते हैं एवं सांस लेने में होने वाली दिक्कत में बहुत लाभ मिलता है ।

छोटे बच्चों की निमोनिया में लाभदायक श्रृंग  भस्म

छोटे बच्चों को अक्सर ही निमोनिया की समस्या हो जाती है तथा थोड़ी सी ठंड लगने पर ही उनकी पसलियां चलने लगती हैं । ऐसी स्थिति में आयुर्वेद चिकित्सकों के द्वारा श्रृंग भस्म का प्रयोग किया जाता है । निमोनिया एवं पसली चलने पर श्रृंग भस्म की 30 से 60 मिलीग्राम मात्रा शहद के साथ दिन में तीन से चार बार चटाने से बहुत अच्छा मिलता है ।

फुफ्फुसावरणशोथ में भकारी श्रृंग भस्म

फेफड़ों के आसपास एक पतली झिल्ली मौजूद होती है जिसमें कभी-कभी सूजन आ जाती है । इस झिल्ली को फुफ्फुसावरणशोथ कहा जाता है । इस झिल्ली में सूजन आने के कारण रोगी की छाती में बहुत तेज दर्द होता है, सांस लेने में दिक्कत होती है तथा छाती से घड घड की आवाज आती है । इस समस्या में श्रृंग भस्म को सेवन करने की विधि इस प्रकार है ।

उपचार मात्रा
श्रृंग भस्म 250 मिलीग्राम *
पिप्पली चूर्ण 125 मिलीग्राम *
शहद 1 चम्मच *
* एक दिन में दो या तीन बार

तपेदिक बुखार में लाभकारी श्रृंग भस्म

तपेदिक बुखार माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकल्स बैक्टीरिया के कारण होता है । इस रोग का मुख्य कारण मायकोबैक्टीरियम टूबरकल जीवाणु होते हैं । श्रृंग भस्म इन जीवानुओ को गतिहीन कर देती है जिस कारण इस रोग में बहुत अच्छा फायदा मिलता है ।

तपेदिक रोग में श्रृंग भस्म को स्वर्ण भस्म के साथ देने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । यदि बुखार के साथ शरीर में दर्द एवं कमजोरी महसूस हो रही हो तो इस स्थिथि में प्रवाल पिष्टी का सेवन भी कराया जा सकता है ।

हृद्‍शूल में लाभकारी श्रंग भस्म

श्रृंग भस्म,हीरक भस्म (Heerak Bhasma) और स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) आयुर्वेदिक उपचार हैं जो हृद्‍शूल और छाती के दर्द में मदद करते हैं।

श्रृंग भस्म को 5 मिलीलीटर घी के साथ उपयोग करने पर यह अकेले ही हल्के से मध्यम मामलों में मदद कर सकता है। यह संयोजन ह्रदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह में सुधार करता है और छाती में जकड़न और दर्द को कम करता है। यह छाती में दबाव को भी कम करता है। गंभीर मामलों में, हो सकता है की श्रृंग भस्म अकेले काम ना करे और निम्न संयोजन की आवश्यकता पड़ सकती है।

उपचार मात्रा
श्रृंग भस्म 250 मिलीग्राम *
हीरक भस्म (Hirak Bhasma) 5 मिलीग्राम *
स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) 10 मिलीग्राम *
पुष्करमूल 250 मिलीग्राम *
प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti) 250 मिलीग्राम *
* दिन में दो बार घी के साथ

सूखा रोग में लाभकारी श्रंग भस्म

प्रवाल पिष्टी (250 मिलीग्राम) और गोदन्ती भस्म (250 मिलीग्राम) के साथ श्रृंग भस्म (125 मिलीग्राम) सूखा रोग में अस्थि स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह बच्चे को शक्ति प्रदान करता है और समग्र विकास में सुधार करता है।

श्रृंग भस्म के अन्य फायदे

श्रंग भस्म के कुछ अन्य लाभ हैं जो इस प्रकार है ।

  1. यह भस्म काली खांसी में लाभ पहुंचाती है ।
  2. यदि खांसी में श्वास नली में जलन हो रही हो तो यह ओषधि लाभदायक होती है ।
  3. यह ओषधि दूषित कफ की उत्पत्ति को बंद करती है ।
  4. बहुत अधिक काम करने से आने वाली कमजोरी में यह उसकी लाभदायक होती है ।
  5. यह औषधि सिर दर्द में फायदा पहुंचाती है ।
  6. इस औषधि का सेवन करने पर नाखून विकृति अर्थात नाखूनों के रोग में लाभ मिलता है ।
  7. यह ओषधि गुर्दों एवं मूत्र मार्ग के संक्रमण में लाभकारी होती है ।

मात्रा और सेवन विधि

श्रृंग भस्म की सामान्य खुराक इस प्रकार है:
शिशु 20 से 60 मिलीग्राम *
बच्चे 50 से 125 मिलीग्राम *
वयस्क 125 से 375 मिलीग्राम *
गर्भावस्था 50 से 125 मिलीग्राम *
वृद्धावस्था 125 से 250 मिलीग्राम *
अधिकतम संभावित खुराक (प्रति दिन या 24 घंटों में) 750 मिलीग्राम (विभाजित मात्रा में)
* दिन में दो बार निम्नलिखित सह-औषधि के साथ

सर्वश्रेष्ठ सह-औषधि

स्थिति सह-औषधि
कफ निस्सारक क्रिया के लिए मिश्री = 3 ग्राम
बलगम उत्पादन कम करने के लिए शहद = 1 चम्मच
बहती नाक या पतले बलगम को कम करने के लिए पान = 1 पत्ता
फेफड़ों की समस्या के कारण छाती में दर्द पिप्पली (125 मिलीग्राम) और शहद (1 चम्मच)
हृद्‍शूल घी (5 मिलीलीटर)
तपेदिक में ज्वर प्रवाल पिष्टी (250 मिलीग्राम) और गिलोय सत्व (250 मिलीग्राम)
निम्न हड्डी घनत्व, ऑस्टियोपोरोसिस, सूखा रोग प्रवाल पिष्टी (250 मिलीग्राम) और गोदन्ती भस्म (250 मिलीग्राम)

विपरीत संकेत

श्रंग भस्म को सूखी खांसी में भूलकर भी प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि श्रंग भस्म श्वसन नली को सुखा देती है । जिस कारण सुखी खांसी और ज्यादा बिगड़ सकती हैं तथा स्थिति गंभीर हो सकती हैं ।

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