शतावरी क्या है? Shatavari kya hai?
शतावरी एक जड़ी बूटी है जो भारत के हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है । हिमालय क्षेत्र में केवल शतावरी ही नहीं बल्कि अन्य बहुत सी जड़ी बूटियां पाई जाती है । शतावरी को हम आयुर्वेद का वरदान कह सकते हैं क्योंकि यह जड़ी बूटी पुरुषों एवं स्त्रियों के अनेकों में प्रयोग की जाती है ।
शतावरी का सेवन करने से पुरुषों के यौन रोग, शरीर की कमजोरी, डायबिटीज, पाचन संस्थान के रोग तथा महिलाओं की समस्याएं जैसे गर्भाशय की कमजोरी, बांझपन, लिकोरिया आदि जैसी समस्याओं में बहुत अच्छा आराम मिलता है ।
शतावरी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो पुरुषों एवं महिलाओं दोनों के ही प्रजनन अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है । आयुर्वेद में कहां गया है शतावरी 100 लोगों की एक दवाई है अर्थात इस जड़ी-बूटी को विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जा सकता है ।
शतावरी मस्तिष्क से संबंधित रोगों में भी बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती है, जैसे मानसिक तनाव, अनिद्रा तथा मानसिक दौरे पड़ना इत्यादि । बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कमजोरी आने लगती है तथा व्यक्ति को थकान महसूस होती है, इस स्थिति में शतावरी को एक टॉनिक के प्रयोग किया जा सकता है । यह जड़ी बूटी बढ़ती उम्र की समस्याओं को दूर करने के लिए भी प्रयोग की जाती है ।
आयुर्वेद में तो शतावरी को जड़ी बूटियों की रानी तक कहा गया है । इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शतावरी में कितने गुण मौजूद होंगे ।
शतावरी के विभिन्न नाम Shatavari ke vibhinn naam
- Asparagus in Hindi or Asparagus meaning in Hindi- सतावर, सतावरि, सतमूली, शतावरी, सरनोई
- Shatavari in English- Wild asparagus (वाईल्ड एस्पैरागस)
- Asparagus in Sanskrit-शतावरी, शतपदी, शतमूली, महाशीता, नारायणी, काञ्चनकारिणी, पीवरी, सूक्ष्मपत्रिका, अतिरसा, भीरु, नारायणी, बहुसुता, बह्यत्रा, तालमूली, नेटिव एस्पैरागस (Native asparagus)
- Asparagus in Urdu- सतावरा (Satavara)
- Asparagus in Oriya- चोत्तारु (Chhotaru), मोहनोले (Mohnole)
- Asparagus in Gujarati- एकलकान्ता (Ekalkanta), शतावरी (Shatavari)
- Asparagus in Tamil or Asparagus meaning in tamil- किलावरि (Kilavari), पाणियीनाक्कु (Paniyinakku)
- Asparagus in Telugu or Asparagus in telugu- छल्लागडडा (Challagadda), एट्टावलुडुटीगे (Ettavaludutige);
- Asparagus in Bengali- शतमूली (Shatamuli), सतमूली (Satmuli)
- Asparagus in Punjabi- बोजान्दन (Bozandan); बोजीदान (Bozidan)
- Asparagus in Marathi- अश्वेल (Asvel), शतावरी (Shatavari)
- Asparagus in Malayalam- शतावरि (Shatavari), शतावलि (Shatavali)
- Asparagus in Nepali- सतामूलि (Satamuli), कुरीलो (Kurilo)
- Asparagus in Arabic- शकाकुल (Shaqaqul)
- Asparagus in Persian- शकाकुल (Shaqaqul)
शतावरी के उपयोगी भाग Shatavari ke upyogi bhaag
शतावरी के निम्नलिखित उपयोगी भाग होते हैं जिनका प्रयोग किया जाता है ।
- जड़
- जड़ से तैयार काढ़ा
- पत्ते
- पेस्ट
- चूर्ण (shatavari churna)
मुख्य रूप से शतावरी की जड़ों का चूर्ण ही शतावरी पाउडर के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
शतावरी की सेवन विधि Shatavari ki sevan vidhi in hindi
शतावरी को निम्न प्रकार से प्रयोग कर सकते हैं ।
- शतावरी की जड़ों का काढ़ा बनाकर
- जड़ों का चूर्ण बनाकर
- शतावरी की जड़ों को भूनकर
- शतावरी की जड़ों का काढ़ा बनाने के लिए शतावरी की जड़ लें तथा उन्हें पानी में डालकर पानी को उबालें । जब पानी आधा रह जाए तो समझे शतावरी का काढ़ा बनकर तैयार है ।
- शतावरी का चूर्ण बाजार में बना बनाया मिलता है इसे आप बना बनाया ही खरीदें ।
शताब्दी की जड़ों को भूनकर कैसे प्रयोग करें?
आइए आप जानते हैं शतावरी की जड़ों को भूनकर कैसे प्रयोग किया जा सकता है ।
- लगभग आधा किलो शतावरी की जड़ों को धो लें तथा काट कर रख ले ।
- इन जड़ों पर ओलिव आयल लगा ले तथा नमक और काली मिर्च छिड़क दें ।
- इन जड़ों को तवे पर रखकर अच्छी तरह भूनकर इनका प्रयोग कर सकते हैं ।
शतावरी और लहसुन की सब्जी बना कर खाएं
शतावर और लहसुन की सब्जी भी बहुत अधिक पौष्टिक होती है, जिसको बनाने की विधि भी बहुत आसान है । इसके लिए कढ़ाई में दो से तीन चम्मच नारियल का तेल डालें, हल्की आंच पर तेल को गर्म करें और शतावरी काट कर डाल दें ।
स्वाद अनुसार नमक एवं काली मिर्च डाल दीजिए । 10 मिनट के पश्चात कढ़ाई को आंच से उतार लीजिए । ध्यान रखें जब सब्जी अच्छी तरह पक जाए तो ही इसका सेवन करें
शतावरी के फायदे Shatavari ke fayde in hindi
जैसा कि हमने आपको बताया कि शतावरी को जड़ी बूटियों की रानी कहा जाता है क्योंकि यह अनेक रोगों में फायदा पहुंचाती है । आइए जानते हैं यह रोग कौन कौन से हैं ।
अनिंद्रा मैं लाभकारी शतावरी चूर्ण
बहुत से लोगों का अनिंड्रा अर्थात नींद ना आने की समस्या होती है । इस समस्या में व्यक्ति रात भर करवटें बदलता रहता है । ऐसी स्थिति में 2 से 4 ग्राम शतावरी चूर्ण को सुबह एवं शाम को गर्म दूध के साथ सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । शतावरी चूर्ण को शहद या घी के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं, ऊपर से गर्म दूध पी लीजिए ।
गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद शतावरी चूर्ण
शतावरी चूर्ण गर्भवती महिलाओं के लिए भी बहुत अधिक फायदेमंद होता है । इसके सेवन की विधि इस प्रकार है ।
शतावरी, सोंठ, अश्वगंधा, मुलेठी तथा भृंगराज इन पांचों जड़ी बूटियों को समान मात्रा में ले ले तथा अच्छी तरह साफ करके एवं सूखा कर इनका चूर्ण बना लें । इस चूर्ण को एक 1 या दो 2 ग्राम सुबह शाम बकरी के दूध के साथ गर्भवती महिला को सेवन करना चाहिए । इससे गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है ।
स्तनों में दूध ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने में लाभकारी शतावरी
बहुत सी माताएं बहने ऐसी होती हैं जिन्हें डिलीवरी के बाद दूध नहीं उतरता है तथा उनके स्तनों में दूध की कमी हो जाती है । ऐसी स्थिति में माता की गोद में पल रहे शिशु का पेट नहीं भरता है तथा वह भूख के कारण बार-बार रोता है ।
ऐसी स्थिति में 5 से 10 ग्राम शतावरी की जड़ के चूर्ण को माताओं एवं बहनों को दूध के साथ सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है तथा स्तनों में दूध की वृद्धि होने लगती हैं । इस प्रयोग को डिलीवरी के बाद शुरू किया जा सकता है । इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है ।
शारीरिक कमजोरी दूर करने में लाभदायक शतावरी
शतावरी एक पौष्टिक वीर्य वर्धक रसायन है जो शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है । 10 ग्राम शतावरी चूर्ण को समान मात्रा में मिश्री मिलाकर दूध के साथ सुबह शाम सेवन किया जा सकता है । इसके अतिरिक्त आप चाहें तो शतावरी चूर्ण में घी मिलाकर भी चाट सकते हैं तथा ऊपर से दूध पी सकते हैं ।
योन शक्ति बढ़ाने मैं फायदेमंद शतावरी
शतावरी में पुरुषों की योन शक्ति को बढ़ाने के गुण मौजूद होते हैं । शतावरी एक प्राकृतिक कामोद्दीपक है । यह पुरुषों में टेस्टोस्टरॉन के स्तर को भी बढ़ाता है जिससे पुरुषों की योन शक्ति एवं कामउत्तेजना में वृद्धि होती है । शतावरी चूर्ण का सेवन करने से लिंग में तनाव ना आना एवं वीर्य का पतलापन जैसी समस्या भी दूर होती है । इन सभी स्थितियों में शतावरी चूर्ण को सफेद मूसली के चूर्ण के साथ सेवन किया जा सकता है ।
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वीर्य दोष ठीक करने में लाभकारी शतावरी
यदि किसी व्यक्ति का वीर्य बहुत ज्यादा पतला हो तथा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या (स्पर्म काउंट) बहुत ज्यादा कम हो गए हो तथा शुक्राणुओं की क्वालिटी भी कम हो गई हो तो ऐसी स्थिति में शतावरी चूर्ण का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । शतावरी चूर्ण वीर्य दोष दूर करता है जिससे वीर्य दोष के कारण पैदा होने वाली नपुंसकता में लाभ मिलता है ।
गोनोरिया (सुजाक) में लाभकारी शतावरी
सूजाक जिसे गोनॉरिया भी कहा जाता है एक बैक्टीरिया से फैलने वाला संक्रामक रोग है । यह रोग पुरुषों के लिंग में घाव पैदा कर देता है । यह एक भयंकर रोग है । इस बीमारी से ग्रस्त रोगी को शतावर के पत्तों का 20 मिलीलीटर रस 80 मिलीलीटर दूध में मिलाकर प्रतिदिन पिलाने से सुजाक में लाभ मिलता है ।
सर्दी जुखाम मैं लाभकारी शतावरी
शतावरी का सेवन सर्दी जुखाम जैसी स्थितियों में किया जाता है क्योंकि शतावरी में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाले गुण मौजूद होते हैं । सर्दी जुकाम जैसी समस्या में शतावरी की जड़ का काढ़ा बना लें तथा सुबह शाम 20 से 25 एमएल मात्रा में पीने से बहुत जल्दी आराम मिलता है ।
गला बैठना (आवाज बैठना) में लाभकारी शतावरी
शतावरी की जड़ का चूर्ण गला बैठना या गले में खराश होना या आवाज बैठना जैसी समस्या में भी लाभदायक होता है । इस स्थिति में शताव, बला तथा मधु (शहद) इन तीनों को मिलाकर चाटने से बहुत अच्छा आराम मिलता है ।
सूखी खांसी में लाभदायक शतावरी
शतावरी को सूखी खांसी में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है । यदि आपको सूखी खांसी की समस्या है तो 10 ग्राम शतावरी चूर्ण, 10 ग्राम अडूसा के पत्ते तथा 10 ग्राम मिश्री, इन तीनों को 150 मिलीलीटर पानी में उबालें ।
जब पानी तीन चौथाई रह जाए तो छानकर किसी पात्र में रख ले । सुबह, दोपहर, शाम दिन में तीन बार 20-20 ml इसको पीने से खांसी में आराम मिलता है । यदि खांसी के साथ कफ भी है तो शतावरी एवं नागबला का काढ़ा बनाकर पिए, इससे कफ दूर होता है ।
श्वसन तंत्र संबंधी रोगों में लाभकारी शतावरी
शतावरी को श्वसन तंत्र से संबंधित रोगों जैसे सांस लेने में दिक्कत होना या सांस फूलना जैसी समस्या में प्रयोग किया जाता है । इसके लिए शतावरी चूर्ण को देसी घी में पका लें तथा 5 से 10 ग्राम दूध के साथ सेवन करें ।
बवासीर में लाभदायक शतावरी
शतावरी चूर्ण को बवासीर की समस्या को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है । बवासीर में 2 से 4 ग्राम शतावरी चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है ।
पेचिश में लाभकारी शतावरी
शतावरी पेचिश जैसी भयंकर रोग में भी लाभदायक होता है । यदि किसी व्यक्ति को मल के साथ खून आता हो तो ऐसी स्थिति में शतावरी की ताजी जड़ लेकर आएं तथा इन्हें दूध के साथ पीसकर छानकर रख लें । इसे मरीज को दिन में तीन से चार बार 20-20 ml पिलाने से लाभ मिलता है ।
स्वपनदोष में लाभकारी शतावरी चूर्ण
शतावरी चूर्ण को स्वपनदोष रोग को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है । स्वपनदोष की यह बहुत ही कारगर औषधि है । शतावरी चूर्ण तथा मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर किसी डब्बे में भरकर रख लें । सुबह शाम 10-10 ग्राम इस पाउडर को दूध के साथ लेने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है ।
अपच में लाभकारी शतावरी
यदि किसी व्यक्ति को भोजन सही प्रकार से हजम नहीं हो रहा है तथा अपच की स्थिति बन गई हो तो ऐसी स्थिति में शतावरी की जड़ के रस को शहद के साथ देने पर बहुत अच्छा आराम मिलता है । यह योग पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव दिखाता है ।
पेट दर्द में लाभदायक शतावरी
यदि पित्त बहुत अधिक बढ़ गया हो तथा पित्त के कारण पेट में दर्द हो गया हो तो ऐसी स्थिति में 10 मिलीलीटर शतावरी रस को समान मात्रा में शहद मिलाकर रोगी को पिलाने से पेट दर्द में बहुत जल्दी लाभ मिलता है ।
सिर दर्द में लाभदायक शतावरी
शतावरी को सिर दर्द में भी प्रयोग किया जाता है । इसके लिए शतावर की ताजी जड़ लेनी चाहिए तथा इन्हें कूटकर इन का रस निकाल ले । इसमें बराबर मात्रा में ही तिल का तेल डालकर पका लें तथा इसकी सिर में मालिश करें । इससे सिर दर्द एवं माइग्रेन के दर्द में बहुत आराम मिलता है ।
नाक की एलर्जी मैं लाभदायक शतावरी
यदि नाक से संबंधित कोई समस्या हो या नाक की एलर्जी हो तो ऐसी स्थिति में शतावरी चूर्ण का सेवन करने से लाभ मिलता है । 5 ग्राम शतावरी चूर्ण को 100 मिलीलीटर दूध में पका लें तथा रोगी को पिला दे । यह योग नाक से संबंधित एलर्जी को दूर करने में काफी लाभदायक है ।
घाव सुखाने में लाभदायक शतावरी चूर्ण
यदि चोट लग गई हो तथा चोट वाले स्थान पर घाव हो गया हो तो ऐसी स्थिति में लगभग 20 ग्राम शतावरी के पत्तों का चूर्ण बना लें तथा दोगुनी मात्रा में घी लेकर इस चूर्ण को पकाय । ठंडा होने पर इस लेप को घाव वाले स्थान पर लगाने से पुराने से पुराना घाव भी ठीक हो जाता है ।
आंखों के रोगों में लाभदायक शतावरी चूर्ण
शतावरी चूर्ण को आंखों के रोगों में प्रयोग किया जाता है । 5 ग्राम शतावरी की जड़ का चूर्ण ले तथा इसे 100 मिलीलीटर दूध में पका लें । इसका सुबह-शाम सेवन करें । यह आंखों की एलर्जी एवं नेत्र रोगों में लाभदायक होता है ।
आंखों के रोगों में लाभकारी शतावरी
नेत्र ज्योति बढ़ाने तथा आंखों के रोगों को दूर करने के लिए त्रिफला, आमला, पुराना गुड़ तथा जो का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए । यह सभी आंखों के रोगों को दूर करने में लाभदायक होते हैं ।
रतौंधी में लाभकारी शतावरी
रतौंधी जिस नाइट ब्लाइंडनेस भी कहा जाता है एक गंभीर समस्या है । इस रोग में शतावरी के ताजे एवं मुलायम पत्ते लें तथा इन्हें देसी घी में भूनकर सुबह-शाम सेवन करने से रतौंधी में काफी अच्छा लाभ मिलता है ।
मूत्र रोगों में लाभकारी शतावरी
शतावरी मूत्र रोगों एवं मूत्र मार्ग संक्रमण की एक विशेष औषधि है । मूत्र संबंधी रोगों में शतावरी चूर्ण को सुबह शाम 10-10 ग्राम दूध के साथ सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।
बुखार में लाभकारी शतावरी
शतावरी तथा गिलोय का 10-10 मिलीलीटर रस ले ले तथा इसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर सुबह, दोपहर,शाम दिन में तीन बार रोगी को पिलाने से बुखार में बहुत अच्छा आराम मिलता है । शतावरीे की जड़ का काढ़ा बनाकर शहद के साथ भी रोगी को देने से बुखार में लाभ मिल जाता है ।
गुर्दे की पथरी में लाभदायक शतावरी
गुर्दे की पथरी हो गई हो तो शतावरी का प्रयोग करके इस को दूर किया जा सकता है । गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए शतावरी की जड़ का 20 से 30 मिलीलीटर रस लेकर बराबर मात्रा में गाय का दूध मिलाकर रोगी को सुबह-शाम पिलाने से पुरानी से पुरानी पथरी भी निकल जाती है ।
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तो इस प्रकार आपने देखा शतावरी वास्तव में ही सौ बीमारियों की एक दवा है इसलिए इसे जड़ी बूटियों की रानी कहा जाता है । यह लेख आपको कैसा लगा अपने विचार कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं ।