शंख वटी के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Shankh Vati ke fayde or nuksan

By | June 13, 2020

शंख वटी क्या है? Shankh Vati kya hai?

शंख वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पाचन तंत्र की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है । इस औषधि का सेवन करने से पाचन तंत्र से जुड़ी हुई विभिन्न समस्याएं जैसे पेट गैस, पेट में दर्द, अफारा, बदहजमी आदि में बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

शंख वटी में सेंधा नमक, काला नमक, समुद्री नमक, सांभर नमक, शंख भस्म, काली मिर्च एवं अन्य कई जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं । शंख भस्म में गंधक एवं पारा भी मौजूद होता है, इसलिए शंख भस्म को बहुत कम मात्रा में किसी योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही सेवन करना चाहिए ।

शंख वटी का वर्णन आयुर्वेद आयुर्वेदिक ग्रंथ भैषज्य रत्नावली के अग्निमांद्य्य रोगाधिकार में किया गया है । इस औषधि का प्रमुख घटक द्रव्य शंख भस्म होती है ।

शंख वटी के घटक द्रव्य Shankh Vati ke ghatak dravy

  • इमली क्षार – ६० ग्राम
  • सेन्धा नमक – १२ ग्राम
  • काला नमक – १२ ग्राम
  • मनिहारी नमक – १२ ग्राम
  • सामुद्र नमक – १२ ग्राम
  • साम्भर नमक – १२ ग्राम
  • नींबू का रस – २४० ग्राम
  • शुद्ध शंख – ६० ग्राम
  • भुनी हींग – १५ ग्राम
  • सोंठ – १५ ग्राम
  • काली मिर्च – १५ ग्राम
  • पीपल – १५ ग्राम
  • शुद्ध पारद – ३.५ ग्राम
  • शुद्ध गन्धक – ३.५ ग्राम
  • शुद्ध पारद – ३.५ ग्राम
  • शुद्ध गन्धक – ३.५ ग्राम
  • शुद्ध विष – ३.५ ग्राम

शंख वटी के फायदे Shankh Vati ke fayde in hindi

  1. शंख वटी का सेवन करने से अपच, बदहजमी एवं अफ़ारा में बहुत अच्छा आराम मिलता है ।
  2. यदि ज्यादा भोजन कर लेने पर पेट में भारीपन हो गया हो या पेट में दर्द होता हो तो ऐसी स्थिति में शंख वटी का सेवन कराने से लाभ मिलता है ।
  3. यदि गरिष्ठ भोजन जैसे पूरी, पराठा, छोले भटूरे या कोई भी अन्य तली भुनी चीज खाने पर खाना हजम ना होता हो एवं पेट में बहुत अधिक भारीपन महसूस होता हो तथा पेट में खिंचाव होता हो तो ऐसी स्थिति में शंख भस्म का सेवन करने से लाभ होता है ।
  4. शंख भस्म आमाशय में पड़े हुए अन्न को आगे गति कराने में सहायक होती है, जिससे भोजन जल्दी हजम होता है एवं पेट हल्का फुल्का महसूस होता है ।
  5. रात का भोजन, गरिष्ठ भोजन या दुर्गंध युक्त बासा भोजन करने से अतिसार या डायरिया हो जाता है, इस स्थिति में रोगी के पेट में भयंकर दर्द होता है, सिर दर्द होता है, दुर्गंध युक्त मल आता है एवं रोगी बहुत अधिक व्याकुल हो जाता है,  ऐसी स्थिति में शंख भस्म का सेवन कराने से लाभ मिलता है ।
  6. शंख भस्म भोजन विश अर्थात फूड प्वाइजन को दूर करने के लिए सफल औषधि होती है ।
  7. यदि ग्रहणी रोग बहुत ज्यादा बढ़ गया हो, तो इस अवस्था में शंख वटी का प्रयोग करने से ज्यादा लाभ नहीं मिलता है । इसलिए ग्रहणी रोग की प्रारंभिक अवस्था में ही यदि शंख वटी का सेवन कराया जाए तो ज्यादा अच्छा लाभ मिलता है  ।
  8. यह औषधि मंदाग्नि, अरुचि एवं उदर शूल में लाभदायक होती है ।
  9. यह औषधि अमाशय, यकृत प्लीहा एवं छोटी आत एवं बड़ी आत इन अंगों पर विशेष प्रभावशाली होती है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

शंख वटी की एक से दो गोली दिन में तीन बार सुबह, दोपहर, शाम को भोजन करने के पश्चात गुनगुने पानी से ले सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

  • इस औषधि को अधिक मात्रा में लेने पर पेट में जलन हो सकती हैं ।
  • इस औषधि में गंधक एवं पारा जैसे विषैले पदार्थ मौजूद होते हैं, इसलिए इस औषधि का सेवन बहुत ही कम मात्रा में कम समय के लिए करना चाहिए ।
  • गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं बहनों को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए ।
  • हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के रोगियों को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए । इसका कारण यह है कि इस औषधि में विभिन्न प्रकार के नमक मौजूद होते हैं जो रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं ।
  • इस औषधि को ठंडी एवं सुखी जगह पर ही रखना चाहिए ।

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