सर्वतोभद्र वटी के फायदे नुक्सान एवं दुष्प्रभाव Sarvatobhadra Vati Uses & Benefits in Hindi

By | October 7, 2020

सर्वतोभद्र वटी क्या है?

सर्वतोभद्र वटी एक आयुर्वेदिक क्लासिकल ओषधि है जिसे यदि हम आयुर्वेद का वरदान करें तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा, क्योंकि यह औषधि वास्तव में ही वरदान से कम नहीं है । इस औषधि का सेवन करने से किडनी फेल होने की समस्या एवं किडनी से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं में बहुत ही अच्छा लाभ मिलता है ।

यदि किसी व्यक्ति के गुर्दे यानी किडनी फेल हो जाए तो ऐसी स्थिति में है एलोपैथिक डॉक्टर रोगी को डायलिसिस की सलाह देते हैं जो रोगी के लिए प्राणघातक भी हो सकता है तथा इसमें खर्चा भी बहुत अधिक आता है । डायलिसिस कराने के बाद भी यह गारंटी नहीं है कि किडनी सही हो जाएगी । इसलिए यदि किडनी फेल होने पर आयुर्वेद का सहारा लिया जाए तो इससे बहुत अधिक मदद मिल सकती है ।

आयुर्वेद में किडनी की समस्याओं को दूर करने के लिए कई प्रकार की दवाइयां मौजूद है जिनमें सर्वतोभद्र वटी, महेश्वर वटी, चंद्रप्रभा वटी, वृकदोषान्तक वटी, गोक्षुरादि गुग्गुल आदि औषधियां बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती हैं ।

सर्वतोभद्र वटी में स्वर्ण एवं रजत जैसी बहुमूल्य रसायन मौजूद है । यह ओषधि आयुर्वेदिक ग्रंथ भैषज्य रत्नावली में वर्णित है ।

सर्वतोभद्र वटी के घटक द्रव्य

स्वर्ण भस्म 18 मिग्रा
रजत भस्म 18 मिग्रा
अभ्रक भस्म 18 मिग्रा
लोहा भस्म 18 मिग्रा
शिलाजीत (एस्फाल्टम) 18 मिग्रा
शुद्ध गंधक 18 मिग्रा
स्वर्ण माशिका भस्म 18 मिग्रा
वरुण (क्रेटेवा नर्सवाला) काढ़े के लिए – क्यूएस

सभी सामग्रियों को बराबर मात्रा में लिया जाता है और क्रेटेवा नर्सवाला के काढ़े में पीस लिया जाता है। अभिषेक भस्म 1000 पुति को जोड़ने के बजाय प्लेन अभ्रक भस्म के अच्छे परिणाम हैं ।

सर्वतोभद्र वटी के उपचारात्मक संकेत

सर्वतोभद्र वटी निम्नलिखित बीमारियों में फायदेमंद है:

  1. नेफ्रैटिस
  2. गुर्दे का रोग
  3. पॉलीसिस्टिक किडनी रोग
  4. अंतिम चरण की किडनी की बीमारी
  5. नेफ्रोमेगाली (गुर्दे में वृद्धि)
  6. नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस
  7. नेफ्रैटिस (गुर्दे की सूजन)
    1. ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (ग्लोमेरुली की सूजन)
    2. इंटरस्टीशियल नेफ्रैटिस या ट्यूबलो-इंटरस्टीशियल नेफ्रैटिस
  8. आयुर्वेदिक क्षारीय के साथ मूत्र पथ के संक्रमण

सर्वतोभद्र वटी के फायदे

सर्वतोभद्र वटी मुख्य रूप से किडनी फेलियर एवं किडनी से संबंधित अन्य समस्याओं में बहुत अधिक लाभदायक होती है । सर्वतोभद्र वटी किडनी फ़ेल्योर और इस से रिलेटेड रोगों में बेहद असरदार है जैसे – हर तरह की Nephritis और इस से रिलेटेड Symptoms, किडनी इनलार्जमेंट(Nephromegaly), Polycystic Kidney Disease, शुगर या डायबिटीज की वजह से होने वाली किडनी की प्रॉब्लम और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन इत्यादि ।

अनुपान एवं सेवन विधि

किडनी की समस्या शरीर में वात पित्त एवं कफ तीनों ही दोषों के बिगड़ने के कारण हो सकती है । इसलिए पहले तो यह पता लगाना आवश्यक है की किडनी की समस्या किस दोष के कारण पैदा हुई है । उसके बाद उसी दोष के अनुसार इस रोग का निदान किया जाता है ।

सामान्य तौर पर इस औषधि को कफ दोष में वरुण की छाल के काढ़े के साथ, पित्त दोष में गोक्षुर के काढ़े के साथ तथा वायु दोष में शिलाजीत एवं दूध के साथ देने से लाभ मिलता है । आइए अब में जान लेते हैं की अलग-अलग दोषों में इस ओषधि को किस प्रकार लिया जा सकता है ।

कफ दोष में

कफ दोष की स्थिति में रोगी को भूख की कमी होना, हर समय शरीर में आलस्य बना रहना, पेट भारी रहना, हल्का सिर दर्द बना रहना आदि लक्षण महसूस होते हैं । इस स्थिति में सर्वतोभद्र वटी की एक गोली एवं चंद्रप्रभा वटी की दो गोली सुबह एवं शाम को काली मिर्च, पिपली, नागर मोथा एवं पुनर्नवा के चूर्ण के साथ देने से लाभ मिलता है ।

पित्त दोष में

पित्त दोष की स्थिति में रोगी को पेशाब में जलन, पेट में जलन, पूरे शरीर में गर्मी बने रहना, हाथों पैरों में जलन होना, पैरों के तलवों में जलन होना, चक्कर आना, हृदय का जोर जोर से धड़कना, आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, मुंह में खट्टा पानी आ जाना जैसी समस्या होती हैं । इस स्थिति में सर्वतोभद्र रस की एक गोली एवं 1 ग्राम गिलोय सत्व सुबह शाम गोक्षुर, धनिया एवं पित्तपापड़ा के काढ़े के साथ देने से लाभ मिलता है ।

वात दोष में

वात दोष की स्थिति में रोगी के जोड़ो एवं हड्डियों में दर्द बना रहता है, मांसपेशियों में दर्द एवं जकड़न होती है, तेज सिर दर्द होता है, सांस लेने में तकलीफ एवं नींद ना आना जैसी समस्या होती हैं । इस स्थिति में सर्वतोभद्र वटी की एक गोली एवं चंद्रप्रभा वटी के दो गोली सुबह-शाम दूध के साथ देने से लाभ मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

सर्वतोभद्र रस की एक से दो गोली रोग एवं दोष के अनुसार ऊपर बताए गए अनुपान के अनुसार सेवन करा सकते हैं । एक गोली 125 मिलीग्राम की होती है । इस दवा का सेवन कम से कम 2 महीने तक कराना चाहिए ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

सर्वतोभद्र रस एक सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है फिर भी इस दवा को डॉक्टर की सलाह एवं देखरेख में ही लेना चाहिए ।

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