सप्तविशंती गुग्गुल के गुण फायदे उपयोग एवं नुक्सान Saptvinshati Guggul benefits in hindi

By | April 20, 2020

सप्तविशंती गुग्गुल क्या है? What is Saptvinshati Guggulu

 
नमस्कार दोस्तों आज हम सब सप्तविशंती गुग्गुल (Saptvinshati Guggul) के बारे में बात करेंगे । सप्तशती गुग्गुल एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जो वैद्यनाथ, दिव्य पतंजलि, डाबर एवं अन्य प्रसिद्ध कंपनियों के द्वारा बनाई जाती है । यह औषधि टेबलेट के रूप में अवेलेबल है । आप इसे लोकल मार्केट से खरीद सकते हैं या ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं । आइए अब विस्तार से सप्तविशंती गुग्गुल के बारे में बात करते हैं ।
 

सप्तविशंती गुग्गुल इन हिंदी Saptvinshati Guggul in hindi

 
सप्तविशंती गुग्गुल एक आयुर्वेदिक और सुरक्षित ओषधि है, जिसका प्रमुख कार्य बवासीर, भगंदर एवं नाड़ीवर्ण में किया जाता है । यह औषधि मुख्य रूप से बवासीर एवं भगंदर में बहुत ही अच्छा कार्य करती हैं ।
 
हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बवासीर दो प्रकार की होती है सुखी एवं वादी । सुखी बवासीर में गुदा के आसपास या गुदा में मस्से हो जाते हैं तथा मल त्याग करते समय अधिक दर्द होता है । जबकि बादी बवासीर में मल त्याग करते समय रक्त भी आता है । इन दोनों ही स्थितियों में सप्तविसंती गुग्गुल का प्रयोग अर्शकुठार रस एवं अर्शोघ्नी वटी के साथ किया जा सकता है ।
 
यदि रक्त बहुत अधिक आ रहा हो तो साथ में बोलबद्ध रस का प्रयोग भी कराया जा सकता है । भगंदर जिसे फिस्टुला भी कहते हैं बवासीर की ही गंभीर स्थिति का एक रूप है । यदि सही समय पर बवासीर का इलाज न कराया जाए तो बवासीर बहुत ज्यादा भयंकर रूप धारण कर लेती है और इस भयंकर रूप को ही भगंदर या फिस्टुला कहा जाता है ।
 
भगंदर में व्यक्ति के गुदा मार्ग में मस्से हो जाते हैं जिनमें मवाद हो जाता है तथा मल त्याग करते समय व्यक्ति को भयंकर पीड़ा होती है । व्यक्ति मल त्याग करने में भी घबराता है । इस स्थिति में सप्तविशंती गुग्गुल का प्रयोग करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है । यहां तक कि जिन लोगों को डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के लिए बोल दिया था वे भी सप्तविशंती गुग्गुल का प्रयोग करके बिल्कुल स्वस्थ हो जाते हैं ।
 
लेकिन आपको ध्यान रखना है बवासीर एवं भगंदर में इस दवा का प्रयोग करते समय आपको अपने खानपान व रहन-सहन में भी परिवर्तन करना आवश्यक है । अन्यथा इस दवा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा । इस बारे में हम आगे चल कर बात करेंगे । आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि सप्तविशंती गुग्गुल में कौन-कौन सी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं ।
 

सप्तविशंती गुग्गुल के घटक द्रव्य Saptvinshati Guggul Ingredients

    • त्रिकटु
    • त्रिफला
    • नागरमोथा
    • विडंग
    • गिलोय
    • चित्रकमूल
    • मुस्ता
    • बड़ी इलायची
    • पीपरामूल
    • देवदारु
    • तेजबल के फल
    • पुष्करमूल
    • इंद्रायण की जड़
    • हल्दी
    • दारूहल्दी
    • विद लवण
    • काला नमक
    • सेंधा नमक
    • गुग्गुलु
    • गज पीपली
त्रिकटु सोंठ, काली मिर्च एवं पिपली के संभाग मिश्रण को त्रिकटु कहा जाता है । त्रिकटु की तासीर गर्म होती है । यही कारण है कि सप्तविशंती गुग्गुल जहां एक और बवासीर एवं भगंदर में लाभ पहुंचाती है वहीं इसका सेवन करने से मूत्र संबंधी विकार भी दूर होते हैं ।
 
त्रिफला इस ओषधि में त्रिफला अर्थात हरड़, बहेड़ा एवं आमला मौजूद होता है । इसलिए यह रोगी के पाचन संस्थान पर भी अपना सकारात्मक प्रभाव डालती है । लेकिन बवासीर एवं भगंदर का प्रमुख कारण कब्ज होती है, इसलिए इस औषधि के साथ त्रिफला चूर्ण या पंचसाकर चूर्ण को दोपहर को एवं रात्रि में भोजन करने के पश्चात गर्म पानी से लेना आवश्यक होता है ।
 
गिलोय गिलोय एंटी इन्फ्लेमेटरी एवं एंटी एनाल्जेसिक जड़ी बूटी है । इसलिए सप्तविशंती गुग्गुल में दर्द निवारक गुण भी आ जाता है । गुग्गुल सप्तविसंती गुग्गुल का प्रमुख घटक द्रव्य है । गुग्गुल का प्रमुख कार्य शरीर में दर्द एवं सूजन को कम करना होता है । इसलिए इस औषधि में बवासीर एवं भगंदर के कारण गुदाद्वार में होने वाले दर्द में राहत मिलती है ।
 

सप्तविशंती गुग्गुल के फायदे Saptvinshati Guggul Benefitds in hindi

    • सप्तविशंती गुग्गुल का सबसे प्रमुख कार्य भगंदर एवं बवासीर को दूर करना होता है ।
    • भगंदर एवं बवासीर में इस औषधि को अर्शकुठार रस, अर्षोघनी वटी एवं बोल बद्ध रस के साथ प्रमुख औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
    • इस औषधि के प्रयोग से मूत्र विकारों में भी लाभ मिलता है  ।

सप्तविशंती गुग्गुल के अन्य लाभ Saptvinshati Guggul uses in hindi

    • यह औषधि गर्भाशय पर अपना सकारात्मक प्रभाव डालती है एवं महिलाओं की मासिक संबंधी समस्याओं में लाभ पहुंचाती है ।
    • यह ओषधि मूत्रल है एवं मूत्र मार्ग के संक्रमण को भी दूर करती है ।
    • इसके अतिरिक्त यह रक्त दोष, चर्म रोगों एवं पाचन संस्थान की समस्याओं में भी थोड़ा बहुत फायदा पहुंचाती है ।

सप्तविशंती गुग्गुल की मात्रा एवं सेवन विधि Saptvinshati Guggul Dosage and Directions

 
इस औषधि की दो दो गोलियां सुबह शाम भोजन के पश्चात ताजे पानी के साथ सेवन कर सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें ।
 

सप्तविशंती गुग्गुल प्रयोग करते समय सावधानी Precautions while using Saptvinshati Guggul

    • सप्तविशंती गुग्गुल का प्रमुख कार्य भगंदर एवं बवासीर को दूर करना होता है । यदि हम इन रोगों के उत्पन्न होने का कारण जाने तो हमें पता चलता है कि यह दोनों रोग लंबे समय से कब्ज की समस्या होने के कारण ही पैदा होते हैं । इसलिए कब्ज इन रोगों का सबसे प्रमुख कारण है । अतः सप्तविशंती गुग्गुल सेवन करने के दौरान त्रिफला चूर्ण या पंचसकार चूर्ण का सेवन जरूर करना चाहिए, ताकि रोगी को कब्ज बिल्कुल ना रहे ।
    • बाजार का जंग फूड जैसे बर्गर, भटूरे, टिक्की, चाऊमीन इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए ।
    • ज्यादा चटपटी एवं मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए ।
    • पानी खूब पीना चाहिए ।
    • रात को जल्दी सोना चाहिए एवं सुबह को जल्दी उठना चाहिए ।
    • सुबह उठकर दो से तीन गिलास खाली पेट पानी पीना चाहिए ।
    • सुबह की सैर अर्थात मॉर्निंग वॉक भी अवश्य करनी चाहिए ।
    • घर का साधारण भोजन दाल रोटी ज्यादा आनी चाहिए ।
    • भोजन में सलाद खूब खानी चाहिए । ।
    • नाश्ते में अंकुरित अनाज एवं दूध का सेवन करना चाहिए ।
    • मीट, मांस, मछली, अंडा आदि का सेवन बहुत कम करना चाहिए ।

सप्तविशंती गुग्गुल के दुष्प्रभाव Saptvinshati Guggul Side Effects


सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । लेकिन फिर भी इस औषधि को आप चिकित्सक की देखरेख में ही सेवन करें ।
 
 

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