रजत भस्म (चांदी या रोप्य भस्म) के फायदे और नुकसान Rajat Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 26, 2020

रजत भस्म क्या है? Rajat Bhasma kya hai?

रजत भस्म जिसे रोप्य भस्म या चांदी भस्म भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से गुर्दों तंत्रिका तंत्र एवं मस्तिष्क रोगों पर कार्य करती हैं । इसके अलावा यह औषधि प्रमेह रोग, वात रोग, पित्त प्रकोप, आंखों के रोग, यकृत वृद्धि, प्लीहा वृद्धि एवं पुरुषों की वीर्य संबंधी समस्याओं में लाभदायक होती है । यह औषधि बहुत ही उत्तम वृष्य, रसायन एवं वीर्य वर्धक है । इस औषधि के सेवन करने से स्मृति भ्रम, चक्कर आना, मानसिक अवसाद आदि रोगों में बहुत ही अच्छा लाभ मिलता है ।

  • विविध नाम: Roupya Bhasma, Raupya Bhasma, Chandi Bhasma, Rajata Bhasma, Rajatha Bhasmam
  • दवा का प्रकार: आयुर्वेदिक धातु भस्म
  • प्रमुख प्रयोग: वात और कफ रोग, मस्तिष्क सम्बंधित दोष, मधुमेह, प्रमेह
  • प्रमुख गुण: बलवर्धक, लेखन, गर्भाशय शोधन, कांतिवर्धक, आयुष्य
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।

यदि चांदी की बात करें तो आयुर्वेद में चांदी के 9 गुण बताए गए हैं । आयुर्वेद में चांदी को भारी, नरम, तोड़ने या तपाने पर सफेद होने वाली, चमकदार, देखने में सुंदर बताया गया है । चांदी को आयुर्वेद में औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है । इसके लिए सबसे पहले चांदी का शोधन किया जाता है एवं उसके पश्चात मारण करके चांदी की भस्म बनाई जाती है ।

चांदी को संस्कृत में रजत, रोप्य, श्वेत, चंद्रहास आदि नामों से जाना जाता है तथा अंग्रेजी में चांदी को सिल्वर कहा जाता है । भारत के अलावा चांदी विश्व के अन्य देशों जैसे अमेरिका, चीन तथा श्रीलंका से खदानों से निकाली जाती है । चांदी सोने के पश्चात दूसरी बहुमूल्य धातु है जिसे महिलाएं श्रृंगार में भी धारण करती हैं ।

चांदी के विविध नाम Rajat Bhasma ke vividh naam

  • हिंदी में चांदी रूपा
  • अंग्रेजी में सिल्वर
  • बंगाली में रूपा
  • गुजराती में रूपम या चांदी
  • मराठी में चांदी या रूपा
  • तेलुगु में वंदे
  • लेटिन में अर्जेंटम
  • संस्कृत में रुपए या रजत

रजत भसम के घटक द्रव्य Rajat Bhasma ke ghatak dravy

चांदी से रजत भस्म बनाने के लिए शुद्ध चांदी का पहले शुद्ध किया जाता है तथा उसके पश्चात मारण किया जाता है । अतः शोधन एवं मरण करने के लिए अलग अलग घटक द्रव्य की आवश्यकता होती हैं जो निम्न प्रकार है ।

शोधन के लिए:

  • शुद्ध चांदी पत्र
  • तिल का तेल
  • तक्र
  • कांजी
  • गोमूत्र
  • कुलथी का काढ़ा

मरण के लिए:

  • चांदी
  • पारा या पारद
  • नींबू का रस
  • गंधक
  • हड़ताल

रजत भस्म चिकित्सकीय गुण

  • यह त्वचा रोगों में बहुत ही अच्छा पैदा करती है ।
  • यह वात दोष एवं कफ दोष का नाश करती है ।
  • यह बल एवं वीर्य वर्धक है ।
  • यह स्मृति बढ़ाने वाली है ।
  • यह मस्तिष्क विकारों को दूर करती है ।
  • यह सप्त धातु को पुष्ट कर ओज बढ़ाती है ।
  • यह पित्त नाशक है ।
  • यह यकृत रोगों में लाभ पहुंचाती है ।
  • यह गर्भाशय के रोग में लाभ पहुंचाती है ।

रजत भस्म के फायदे Rajat Bhasma ke fayde

तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों जैसे सिर दर्द, माइग्रेन, स्मृति भ्रम, याददाश्त की कमी होना, अल्जाइमर, पार्किसंस, चक्कर आना, मिर्गी के दौरे इत्यादि में सर्वोत्तम लाभकारी है । स्वर्ण भस्म के पश्चात तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों में रजत भस्म सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है । हालांकि यह भस्म महंगी होती है लेकिन यदि इसके फायदों की बात करें तो इसे सेवन कराना आवश्यक हो जाता है ।

मानसिक रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म अनेकों मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रोगों की एक सफल औषधि है । इस औषधि को मानसिक रोगों जैसे चिंता, अवसाद, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, पागलपन, डर लगना, हर समय उदासी बने रहना, तनाव के कारण भूख ना लगना, हिस्टीरिया इत्यादि में प्रयोग किया जाता है । मानसिक रोगों की यह सर्वश्रेष्ठ औषधियों में से एक है ।

उदर रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म को उदर रोगों जैसे मानसिक अवसाद के कारण भूख ना लगना, यकृत विधि, प्लीहा वृद्धि, फैटी लीवर, पेप्टिक अल्सर एवं ग्रहणी रोग में प्रयोग किया जाता है ।

गुर्दे एवं मूत्र संक्रमण में लाभकारी रजत भस्म

गुर्दे एवं मूत्र संस्थान के संक्रमण में रजत भस्म को मुख्य औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है । इस औषधि का सेवन करने से गुर्दों को बल प्राप्त होता है तथा गुर्दे सही कार्य करने लगते हैं । इसके अलावा यदि मूत्र मार्ग में संक्रमण हो गया हो जैसे बार बार पेशाब का आना, पेशाब का रुक रुक कर आना या अन्य संक्रमण हो तो उसमें रजत भसम को प्रयोग किया जाता है ।

श्वसन रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म श्वसन तंत्र से संबंधित रोगों जैसे सुखी खांसी या बलगम वाली खांसी में लाभदायक होती है।  इस औषधि का सेवन करने से फेफड़ों को ताकत मिलती है । जिससे इस औषधि को क्षय अर्थात टीवी के मरीजों को भी सेवन कराने से बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

हृदय रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म हृदय को बल प्रदान करने वाली औषधि है । यह बेड कोलेस्ट्रोल को कम करती है तथा हृदय की धमनियों को साफ करने में मददगार होती है । इस औषधि का सेवन करने से हृदय की धमनियों से कोलेस्ट्रोल दूर होने लगता है जिससे हृदय को रक्त को पंप करने में आसानी रहती है एवं हृदय स्वस्थ एवं निरोगी रहता है ।

पुरुषों के रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म पुरुषों के वीर्य रोगों की एक सुप्रसिद्ध औषधि है । इस औषधि का सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है एवं नपुंसकता एवं शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है । यह कामोत्तेजना बढ़ाने वाली औषधि है तथा इसका सेवन करने से सप्त धातु पुष्ट होती है । इसके सेवन से व्यक्ति लंबे समय तक मैथुन कर्म करने के लिए सक्षम हो जाता है ।

त्वचा रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म त्वचा रोगों जैसे त्वचा का संक्रमण एवं गैंग्रीन रोगों में लाभदायक होती है । गैंग्रीन रोग में त्वचा का मांस सड़ जाता है तथा उसमें कीड़े पड़ जाते हैं । यह बहुत ही भयानक रोग होता है जो सामान्य दवाओं से जल्दी से ठीक नहीं होता है । इसलिए इस रोग में रजत भस्म का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

महिलाओं के रोगों में लाभकारी रजत भस्म

रजत भस्म महिलाओं में प्रसव के उपरांत आने वाली समस्याओं, गर्भाशय के रोगों एवं अन्य रोगों में प्रयोग की जाती है ।

रजत भस्म: रोग एवं अनुपान

रजत भस्म को अलग-अलग रोगों में अलग अलग ओषधियों के साथ अलग-अलग अनुपान में सेवन कराया जाता है । निम्न तालिका में हमने रजत भस्म के रोग एवं अनुपान का वर्णन किया है ।

  • उपदंश एवं सुझाव के कारण नपुंसकता शिलाजीत के साथ
  • स्त्रियों के बांझपन में अश्वगंधा चूर्ण या शिवलिंगी के बीज के साथ
  • वीर्य वृद्धि के लिए शहद के साथ
  • मैथुन आनंद के लिए शहद के साथ
  • मस्तिष्क रोगों में अश्वगंधा चूर्ण के साथ
  • मिर्गी या पागलपन में बच के चूर्ण, ब्राह्मी चूर्ण एवं घी के साथ
  • वाट एवं पित्त रोगोंमें त्रिफला चूर्ण के साथ
  • बवासीर में ईसबगोल की भूसी के साथ
  • पीलिया रोग में त्रिकटु चूर्ण के साथ
  • नेत्र रोगों में त्रिफला घृत के साथ
  • सुखी खांसी में मक्खन के साथ
  • यकृत एवं प्लीहा वृद्धि में मंडूर भस्म के साथ

सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा Dosage

बच्चे (5 वर्ष तक) 1 मिली ग्राम प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से; पर एक खुराक में 30 मिली ग्राम से मात्रा अधिक नहीं होनी चाहिए और प्रतिदिन 60 मिली ग्राम से मात्रा अधिक नहीं होनी चाहिए
बच्चे (5 वर्ष के बाद) 30 से 65 मिली ग्राम
वयस्क 65 से 125 मिली ग्राम

सेवन विधि Directions

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाली पेट लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

  • इस औषधि को बिना चिकित्सक की देखरेख एवं सलाह के सेवन करने से गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं । इसलिए इस औषधि को बिना चिकित्सक की सलाह के सेवन ना करें ।
  • इस औषधि का अधिक मात्रा में सेवन करने से आंतों एवं गुदा को नुकसान पहुंच सकता है ।
  • अच्छी क्वालिटी की एवं सही प्रकार से बनी हुई रजत भस्म का ही सेवन करें ।
  • अशुद्ध एवं कच्चे रजत भस्म का सेवन करने से शरीर में इंफेक्शन हो सकता है या अन्य समस्याएं जैसे खाज, खुजली, बुखार, कमजोरी एवं सिरदर्द जैसी समस्याएं आ सकती हैं ।
  • इस औषधि का सेवन करने के दौरान मल का रंग थोड़ा सा बदल जाता है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है ।

रजत भस्म की उपलब्धता

  • बैद्यनाथ Baidyanath (Raupya Bhasma)
  • डाबर Dabur (Rajat (Chandi) Bhasma)
  • झंडू Zandu (Raupya Bhasma)
  • पतंजलि Patanjali Divya Pharmacy (Rajat Bhasma A.S.S)
  • श्री धूतपापेश्वर Shree Dhootapapeshwar Limited (Rajata Bhasma) and many other Ayurvedic pharmacies

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