प्रवाल पिष्टी के फायदे और नुक्सान Praval Pishti ke fayde or nuksaan

By | May 22, 2020

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प्रवाल पिष्टी क्या है? Praval Pishti kya hai?

प्रवाल पिष्टी एक आयुर्वेदिक एवं शास्त्रोक्त औषधि है जो प्रवाल से तैयार की जाती है । प्रवाल को हिंदी में मूंगा एवं अंग्रेजी में कोरल कहा जाता है । प्रवाल पिष्टी बनाने के लिए शुद्ध प्रवाल को चीनी मिट्टी की खरल में गुलाब जल के साथ 21 दिनों तक घोट घोट कर तैयार किया जाता है ।

यदि हम प्रवाल पिष्टी की तुलना प्रवाल भस्म से करें, तो प्रवाल पिष्टी प्रवाल भस्म की तुलना में शीतल एवं सौम्य होती है, क्योंकि यह गुलाब जल के साथ घोटकर बनाई जाती है । जबकि दूसरी ओर प्रवाल भस्म को अग्नि में भस्म करके बनाया जाता है इसलिए प्रवाल भस्म की तासीर गर्म होती है जबकि प्रवाल पिष्टी की तासीर ठंडी होती है ।

प्रवाल पिष्टी क्षय रोग, पित्तदोष, रक्तपित्त, खांसी, नेत्र दोष, कफ दोष, हाइपर एसिडिटी, पित्त की अधिकता, कैल्शियम की कमी एवं बच्चों के रोगों में प्रमुखता से उपयोग की जाती है । इस औषधि का सेवन टीवी के कारण होने वाली अत्यधिक खांसी, बहुत ज्यादा पसीना आना, पेशाब में जलन होना, बार-बार प्यास लगना आदि समस्याओं में भी किया जाता है ।

प्रवाल पिष्टी के घटक द्रव्य Praval Pishti ke ghatak dravy

  • शुद्ध प्रवाल (मूंगा)
  • गुलाब जल

प्रवाल पिष्टी की निर्माण विधि Praval Pishti preparation method

प्रवाल पिष्टी बनाने के लिए शुद्ध प्रवाल को गुलाब जल के साथ चीनी मिट्टी की खदान में 21 दिन तक लगातार घोटा जाता है, तत्पश्चात प्रवाल पिष्टी का निर्माण हो जाता है । यह एक अनुभव का विषय है जिसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ से संपर्क करना आवश्यक है ।

प्रवाल पिष्टी के चिकित्सक़िय गुणधर्म

  • हृदय बलवर्धक
  • ऑस्टियोपोरोसिस में लाभकारी
  • कमजोर हड्डियों में लाभकारी
  • क्षय रोग टीवी में लाभकारी
  • अम्ल पित्त नाशक
  • ज्वरनाशक
  • नाक से खून आना अर्थात नकसीर फूटना में लाभकारी
  • पेट दर्द में लाभकारी
  • मूत्र संक्रमण में लाभकारी
  • मासिक धर्म में अत्यधिक लाभकारी
  • हाइपर एसिडिटी में लाभकारी
  • हाथों पैरों में जलन होना में लाभकारी
  • कैल्शियम की कमी में लाभकारी
  • मानसिक अवसाद डिप्रेशन में लाभकारी

प्रवाल पिष्टी के फायदे Praval Pishti ke fayde

बुखार में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी जवर नाशक के रूप में मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है । यदि बुखार बहुत तेज हो तो यह गोदंती भस्म से भी अच्छा कार्य करती है । यदि बुखार पित्त की अधिकता के कारण हो एवं व्यक्ति को शरीर में दर्द हो प्यास लगती हो, पसीना खूब आता हो, सिर दर्द रहता हो चक्कर उल्टी आती हो तो इस अवस्था में प्रवाल पिष्टी को गिलोय सत्व के साथ देने पर बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यदि ज्वर परजीवी संक्रमण के कारण हो या मलेरिया का बुखार हो तो रोगी के शरीर में पित्त की अधिकता हो जाती है । इस अवस्था में भी प्रवाल पिष्टी का उपयोग कराने से बुखार शीघ्र उतर जाता है ।

हाथों पैरों एवं शरीर की जलन में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

यदि हाथों पैरों में बहुत ज्यादा जलन होती हो यहां तक कि जलन पूरे शरीर में रहती हो तथा जलन के कारण रोगी बहुत ज्यादा परेशान हो जाता हो, उसका दिल घबराता हो, त्वचा सूखी सूखी रहती हो तो इस अवस्था में भी प्रवाल पिष्टी को मीठे अनार के रस या मिश्री के साथ देने पर लाभ मिल जाता है ।

छोटे बच्चों की काली खांसी में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

यदि छोटे बच्चों को काली खांसी हो गई हो जिसमें बच्चों को बहुत जोर जोर से खांसी आती हो तथा खांसी के कारण बच्चों की नाक एवं मुंह से खून भी आ जाता हो तो इस अवस्था में प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

इस रोग में बच्चों का चेहरा फूल कर सूज जाता है एवं उनके गले एवं छाती में भी दर्द रहता है । इस अवस्था में प्रवाल पिष्टी को श्रंग भस्म, वंशलोचन, इलायची के दाने एवं अमृता सत्व के मिश्रण के साथ देने से लाभ मिलता है ।

छाती का मांस फटने में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

यदि खांसी भयंकर रूप धारण कर ले तो खांसते खांसते कमजोर शरीर वाले रोगियों की छाती का मांस फट जाता है, जिससे उनको भयंकर पीड़ा होती है । ऐसी स्थिति में प्रवाल पिष्टी को देने से छाती के घाव भरने लगते हैं ।

गर्भावस्था में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

गर्भावस्था में महिलाएं अपने गर्भ में पल रहे शिशु को अपने भोजन में से ही पोषक तत्व प्रदान करती हैं । बच्चों के शरीर विकास के समय गर्भवती महिला का शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है एवं उसके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है ।

गर्भवती महिला की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, उसके घुटनों में सूजन आ जाती है ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था से लेकर बालक के जन्म होने तक प्रवाल पिष्टी को गिलोय सत्व एवं सितोपलादि चूर्ण के साथ देने से बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

सप्त धातु पुष्ट करती हैं प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से सप्त धातुये पुष्ट होती है, शरीर में वीर्य वृद्धि होती है एवं शरीर हष्ट पुष्ट एवं निरोगी रहता है ।

आंखों की जलन में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी का उपयोग आंखों में होने वाली जलन में मुख्य रूप से किया जाता है । कुछ लोगों की आंखों में जलन होती है तथा पानी आ जाता है ऐसी स्थिति में प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

बच्चों की अस्थि वक्रता (रिकेट्स) में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

जिन बच्चों को भोजन में पोषक तत्व नहीं मिलते हैं ऐसे बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं तथा उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं एवं मुड़ कर टेढ़ी मेढी हो जाती हैं, जिसे अस्थि वक्रता अथवा रिकेट्स कहा जाता है ।यह रोग 3 से 4 महीने के बच्चे से लेकर बड़े बच्चों में भी पाया जाता है ।

इस रोग में बच्चों के नितंब (चूतड़) सिकुड़ जाते हैं, हाथों एवं पैरों की हड्डियों मुड़ जाती हैं, बच्चों को बार बार दस्त होते हैं एवं बुखार भी आता है । ऐसी स्थिति में प्रवाल पिष्टी को गिलोय सत्व के साथ देने पर लाभ मिलता है । यदि बच्चों को खांसी भी हो रही हो तो श्रंग भस्म को भी मिलाया जा सकता है ।

बच्चों के दांत आते समय होने वाली समस्या में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

जब बच्चों के दांत आते हैं तो बच्चे बहुत ज्यादा परेशान करते हैं । बच्चों को बार दुर्गंध युक्त पतले पतले दस्त होते हैं, बच्चों को बुखार भी चढ़ता है एवं उल्टी आती है । ऐसी स्थिति में प्रवाल पिष्टी का सेवन कराने से लाभ मिलता है ।

अम्लपित्त (एसिडिटी) में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी अम्लपित्त (एसिडिटी) को दूर करने के लिए एक विख्यात औषधि है । बहुत से लोगों को बहुत ज्यादा अम्ल पित्त बनता है तथा उनकी छाती में जलन रहती है । इस स्थिति में प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

शुक्रमेह मैं लाभकारी प्रवाल पिष्टी

कुछ लोगों को कामोत्तेजना बहुत ज्यादा रहती है । ऐसे लोग स्त्रियों का चिंतन करते ही या स्त्रियों को देखते ही बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं तथा उनके लिंग से वीर्य स्राव हो जाता है । इस रोग को शुक्रमेह कहा जाता है ।

इस अवस्था में व्यक्ति यदि किसी सुंदर स्त्री के बारे में कल्पना करें या किसी स्त्री के गहनों की, चूड़ियों की आवाज भी सुन ले तो उसमें इतनी उत्तेजना आ जाती है कि उसके लिंग से वीर्य स्राव हो जाता है । यह स्थिति व्यक्ति की मानसिक परिपक्वता ना होने के कारण होती है ।

प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से यह स्थिति धीरे-धीरे दूर हो जाती है, जिससे व्यक्ति में संयम रखने की क्षमता आ जाती है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि यह औषधि मानसिक संतुलन बनाने के लिए भी प्रयोग की जाती है ।

सुजाक, उपदंश एवं मूत्र संक्रमण में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी का उपयोग सूजाक या उपदंश के कारण मूत्र मार्ग में होने वाले संक्रमण जैसे पेशाब करते हुए जलन होना या दर्द होना, पेशाब का रंग पीला या लाल हो जाना, पेशाब का बहुत गर्म हो जाना आदि समस्याओं में किया जाता है ।

बवासीर में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी का उपयोग खूनी बवासीर एवं पित्त की वृद्धि के कारण होने वाली बवासीर में किया जाता है । इस स्थिति में प्रवाल पिष्टी का उपयोग गिलोय सत एवं नागकेसर के साथ मिश्री मिले बकरी के दूध के साथ कराने से लाभ मिलता है ।

पित्त दोष नाशक प्रवाल पिष्टी

यदि पित्ताशय से पित्त बहुत अधिक मात्रा में निकल रहा हो जिसे यकृत पित्त भी कहा जाता है, तो इस स्थिति में रोगी के पित्ताशय में दर्द होता है । यह दर्द भोजन से पहले ज्यादा रहता है तथा भोजन करने के पश्चात थोड़ा कम हो जाता है । इस स्थिति में प्रवाल पिष्टी को गिलोय सत्व एवं आंवले के रस में मिलाकर भोजन से एक घंटा पहले देने से लाभ मिलता है ।

टीवी की प्रथम अवस्था में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

प्रवाल पिष्टी क्षय रोग अर्थात टीवी की प्रथम अवस्था में बहुत अधिक लाभकारी है । यदि टीवी का शुरुआत में ही पता चल जाए तो प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से तुरंत लाभ मिल जाता है । लेकिन यदि टीवी की दूसरी अवस्था भी आ गई हो तो भी प्रवाल पिष्टी को श्रंग भसम एवं गिलोय सत्व के साथ देने से लाभ मिल जाता है ।

नकसीर फूटने में लाभकारी प्रवाल पिष्टी

कुछ लोगों को यहां तक कि बच्चों को भी गर्मियों के मौसम में नाक से रक्त आता है, जिसे नकसीर फूटना कहा जाता है । इस अवस्था में प्रवाल पिष्टी का सेवन कराने से लाभ मिलता है क्योंकि प्रवाल पिष्टी तासीर में ठंडी होती है ।

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions

प्रवाल पिष्टी की खुराक दिन में दो या तीन बार 125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक है। प्रवाल पिष्टी की अधिकतम खुराक प्रति दिन 2500 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

पूरक खुराक 500 मिलीग्राम
अधिकतम दैनिक पूरक खुराक 1000 मिलीग्राम
चिकित्सीय खुराक 125 मिलीग्राम से 1000 मिलीग्राम
अधिकतम दैनिक चिकित्सीय खुराक 2500 मिलीग्राम

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यतः प्रवाल पिष्टी का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन फिर भी हम आपको सलाह देंगे कि आप इसे अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सेवन करें । इस औषधि की अधिक मात्रा लेने पर निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं ।

  • पेट में सूजन आ जाना
  • पेट में दर्द होना
  • गुर्दे की पथरी होना
  • भूख ना लगना

क्योंकि प्रवाल पिष्टी में कैल्शियम की बहुत अधिक मात्रा होती है इसलिए इस औषधि का सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए तथा अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए ।

प्रवाल पिष्टी के ब्रांड और प्राइस Brands & Price

  • बैद्यनाथ Baidyanath Prawal Pishti – Rs 231.00
  • पतंजलि Patanjali Praval Pishti – 5 GM Rs. 30.00
  • धूतपापेश्वर Dhootapapeshwar Mouktik Mukta Pishti Rs. 359.00
  • डाबर Dabur Praval Pishti 5Gm Rs. 151.00 आदि।
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