पत्रांगासव सिरप के फायदे और नुक्सान Patrangasava syrup ke fayde or nuksaan

By | May 5, 2020

पत्रांगासव सिरप क्या है? Patrangasava syrup kya hai?

 
पत्रांगासव सिरप एक आयुर्वेदिक ओषधि है जिसका उपयोग मुख्य रूप से महिलाओं के प्रदर रोगों में किया जाता है । इस औषधि का मुख्य घटक द्रव्य पतंग काष्ट होता है । इसीलिए इस औषधि का नाम पत्र अंगा शव रखा गया है ।  यह औषधि भैषज्य रत्नावली के प्रदर रोग अधिकार से ली गई है । यह औषधि आयुर्वेदिक आसव है जिसमें 5 से 10% सेल्फ जनरेटर अल्कोहल  होता है । आइए अब हम इस औषधि के बारे में विस्तार से बात करते हैं ।
  • संधर्भ: भैषज्यरत्नावली, रसायनरोगाधिकार
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक आसव-अरिष्ट
  • मुख्य उपयोग: प्रदर रोग
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल

प्रदर रोग क्या है Pradar rog kya hai

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया चित्र तिरंगा शो का प्रमुख फायदा प्रदर रोग को दूर करना होता है, तो यहां यह जानना भी आवश्यक है कि प्रदर रोग वास्तव में होता क्या है । प्रदर रोग महिलाओं का एक गुप्त रोग होता है, जिसमें महिलाओं की योनि से असामान्य स्राव होता है । प्रदर रोग निम्न दो प्रकार का होता है ।

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श्वेत प्रदर एवं रक्त प्रदर shwet pradar eavm rakt pradar 

श्वेत प्रदर लिकोरिया shwet pradar lukoria

श्वेत प्रदर जिसे आम भाषा में लिकोरिया भी कहते हैं, यह बीमारी महिलाओं की सबसे बड़ी दुश्मन है । क्योंकि इस बीमारी में महिलाएं सुख कर काटा हो जाती हो और उनकी सुंदरता खत्म हो जाती है । इस रोग में महिलाओं की योनि से सफेद और चिपचिपा पदार्थ निकलता रहता है जिसमें से दुर्गंध भी आती है । यह स्राव कभी ज्यादा तो कभी कम होता है ।

यहां हम आपको यह बता दे कि जिन महिलाओं को श्वेत प्रदर लिकोरिया की बीमारी नहीं होती है, उन महिलाओं की योनि से भी एक स्राव हमेशा निकलता रहता है जिसे म्यूकस डिसचार्ज कहते हैं । यह योनि की दीवारों को नरम बनाए रखता है ।  यह लिकोरिया से अलग तरह का होता है । लिकोरिया से होने वाले स्राव में महिलाओं को कमजोरी आती है, जबकि इस स्राव में महिलाओं को कोई कमजोर नहीं आती है ।

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रक्त प्रदर Rakt Pradar

रक्त प्रदर उस बीमारी को कहा जाता है जिसमें महिला के गर्भाशय से रक्त का स्राव होता है तथा शरीर में खून की कमी हो जाती है । जिससे महिला बहुत कमजोर हो जाती है तथा उसके कमर तथा कंधों में दर्द बना रहता है । इस स्थिति में गर्भाशय भी बहुत कमजोर हो जाता है । महिलाओं में बांझपन की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है । रक्त प्रदर को चिकित्सा शास्त्र में मेट्रोरेजिया तथा मेनोरेजिया कहा जाता है ।

पत्रांगासव के घटक द्रव्य Patrangasava ke ghatak dravy

  • पतंग काष्ठ Patranga Caesalpinia sappan 48 grams
  • खैरसार Khadira Acacia catechu 48 grams
  • वासामूल Vasa Adhatoda vasica 48 grams
  • सेमल के फूल Salmali Salmalia malabaricum 48 grams
  • बला Bala Sida cordifolia 48 grams
  • भिलावा Bhallataka Semecarpus anacardium 48 grams
  • गुडहल की कली Japakusuma Hibiscus rosasinensis 48 grams
  • सारिवा Sariva Hemidesmus indicus 48 grams
  • आम की गुठली की मींगी Amra Bija Mangifera indica 48 grams
  • दारुहल्दी Daruhaldi Berberis aristata 48 grams
  • रसोंत Daruhaldi Berberis aristata 48 grams
  • चिरायता Kiratatikta Swertia chireta 48 grams
  • सफ़ेद जीरा Shvet Jeeraka Cuminum cyminum 48 grams
  • बिल्व Bilva Aegle marmelos 48 grams
  • भांगरा Bringraja Eclipta alba 48 grams
  • दालचीनी Twak Cinnamon Cinnamomum zeylanicum 48 grams
  • केशर Kesar Crocus sativus 48 grams
  • लौंग Laung Clove Syzigium aromaticum 48 grams
  • लौह भस्म Lauha Bhasma 48 grams
  • द्राक्षा Draksha 960 g
  • धातकी Dhataki pushpa 768 g
  • पानी Water 24।576 liter
  • चीनी Sharkara Sugar 4।8 kg
  • शहद Madhu Honey 2।4 kg

पत्रांगासव के फायदे Patrangasava  ke fayde

  • पटरंगासवा महिलाओं के प्रदर रोग, श्वेत प्रदर एवं रक्त प्रदर के लिए एक सुप्रसिद्ध एवं लाभदायक दवा होती है ।
  • महिलाओं में मासिक धर्म के समय होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव एवं दर्द में लाभकारी श्वेत प्रदर लिकोरिया की समस्या में लाभकारी ।
  • इसका सेवन करने से रक्त साफ होता है तथा यह माहवारी के समय रक्त में से गंदगी को दूर करता है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से गर्भाशय को बल मिलता है तथा यह गर्भाशय के लिए एक टोनिक का कार्य करता है ।
  • इस दवा के सेवन करने से बांझपन अर्थात इनफर्टिलिटी इस समस्या में भी लाभ मिलता है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से पीरियड्स के समय होने वाले दर्द में राहत मिलती है ।
  • यह ओषधि पाचन संस्थान पर भी अपना सकारात्मक प्रभाव डालती है ।

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सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 5 मिलीलीटर
वयस्क 10 से 20 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं साइड इफेक्ट  saavdhaniya evam side effect

समान्यत इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट नहीं है । इस औषधि को निश्चित मात्रा में चिकित्सक की देखरेख में ही सेवन करना चाहिए । इस ओषधि को बच्चों की पहुंच से दूर रखें । इस औषधि को खाली पेट ना लें क्योंकि इस ओषधि में गुड,शहद एवं द्राक्षा होता है । इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इस औषधि का सेवन करते समय अपना शुगर लेवल लगातार चेक कराते रहना चाहिए । गर्भावस्था के दौरान इस दवा सेवन ना करे ।

निर्माता Brands

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

  1. बैद्यनाथ Baidyanath Patrangasava
  2. डाबर Dabur Patrangasava
  3. महर्षि आयुर्वेद Maharishi Ayurveda Patrangasava
  4. पतंजलि Divya Patrangasava
  5. तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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