नित्यानंद रस के गुण उपयोग फायदे और नुक्सान Nityanand Ras ke fayde or nuksan

By | June 22, 2020

नित्यानंद रस क्या है? Nityanand Ras kya hai?

नित्यानंद रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से हाथीपाव रोग में प्रयोग की जाती है । हाथीपाव रोग को हाथीपगा, श्लीपद, फाइलेरिया या फीलपाँव रोग आदि नामों से भी जाना जाता है । यह कफ दोष एवं वात-कफ दोष के कारण पैदा होने वाला रोग होता है ।

इस रोग में व्यक्ति का पैर बहुत अधिक मोटा हो जाता है तथा देखने में हाथी के पैर की तरह दिखाई देता है, इसीलिए इस रोग को हाथीपांव या फाइलेरिया रोग कहा जाता है । इस रोग में व्यक्ति के पैर में खाज होती है तथा कभी-कभी उसमें से पस भी आता है ।

इस रोग का मुख्य कारण फाइलेरिया नामक कीटाणु होता है जिस कारण रोगी का पैर फूल कर हाथी की तरह हो जाता है । यह रोग ज्यादातर उन स्थानों पर होता है जहां की जलवायु में नमी ज्यादा होती है तथा जहां ठंडक होती है ।

जिन स्थानों पर कूड़ा कचरा पानी या नमी में पड़ा रहता है, वहां इस कूड़े से दुर्गंध पैदा होती है तथा कीटाणु पैदा हो जाते हैं । ऐसे ही स्थान पर रहने वाले लोगों की त्वचा में कफ दोष पैदा हो जाता है ।

शुरुआत में त्वचा थोड़ी फूल कर मोटी हो जाती है । रोगी के शरीर में हल्का हल्का बुखार बना रहता है तथा रोग वाले स्थान पर सूजन बढ़नी शुरू हो जाती है और धीरे-धीरे वह स्थान स्थाई रूप से मोटा हो जाता है ।

नित्यानंद रस इन हिंदी Nityanand Ras in hindi

भारत में बंगाल, कोचीन एवं मालाबार जैसे स्थानों पर इस रोग के रोगी बहुत ज्यादा पाए जाते हैं । इस रोग के कीटाणु केवल पैरों को ही प्रभावित नहीं करते, बल्कि पुरुषों के अंडकोष, लिंग एवं हाथों पर भी इन कीटाणुओं का प्रभाव हो जाता है जिससे यह अंग भी फूल कर बहुत ज्यादा मोटे हो जाते हैं ।

इस सबके अलावा यह औषधि रसोली, गंडमाला, पुरानी हर्निया रोग (आंत्र वृद्धि), पेट के कृमि रोग आदि रोगों में भी फायदा पहुंचाती है ।

नित्यानंद रस एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है, जो हाथी पाव अर्थात फाइलेरिया को दूर करने के लिए सुप्रसिद्ध है । इस औषधि में शुद्ध गंधक, शुद्ध पारा, ताम्र भस्म, वंग भस्म एवं शंख भस्म सहित अन्य जड़ी बूटियां एवं कई प्रकार के नमक मौजूद होते हैं, जिस कारण यह औषधि फाइलेरिया नामक कीटाणुओं को नष्ट करने में सक्षम होती है ।

यह औषधि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ा देती है एवं जठराग्नि को प्रदीप्त कर बल एवं वीर्य की वृद्धि करने वाली होती है ।

नित्यानंद रस के घटक द्रव्य Nityanand Ras ke ghatak dravy

शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गंधक, ताम्र भस्म, काँस्य भस्म, वंग भस्म, शुद्ध हरताल, शुद्ध तूतिया, शंख भस्म, लौह भस्म, विदारीकन्द, सोंठ,मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आंवला, विडंग,विड नमक, समुद्र नमक, सेंधा नमक, सौवर्च लवण, चव्य, पिपरामुल, हपुषा, बच, पाठा, देवदार, इलायची, विधारा, त्रिवृत, चित्रक, दन्ती मूल और शठी में हरीतकी के क्वाथ की भावना

नित्यानंद रस के चिकित्सकीय उपयोग Nityanand Ras ke upyog in hindi

नित्यानंद रस निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

  1. हाथीपाव (श्लीपद, हाथीपगा, फाइलेरिया)
  2. ट्यूमर
  3. मोटापा
  4. गंडमाला
  5. हर्निया (आंत्रवृद्धि)
  6. वृषण का मोटा हो जाना
  7. रसोली

नित्यानंद रस के फायदे

  1. नित्यानंद रस को फाइलेरिया रोग में मुख्य औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
  2. यह औषधि वातदोष एवं कफदोष को संतुलित करती है एवं पित्त की वृद्धि करने वाली होती है ।
  3. इस औषधि का सेवन करने से वात एवं कफ के कारण पैदा होने वाले रोगों में फायदा होता है ।
  4. यह औषधि शरीर की सूजन, दर्द एवं शरीर में रहने वाले बुखार को दूर करने में लाभदायक होती है ।
  5. इस औषधि में विभिन्न प्रकार के नमक एवं जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जिस कारण यह बहुत अच्छी पाचक एवं दीपन है तथा जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन शक्ति बढ़ाती है ।
  6. यह औषधि शरीर के अतिरिक्त जल को सुखा देती है ।
  7. यह शरीर के किसी भी प्रकार के ट्यूमर अर्थात फोड़े को दूर करने में मददगार होती है ।
  8. यह औषधि गंडमाला एवं पुरानी हर्निया (आंत्रवृद्धि) में सहायक होती है ।
  9. यह औषधि मोटापे को दूर करने वाली होती है तथा मेद नाशक होती है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

इस औषधि की एक से दो गोली दिन में दो बार सुबह एवं शाम को भोजन करने के पश्चात गोमूत्र या ताजा पानी से लेनी चाहिए । इस औषधि को लंबे समय तक सेवन कराने से ही लाभ मिलता है । गर्भावस्था में इस औषधि का सेवन किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में एवं डॉक्टर के परामर्श अनुसार सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है ।

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