नवजीवन रस के फायदे गुण उपयोग एवं नुकसान Navjeevan Ras ke fayde or nuksan

By | July 2, 2020

नवजीवन रस क्या है? Navjeevan Ras kya hai?

नवजीवन रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो अपने नाम के अनुसार ही रोगी को नया जीवन प्रदान करने वाली मानी जाती है । यह औषधि कमजोर रोगियों को बल प्रदान करती है तथा ज्ञानवाही नाड़ियों को शक्ति प्रदान करती हैं ।

इस औषधि का सेवन करने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है तथा पाचन तंत्र की समस्याएं जैसे अफारा, अग्निमांद्य एवं अजीर्ण इत्यादि में बहुत अच्छा लाभ मिलता है । यह औषधि हृदय को बल प्रदान करती है तथा एंटीबैक्टीरियल के रूप में भी काम करती है ।

इतना ही नहीं यह औषधि पुरुषों में कामोत्तेजना को दूर करती है एवं अन्य समस्याओं में भी लाभ पहुंचाती है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि यह औषधि अपने आप में एक कंप्लीट टॉनिक है जो लगभग लगभग सभी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग की जा सकती है ।

नवजीवन रस के घटक द्रव्य Navjeevan Ras ke ghatak dravy

  • रससिंदूर,
  • अभ्रक भस्म,
  • लोह भस्म, 
  • शुद्ध कुचीला और चित्रकमूल, ये सब 2-2 तोले
  • त्रिकटु (सोंठ, कालीमिर्च और पीपल) 4 तोले, 
  • चित्रकमूल का क्वाथ, अदरक का रस और नगरवेल के पानों का रस, इन तीनों के साथ क्रमशः 12-12 घंटे खरल करके आध आध रत्ती की गोलियां बना लेवें। 

नवजीवन रस के फायदे Navjeevan Ras ke fayde in hindi

नवजीवन रस अनेकों रोगों में प्रयोग की जाने वाली औषधि है । हमने यहां इस औषधि के फायदों के बारे में विस्तार से वर्णन किया है ।

सेक्स पावर बढ़ाने के लिए लाभदायक नवजीवन रस

नवजीवन रस एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जो पुरुषों की सेक्स पावर को बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है । अत्यधिक मैथुन करने के कारण या बचपन की गलतियों के कारण यदि लिंग में ढीलापन आ गया हो एवं रोगी को शीघ्रपतन या नपुंसकता की शिकायत हो गई हो तो ऐसी स्थिति में नवजीवन रस का सेवन कराया जाता है । जब तक इस औषधि का सेवन कराया जाता है तब तक रोगी रोगी को ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक होता है अन्यथा इस औषधि का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा ।

इस औषधि के साथ सहायक औषधियों के रूप में वसंत कुसुमाकर रस, शुक्र वल्लभ रस एवं काम चूड़ामणि रस का उपयोग करने से अच्छा लाभ मिलता है । यदि रोगी को कब्ज की समस्या हो तो त्रिफला चूर्ण या पंचसकार का चूर्ण का सेवन भी कराया जाता है ।

निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभकारी नवजीवन रस

नवजीवन रस का सेवन करने से निम्न रक्तचाप अर्थात लो ब्लड प्रेशर की समस्या में भी बहुत अच्छा लाभ मिलता है । इस रोग में नवजीवन रस की दो दो गोलियां गर्म दूध या चाय के साथ आधे आधे घंटे के भीतर रोगी को दी जाती है तथा ब्लड प्रेशर को लगातार चेक किया जाता है ।

कुछ समय बाद ही रोगी का ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगता है तथा रोगी अच्छा महसूस करने लगता है।। इस रोग में पूर्ण लाभ के लिए कम से कम 40 दिन तक इस औषधि का सेवन कराना चाहिए । सहायक औषधियों के रूप में नरसिंह चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण आदि का सेवन कराया जा सकता है ।

वात रोगों में लाभकारी नवजीवन रस

नवजीवन रस में त्रिकटु चूर्ण एवं शुद्ध कुचला मौजूद होता है । इन दोनों ही जड़ी बूटियों की तासीर गर्म होती है तथा यह दोनों औषधियां वात एवं कफ नाशक होती हैं । वात रोग के कारण अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा होती हैं जैसे ग्रद्धसी (साइटिका), हाथों पैरों में दर्द, गठियाबाय इत्यादि ।

ऐसी स्थिति में नवजीवन रस का सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । वात रोगों में सहायक औषधि के रूप में वृहत वात चिंतामणि रस व योगेंद्र रस इत्यादि का सेवन करने से जल्दी लाभ मिलता है ।

मानसिक थकान दूर करने में लाभकारी नवजीवन रस

नवजीवन रस मानसिक थकान को दूर करने के लिए बहुत ही अच्छी औषधि होती है । यह औषधि मानसिक तनाव, थकान, अवसाद एवं डिप्रेशन को दूर करने में मददगार होती है । इस स्थिति में नवजीवन रस की एक एक गोली दूध के साथ देने से पूरा आराम मिल जाता है ।

थायराइड में लाभकारी नवजीवन रस

नवजीवन रस का सेवन करने से थायराइड रोग में बहुत अच्छा मिलता है । यह औषधि गर्म तासीर की होती है तथा पाचक एवं दीपन गुणों से युक्त होती है । यह औषधि जठराग्नि को प्रदीप करती है तथा शरीर में मौजूद अतिरिक्त मेद को नष्ट करती है ।

थायराइड रोग में इस औषधि के साथ सहायक औषधि के रूप में आरोग्यवर्धिनी वटी, गोमूत्र हरीतकी, कांचनार गुग्गुल एवं वृद्धिवाधिका वटी का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

अन्य रोगों में लाभकारी नवजीवन रस

यह औषधि हृदय को बल प्रदान करती है । यह पाचन तंत्र से संबंधित रोगों जैसे अग्निमांद्य, अफारा इत्यादि को दूर करती है । यह औषधि यकृत को बल प्रदान करती है जिससे यकृत से पाचक रसों का स्राव सही मात्रा में होता है । यह पेट की वायु को दूर करती है व मल शुद्धि में सहायक होती है ।

यदि पेट में कृमि होने के कारण शरीर में रक्त की कमी हो गई हो एवं पीलिया की स्थिति हो गई हो तो ऐसी स्थिति में नवजीवन रस का सेवन करने से लाभ मिलता है । इस औषधि में त्रिकटु एवं लोह भस्म दोनों ही मौजूद होती हैं, इसलिए यह औषधि उदर कृमि के कारण होने वाली खून की कमी को दूर करने में सहायक होती है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

नवजीवन रस की एक से दो गोली सुबह एवं शाम को भोजन के पश्चात ताजे पानी से ले सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

नवजीवन रस को केवल चिकित्सक के परामर्श अनुसार ही सेवन करना चाहिए । इस औषधि में शुद्ध कुचला मौजूद होता है जो कि एक विषैला पदार्थ है, इसलिए इस औषधि को गलत अनुपात में एवं अधिक मात्रा में सेवन करने पर भयंकर दुष्परिणाम प्रकट हो सकते हैं । जिन रोगियों का ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता हो उन्हें इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह औषधि रक्तचाप को बढ़ाने वाली है ।

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