नाग भस्म के फायदे और नुकसान Nag Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 31, 2020

नाग भस्म क्या है? Nag Bhasma kya hai?

नाग भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका निर्माण सीसे अर्थात लेड से किया जाता है । नाग भस्म में लेड सल्फाइड अधिक मात्रा में होता है इसलिए नाग भस्म को बनाते समय अन्य जड़ी बूटियों के साथ संसाधित करके नाग भस्म बनाई जाती है, ताकि लेड का विषैला प्रभाव नष्ट हो जाए एवं यह मनुष्य के लिए प्रयोग करने योग्य हो जाए ।
सीसे से नाग भस्म बनाने के लिए तिल का तेल, मक्खन, गोमूत्र इत्यादि का प्रयोग किया जाता है । इसके अलावा पीपल एवं इमली की छाल का प्रयोग करके इसकी भस्म बनाई जाती है । नाग भस्म बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है । इसलिए इस  भस्म को बाजार से बना बनाया ही ले लेना चाहिए ।नाग भस्म का सेवन करने से नेत्र रोग, गुल्म अर्थात पेट का दर्द, प्लीहा वृद्धि, प्रदर रोग, अतिसार, डायरिया, बुखार, अम्ल पित्त, मंदाग्नि, गंडमाला, सांस की नली की सूजन, खांसी, शारीरिक निर्बलता, सिरदर्द, यकृत विकार एवं मूत्र रोगों में लाभ मिलता है । यह औषधि अलग-अलग अनुपान में अलग-अलग रोगों में प्रयोग की जाती है ।

नाग भस्म का चिकित्सकीय उपयोग

नाग भस्म को निम्न रोगों में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

  • यकृत, लिवर के रोग एवं प्लीहा वृद्धि में लाभकारी
  • पाचन तंत्र के रोग जैसे कब्ज अपच इत्यादि
  • हर्निया के कारण अम्लता, पेट एवं छाती में जलन होना
  • मूत्र संक्रमण जैसे बार-बार पेशाब आना, रुक रुक कर पेशाब आना या पेशाब का निकल जाना
  • महिलाओं के प्रदर रोग
  • संधिशोथ
  • बवासीर
  • पुरुषों के रोगों एवं नपुंसकता
  • श्वास नलिका की सूजन के कारण होने वाली खांसी
  • रक्त गुल्म
  • अतिसार
  • सिर दर्द
  • पांडूरोग (पीलिया)

नाग भस्म के फायदे Nag Bhasma ke fayde

नाग भस्म आयुर्वेद की एक सुप्रसिद्ध औषधि है जिसे अनेकों रोगों में प्रयोग किया जाता है । शायद ही कोई ऐसा रोग हो जिसमें नाग भस्म का सेवन ना कराया जा सकता हो । नाग भस्म को शुगर डायबिटीज,  पुराने  घाव, बवासीर, डायरिया, पीलिया,  त्वचा रोगों जैसे खुजली, कफ वाली खांसी, काली खांसी, दमा श्वास, शारीरिक कमजोरी,  पेट में दर्द, मोटापा, एनीमिया, संधिशोथ, महिलाओं के प्रदर रोग, अतिसार एवं मिर्गी इत्यादि रोगों में सेवन कराया जा सकता है । इस औषधि का सेवन करने से वात पित्त एवं कफ तीनों ही दोष संतुलित रहते हैं ।

मधुमेह में लाभकारी नाग भस्म

नाग भस्म को मधुमेह अर्थात डायबिटीज के रोगियों को शिलाजीत के साथ सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । इसके अलावा यदि रोगी बहुत ज्यादा कमजोर हो तो इस दवा को गुड़मार बूटी चूर्ण एवं गिलोय सत के साथ मिलाकर शहद के साथ चटाने से भी मधुमेह में लाभ मिलता है । जो रोगी ज्यादा मोटे एवं शरीर में स्थूल होते हैं ऐसे रोगियों को नाग भस्म को टंकण भस्म के साथ दे सकते हैं ।

पाचन तंत्र के रोगों में लाभकारी नाग भस्म

पाचन तंत्र के रोग यकृत की कमजोरी के कारण पैदा होते हैं । यदि यकृत से पाचक रसों का सही मात्रा में स्राव ना हो तो अपच, पेट गैस, मंदाग्नि, कब्ज जैसी समस्या पैदा हो जाती हैं । इस स्थिति में नाग भस्म को पंचकोल(पीपल, पीपला मूल, चव्य, चित्रक एवं सोंठ के चूर्ण के साथ मिलाकर जीरा अर्क के साथ देने से लाभ मिलता है ।

क्षय रोग टीवी मे लाभकारी नाग भस्म

क्षय रोग फेफड़ों के कमजोर हो जाने एवं फेफड़ों के संक्रमण के कारण होता है । इस रोग में नाग भस्म को मुक्ता पिष्टी, चवनप्राश एवं वासवलेह के साथ देने से लाभ मिलता है ।

गठिया या आमवात में लाभकारी नाग भस्म

गठियाबाय नामक बीमारी का मुख्य कारण शरीर में आमवात का उत्पन्न होना माना जाता है । यदि भोजन सही प्रकार से हजम ना हो तो भोजन से आमविश उत्पन्न हो जाता है जो आमवात का कारण बनता है । इसी कारण संधि शोथ एवं गठिया जैसी समस्याएं पैदा होती हैं । इस स्थिति में नाग भस्म को सोंठ के चूर्ण के साथ शहद मिलाकर देने से बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

सूखी खांसी में लाभकारी नाग भस्म

यदि सांस की नली में संक्रमण हो गया हो जिस कारण बहुत ज्यादा खांसी आती हो तो ऐसी स्थिति में नाग भस्म को सितोपलादि चूर्ण के साथ मिलाकर वासारिष्ट के साथ दिया जा सकता है ।

मूत्र संक्रमण में लाभकारी नाग भस्म

यदि रोगी को बार-बार पेशाब आता हो, पेशाब रुक रुक कर आता हो एवं पेशाब रोकना कठिन महसूस होता हो तो इस स्थिति में नाग भस्म को यवक्षार के साथ दिया जा सकता है,  या फिर मुक्ताशुक्ति पिष्टी के साथ मिलाकर मक्खन के साथ भी चटाने से लाभ मिलता है ।

यह हमने आपको नाग भस्म के केवल कुछ ही फायदे बताए हैं । इसके अलावा नाग भस्म के फायदे इतने ज्यादा हैं कि यदि हम उन सभी फायदों को यहां आपको बताए तो यह लेख बहुत ज्यादा लंबा हो जाएगा । यदि आप नाग भस्म के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो आप शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन कर सकते हैं ।

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions

30 मिलीग्राम से 125 मिलीग्राम दिन में दो बार शहद या मक्खन के साथ ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

नाग भस्म को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए । स्वयं इस औषधि को लेने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं । इस औषधि को अधिक मात्रा में लेने से एसिडिटी एवं छाती में जलन जैसी समस्याएं हो सकती है । गर्भवती महिलाओं को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।

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