मुक्ताशुक्ति भस्म के फायदे और नुकसान Muktashukti Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 27, 2020

मुक्ताशुक्ति भस्म क्या है? Muktashukti Bhasma kya hai?

मुक्ताशुक्ति भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मोती के सीप के खोल से बनाई जाती है । मुक्ताशुक्ति भस्म एवं मुक्ताशुक्ति पिष्टी दोनों को ही इसी खोल से बनाया जाता है । सीप का खोल कैल्शियम का बना होता है, इसलिए मुक्ताशुक्ति भस्म एवं मुक्ताशुक्ति पिष्टी में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होती है तथा यह औषधियां कैल्शियम की कमी वाले रोगियों को सेवन कराई जाती है ।

मुक्ताशुक्ति पिष्टी मुक्ताशुक्ति भस्म की तुलना में ज्यादा सोम्य होती है, क्योंकि मुक्ताशुक्ति पिष्टी को गुलाब जल के साथ संसाधित करके बनाया जाता है जबकि मुक्ताशुक्ति भस्म को गजपुट करके बनाया जाता है । इस लेख में हम मुक्ताशुक्ति भस्म का विस्तार से वर्णन करेंगे, क्योंकि मुक्ताशुक्ति भस्म को वेदों के द्वारा ज्यादा प्रयोग किया जाता है तथा मुक्ताशुक्ति भस्म ही ज्यादा प्रचलित भी है ।

मुक्ताशुक्ति भस्म के घटक द्रव्य Muktashukti Bhasma bhasm ke ghatak

मुक्ताशुक्ति भस्म को बनाने एवं इसका शोधन करने में निम्न घटक द्रव्य की आवश्यकता पड़ती है ।

  • मुक्ताशुक्ति (मोती के सीप का खोल)
  • छाछ
  • एलोवेरा का गूदा
  • नींबू का रस

मुक्ताशुक्ति भस्म बनाने की विधि

सबसे पहले मुक्ताशुक्ति को शुद्ध किया जाता है । मुक्ताशुक्ति को शुद्ध करने के लिए इसे 3 दिन तक छाछ में डुबोकर रखा जाता है तथा रोज छाछ को बदला जाता है । दिन के समय इस बर्तन को धूप में रखा जाता है । तीसरे दिन मुक्ताशुक्ति को गर्म पानी से धोते हैं तथा इसके काले रंग के भाग को काट कर अलग कर देते हैं । अब जो सफेद सीप का खोल बचा है इससे ही मुक्ताशुक्ति भस्म बनाई जाती है ।

भस्म बनाने के लिए सबसे पहले इस मुक्ताशुक्ति को किसी मिट्टी के बर्तन में एलोवेरा के गूदे में भरकर रख देते हैं ।इसके पश्चात इसको अग्नि पर रखकर गजफुट किया जाता है । गजपुट से निकालकर इसे नींबू के रस के साथ घोटा जाता है तथा छोटी छोटी टिकिया बनाई जाती हैं । इन टिकियों को सुखा कर उन्हें आग में गजफुट किया जाता है । अंत में इस भस्म का चूर्ण बनाकर कपड छन करके बर्तन में भरकर रख लेते हैं, इसे ही मुक्ताशुक्ति भस्म कहा जाता है ।

मुक्ताशुकता भस्म के चिकित्सकीय गुण

  • यह क्षारीय प्रकृति की होने के कारण प्रबल अम्ल पित्त नाशक है ।
  • यह गठियाबाय में लाभ पहुंचाती है ।
  • पित्त ग़ुलाम में लाभदायक ।
  • रक्त गुल्म मैं लाभदायक ।
  • ह्रदय रोगों में लाभदायक ।
  • अरुचि में लाभदायक

मुक्ताशुक्ति पिष्टी के फायदे Muktashukti Bhasma ke fayde

  • यह औषधि प्रकृति में क्षारीय होती है जिस कारण यह अम्ल पित्त में बहुत ही अच्छा लाभ पहुंचाती है ।
  • अम्ल पित्त के कारण छाती में एवं पेट में जलन होना, मुंह से खट्टी डकार आना, मुंह में छाले हो जाना आदि रोगों में यह फायदा पहुंचाती है ।
  • यह उदर में बने हुए एसिड को नष्ट करती है एवं अम्ल पित्त में लाभ पहुंचाती है ।
  • यह ऑस्टियोपोरोसिस में लाभकारी है ।
  • मुक्ताशुक्ति भस्म कैल्शियम का एक प्राकृतिक स्रोत होती है तथा इसमें कैल्शियम बहुत अधिक मात्रा में होता है इसलिए ऑस्टियोपोरोसिस एवं हड्डियों के अन्य रोगों में इस भस्म का सेवन करने से लाभ मिलता है । इन रोगों में मुक्ताशुक्ति भस्म को हड़जोड़ चूर्ण के साथ देने से अधिक लाभ मिलता है ।
  • यह औषधि जीर्ण जठरशोथ, ग्रहणी के जख्म, सीने में जलन, मुंह के छाले जैसी समस्याओं में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है । इस औषधि का सेवन करने से अपच, भूख की कमी, गैस बनना, पेट का फूलना, पेट फूलना, पेट में सूजन आ जाना आदि समस्याओं में भी लाभ मिलता है ।
  • जिन लोगों के मुंह से दुर्गंध आती है मुंह कड़वा या खट्टा रहता है, खाने में स्वाद नहीं आता है, एवं भोजन में अरुचि रहती हो, उन्हें इस औषधि का लाभ सेवन करने से लाभ मिलता है । यह सभी लक्षण पित्त की अधिकता के कारण होते हैं एवं यह दवा पित्त का दमन करती है ।
  • वात एवं पित्त की अधिकता के कारण कुछ लोगों के हृदय में पीड़ा रहती है एवं छाती में भारीपन बना रहता है । इस औषधि का सेवन करने से यह समस्या दूर हो सकती है ।
  • पित्त अतिसार के कारण बार बार दस्त होना, जिसमें दस्त का रंग पीला नीला या लाल रंग का हो जाए एवं रोगी को बार बार चक्कर आए, बेहोशी आए एवं गुदा के आसपास की त्वचा फट जाए या छोटी-छोटी फुंसियां हो जाए तो इन सभी लक्षणों में मुक्ताशुक्ति भस्म को देने से लाभ मिलता है । इस स्थिति में इस औषधि को दाडिमावलेह, आम का मुरब्बा, मक्खन या अनार के शरबत के साथ सेवन कराया जाता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि Dosage & Directions

मुक्ता शुक्ति भस्म और पिष्टी की सामान्य खुराक निम्नानुसार है:

शिशु 60 से 125 मिलीग्राम *
बच्चे 125 से 250 मिलीग्राम *
वयस्क 250 से 500 मिलीग्राम *
गर्भावस्था 125 से 250 मिलीग्राम *
वृद्धावस्था 125 से 250 मिलीग्राम *
अधिकतम संभावित खुराक (प्रतिदिन या 24 घंटे में) 1000 मिलीग्राम (विभाजित मात्रा में)
* दिन में दो बार गुलकंद, शहद, पानी या रोग के अनुसार उचित अनुपान के साथ

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है लेकिन इस औषधि की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है । इस औषधि को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सेवन करें ।

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