मंडूर भस्म के फायदे और नुकसान Mandur Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 29, 2020

मंडूर भस्म क्या है? Mandur Bhasma kya hai?

मंडूर भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मंडूर अर्थात जंग लगे हुए पुराने लोहे से बनाई जाती है । यह भस्म यकृत अर्थात लीवर एवं तिल्ली के रोगों में बहुत ही अच्छा फायदा पहुंचाती है ।

लिव-52 जोकि लीवर की एक सुप्रसिद्ध औषधि है तथा जिसे लिवर टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, मैं मंडूर भस्म मुख्य घटक के रुप में प्रयोग किया जाता है ।

मंडूर भस्म का सेवन करने से यकृत एवं तिल्ली के रोगों में लाभ मिलता है, खून की कमी अर्थात एनीमिया दूर होता है, पीलिया में फायदा होता है, महिलाओं के मासिक धर्म की गड़बड़ी एवं मासिक धर्म का बिल्कुल ना होना जैसी समस्या में फायदा मिलता है ।

मंडूर भस्म इन हिंदी Mandur Bhasma in hindi

इसके अलावा भूख ना लगना, सामान्य कमजोरी एवं बेचैनी जैसी समस्या में भी इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

मंडूर भस्म की तुलना लोह भस्म से की जाती है, क्योंकि मंडूर भस्म एवं लौह भस्म में कोई ज्यादा अंतर नहीं है । दोनों के गुण धर्म एवं उपयोगिता एक जैसे ही हैं । मंडूर भस्म लोहे से ज्यादा सौम्य होती है तथा यह लोहे के ऑक्साइड (जंग लगा लोहा) से बनी होती है ।

इसलिए इसमें आयरन की प्रचुर मात्रा होती है, जिस कारण इस औषधि का सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है, चेहरे एवं हाथों का पीलापन एवं लीवर एवं स्प्लीन के रोगों में यह बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है ।

मंडूर भस्म के घटक द्रव्य Mandur Bhasma ke ghatak dravy

मंडूर भस्म व इसका शोधन और मारण करके मंडूर भस्म बनाने के लिए निम्न घटक द्रव्यों की आवश्यकता होती है ।

  • पुराना मंडूर अर्थात जंग लगा हुआ लोहा  (फेरिक ऑक्साइड या रेड आयरन ऑक्साइड)
  • त्रिफला काढ़ा
  • गोमूत्र
  • एलोवेरा रस

मंडूर भस्म बनाने की विधि

सबसे पहले कम से कम 100 साल पुराना मंडूर लिया जाता है, क्योंकि आयुर्वेद में 100 साल पुराने मंडूर को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । यदि मंडूर 80 वर्ष पुराना हो तो भी उसे प्रयोग में किया जा सकता है लेकिन 60 वर्ष से कम उम्र के मंडोर को विष तुल्य माना जाता है तथा इसकी भस्म नहीं बनाई जाती है ।

100 वर्ष पुराने मंडूर का एक भाग एवं त्रिफला काढ़े का चार भाग लिया जाता है । सबसे पहले मंडूर एवं त्रिफला काढ़े को आग पर गर्म किया जाता है । इस मिश्रण को तब तक गर्म करते हैं जब तक इस मिश्रण में मौजूद सारा पानी उड़ ना जाए तथा पात्र में केवल चूर्ण ही बच जाए ।

इसके पश्चात इस चूर्ण को गोमूत्र एवं एलोवेरा रस में मिलाकर अच्छी तरह से घोटा जाता है एवं तत्पश्चात इसे सुखाया जाता है । जब यह अच्छी तरह सूख जाता है तब इसे भट्टी पर रखकर उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है।। इस प्रकार मंडूर भस्म प्राप्त हो जाती है ।

नोट: मंडूर भस्म बनाना थोड़ा कठिन कार्य है क्योंकि सबसे पहले तो 80 वर्ष यह 100 वर्ष पुराना मंडूर मिलना कठिन है एवं इसके पश्चात ऊपर बताई गई विधि के अनुसार इस भस्म को बनाना इतना सरल नहीं है । इसलिए इस भस्म को बना बनाया ही ले लेना चाहिए ।

मंडूर भस्म का रासायनिक संगठन

मंडूर भस्म में फेरिक ऑक्साइड एवं या रेड आयरन ऑक्साइड मौजूद होता है ।

मंडूर भस्म के चिकित्सकीय उपयोग

मंडूर भस्म को निम्न रोगों में सेवन कराया जाता है ।

  • यकृत वृद्धि
  • प्लीहा वृद्धि
  • उदर शूल
  • रक्ताल्पता
  • एनीमिया
  • पांडु रोग (पीलिया)
  • भूख की कमी
  • रजोरोध अर्थात मासिक धर्म का बिल्कुल ना होना
  • रक्त प्रदर
  • सामान्य दुर्बलता

मंडूर भस्म के फायदे Mandur Bhasma ke fayde

  • यह औषधि यकृत एवं प्लीहा वृद्धि को सही करती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से यकृत सही कार्य करता है, जिससे भूख ना लगना, बेचैनी रहना एवं सामान्य कमजोरी दूर होती है ।
  • पेट में दर्द रहना, भारीपन रहना आदि रोगों में यह औषधि लाभ पहुंचाती है ।
  • यह खून की कमी के कारण पैदा हुए अन्य दोषों को दूर करती है ।
  • यह औषधि लोह भस्म के स्थान पर प्रयोग की जा सकती है ।
  • यह लोह भस्म से अधिक सौम्य होने के कारण इसे गर्भावस्था में एवं बच्चों को भी सेवन कराया जा सकता है ।
  • शरीर में आने वाली सूजन एवं सर्वांगशोथ में यह दवा फायदा करती है ।
  • यह पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालती है ।
  • यह रक्त में लाल रक्त कणिकाओं का पुनर्निर्माण करती है एवं हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से मिट्टी एवं खड़िया इत्यादि खाने की आदत छूट जाती है, क्योंकि यह सभी आदतें हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होती हैं ।

मात्रा एवं सेवन विधि

मण्डूर भस्म (Mandur Bhasma) की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु संस्तुति नहीं
बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 25 से 50 मिलीग्राम
वयस्क 125 से 375 मिलीग्राम
गर्भावस्था 25 मिलीग्राम
वृद्धावस्था 50 से 125 मिलीग्राम
अधिकतम संभावित खुराक 750 मिलीग्राम *

*  कुल दैनिक खुराक विभाजित मात्रा में

सेवन विधि (Directions) 

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) त्रिकटु चूर्ण एवं शहद के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

  • सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है, लेकिन हम आपको सलाह देते हैं कि आप इस औषधि को केवल अपने डॉक्टर की सलाह लेने के पश्चात ही सेवन करें ।
  • अच्छी कंपनी की बनी हुई मंडूर भस्म का ही सेवन करना चाहिए । कच्ची या अधपकी मंडूर भस्म का सेवन करने से शरीर में विषैले पदार्थ अर्थात टॉक्सिंस की अधिकता हो सकती है, जिससे मुंह का स्वाद बदल सकता है एवं मल का रंग काला हो सकता है ।
  • गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को इस औषधि का सेवन कराना संभवतः सुरक्षित है ।

उपलब्धता

This medicine is manufactured by Baidyanath (Mandoor Bhasma), Dabur (Mandoor Bhasma), Patanjali Divya Pharmacy (Divya Mandura Bhasma), Manil (Mandur Bhasma), Rasashram (Mandoor Bhasma) and many other Ayurvedic pharmacies.

आपको यह लेख कैसा लगा, अपने विचार हमे कमेन्ट के माध्यम से जरुर बताये ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *