लक्ष्मी विलास रस नारदीय के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Laxmi Vilas Ras ke fayde or nuksan

By | June 11, 2020

लक्ष्मी विलास रस नारदीय क्या है? Laxmi Vilas Ras Nardiya kya hai?

लक्ष्मी विलास रस नारदीय रसायन है जो बल, बुद्धि एवं वीर्य की वृद्धि करती हैं तथा सप्त धातु को पुष्ट करके हमारे शरीर को अनेक रोगों से बचाती है ।

यह औषधि मुख्य रूप से सन्निपात, 18 प्रकार के कुष्ठ रोगों,  20 प्रकार के प्रमेह रोगों, नाड़ी वरण अर्थात साइनस एवं फिस्टुला, अर्श (बवासीर), भगंदर, हाथीपांव, आंत्रवृद्धि, अतिसार, आमवात,  गला बैठना, उदर रोगों, कर्णविकार, नासा विकार, राज्यक्षमा, पुरुष रोगों एवं स्त्री रोगों में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है ।

इस औषधि के इतने अधिक फायदे हैं कि उन सभी फायदों का इस लेख में वर्णन करना संभव नहीं है, अन्यथा यह लेख बहुत बड़ा हो जाएगा । लेकिन हमने आपकी जानकारी के लिए लक्ष्मी विलास रस नारदीय के मुख्य मुख्य सभी फायदों का वर्णन इस लेख में किया है ।

लक्ष्मी विलास रस नारदीय इन हिंदी Laxmi Vilas Ras in hindi

इस औषधि में अभ्रक भस्म मुख्य औषधि के रूप में मौजूद होता है । इसलिए इस औषधि को लक्ष्मी विलास रस अभ्रक भी कहा जाता है । यह औषधि कमजोर हृदय वाले रोगियों, जिनका हृदय बहुत ज्यादा कमजोर हो गया हो तथा जिनके हृदय की धड़कन अनियमित हो गई हो को भी दी जाती है । यह ह्रदय तथा फेफड़ों को मजबूती प्रदान करती है तथा यह ह्रदय रक्षक के रूप में सेवन की जाने वाली औषधि है ।

इस औषधि का वर्णन भैषज्य रत्नावली के रसायन अधिकार में किया गया है । इस दवा को रसायन इसलिए कहा गया है क्योंकि यह औषधि हमारे शरीर में बल, बुद्धि, वीर्य एवं ओज की वृद्धि करती है तथा लगभग लगभग सभी प्रकार के रोगों को दूर करके जीवनी शक्ति को बढ़ाती है । यह शरीर में नए खून का निर्माण करती है, पुराने बुखार को दूर करती है एवं व्यक्ति को नवजीवन प्रदान करती है ।

लक्ष्मी विलास रस नारदीय के घटक द्रव्य Laxmi Vilas Ras ke ghatak dravy

  • अभ्रक भस्म Krishnabhra (Abhraka) bhasma 48 g
  • रस Rasa (Parada) Shuddha 24 g
  • गंधक Gandhaka Shuddha 24 g
  • कपूर Chandra (Karpura) (Sub . Ext.) 12 g
  • जावित्री Jatikosha (Jatiphala) (Ar.) 12 g
  • जायफल Jatiphala (Sd.) 12 g
  • विधारा Vriddhadaraka (Vriddhadaruka) (Sd.) 12 g
  • धतुरा बीज Dhusturaka (Dhattura) (Sd.) 12 g
  • भांग के बीज Trailokya vijaya (Vijaya) bija (Bhanga) (Sd.) 12 g
  • विदारी छाल Vidari mula (Rt . Tr.) 12 g
  • शतावरी Narayani (shatavari) (Rt . Tr.) 12 g
  • नागबला Nagabala (Rt.) 12 g
  • अतिबला Atibala (Rt.) 12 g
  • गोखरू Gokshuraka (Gokshura) (Fr.) 12 g
  • निकुला/ हिज्जल Nicula bija Barringtonia acutangula(Sd.) 12 g
  • पान के पत्ते का रस घोटने के लिए Parna patra (Nagavalli) (Lf.) Q .S. (for mardana)

लक्ष्मी विलास रस नारदीय के चिकित्सीय उपयोग Laxmi Vilas Ras ke upyog

लक्ष्मी विलास रस नारदीय को निम्न रोगों के निदान में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

  1. प्रमेह
  2. धातु क्षीणता
  3. गुदा रोग
  4. बवासीर एवं भगंदर
  5. कुष्ठ रोग
  6. वर्ण (अल्सर)
  7. हाथीपांव
  8. गले के संक्रमण
  9. खांसी
  10. नजला-जुकाम
  11. राजयक्ष्मा (टीवी)
  12. पीनस
  13. आंत्रवृद्धि (हर्निया)
  14. अतिसार
  15. गठियाबाय (आमवात)
  16. निगलने में दिक्कत
  17. आंख कान नाक एवं मुख के रोग
  18. मोटापा

लक्ष्मी विलास रस नारदीय के फायदे Laxmi Vilas Ras ke fayde

  • लक्ष्मी विलास रस नारदीय को औषधि नहीं बल्कि रसायन कहा जाता है, क्योंकि यह बल, बुद्धि, वीर्य एवं ओज की वृद्धि करती है ।
  • यह वात, पित्त एवं कफ तीनों ही दोषों को दूर करती है, इसलिए इसे त्रिदोष नाशक कहा जाता है ।
  • यह विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर एवं अन्य हर प्रकार के बुखार में लाभदायक होती है ।
  • यह रसायन रक्तवर्धक, बलवर्धक, वीर्यवर्धक एवं धातु वर्धक है ।
  • यह दवा पाचन तंत्र पर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।
  • इसका सेवन करने से चर्म रोगों में लाभ मिलता है ।
  • यह फेफड़ों के संक्रमण, फेफड़ों में सूजन या दर्द होना, फेफड़ों मे जकड़न होना, हर प्रकार की खांसी, जुखाम, बहुत ज्यादा कफ बनना, कफ के कारण बुखार होना, निमोनिया, दमा श्वास तथा नाक की एलर्जी (इनफ्लुएंजा) जैसे रोगों में फायदा पहुंचाती है ।
  • यह अट्ठारह प्रकार के कुष्ठ रोगों तथा 20 प्रकार के प्रमेह रोगों को को दूर करती है ।
  • यह कामोद्दीपक रसायन है अर्थात इसका सेवन करने से पुरुषों में काम उत्तेजना बढ़ती है ।
  • यह पुरुषों के वीर्य विकार जैसे वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन तथा शुक्राणुओं के विकारों में लाभदायक होती है ।
  • यह नपुंसकता व दुर्बलता में बहुत अच्छा फायदा दिखाती है ।
  • यह औषधि हृदय को बल प्रदान करती है ।
  • यह बवासीर तथा भगंदर जैसे रोगों में फायदा पहुंचाती है ।
  • यह हाथीपांव जैसे भयंकर रोग में लाभ पहुंचाती है ।
  • यह आंत, अतिसार जैसे रोगों में फायदा पहुंचाती है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

  • लक्ष्मी विलास रस की एक एक गोली दिन में दो बार या अधिकतम चार बार ताजे पानी से ले सकते हैं ।
  • एक टेबलेट लगभग 250 मिलीग्राम की होती है ।
  • जीर्ण ज्वर एवं वातदोष में अदरक के रस एवं शहद के साथ ले सकते हैं ।
  • विषम ज्वर में पिपली के चूर्ण एवं शहद के साथ ले सकते हैं ।
  • अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में तथा चिकित्सक के परामर्श अनुसार इस औषधि का सेवन करने से कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए । गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस औषधि का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए । इस औषधि को ठंडी एवं सुखी जगह पर रखना चाहिए ।

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One thought on “लक्ष्मी विलास रस नारदीय के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Laxmi Vilas Ras ke fayde or nuksan

  1. Prakash Acharya

    Nardiy laxmi Vilas ras me bahu dinose letahu bahu acchi dawai hai me sinocitis ke liye letahu

    Reply

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