लवंगादि वटी के गुण उपयोग घटक फायदे और नुकसान Lavangadi Vati ke fayde or nuksan in hindi

By | June 16, 2020

लवंगादि वटी क्या है? Lavangadi Vati kya hai?

लवंगादि वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से श्वसन रोगों में प्रयोग की जाती है । इस औषधि का सेवन करने से सभी प्रकार की खांसी में आराम मिलता है । खांसी चाहे सूखी हो या कफ वाली दोनों ही स्थितियों में लवंगादि वटी लाभदायक होती है । यह औषधि श्वसन संक्रमण, कफ, बार बार खांसी होना, खांसी का धसका उठना एवं जुखाम आदि के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

लवंगादि वटी में लोंग, बहेडे की छाल, पीपल, दालचीनी, मुनक्का सहित अन्य बहुत सी ऐसी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जिनके कारण इस औषधि की तासीर इतनी गर्म हो जाती है कि यह औषधि श्वसन प्रणाली में होने वाले संक्रमण, कफ, बलगम, खांसी, नजला-जुकाम इत्यादि को जड़ से खत्म कर देती है । यह खांसी, जुकाम एवं कफ रोग की बहुत ही उत्तम औषधि है ।

लवंगादि वटी के घटक द्रव्य Lavangadi Vati ke ghatak dravy

  • लौंग (Syzgium aromaticum) – 10%
  • बहेरा (Terminalia bellirica) – 5%
  • पीपल (Piper longum) – 5%
  • सागर टिगल – 4%
  • काकडा-श्रंगी (Pistacia integerrima) – 3%
  • दाड़िम-त्वक (Bark of Punica granatum) – 2%
  • दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum) – 3%
  • खैरसार (Acacia catecha) – 14%
  • मुलेठी सत्व (Extract of Glycyrrhiza glabra) – 26%
  • मुनक्का (Vitis vinifera) – 14%
  • आक के फूल (Flowers of calotrophic procera) – 7%
  • नौसादर – 3%
  • कपूर (Cinnamomum camphora) – 2%
  • सुहागा – 2%

लवंगादि वटी के चिकित्सकीय उपयोग Lavangadi Vati ke upyog in hindi

लवंगादि वटी को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

  1. छाती में कफ या बलगम जमा होने पर
  2. बार बार खांसी आने पर
  3. सूखी या कफ वाली खांसी आने पर
  4. सांस लेने में दिक्कत होने पर
  5. गले में खराश होने पर
  6. दमा श्वास अस्थमा होने पर
  7. सामान्य सर्दी जुकाम होने पर

लवंगादि वटी के फायदे Lavangadi Vati ke fayde in hindi

  • यह औषधि तासीर में गर्म होती है ।
  • इसका सेवन करने से छाती में जमा हुआ बलगम बाहर निकल जाता है ।
  • यह औषधि सूखी खांसी एवं कफ वाली खांसी दोनों में ही बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है ।
  • इस औषधि की दो दो गोलियां सुबह दोपहर शाम चूसने से छाती में जमा हुआ बलगम ढीला होकर निकल जाता है, जिससे सांस नली साफ हो जाती है ।
  • यह गले की खराश एवं खांसी में राहत पहुंचाती है ।
  • यह औषधि वात एवं कफ को कम करती हैं तथा पित्त को बढ़ाती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी पावर) बहुत अधिक बढ़ जाती है ।

    नोट: खांसी ज्यादा होने पर सितोपलादि चूर्ण का सेवन सहायक ओषधि के रूप में कराया जा सकता ही ।

सेवन विधि एवं मात्रा

इस औषधि की एक गोली या दो गोली दिन में 4 से 5 बार चूसने पर आराम मिल जाता है । इस औषधि को चूस  कर ही सेवन करना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्परिणाम

सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्परिणाम नहीं है, लेकिन यह औषधि पित्त वर्धक होती है । इसलिए जिन लोगों को पित्त की समस्या हो उन्हें इस औषधि का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए ।

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