कपर्दक भस्म (वराटिका भस्म) के फायदे और नुकसान Kapardak Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 26, 2020

कपर्दक भस्म क्या है? Kapardak Bhasm kya hai?

कपर्दक भस्म आयुर्वेदिक औषधि है जिसे वराटिका भस्म के नाम से भी जाना जाता है । यह भस्म कौड़ी से बनाई जाती है । आपने पीली कौड़ी एवं सफेद कौड़ी का नाम तो सुना ही होगा, जिसका ज्योतिष में बहुत ज्यादा महत्व होता है । दीपावली के समय यह कोडी आपको बाजार में आसानी से मिल जाती है ।

कोड़ी समुंद्र से निकलती है तथा यह एक प्रकार का कैलशियम कार्बोनेट होती है । आयुर्वेद में ज्यादातर पीली कौड़ी की भस्म बनाई जाती है एवं इसे ही कपरदक भस्म के रूप में प्रयोग किया जाता है । इस औषधि की तासीर गर्म होती है तथा इसे मुख्य रूप से अम्ल पित्त, पेट की बीमारियों, इज्जत रत की बीमारियों एवं संग्रहणी रोग में प्रयोग किया जाता है ।

कपर्दक भस्म के घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि

कपर्दक भस्म का निर्माण करने के लिए पीली कौड़ी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । जो कोड़ी पीले रंग की हो, आकार में लंबी एवं गोल हो तथा जिसके पीठ पर गांठे हो ऐसी कोडी को वराटिका कोडी कहा जाता है तथा इसे ही भसम बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है ।

कोड़ी से भस्म बनाने के लिए सबसे पहले कोडी का शोधन किया जाता है एवं उसके पश्चात भस्म बनाकर उसे पीसकर बारीक चूर्ण तैयार कर लिया जाता है । इसे ही कपर्दक भस्म कहा जाता है, जिसे अनेकों रोगों में औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है ।

कपर्दक भस्म के चिकित्सकीय उपयोग

कपरदक भस्म को निम्न रोगों में सेवन कराया जाता है ।

  • अम्लपित्त
  • ग्रहणी
  • रक्तपित्त
  • कान का बहना
  • नेत्र रोग
  • पेट दर्द
  • पेट फूलना
  • भूख में कमी
  • मुंह में खट्टा स्वाद रहना
  • अजीर्ण एवं अपच

कपर्दक के फायदे Kapardak Bhasm ke fayde

अम्ल पित्त नाशक कपर्दक भस्म

यह भस्म अम्लपित्त दूर करती हैं तथा कमजोर पाचन के कारण भोजन में बनने वाले आमविश को दूर करती है । इस औषधि का सेवन करने से भूख बढ़ती है एवं पाचन सही रहता है ।

आंतों की सूजन में लाभकारी कपर्दक भस्म

इस औषधि में वायु नाशक एवं सूजन नाशक गुण मौजूद होते हैं । यह औषधि आंतों की वायु को दूर करती है जिससे पेट का फूलना सही हो जाता है । इसके अलावा यह पेट में आई हुई सूजन भी सही करती है ।

इस रोग में इस औषधि को गाय के घी एवं मिश्री के साथ सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । यदि इस औषधि के साथ आरोग्यवर्धिनी वटी का प्रयोग कराया जाए तो लाभ शीघ्र मिलता है ।

पेट दर्द में लाभकारी कपर्दक भस्म

यदि गैस के कारण पेट में दर्द रहता हो एवं पेट में भारीपन का एहसास रहता हो तो इस औषधि को सहायक औषधि के रूप में सेवन कराया जा सकता है । पेट दर्द में इस औषधि को गाय के घी एवं मिश्री के साथ सेवन कराया जाता है ।

उबकाई एवं खट्टी डकारें में लाभकारी कपर्दक भस्म

जिन लोगों का पाचन तंत्र सही ना रहता हो, आमविश ज्यादा बनता हो एवं पित्त की अधिकता रहती हो, ऐसे लोगों के मुंह में खट्टी डकार आती हैं एवं बार-बार उबकाई आती है । ऐसी स्थिति में कपर्दक भसम का सेवन करने से आराम मिलता है ।

अति अम्लता (हाइपरएसिडिटी) में लाभकारी कपर्दक भस्म

कपर्दक भस्म को हाइपरएसिडिटी में स्वर्ण माक्षिक भस्म के साथ सेवन कराने से लाभ मिलता है
। यदि रोगी को बलगम वाली उल्टी भी आ रही हो तो इस औषधि को सेवन कराने से जल्दी लाभ मिलता है ।

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions

  • 250 mg से 500 mg, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे मक्खन या मलाई के साथ लें। सीधे लेने पर यह जीभ कट सकती है।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

  • इस औषधि को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सेवन करना चाहिए ।
  • इस औषधि को अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • इस औषधि को जीभ पर रखने से जीभ पर दरारे पड़ सकती हैं, इसलिए इस औषधि को गाय के घी, गिलोय सत या शहद के साथ ही सेवन करना चाहिए  ।
  • इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए ।

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