कांत लौह भस्म के फायदे और नुकसान Kant Loh Bhasma ke fayde or nuksaan

By | May 26, 2020

कांत लौह भस्म क्या है? Kant Loh Bhasma kya hai?

कांत लौह भस्म एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है जो रसायनिक रूप से आयरन का ऑक्साइड है । इस औषधि को आयुर्वेदिक चिकित्सकों के द्वारा लोहे की कमी के कारण होने वाली रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया, पांडुरोग पीलिया एवं इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याओं में प्रयोग किया जाता है ।

यह औषधि खून में लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करती है एवं उनका पुनर्गठन करती है, जिससे पीलिया के कारण आने वाली कमजोरी में इस औषधि का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । पीलिया के रोगियों का चेहरा निस्तेज एवं कमजोर हो जाता है, इस औषधि का सेवन करने से चेहरे पर एक नई रोनक एवं क्रांति आ जाती है । यही कारण है कि इस औषधि का नाम कांत लौह भस्म रखा गया है ।

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कांत लौह भस्म के घटक द्रव्य Kant Loh Bhasma ke ghatak

कांत लौह भस्म को बनाने के लिए एवं इसकी शुद्धि करने के लिए निम्न घटक द्रव्य की आवश्यकता होती है ।

  • कांत लौह (शुद्ध आयरन ऑक्साइड)
  • छाछ
  • कुलथी का काढ़ा
  • एलोवेरा रस
  • जाम्बुल के पेड़ की छाल

कांत लौह भस्म के चिकित्सकीय गुण

कांत लोह भस्म को निम्नलिखित रोगों में प्रयोग किया जा सकता है ।

  • लोहे की कमी के कारण होने वाली रक्ताल्पता
  • एनीमिया
  • पांडु रोग(पीलिया)
  • इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
  • सामान्य कमजोरी

कांत लौह भस्म के फायदे Kant Loh Bhasma ke fayde

रक्ताल्पता (एनीमिया) में लाभकारी कांत लौह भस्म

कांत लौह भस्म में लोहे की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है जिस कारण इस भस्म का सेवन करने से शरीर में लोहे की कमी दूर हो जाती है । यह लाल रक्त कणिकाओं का पुनर्निर्माण करती है तथा उनका पुनर्गठन करती है ।

जिस कारण एनीमिया के कारण होने वाली समस्याओं जैसे थोड़ा सा काम करने पर ही थकान हो जाना, कमजोरी, चेहरा एवं हाथ पीले पीले रहना, सांस लेने में दिक्कत होना, सिर में दर्द रहना एवं भारीपन रहना, हाथों पैरों का ठंडा रहना, दिल का तेज धड़कना एवं नाखूनों को कमजोर हो जाना इत्यादि मैं फायदा होता है । इतना ही नहीं इस दवा का सेवन करने से भूख बढ़ती है तथा पाचन तंत्र भी सही रहता है ।

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पीलिया में लाभकारी कांत लोह भस्म

इस औषधि का सेवन करने से पांडु रोग अर्थात पीलिया में बहुत अच्छा फायदा मिलता है तथा पीलिया के कारण आई हुई कमजोरी इस औषधि का सेवन करने से दूर हो जाती है । यह औषधि रक्त में लाल रक्त कणिकाओं को बढ़ाती है एवं बिलीरुबिन के स्तर को कम करती है ।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम मे लाभकारी कांत लोह भस्म

यह भस्म पेट एवं बड़ी आंतों में होने वाले रोगों जैसे पेट में दर्द के साथ मरोड़ होना, बार-बार मल त्याग करने की इच्छा होना, पेट में गैस बनना एवं कब्ज इत्यादि को दूर करने में लाभदायक होती है ।

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मात्रा एवं सेवन विधि Dosage & Directions

कांत लौह भस्म को 1 दिन में दो बार सुबह एवं शाम 50 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक लिया जा सकता है । इस औषधि की अधिकतम संभावित खुराक 500 मिलीग्राम प्रतिदिन है । इस औषधि के साथ चवनप्राश का सेवन करने से सामान्य कमजोरी एवं एनीमिया में बहुत अच्छा लाभ मिलता है । इस औषधि को पिपली के चूर्ण या शहद के साथ भी सेवन किया जा सकता है ।

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सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यत इस दवा का कोई नुक्सान या दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन हम आपको यही सलाह देंगे की आप इस दवा का सेवन अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें ।

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