कांकायन वटी के गुण उपयोग फायदे और नुक्सान Kankayan Vati ke fayde or nuksan

By | June 19, 2020

कांकायन वटी क्या है? Kankayan Vati kya hai?

कांकायन वटी आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से बादी बवासीर को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है । कांकायन वटी का वर्णन भैषज्य रत्नावली के अर्श रोगाधिकार में किया गया है । इस औषधि में जो जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं उनमें बवासीर को दूर करने के गुण मौजूद होते हैं ।

यह औषधि पाचन तंत्र पर भी अपना बहुत अच्छा प्रभाव डालती है तथा कब्ज को दूर करने में सहायक होती है । इस औषधि में शुद्ध भिलावा मौजूद होता है । भिलावा तासीर में गर्म होता है तथा रक्त के प्रवाह को बढ़ाने वाला होता है ।

इसलिए कांकायन वटी का प्रयोग खूनी बवासीर में नहीं किया जाता है । इसका प्रयोग केवल बादी बवासीर में ही किया जाता है क्योंकि बादी बवासीर में रोगी को मल के साथ खून नहीं आता है ।

कांकायन वटी भी अर्शकुठार रस की तरह बादी बवासीर को जड़ से खत्म करने के लिए एक सुप्रसिद्ध औषधि है । यह औषधि भी बवासीर के मस्सों को सुखा देती है, जिससे बवासीर के मस्सों से होने वाला दर्द ठीक हो जाता है एवं रोगी को आराम मिलता है ।

कांकायन वटी के घटक द्रव्य Kankayan Vati ke ghata dravy

हरड़ का वक्कल 48 ग्राम
काली मिर्च 48 ग्राम
जीरा 48 ग्राम
पीपल 48 ग्राम
पीपलामूल 96 ग्राम
चव्य 144 ग्राम
चीता 192 ग्राम
सोंठ 240 ग्राम
शुद्ध भिलावा 384 ग्राम
जिमीकन्द 768 ग्राम
यवक्षार 96 ग्राम
गुड़ उपरोक्त सभी औषधियों की दुगनी मात्रा

कांकायन वटी के फायदे Kankayan Vati ke fayde in hindi

  1. कांकायन वटी बादी बवासीर में लाभदायक होती है ।
  2. यह औषधि बवासीर के मस्सों को सुखा देती है ।
  3. इस औषधि का सेवन करने से बवासीर के मस्सों से होने वाले दर्द में बहुत ज्यादा आराम मिलता है ।
  4. यह औषधि पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालती है तथा कब्ज को दूर करती है ।
  5. यह औषधि वात एवं कफ को संतुलित करती है तथा पित्त को बढ़ाती है ।
  6. बवासीर के अलावा यह औषधि अग्निमांद्य्य एवं पीलिया रोग में भी लाभ पहुंचाती है ।
  7. यह औषधि भूख बढ़ाती है एवं यकृत को स्वस्थ रखती है ।
  8. इस औषधि का सेवन करने से गुदा के आसपास दर्द एवं सूजन में आराम मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

इस औषधि की दो-दो गोली सुबह शाम ठंडे पानी या छाछ के साथ ले सकते हैं । इस औषधि के साथ यदि अभयारिष्ट के दो दो चम्मच भोजन के पश्चात पानी की समान मात्रा के साथ लिए जाएं तो जल्दी लाभ मिलता है । अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । इस औषधि को खूनी बवासीर में नहीं देना चाहिए । इसका कारण यह है कि इस औषधि में शुद्ध भिलावा मौजूद होता है जो उष्ण वीर्य होता है एवं तासीर में गर्म होता है एवं रक्त के प्रवाह को बढ़ाने वाला होता है, जिससे यह को सभी खूनी बवासीर में खून को और अधिक बढ़ा सकती हैं । इसे केवल बादी बवासीर में ही सेवन किया जाना चाहिए ।

 

 
 

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