कनकासव सिरप के गुण उपयोग फायदे एवं नुक्सान Kanakasavam Syrup uses and benefits in hindi

By | May 1, 2020

कनकासव सिरप क्या है? Kanakasavam Syrup in hindi

कनकासव एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से श्वास रोगों एवं कफ जनित रोगों जैसे अस्थमा एवं क्षय रोग में प्रयोग की जाती है । यदि हम इस औषधि के नाम को देखें तो इस औषधि का नाम 2 शब्दों में विभाजित किया जा सकता है ।

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आसव
  • मुख्य उपयोग: श्वांस, कांस, क्रोनिक फीवर
  • मुख्य गुण: कफ और वात को संतुलित करना

कनक एवं आसाव । कनक संस्कृत में धतूरे को कहा जाता है । इस औषधि में मुख्य रूप से कनक का प्रयोग किया जाता है । कनकासव कफ जनित रोगों जैसे खांसी, दमा, सांस लेने में दिक्कत होना एवं टीवी जैसी समस्याओं में बहुत ज्यादा फायदेमंद होती है  ।

कनकासव को आस्वं विधि से तैयार किया जाता है तथा इसमें धतूरे के अतिरिक्त लगभग 12-13 जड़ी बूटियां और पड़ी होती हैं । कनकासव बाजार में वेदनाथ, डाबर, पतंजलि, धूतपापेश्वर एवं श्री मोहता जैसी प्रसिद्ध कंपनियों के द्वारा निर्मित की जाती है ।

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कनकासव के घटक द्रव्य Kanakasavam Syrup ingredients

  • कनक धतूरा 192 ग्राम
  • मुलेठी 96 ग्राम
  • पिप्पली 96 ग्राम
  • वासा 96 ग्राम
  • कंटकारी 96 ग्राम
  • नागकेशर 96 ग्राम
  • भारंगी 96 ग्राम
  • सोंठ 96 ग्राम
  • तालिसपत्र 96 ग्राम
  • धातकी पुष्प 768 ग्राम
  • मुन्नका 960 ग्राम
  • शहद 2 .400 किलोग्राम
  • शक्कर 4.800 किलोग्राम
  • जल 24.576 किलोग्राम

कनकासव बनाने की विधि How to prepare Kanakasava Syrup

कनकासव बनाने की विधि बहुत ही आसान है और यदि आप आयुर्वेद में रुचि रखते हैं एवं आपके पास पात्र एवं स्थान मौजूद है तथा जड़ी बूटियों की भी पहचान है, तो आप इस औषधि को बड़ी आसानी से घर पर भी बना सकते हैं ।

इसके लिए आप एक मिट्टी का बहुत बड़ा पात्र ले लीजिए । इसके पश्चात इस पात्र में शुद्ध जल ऊपर दी गई मात्रा के अनुसार भर दीजिए, तथा इस जल में शक्कर एवं शहद को अच्छी तरह मिला दीजिये । इसके पश्चात शेष सभी जड़ी बूटियों को दरदरा कूट लीजिए तथा इस पात्र में डालकर अच्छी तरह मिक्स कर दें ।

तत्पश्चात इस पात्र का मुंह इस प्रकार बंद कर दें इसमें वायु प्रवेश ना कर सके । लगभग 30 से 40 दिनों तक इस पात्र को सुरक्षित स्थान पर रखें । इस समय अवधि के पश्चात इस द्रव्य को छानकर कांच की बोतलों में भरकर रख लें, कनकासव बनकर तैयार है ।

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कनकासव के चिकित्सकीय गुण 

 

  • कास (cough)
  • श्वास (asthma)
  • टी बी (tuberculosis)
  • सांस लेने में समस्या (breathing problems)

 

कनकासव के फायदे Kanakasava Syrup uses in hindi

  • कनकासव अस्थमा रोग की सुप्रसिद्ध एवं सर्वाधिक लाभदायक औषधियों में से एक है ।
  • अस्थमा के रोगियों को इस औषधि को एक टॉनिक के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए ।
  • जिन लोगों की खांसी बहुत पुरानी हो गई हो एवं खांसी में कफ भी आता हो, छाती में कफ जमा हुआ हो तो इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिल जाता है ।
  • टीवी रोग में इस औषधि का सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है ।
  • यह ओषधि छाती में जमे हुए कफ एवं श्वास नली के संक्रमण को दूर करने के लिए जानी जाती है ।
  • जिन लोगों को रक्त पित्त की समस्या हो ऐसी स्थिति में भी इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • दमा श्वास के कारण यदि बुखार बना रहता हो तो ऐसी स्थिति में इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • इसके अतिरिक्त यह औषधि पाचन संस्थान पर अपना सकारात्मक प्रभाव डालती है तथा आम दोष को दूर करती हैं ।
  • कंकासव का सेवन करने से सांस की नली में आई हुई सूजन दूर होती है जिससे सांस लेने में सुगमता होती है ।
  • जिन लोगों को दमा श्वास के कारण सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी होती है उन्हें कनकासव का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से फेफड़ों को नई ऊर्जा एवं बल प्राप्त होता है ।
  • इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए यह दवा खांसी को दूर करती है  व शरीर से कफ निकालती है ।

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कनकासव के चिकित्स के उपयोग Kanakasava Syrup benefits in hindi

सेवन विधि एवं मात्रा 

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(10 वर्ष की आयु से ऊपर) 6 से 12 मिलीलीटर
वयस्क 12 से 24 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां Precautions 

  • कनकासव में धतूरा मुख्य ओषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है जो कि एक नशीला पदार्थ होता है । इसलिए कनकासव का उपयोग किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही किया जाना चाहिए ।
  • इस औषधि को अधिक मात्रा में लेने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं ।
  • इस औषधि का सेवन करने से शरीर में गर्मी बढ़ती है एवं पित्त भी बढ़ जाता है, इसलिए जो लोग पित्त प्रधान प्रकृति के होते हैं एवं जिनके हाथों पैरों में जलन रहती हो या शरीर में गर्मी रहती हो उन्हें इस औषधि का सेवन ज्यादा लंबे समय तक नहीं करना चाहिए ।
  • इस दवा की अधिक खुराक लेने से पेट में जलन हो सकती है ।
  • इसके अतिरिक्त इस दवा को ज्यादा मात्रा में लेने पर सिर दर्द, जी मिचलाना, उल्टी एवं बेचैनी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं ।
  • गर्भावस्था व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।

कहाँ से खरीदें? Where to buy?

This medicine is manufactured by Dabur, Shree Baidyanath Ayurved Bhawan, Vaidyaratnam Oushadhasala, Sandu, Pankajakasthuri (Kanakasavam), Kerala Ayurveda Limited (Kanakasavam), Kottakkal (Kanakasavam), Kairali Kanakasavam, Arya Vaidya Sala, and some other pharmacies.

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