कहरवा पिष्टी के फायदे और नुक्सान Kaharva Pishti ke fayde or nuksaan

By | May 24, 2020

कहरवा पिष्टी क्या है? Kaharva Pishti kya hai?

कहरवा पिष्टी जिसे तृणकान्तमणि पिष्टी भी कहा जाता है एक प्रकार का खनिज योगिक है जिसे आयुर्वेद में औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है । इस औषधि को कहरवा नामक पदार्थ से बनाया जाता है ।

  • नाम: कहरवा पिष्टी, तृणकान्तमणि, तृणकान्तमणि पिष्टी
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: पिष्टी, आयुर्वेदिक और यूनानी दवा
  • मुख्य उपयोग: शरीर में पित्त की अधिकता होने के कारण रोग जैसे की अंगों से असामान्य खून गिरना एवं मस्तिष्क के कृमि संक्रमण में लाभकारी
  • मुख्य गुण: बढ़े पित्त को कम करना, हृदय को ताकत देना
  • औषधीय गुण: संकोचक, रक्त को रोकना, पित्तहर

कहरवा एक प्रकार का गोंद होता है जो देखने में चमकदार और पीले रंग का होता है । इसमें से हल्की-हल्की नींबू जैसी खुशबू भी आती है । कहरवा का ही एक अन्य नाम श्रीकांत मणि भी होता है । इस औषधि को आयुर्वेदिक एवं यूनानी दोनों ही वैध इस्तेमाल करते हैं ।

यदि हम इस औषधि के गुणधर्म की बात करें तो यह औषधि मुख्य रूप से मस्तिष्क कृमि नाशक के रूप में प्रयोग की जाती है । इसके अलावा पेचिश, रक्त बवासीर, गर्भाशय से अत्यधिक रक्त आना, मासिक धर्म के समय बहुत ज्यादा रक्त आना, बहुत ज्यादा चक्कर आना, प्यास लगना, पसीना आना इत्यादि रोगों में प्रयोग की जाती है ।

कहरवा पिष्टी के घटक द्रव्य Kaharva Pishti ke ghatak

  • कहरवा (तृणकान्तमणि)
  • गुलाब अर्क गुलाब का जल

कहरवा पिष्टी की निर्माण विधि

कहरवा पिष्टी बनाने के लिए सबसे पहले कहरवा अर्थात किरण कांत मणिपुर को पानी से धोकर साफ किया जाता है । इसके पश्चात इसमें गुलाब जल की भावनाएं दी जाती हैं तथा छाया में सुखाया जाता है । पुनः गुलाब जल की भावना देकर छाया में सुखाते हैं ।

यह प्रक्रिया 7 दिन तक लगातार की जाती है ताकि कहरवा बिल्कुल नरम एवं मुलायम हो जाए, जिससे कि इसका बारीक पावडर तैयार किया जा सके । बारीक पाउडर तैयार करने के पश्चात इसे छानकर किसी जार में भरकर रख लेते हैं, इसे ही कहरवा पिष्टी कहा जाता है ।

कहरवा पिष्टी के औषधी गुणधर्म

  • यह रक्तस्राव को रोकने वाली औषधि है ।
  • यह कृमि नाशक एवं परजीवी नाशक औषधि है ।
  • यह अम्ल पित्त नाशक औषधि है ।
  • यह स्वभाव में स्तंभक है ।
  • यह मस्तिष्क में कृमि संक्रमण को रोकती है ।
  • यह फीता कृमि के लारवा संक्रमण को नष्ट करती है ।
  • मस्तिष्क में कृमि संक्रमण के कारण होने वाले दर्द को दूर करती है ।
  • यह दिल को ताकत पहुंचा कर दिल की घबराहट को दूर करती है ।
  • यह रक्त स्राव एवं खूनी बवासीर में फायदा करती है ।
  • यह गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को दूर करती है ।
  • यह रक्त प्रदर अर्थात मासिक धर्म के समय होने वाले अत्यधिक रक्त को दूर करती हैं ।

कहरवा पिष्टी के फायदे Kaharva Pishti ke fayde

मस्तिष्क में कृमि संक्रमण में लाभकारी कहरवा पिष्टी

कहरवा पिष्टी का सबसे मुख्य फायदा मस्तिष्क में कृमि संक्रमण को नष्ट करना होता है । मस्तिष्क में होने वाले कृमि संक्रमण का सबसे प्रमुख कारण फीता कर्मी का लारवा होता है जो इस संक्रमण को फैलाता है ।

परिणाम स्वरूप रोगी के सिर में बहुत ज्यादा दर्द रहता है, चक्कर आता है, बुखार रहता है, मुंह और नाक से बदबू आती है एवं नाक से रक्त भी आता है । कहरवा पिष्टी का सेवन करने से फीता कृमि का संक्रमण दूर हो जाता है जिस कारण उपरोक्त सभी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं ।

ह्रदय बलवर्धक कहरवा पिष्टी

कहरवा पिष्टी में ऐसे औषधीय गुण मौजूद होते हैं जो कमजोर दिल वाले रोगियों को फायदा पहुंचाते हैं । जिन रोगियों की शारीरिक कमजोरी के कारण हृदय की धड़कन तेज रहती हो तथा दिल घबराता हो उन्हें कहरवा पिष्टी को मुक्ता पिष्टी, प्रवाल पिष्टी एवं अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ सेवन कराने से बहुत लाभ मिलता है ।

रक्त अतिसार में लाभकारी कहरवा पिष्टी

कहरवा पिष्टी किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने के लिए प्रयोग की जाती है । यह औषधि बवासीर में होने वाले रक्तस्राव को रोकती है । गर्भाशय से होने वाले रक्तस्राव को रोकती हैं तथा मासिक धर्म के समय होने वाले रक्त स्राव को भी नियंत्रित रखती है । रक्त अतिसार में इस औषधि को गिलोय सत्व, प्रवाल पिष्टी एवं नागकेसर के साथ सेवन कराने से लाभ मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि Dosage & Directions

  • 250 mg – 500 mg दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे शहद, दूध, मक्खन आदि के साथ लें।
  • पेशाब के साथ खून आने और रक्तार्श में इसे दूर्वा के रस के साथ लें।
  • पित्त विकारों में इसे २ रत्ती प्रवाल पिष्टी मिलाकर, आंवले के मुरब्बे के साथ लें।
  • हृदय की कमजोरी में अर्जुनारिष्ट के साथ लें।
  • खूनी अतिसार में कुटजारिष्ट के साथ लें।
  • रक्त प्रदर में अशोकारिष्ट के साथ लें।
  • पेचिश और पाइल्स में ईसबगोल की भूसी के साथ लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।
  • पथ्य: ठंडा दूध, दलिया, मूंग की दाल, ठन्डे पदार्थ

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Precautions & Side Effects

सामान्यतः कहरवा पिष्टी का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है तथा यह एक सुरक्षित ओषधि है । लेकिन यदि इस औषधि की अधिक मात्रा का सेवन कर लिया जाए तो इससे सिर में दर्द होने की समस्या हो सकती है । इस औषधि को केवल चिकित्सक की सलाह के उपरांत ही लेना चाहिए ।

उपलब्धता

  • बैद्यनाथ Baidyanath (Kaharwa Pishti Trinkantmani)
  • पतंजलि Patanjali Divya Pharmacy (Kaharava Pishti)
  • श्री धन्वन्तरी हर्बल्स Shree Dhanwantri Herbals (Kaharwa Pishti)
  • डाबर Dabur (Kaharva Pishti (TrinKant Mani))
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