जीरकाद्यारिष्ट के फायदे और नुक्सान Jeerakarishtam ke fayde or nuksaan

By | May 5, 2020

जीरकाद्यारिष्ट क्या है? Jeerakarishtam kya hai?

Jeerakarishtam एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम अर्थात आईबीएस के लिए प्रयोग की जाती है । इस रोग में व्यक्ति को भूख नहीं लगती है । खाया पीया हजम नहीं होता है, भोजन करने के पश्चात पेट भारी भारी रहता है, गैस बहुत ज्यादा बनती है तथा स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहता है । पाचन तंत्र बहुत बुरी तरह से प्रभावित रहता है जिससे व्यक्ति दिन प्रतिदिन कमजोर होता चला जाता है ।
 
इस रोग का प्रमुख कारण यकृत का पाचक रसों का सही प्रकार से स्राव ना करना होता है । यह औषधि यकृत को पाचक रसों का सही मात्रा में स्राव करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे यकृत सही तरीके से कार्य करता है एवं अपच, पेट गैस, कब्ज, पेट फूलना, पेट में भारीपन रहना जैसी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं । इसके अतिरिक्त याद दवा त्वचा रोगों जैसे खुजली एवं फोड़े फुंसी में भी फायदा करती है ।
 

घटक द्रव्य Ingredients

सफ़ेद जीरा Fruit 9.6 kg
पानी काढ़ा बनाने के लिए 49.152 liter reduced to 12.288 liter
गुड   14.4 kg
     
धातकी Flower 768 g
सोंठ Rhizome 48 g
जतिफल Seed 48 g
मोथा Rhizome 48 g
दालचीनी Stem Bark 48 g
छोटी इलाइची Seed 48 g
तेजपत्ता leaf 48 g
नागकेशर Stamen 48 g
यवनी Fruit 48 g
काकोल Fruit 48 g
देव्पुश्पा Flower Bud 48 g

Jeerakarishtam के फायदे Jeerakarishtam

  • Jeerakarishtam का सेवन करने से अपच की समस्या दूर होती है, जिससे शरीर में बनने वाला आमविश नष्ट हो जाता है ।
  • यह औषधि पेट के लिए एक डिटॉक्सिफायर के रूप में कार्य करती है ।
  • यह ओषधि भूख बढ़ाने वाली है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से पाचक रसों का सही मात्रा में उत्सर्जन होता है जिससे अपच एवं पेट का भारी रहना जैसे समस्या दूर होती हैं ।
  • इस ओषधि में रोग प्रतिरोधक गुण भी पाए जाते हैं, इसलिए यह ओषधि त्वचा रोगों जैसे फोड़ा फुंसी एवं खाज खुजली में भी प्रभावी होती है ।
  • यह ओषधि महिलाओं में प्रसव के पश्चात गर्भाशय से विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए बहुत अच्छा कार्य करती हैं ।
  • इस औषधि को गर्भाशय डिटॉक्सिफायर कहा जाता है ।

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Jeerakarishtam के औषधीय गुण

  • अपच एवं भूख ना लगना जैसी समस्या में लाभकारी
  • प्रसव के उपरांत गर्भाशय की सफाई करना
  • शारीरिक दर्द को दूर करना
  • आमविश को दूर करना
  • त्वचा रोगों खाज, खुजली, फोड़ा, फुंसी इत्यादि में लाभकारी
  • मुंह के छाले, हाइपर एसिडिटी इत्यादि में लाभकारी
  • पेट में जलन एवं दर्द में लाभकारी

प्रसव के उपरांत बुखार में लाभकारी Prasav ke uprant bukhar me laabhkari

यह औषधि महिलाओं में प्रसव के उपरांत होने वाले बुखार एवं गर्भाशय एवं मूत्र संस्थान के संक्रमण में लाभकारी होती है । इस औषधि में जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं इसलिए यह औषधि प्रसव के उपरांत गर्भाशय में से विषैले पदार्थों को डिटॉक्सिफाई करने के लिए प्रयोग की जाती है । इसके साथ साथ प्रसव के उपरांत महिलाओं को बुखार भी हो जाता है एवं पेट में दर्द, कब्ज, गैस बनना, अपच, अत्यधिक प्यास लगना जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं । उनके शरीर में आलस्य बना रहता है तथा अरुचि पैदा हो जाती है । ऐसी स्थिति में यह भी बहुत अच्छा कार्य करती है ।

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प्रसव के उपरांत दुर्बलता में लाभकारी prasav ke uprant durbalta me laabhkari

यह औषधि महिलाओं में प्रसव के उपरांत आने वाली कमजोरी को भी दूर करती है । प्रसव के उपरांत महिलाओं में बहुत ज्यादा कमजोरी आ जाती है तथा थोड़ा बहुत काम करने पर ही उन्हें थकावट महसूस होती है । इसके अतिरिक्त प्रसूता की मांसपेशियों में बहुत ज्यादा दर्द एवं अकडाहट रहती है । ऐसी स्थिति में इस औषधि का सेवन दशमूलारिष्ट के साथ कराने पर बहुत ज्यादा लाभ मिलता है ।

दूध बढ़ाने में लाभकारी यदि प्रसव के उपरांत यह ओषधि महिलाओं के स्तन में दूध की वृद्धि करती है । जिन महिलाओं को दूध बहुत कम आता हो उन्हें इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

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सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 5 मिलीलीटर
वयस्क 10 से 20 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Side Effects

सामान्यता इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन फिर भी आप इस औषधि का सेवन अपने डॉक्टर की सलाह पर ही करें । गर्भावस्था एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस ओषधि में जायफल होता है, जिसकी तासीर गर्म होती है ।

यह ओषधि पित्त प्रधान प्रकृति के रोगियों को सेवन कराई जा सकती है । इस ओषधि में गुड होता है, इसलिए इस औषधि को डायबिटीज के रोगियों को सेवन नहीं करना चाहिए ।

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