गिलोय सत्व (सत) के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Giloy Satva ke fayde or nuksaan

By | June 8, 2020

गिलोय सत्व (सत) क्या है? Giloy Satva kya hai?

गिलोय सत्व गिलोय से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो विभिन्न रोगों के उपचार में प्रयोग की जाती है । यदि हम गिलोय के बात करें तो गिलोय एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसमें अनेकों दिव्य गुण मौजूद होते हैं ।

यह जड़ी बूटी स्वाद में कड़वी, कसैली तथा तीखी होती है तथा इस जड़ी बूटी में तीनों के दोषों को दूर करने के गुण मौजूद होते हैं । यह मुख्य रूप से जिगर अर्थात लीवर के रोगों को दूर करती है एवं हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में मददगार होती हैं ।

इस जड़ी बूटी का सेवन करने से किसी भी प्रकार के बुखार में लाभ मिलता है तथा यह रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ा देती है ।

गिलोय सत्व बनाने की विधि Giloy Satva kaise banaye

गिलोय सत्व गिलोय का निचोड़ होता है । गिलोय से गिलोय सत्व को बनाने की विधि ज्यादा कठिन नहीं है तथा आप इसे घर पर भी बड़ी आसानी से बना सकते हैं । गिलोय सत्व बनाने की विधि इस प्रकार है ।

सबसे पहले आप गिलोय की जड़ों एवं गिलोय के तने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए तथा इसके पश्चात इन्हें कूटने के पश्चात किसी बड़े से पात्र में रखकर पानी में भिगो दीजिये । पानी की मात्रा केवल इतनी हो की गिलोय अच्छी तरह डूब जाए, बहुत ज्यादा पानी लेने की आवश्यकता नहीं है ।

अगले दिन सुबह इन टुकड़ों को खूब अच्छी तरह मसले ताकि इन टुकड़ों में जितना भी स्टार्च है वह सब पानी में आ जाए । इसके पश्चात इस पानी को कपड़े की सहायता से छान लेते हैं तथा पानी को एकत्रित कर लेते हैं ।

गिलोय के तने एवं जड़ों का शेष पदार्थ फेक दिया जाता है क्योंकि यह हमारे किसी काम का नहीं होता है । पानी को कुछ घंटों के लिए पात्र में ही रहने दिया जाता है ताकि इस पानी में जितना भी स्टार्ट है वह नीचे बैठ जाए ।

कुछ घंटों के पश्चात सावधानीपूर्वक इस टॉर्च को इकट्ठा कर लिया जाता है तथा धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि इसमें से नमी दूर हो जाए । यदि इसकी गांठे बन जाए तो इसे पीसकर इसका पाउडर बना लिया जाता है ।इसे ही गिलोय सत्व कहा जाता है । गिलोय सत्व को गुडुची सत्व या अमृता सत्व भी कहा जाता है ।

गिलोय सत्व के फायदे Giloy Satva ke fayde in hindi

  1. गिलोय सत्व मात्र औषधी नहीं है बल्कि यह एक रसायन है जो हमें अनेकों रोगों से बचाता है ।
  2. गिलोय सत्व का सेवन करने से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी पावर) बहुत ज्यादा मजबूत हो जाती है ।
  3. यह शरीर से विषैले पदार्थों को दूर करने में मददगार होता है ।
  4. गिलोय सत्व किसी भी प्रकार के बुखार जैसे मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर और एवं शीत ज्वर इत्यादि में लाभदायक होता है ।
  5. गिलोय सत्व भोजन के पाचन को सही करता है ।
  6. यह लीवर अर्थात जिगर को बल प्रदान करता है, जिससे लीवर सुचारू रूप से कार्य करता है ।
  7. यह शरीर में से आमदोष को दूर करता है ।
  8. यह त्रिदोष नाशक है अर्थात इसका सेवन करने से वात पित्त एवं कफ तीनों ही दोष नष्ट होते हैं । लेकिन यह वात एवं पित्त को कफ की तुलना में ज्यादा कम करता है ।
  9. गिलोय सत्व में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं ।
  10. गिलोय सत्व जोड़ों के दर्द, गठियाबाय जैसे रोगों में भी फायदा पहुंचाता है ।
  11. एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होने के कारण गिलोय सत्व त्वचा रोगों मे लाभ पहुंचाता है ।
  12. गिलोय सत्व खून में से विषैले पदार्थों को दूर करता है एवं रक्तदोष से पैदा होने वाले रोगों को दूर करने में मददगार होता है ।
  13. यह पुरुषों के प्रमेह रोगों को दूर करने में मददगार होता है ।
  14. यह मूत्र संक्रमण को दूर करने में मदद करता है ।
  15. गिलोय सत्व मूत्रल होता है अर्थात इसका सेवन करने से मूत्र अधिक आता है, जिस कारण यह गुर्दों के अच्छे स्वास्थ्य के लिय लाभदायक होता है ।
  16. यह शरीर की गर्मी को दूर करता है तथा बहुत ज्यादा प्यास लगना एवं पसीने आना जैसी समस्या में लाभदायक होता है ।
  17. यह शरीर में बड़े हुए यूरिक एसिड के इस स्तर को कम करता है ।
  18. यह शरीर में होने वाली जलन एवं पेशाब की जलन को दूर कर शरीर को ठंडक पहुंचाता है ।
  19. गिलोय सत्व का सेवन करने से हृदय को बल मिलता है तथा हृदय की अनियमित धड़कन में यह लाभ पहुंचाता है ।
  20. गिलोय सत्व रोग प्रतिरोधक शक्ति की कमी से होने वाली सर्दी खांसी एवं कफ रोगों में लाभदायक होता है ।
  21. यह हाई ब्लड प्रेशर एवं लो ब्लड प्रेशर दोनों ही स्थितियों में बहुत अच्छा फायदा दिखाता है ।
  22. गिलोय सत्व डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक होता है । इसका सेवन करने से रक्त में शर्करा की मात्रा नियंत्रित होती है ।
  23. यह यकृत लीवर के कारण होने वाले रोगों जैसे रक्ताल्पता एवं पीलिया में लाभदायक होता है ।
  24. गिलोय सत्व महिलाओं के श्वेत प्रदर जैसे रोग में भी लाभदायक होता है ।

गिलोय की मात्रा एवं सेवन विधि Giloy Satva ki matra or sevan vidhi

व्यस्को को गिलोय सत्व 500 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक विभाजित मात्रा में दी जा सकती है । 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को गिलोय सत्व 125 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक दी जा सकती है ।

रोग एवं अनुपान Rog evam anupan

गिलोय सत्व को अलग-अलग रोगों में अलग-अलग जड़ी बूटियों के साथ देने से ज्यादा लाभ मिलता है । नीचे हमने गिलोय सत्व के रोग एवं अनूपान का वर्णन किया है ।

  • अग्नि मानदेय एवं जीर्ण ज्वर में पीपली चूर्ण एवं शहद के साथ
  • पुरुषों के प्रमेह एवं धातुरोगों में ताल मखाना, जायफल एवं मिश्री के साथ
  • वीर्य को गाढ़ा करने एवं स्वपनदोष में बंग भस्म एवं प्रवाल पिष्टी के साथ
  • पेशाब बहुत ज्यादा आने पर देसी घी के साथ
  • पेशाब में पस आने पर मिश्री मिले दूध के साथ
  • प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए एलोवेरा जूस के साथ
  • वात रोगों में घी के साथ
  • पित्त रोगों में मिश्री के साथ
  • कफ रोगों में शहद के साथ

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव Savdhaniya evam dushprabhav

  • निर्धारित मात्रा में गिलोय सत्व का सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता है एवं ना ही इसका कोई दुष्प्रभाव देखा गया है ।
  • गर्भावस्था में गिलोय सत्व को बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है, इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इस औषधि का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करवाना चाहिए ।
  • किसी भी प्रकार की सर्जरी या ऑपरेशन के 2 सप्ताह तक गिलोय सत्व का सेवन नहीं करना चाहिए ।

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One thought on “गिलोय सत्व (सत) के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Giloy Satva ke fayde or nuksaan

  1. Prakash Chand Dogra

    This medicine is very useful specially for all diseases of human bodies.

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