एकांगवीर रस के गुण उपयोग फायदे घटक एवं साइड इफ़ेक्ट Ekangveer Ras ke fayde or nuksan

By | June 13, 2020

एकांगवीर रस क्या है? Ekangveer Ras kya hai?

एकांगवीर रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कई प्रकार की भस्म एवं जड़ी बूटियों से बनाई जाती है । इस औषधि का प्रयोग मुख्य रूप से वात विकारों में किया जाता है । एकांगवीर रस पक्षाघात अर्थात लकवे के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधि मानी जाती है । इसके अतिरिक्त एकांगवीर रस का सेवन करने से अर्धांगवात, ग्रधसी अर्थात साइटिका एवं अन्य सभी प्रकार के वात विकारों में लाभ मिलता है ।

यह औषधि खून की विकृति को दूर करती है एवं वात नाडियों को बल प्रदान करती है । इस औषधि में कीटाणु नाशक एवं कफ एवं वात विकारों को दूर करने के गुण मौजूद होते हैं ।

पक्षाघात (पैरालाइसिस) आंशिक या पूर्ण दो प्रकार का होता है । आंशिक पक्षाघात में रोगी का आधा शरीर मर जाता है तथा पूर्ण पक्षाघात में लोगी का रोगी का पूरा शरीर ही मर जाता है । यहां मरने से अर्थ है कि शरीर के उस हिस्से में किसी प्रकार की कोई हलचल नहीं होती है और ना ही रोगी को उसका अनुभव होता है । इस स्थिति में एकांगवीर रस का सेवन करने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

एकांगवीर रस इन हिंदी Ekangveer Ras in hindi

पक्षाघात के अतिरिक्त साइटिका रोग जिसे ग्रघसी रोग भी कहा जाता है, में रोगी की कमर से लेकर नितंब तक, जांघों में, पैरों के टखनों में तथा पूरे ही पैर में बहुत अधिक दर्द होता है । पैर में जकड़न आ जाती है, थोड़ा समय खड़े रहने पर ही पैरों में दर्द होने लगता है । इस स्थिति में एकांगवीर रस देने से लाभ मिलता है ।

वात रोग का प्रभाव हाथों की उंगलियों पर भी पड़ता है, जिससे हाथों की उंगलियों में वेदना इतनी अधिक बढ़ जाती है कि हाथ बहुत ज्यादा भारी हो जाते हैं । उंगलियों से कार्य करना कठिन हो जाता है, किसी वस्तु को पकड़ा नहीं जाता ।

उंगलियों में झनझनाहट होती है तथा वस्तु हाथ से छूट कर नीचे गिर जाती है । वस्तु हाथ से कब छूटी तथा कहां गिरी इसका भी पता नहीं रहता है । ऐसी स्थिति में एकांगवीर रस बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती है ।

विशेष नोट:  यदि उपरोक्त लक्षण वाले रोगी को के शरीर में पित्त की अधिकता हो जाए तब रोगी को एकांगवीर रस का सेवन नहीं कराया जाता है । इसलिए एकांगवीर रस का सेवन किसी योग्य एवं अनुभवी चिकित्सक की देखरेख एवं सलाह के अनुसार ही करना चाहिए । एकांगवीर रस के साथ सहायक औषधियों के रूप में प्रवाल पिष्टी एवं शिलाजीत का सेवन भी कराया जा सकता है ।

एकांगवीर रस के घटक द्रव्य Ekangveer Ras ke ghatak dravy

  • गंधक शुद्ध 1 Part
  • रस -सिंदूर 1 Part
  • कान्त लौह भस्म 1 Part
  • वंग भस्म 1 Part
  • नाग भस्म 1 Part
  • ताम्र भस्म 1 Part
  • अभ्रक भस्म 1 Part
  • तीक्ष्ण लौह भस्म 1 Part
  • नगर (शुंठी ) (Rz.) 1 Part
  • मरीचा (Fr.) 1 Part
  • पिप्पली (Fr.) 1 Part
  • त्रिफला क्वाथ (P.) Q.S. 3 भावना
  • व्योष द्रव (त्रिकटु ) क्वाथ Q.S. 3 भावना
  • शुंठी (Rz.)
  • पिप्पली (Fr.)
  • मरीचा (Fr.)
  • निर्गुण्डी क्वाथ (Lf.) Q.S. 3 भावना
  • चित्रका क्वाथ (Rt.) Q.S. 3 भावना
  • भृंगराज स्वरस (Pl.) Q.S. 3 भावना
  • शिग्रु स्वरस (Lf.) Q.S. 3 भावना
  • कुष्ठ क्वाथ (Rt.) Q.S. 3 भावना
  • धात्री द्रव (आमलकी ) स्वरस (Fr.) Q.S. 3 भावना
  • विसमष्टि शुद्ध क्वाथ (Enm.) Q.S. 3 भावना
  • अर्क -क्वाथ (Rt./Lf.) Q.S.3 भावना
  • धत्तुरा (Lf.) Q.S. 3 भावना
  • आर्द्रका रस (Rz.) Q.S.3 भावना

एकांगवीर रस के फायदे Ekangveer Ras ke fayde in hindi

  1. एकांगवीर रस का सेवन करने से पक्षाघात अर्थात पैरालाइसिस में लाभ मिलता है ।
  2. ग्रधसि जिसे साइटिका भी कहा जाता है, रोग में एकांगवीर रस मुख्य औषधियों के रूप में प्रयोग की जाती है ।
  3. यह धनुष टंकार में लाभ पहुंचाती है । धनुर्वात या धनुष टंकार रोग जिसमें शरीर टेढ़ा हो जाता है, में लाभदायक होती है ।
  4. हाथों की उंगलियों के मुड़ जाने एवं क्रियाशीलता को सही करने में लाभदायक होती है ।
  5. यह औषधि वात दोष को संतुलित करती हैं ।
  6. वात नाड़ियों एवं शरीर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है ।
  7. यह औषधि रक्त में से कीटाणुओं को नष्ट करती है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

एकांगवीर रस की एक से दो गोली दिन में दो बार सुबह एवं शाम शहद या गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है । सहायक औषधियों के रूप में दशमूल क्वाथ या रासनादी क्वाथ का सेवन कराने से लाभ मिलता है । इस औषधि को भोजन करने के पश्चात ही देना चाहिए ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

चिकित्सक के परामर्श अनुसार निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । इस औषधि को बच्चों से दूर रखना चाहिए ।

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