द्राक्षासव सिरप के गुण उपयोग फायदे एवं नुक्सान Drakshasava Syrup uses and benefits in hindi

By | May 1, 2020

द्राक्षासव सिरप क्या है? Drakshasava Syrup in hindi

द्राक्षासव सिरप एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पेट से संबंधित रोगों के लिए प्रयोग की जाती है । जैसा कि इस औषधि के नाम से ही पता चलता है, इस औषधि का प्रमुख घटक द्रव्य द्राक्षा है । द्राक्षा संस्कृत में अंगूर को कहा जाता है ।

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आसव
  • मुख्य उपयोग: मन्दाग्नि, अरूचि नाशक, 
  • मुख्य गुण: यकृत को सही रखना

यह ओषधि पाचन संस्थान के लिए एक सफल एवं कारगर टॉनिक है, जो पाचन संस्थान की लगभग लगभग सभी समस्याओं को दूर कर व्यक्ति को स्वस्थ एवं निरोगी बना देती है । जो लोग अनियमित खानपान एवं रहन सहन के आदी होते हैं ऐसे लोगों को अक्सर पाचन संस्थान से संबंधित समस्याएंन जैसे पेट गैस, अपच, बदहजमी, भूख ना लगना, पेट में कमर में दर्द रहना आदि बनी रहती हैं । 



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ऐसी स्थिति में द्राक्षासव का सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है । द्राक्षासव को बच्चे, जवान, बुड्ढे, महिलाएं, पुरुष सभी ले सकते हैं । इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, यह पूर्णता प्राकृतिक एवं हर्बल टॉनिक है । इस औषधि का सेवन करने से नींद ना आने जैसी समस्या अर्थात अनिंद्रा दूर होती है ।

द्राक्षासव को आसवन अर्थात फर्मेंटेशन प्रक्रिया के द्वारा बनाया जाता है । इसलिए द्राक्षासव में प्राकृतिक शराब अर्थात सेल्फ जनरेटर अल्कोहल होता है । जिस कारण यह शरीर में बड़ी तीव्रता से अवशोषित होती है एवं लाभ पहुंचाती है ।

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द्राक्षासव के चिकित्सकीय उपयोग Drakshasava Syrup uses in hindi

  • उदावर्त अर्थात पेट में गैस ऊपर की ओर चढ़ना
  • रक्तगुल्म रक्त की गांठें बनना
  • पाचन संबंधित समस्याएं
  • पेट में कीड़े होना
  • आमवात से होने वाला बुखार
  • आम दोष नाशक
  • रक्ताल्पता एनीमिया नाशक
  • पीलिया नाशक
  • अरुचि नाशक
  • आलस्य एवं थकन थकावट को दूर करने वाला
  • अनिद्रा नाशक
  • बवासीर नाशक

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द्राक्षासव के घटक द्रव्य Drakshasava Syrup ingredients

  • द्राक्षा (मुन्नका)  – 2.400 किग्रा.
  • गुड    – 9.600 किग्रा
  • धातकी पुष्प – 240 ग्राम
  • इलायची – 48 ग्राम
  • मरिच (कालीमिर्च) – 48 ग्राम
  • पिप्पली – 48 ग्राम
  • विडंग – 48 ग्राम
  • दालचीनी – 48 ग्राम
  • तेजपता – 48 ग्राम
  • प्रियंगु – 48 ग्राम
  • नागकेशर – 48 ग्राम

द्राक्षासव बनाने की विधि How to prepare Drakshasava Syrup

सबसे पहले मुनक्का को मसल कर पानी में डालकर उबालें । जब पानी एक चौथाई रह जाए तब इस पानी को ठंडा होने के लिए रख दें । पानी को ठंडा होने के पश्चात मुनक्का को अच्छी तरह पानी में मसलें तथा छानकर इस पानी को किसी दूसरे पात्र में भरकर रख लें ।

अब इस पानी में मिश्री को पीसकर शहद के साथ डाल दें तथा बाकी सभी दवाइयों को भी कूटकर इस पानी में डाल दें । इसके पश्चात एक बड़ा बर्तन ले, उसमें कपूर, अगर एवं चंदन की धूनी को इस बर्तन में इकट्ठा कर लें ।

इसके पश्चात इसी बर्तन में शेष द्रव्यों को डाल दें तथा इस बर्तन के मुंह को अच्छी तरह बंद कर दें ताकि इस बर्तन में वायु प्रवेश ना कर सके । इसके लिए इस बर्तन के मुंह पर गीला आटा लगाकर इसको बंद किया जा सकता है ।

तत्पश्चात इस बर्तन को 30 से 45 दिनों तक सुरक्षित स्थान पर रखते हैं । 45 दिनों के बाद इस द्रव्य को छानकर कांच की बोतल में भरकर रख लें, इसे ही द्राक्षासव कहा जाता है ।

द्राक्षासव के फायदे Drakshasava Syrup benefits in hindi

  • द्राक्षासव पाचन संस्थान से जुड़ी हुई समस्याओं को तत्काल दूर करके व्यक्ति को निरोगी एवं हष्ट पुष्ट बना देती है ।
  • इसका सेवन करने से पेट गैस, कब्ज, बदहजमी, अरुचि खत्म होती है ।
  • यह मंदाग्नि के कारण उत्पन्न हुए आलस्य, थकान, बेचैनी को दूर कर व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त बना देती है ।
  • इसका सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, जिससे अपच की समस्या खत्म होती है । यदि भोजन सही तरीके से हजम होगा तो आमविष नहीं बनेगा, जिससे आमवात एवं आम दोष जैसी समस्याएं भी नहीं होंगी ।
  • इसका सेवन करने से यकृत को बल मिलता है, जिससे यकृत सुचारू रूप से कार्य करता है ।
  • यकृत के सुचारू रूप से कार्य करने पर इसके अनेकों सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जैसे कि यकृत के सही कार्य करने पर पेट की समस्याएं ठीक हो जाती हैं ।
  • जिससे बवासीर की समस्या में बहुत जल्दी लाभ मिलता है तथा जिन रोगियों को बवासीर रहती हो उन्हें भी द्राक्षासव का सेवन कराया जाता है ।
  • आम दोष के कारण कभी-कभी बुखार हो जाता है जिसे आमज्वर कहा जाता है । द्राक्षासव के सेवन करने से आमदोष नष्ट होता है जिससे आम ज्वर भी स्वत ही ठीक हो जाता है ।
  • जिन लोगों को पित्त की समस्या हो उन्हें द्राक्षासव का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

तो इस प्रकार हम कह सकते हैं कि द्राक्षासव उन लोगों के लिए एक सर्वोत्तम ओषधि हैं जिन्होंने उटपटांग रहन-सहन एवं खानपान के कारण अपना पाचन संस्थान बिल्कुल खराब कर लिया हो । जिन्हें भूख न लगती हो,  कब्ज बनी रहती हो, गैस बनती हो, थकान एवं सुस्ती बनी रहती हो एवं शरीर कमजोर हो गया हो, आंखें अंदर धंस गई हो, उन्हें इस टॉनिक का सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है ।

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सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(10 वर्ष की आयु से ऊपर) 10 से 15 मिलीलीटर
वयस्क 20 से 30 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

दुष्प्रभाव Side Effects

द्राक्षासव का सामान्यता कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । लेकिन फिर भी आप इस ओषधि को अधिक मात्रा में बिल्कुल भी सेवन ना करें, क्योंकि ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर पेट में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं । अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।



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