द्राक्षारिष्ट सिरप के फायदे नुक्सान उपयोग विधि साइड इफ़ेक्ट एवं मूल्य Draksharishta Syrup Uses Benefits Side Effects & Price in Hindi

By | August 16, 2020

द्राक्षारिष्ट सिरप क्या है? What is Draksharishta Syrup in hindi

द्राक्षारिष्ट सिरप (Draksharishta Syrup) आयुर्वेद की एक सुप्रसिद्ध एवं सर्वोत्तम औषधि है जिसे हम टॉनिक कह सकते हैं । यह टॉनिक हमारे लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है तथा हमारे शरीर की अनेकों समस्याएं एवं रोगों को दूर करता है ।

द्राक्षारिष्ट में आयरन,।फास्फोरस, कैल्शियम, पोटेशियम एवं जिंक जैसे खनिज लवण होते हैं । खनिज लवण के अतिरिक्त द्राक्षारिष्ट में विटामिन बी, एवं विटामिन सी भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं, जिस कारण यह हमें बहुत अधिक फायदा पहुंचाता है ।

द्राक्षारिष्ट का सेवन करने से शारीरिक कमजोरी, भूख ना लगना, कब्ज, अनिद्रा अर्थात नींद का ना आना, सिर दर्द, थोड़ा सा काम करने पर थकान महसूस होना, पुरुषों एवं महिलाओं के गुप्त रोगों एवं श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं में बहुत अच्छा आराम मिलता है ।

द्राक्षारिष्ट एक ऐसा टॉनिक है जिसे सभी उम्र के लोगो महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों के द्वारा प्रयोग किया जा सकता है । तो आइए द्राक्षारिष्ट के बारे में विस्तार से बात करते हैं ।

द्राक्षारिष्ट सिरप के घटक द्रव्य Draksharishta Syrup ingredients in hindi

  1. मुन्नका
  2. गुड
  3. इलायची
  4. कालीमिर्च
  5. दालचीनी
  6. तेजपता
  7. नागकेशर
  8. धातकी पुष्प
  9. विडंग
  10. जल

द्राक्षारिष्ट सिरप बनाने की विधि How to Prepare Draksharishta Syrup in Hindi

द्राक्षारिष्ट को बनाना ज्यादा कठिन नहीं है । यदि आपको थोड़ा सा भी अनुभव है तो आप द्राक्षारिष्ट को घर पर भी बना सकते हैं । इसके लिए आप सबसे पहले मुनक्का को मसल कर पानी में डालकर उबालें ।

जब पानी पकते पकते एक चौथाई रह जाए तब इसे आंच से उतारकर ठंडा होने के लिए रखते हैं । जब पानी ठंडा हो जाए तब मुनक्का को खूब अच्छी तरह हाथ से मसल लें ताकि मुनक्का का असर पानी में आ जाए । इसके पश्चात इस पानी को छान लें तथा मुनक्का के फोकट को फेंक दें ।

इसके पश्चात इस पानी में बाकी सभी जड़ी बूटियों को डालकर पानी को गर्म किया जाता है । फिर इसमें गुड मिलाया जाता है तथा मिश्रण को गर्म किया जाता है । सबसे अंत में इस मिश्रण में धातकी के पुष्प मिलाये जाते हैं तथा मिश्रण को कुछ देर और पकाया जाता है ।

इसके पश्चात इस मिश्रण को आंच से उतार लेते हैं । पात्र के मुंह को अच्छी तरह बंद कर देते हैं ताकि इसमें वायु प्रवेश ना कर सकें । इस पात्र को सुरक्षित स्थान पर 30 से 45 दिनों के लिए रख देते हैं ।

30 से 45 दिनों के पश्चात पात्र को खोलते हैं तथा इस द्रव्य में माचिस की तीली को जलाकर डालते हैं । यदि माचिस की तीली जलती रहे तो समझे कि द्राक्षारिष्ट बनकर तैयार है, अन्यथा इस मिश्रण को कुछ दिन और रखा जाता है । इस प्रकार द्राक्षारिश्ट बनकर तैयार हो जाता है ।

द्राक्षारिष्ट सिरप के फायदे Draksharishta Syrup Uses in hindi

जैसा कि हमने आपको पर बताया द्राक्षारिष्ट कोई साधारण ओषधि नहीं है बल्कि यह एक टॉनिक है जो हमें विभिन्न रोगों में लाभ पहुंचाता है । तो आइए जानते हैं द्राक्षारिष्ट के क्या-क्या लाभ होते हैं ।

श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं में लाभदायक द्राक्षारिष्ट सिरप Draksharishta Syrup Uses in Respiratory System in hindi

द्राक्षारिष्ट का सेवन करने से श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रमण एवं विभिन्न प्रकार की समस्याएं जैसे दमा श्वास, अस्थमा, जुखाम, खांसी, सांस लेने में समस्या, श्वसन पथ में सूजन आदि समस्याओं में लाभ मिलता है ।

सामान्य कमजोरी एवं थकान में लाभदायक द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup Uses in General Weakness in hindi

जिन लोगों को थोड़ा बहुत काम करने पर ही कमजोरी महसूस होती हो एवं आराम करने को मन करता हो उन्हें द्राक्षारिष्ट का सेवन टोनिक के रूप में अवश्य करना चाहिए । द्राक्षारिष्ट में इलायची, काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता, नागकेसर एवं धातकी जैसी जड़ी बूटी मौजूद होती हैं ।

यह सभी जड़ी बूटियां हमारी इम्युनिटी को बहुत अधिक बढ़ा देती हैं जिससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है तथा शरीर ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है । जिस कारण सामान्य कमजोरी, थकान एवं दुर्बलता में बहुत अच्छा आराम मिलता है ।

महिलाओं की समस्या में लाभकारी द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup Uses in Women Problems in hindi

द्राक्षारिष्ट में आयरन, फास्फोरस, जिंक, पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन बी एवं विटामिन सी जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं । इसके अलावा द्राक्षारिष्ट में अन्य जड़ी बूटी मौजूद होती है जो महिलाओं की समस्याओं जैसे पीरियड के दौरान बहुत अधिक दर्द होना, गर्भाशय में दर्द होना, गर्भाशय से बहुत अधिक रक्तस्राव होना, कमर दर्द, कंधों में दर्द, हाथों पैरों में दर्द आदि में बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती है ।

ह्रदय रोगों के लिए लाभदायक द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup Uses in Heart Problems in Hindi

द्राक्षारिष्ट में जितनी भी जड़ी बूटियों मौजूद होती हैं खासकर दालचीनी एवम् तेजपत्ता, हमारे हृदय के लिए बहुत अधिक लाभदायक होती है । द्राक्षारिष्ट का सेवन करने से हृदय से संबंधित समस्याएं जैसे रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल, ट्राइग्लिसराइड आदि में बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यह टॉनिक खून को पतला करने में मदद करता है जिससे हृदय को खून को पंप करने में आसानी होती है तथा हृदय की कार्य क्षमता एवं आयु बढ़ जाती है । इसलिए इस टॉनिक को हम हृदय का दोस्त कह सकते हैं ।

पाचन तंत्र के लिए लाभदायक द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup Uses for Digestive System in Hindi

द्राक्षारिष्ट पाचन तंत्र की विभिन्न समस्याओं जैसे पेट गैस, कब्ज, बदहजमी, खट्टी डकार आना, अपच, भूख ना लगना आदि समस्याओं में रामबाण फायदा पहुंचाता है । द्राक्षारिष्ट में मुनक्का, गुड, इलायची एवं धातकी के फूल मौजूद होते हैं ।

यह सभी जड़ी बूटियां पाचन तंत्र पर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाती हैं, जिस कारण यकृत से पाचक रसों का स्राव नियमित होता है, भोजन सही प्रकार से हजम होता है, अपान वायु निष्कर्षित होती है, पेट हल्का फुल्का रहता है तथा रोगी को बहुत अच्छा महसूस होता है ।

आमवात में लाभकारी द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup for Gaut in Hindi

आमवात का मुख्य कारण आमविश होता है जो भोजन के सही प्रकार से हजम ना होने के कारण बनता है । यदि भोजन सही प्रकार से हजम ना हो तो भोजन से आमविश उत्पन्न होता है जो आमदोष का मुख्य कारण है । द्राक्षारिष्ट अपच की समस्या को भी दूर कर देता है, जिस कारण आमदोष एवं आम्वात दोनों ही समस्याएं दूर हो जाती हैं ।

बवासीर में लाभदायक द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup in Piles in hindi

बवासीर का मुख्य कारण कब्ज होती है । यदि रोगी को कब्ज रहे तो आगे चलकर यही समस्या बवासीर का रूप धारण कर लेती है, और जैसा कि आप जानते हैं कि द्राक्षरिष्ट कब्ज को दूर करती हैं । इसलिए बवासीर के समस्या में यह टॉनिक बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती हैं ।

आमज्वर में लाभदायक द्राक्षारिष्ट Draksharishta Syrup in Aamjvar in hindi

आमदोष के कारण कभी-कभी रोगी को हल्की हरारत या बुखार जैसी समस्या हो जाती है, जिससे आमज्वर कहा जाता है । द्राक्षारिष्ट सिरप का करने से आमजवर में तत्काल आराम मिल जाता है ।

सेवन विधि एवं मात्रा Dosage & Directions in Hindi

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(10 वर्ष की आयु से ऊपर) 10 से 15 मिलीलीटर
वयस्क 20 से 30 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

सामान्यतः इस दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है तथा यह एक सुरक्षित ओषधि है । द्राक्षारिष्ट सिरप को अधिक मात्रा में सेवन करने पर पेट से संबंधित कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं जैसे पेट में जलन, छाती में जलन इत्यादि ।

गर्भावस्था एवं स्तनपान

गर्भावस्था में एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को इस टोनिक का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिय ।

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