पाचन तंत्र से संबंधित रोग लक्षण कारण और उपचार Diseases Related to Digestive System of Human Body

By | March 8, 2021
pachan tantra ke rog

Last updated on April 3rd, 2021 at 12:22 pm

पाचन तंत्र से संबंधित रोग

दोस्तों हमारा शरीर परमात्मा की एक बहुत ही विचित्र रचना है, जिसमें मस्तिष्क, ह्रदय, पाचन तंत्र तथा तंत्रिका तंत्र होते हैं । इनमें से यदि हम पाचन तंत्र की बात करें तो यह मनुष्य शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण तंत्र होता है, क्योंकि हम जो भी भोजन ग्रहण करते हैं वह पाचन तंत्र के माध्यम से ही हमें ऊर्जा प्रदान करता है तथा हमें जीवित बनाए रखता है ।

तो आइए जानते हैं कि पाचन तंत्र क्या है तथा इससे जुड़े हुए रोग कौन-कौन से हैं तथा उन रोगों का निदान कैसे किया जा सकता है ।

पाचन तंत्र क्या है What is Digestive System in Hindi

पाचन तंत्र हमारे मुंह से लेकर गुदा तक फैला हुआ है । मुंह से लेकर गुदा तक विभिन्न अंग होते हैं जिनसे मिलकर पाचन तंत्र का निर्माण होता है । सबसे पहले पाचन तंत्र में ग्रास नली आती है, उसके बाद अमाशय, पित्ताशय, छोटी आंत, बड़ी आंत तथा अंत में गुदाद्वार आता है ।

पाचन प्रणाली में लीवर की मुख्य भूमिका होती है, क्योंकि विभिन्न प्रकार के पाचक रसों का निर्माण लीवर में ही होता है । लीवर की सहायता के लिए पित्त की थैली तथा अग्नाशय भी होते हैं, क्योंकि इनसे भी कुछ पाचक रसों का निर्माण होता है जो हमारे शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए तथा भोजन के सभी प्रकार के पाचन के लिए आवश्यक होते हैं ।

जो भोजन ग्रहण करते हैं वह लीवर से होता हुआ छोटी आंत में पहुंचता है जहां भोजन को पीसा जाता है । इसके बाद भोजन बड़ी आत में जाता है जहां भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण कर लिया जाता है तथा अपशिष्ट पदार्थ को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है ।

पाचन तंत्र के रोग Diseases of Digestive System in Hindi

आइए अब हम जानते हैं पाचन तंत्र के रोग कौन कौन से होते हैं । पाचन तंत्र से जुड़े किसी भी अंग में किसी भी प्रकार की कोई समस्या या रोग होने पर उसे ही पाचन तंत्र के रोग कहा जाता है । यह रोग कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे कि कब्ज, पेट में दर्द होना, पेट में ऐठन, मतली, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, इन्फ्लेमेटरी बॉवेल सिंड्रोम, छाती में जलन होना, दस्त लगना इत्यादि ।

यदि कभी भी आपको पाचन तंत्र से संबंधित किसी भी रोग की समस्या हो या आपको कोई लक्षण दिखाई दें तो आपको तुरंत पेट के डॉक्टर से मिलना चाहिए । पाचन तंत्र से संबंधित डॉक्टर को गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट कहा जाता है । यह आपके पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं को आप के बताए गए लक्षणों के अनुसार परीक्षण करके आपको दवाई दे सकते हैं ।

पाचन तंत्र की बीमारियों के प्रकार

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया पाचन तंत्र विभिन्न अंगों से मिलकर बना होता है तथा प्रत्येक अंग अपने आप में बहुत अधिक जटिल होता है । इसलिए किसी भी अंग में किसी भी प्रकार की समस्या पैदा होने पर उसे पाचन तंत्र के रोग में ही गिना जाएगा । यही कारण है की पाचन तंत्र की बीमारियां कई प्रकार की होती हैं ।

पाचन तंत्र की बीमारियों के लक्षण

यदि आपके पाचन तंत्र में गड़बड़ी है तो इसका सीधा प्रभाव आपकी भूख तथा आपके स्वास्थ्य पर पड़ेगा । निश्चित रूप से आपको या तो भूख नहीं लगेगी या खाया पिया जब नहीं होगा तथा आप दिन प्रतिदिन कमजोर होते चले जाएंगे । यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो आप समझ जाइए कि आपका पाचन तंत्र सही नहीं है तथा आपको उपचार की आवश्यकता है ।

  • कब्ज होना अर्थात 2 से 3 दिनों तक मल त्याग ना होना
  • पेट का भारी रहना
  • पेट में दर्द रहना
  • पेट में ऐठन रहना
  • छाती में जलन होना
  • पतले पतले दस्त आना
  • भूख ना लगना
  • पेट में बहुत अधिक गैस बनना
  • पेट का फूल जाना
  • भोजन करते करते जी कच्चा होना एवं उल्टी या मतली आना
  • वजन बहुत अधिक बढ़ जाना या बहुत अधिक घट जाना
  • भोजन निकलते समय गले में दर्द होना या कठिनाई महसूस होना
  • मल का रंग काला हो जाना
  • मल त्याग करते समय खून आना एवं दर्द होना
  • हर समय थकान आलस्य एवं कमजोरी बने रहना

डॉक्टर के पास कब जाएं

अगला महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए । कभी-कभी कुछ समस्या ऐसी होती हैं जो आपके खानपान या खराब दिनचर्या के कारण पैदा होती हैं तथा अपने आप ही खत्म भी हो जाती हैं तथा आपको डॉक्टर के पास जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है ।

लेकिन कुछ समस्या ऐसी हो सकती हैं जो बिना डॉक्टर के पास जाए ठीक नहीं होती हैं । तो यह जानना भी आवश्यक है कि आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए । नीचे हमने कुछ ऐसे ही परिस्थितियां दी हैं जिनमें आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए ।

  • यदि आपके वजन में लगातार गिरावट आ रही हो
  • मल त्याग करते समय खून आ रहा हो
  • गुदा में दर्द होता हो
  • पेट में तेज दर्द होता हो तथा इस दर्द की आवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही हो
  • लगातार दस्त हो रहे हो तथा मल का रंग बदल गया हो ।

यह कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं जिनमें आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाकर अपना परीक्षण कराना चाहिए ।

पाचन तंत्र के रोग का कारण

अब यह जानना भी आवश्यक है कि आखिर पाचन तंत्र की समस्याएं या रोग पैदा क्यों होते हैं । क्योंकि यदि आपको सही कारण का पता चल जाएगा तो काफी हद तक आप स्वयं ही अपनी दिनचर्या एवं रहन-सहन में परिवर्तन करके पाचन तंत्र के रोगों से बच सकते हैं तथा अपने आप को स्वस्थ भी रख सकते हैं ।

लेकिन हम आपको बता दें तंत्र पाचन तंत्र के अलग-अलग रोगों के कारण भी अलग-अलग होते हैं । इसलिए इन सभी पर चर्चा करना भी जरूरी है । तो आइए जानते हैं कौन-कौन से अंग में होने वाले रोग के कारण क्या क्या है ।

कब्ज

सबसे पहले बात करते हैं कब्ज की । कब्ज जिसे कॉन्स्टिपेशन भी कहा जाता है एक ऐसी बीमारी है जिसमें रोगी को कई-कई दिनों तक मल त्याग करने की इच्छा पैदा नहीं होती है । यह रोग खराब जीवनशैली तथा गलत आहार-विहार के कारण होता है ।

इसलिए अपना खान-पान सही रखें, हरी सब्जियां खूब खाएं, पानी खूब पिए, रात को जल्दी सोए तथा सुबह जल्दी सो कर उठे, योगा करें । तो निश्चित रूप से आप कब्ज की समस्या से बचे रहेंगे ।

पेट में अल्सर की बीमारी

अल्सर का अर्थ होता है जख्म अर्थात पेट में जख्म हो जाना । यदि आप बहुत अधिक अंग्रेजी दवाइयां खाली पेट लेते हैं जैसे कि एस्प्रिन या इबुप्रोफेन इत्यादि तो इनका सेवन करने से पेट में अल्सर पैदा हो जाता है, जो आगे चलकर बहुत अधिक परेशानी पैदा करता है । इसके अलावा बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण भी पेट में अल्सर की समस्या पैदा हो जाती है ।

पित्त की थैली में पथरी हो जाना

पित्त की थैली में पथरी होना एक जटिल रोग माना जाता है तथा अभी तक इसका किसी प्रकार का उपचार भी नहीं मिल पाया है । इसका एकमात्र उपचार है ऑपरेशन के द्वारा पित्त की थैली को ही शरीर से बाहर निकाल कर फेंक देना ।

पित्त की थैली में पथरी होने के कारणों का अभी तक सही प्रकार से पता नहीं चला है, लेकिन माना जाता है कि यदि पित्त रस जो कि पित्ताशय में ही बनता है, यदि उसमें कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाए तो पित्ताशय में पथरी बनने लगती है । पित्त रस रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखने में मदद करता है ।

पित्त की पथरी बनने के कुछ अन्य कारण

ऐसा आवश्यक नहीं है कि पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने पर ही पित्त की पथरी बनती है, बल्कि कुछ अन्य कारण भी हैं जो पित्त की थैली में पथरी बनने का कारण बनते हैं, जैसे कि –

  • बहुत अधिक कोलेस्ट्रोल युक्त भोजन का सेवन करना
  • बहुत अधिक वसा युक्त भोजन जैसे मॉस मछली इत्यादि का सेवन करना
  • ज्यादातर ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जिनमें रेशा अर्थात फाइबर बहुत ही कम हो
  • यकृत अर्थात लीवर से संबंधित किसी बीमारी का होना

इन्फ्लेमेटरी बॉवेल सिंड्रोम

इस रोग में पाचन तंत्र में सूजन आ जाती है जिस कारण पेट में दर्द होना, ऐठन होना, छाती में जलन होना जैसी समस्या पैदा हो जाती हैं । इस रोग का मुख्य कारण अल्सरेटिव कोलाइटिस तथा क्रॉन रोग को माना जाता है । इसके अलावा यदि आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति इम्यूनिटी पावर कमजोर पड़ गई हो तो भी वायरल इंफेक्शन के कारण यह समस्याएं पैदा हो सकती हैं ।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पाचन तंत्र की समस्या मानी जाती है । इस समस्या में व्यक्ति मल त्याग करने के लिए जोर नहीं लगा पाता है जिस कारण पूर्ण रूप से मल त्याग नहीं हो पाता है । इसके अतिरिक्त पेट में दर्द होना, खिंचाव होना जैसी समस्याएं भी रोगी में प्रकट हो जाती है ।

एसिड भाटा रोग

जब आप भोजन ग्रहण करते हैं तो भोजन ग्रहण करने पर ग्रास नलिका का अगला भाग खुल जाता है जिससे भोजन आमाशय में चला जाता है । भोजन निकलने के बाद ग्रास नली का का अग्रभाग बंद हो जाता है ।

लेकिन कुछ असामान्य परिस्थितियों में यह भाग बंद नहीं होता है जिस कारण पेट में मौजूद पाचक रस ग्रास नलिका में आ जाते हैं एवं ग्रास नलिका में बहुत अधिक जलन पैदा कर देते हैं । इस समस्या को ही एसिड भाटा रोग कहा जाता है । इस रोग के होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं ।

  • बहुत अधिक सिगरेट एवं शराब का सेवन करना
  • जरुरत से अधिक चाय या कॉफी पीना
  • मोटापा एवं गर्भावस्था

बवासीर

इस रोग में रोगी को मल त्याग करते समय काफी दर्द होता है तथा मल के साथ-साथ खून भी आता है । रोगी के गुदा के आसपास मस्से हो जाते हैं जिनमें दर्द होता है एवं मल त्याग करते वक्त रक्त भी आता है । बवासीर होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं ।

  • बहुत अधिक तला भुना भोजन ग्रहण करना
  • मीट मांस मछली इत्यादि का अधिक सेवन करना
  • शराब एवं सिगरेट का ज्यादा सेवन करना
  • लंबे समय तक कब्ज रहना
  • पानी बहुत कम पीना
  • फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना
  • रात को देर से सोना एवं सुबह को देर से सोकर उठना
  • मल त्याग करने की इच्छा को रोककर रखना इत्यादि

पाचन तंत्र के रोगों से कैसे बचें

अगला महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हम पाचन तंत्र के रोगों से अपने आप को कैसे बचाएं । तो इसका सीधा सा उत्तर है अपने खानपान एवं अपनी जीवनशैली में बदलाव करके तथा प्राकृतिक जीवन को अपनाकर हम पाचन तंत्र के रोगों से काफी हद तक बच सकते हैं तथा अपने स्वास्थ्य को अच्छा बना कर रख सकते हैं । नीचे हमने बताया है कि आप किस प्रकार पाचन तंत्र के रोगों को दूर कर सकते हैं ।

  • ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा अर्थात चिकनाई बहुत अधिक हो कम से कम खाएं
  • ज्यादा चटपटा तथा मसालेदार भोजन भी कम खाएं
  • तला भुना भोजन जैसे समोसे कचोरी छोले भटूरे पकोड़े इत्यादि का कम से कम सेवन करें
  • पानी खूब पिए प्रतिदिन, कम से कम 8 से 10 लीटर पानी जरूर पिएं
  • सुबह उठकर तीन से चार गिलास गर्म पानी जरूर पिएं
  • रात को जल्दी सोने की आदत डालें तथा सुबह जल्दी सो कर उठे
  • सुबह उठकर हल्का फुल्का व्यायाम करें तथा दो से 3 किलोमीटर शहर भी अवश्य करें
  • शराब तथा धूम्रपान का सेवन बिल्कुल ना करें
  • बहुत अधिक मात्रा में भोजन ना खाएं तथा भोजन करने के तुरंत बाद थोड़ा सी सैर अवश्य करें
  • भोजन करने के तुरंत पश्चात पानी ना पिए कम से कम 45 मिनट के बाद पानी पिए
  • अनावश्यक रूप से मल त्याग करने की इच्छा को ना रुके जैसे ही आप को मल त्याग करने की इच्छा हो तुरंत मल त्याग करने जाएं सुबह-सुबह मल त्याग करने की आदत डालें
  • अधिक मात्रा में दर्द निवारक सूजन कम करने वाली एलोपैथिक दवाओं का सेवन ना करें क्योंकि यह दवा आपके लीवर किडनी पर सीधा प्रभाव डालती हैं तथा पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकती हैं

पाचन तंत्र की बीमारियों में क्या खाएं क्या ना खाएं

यदि आपको पाचन तंत्र से जुड़ी हुई समस्याएं हैं तो आपको अपने खान-पान का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है । नीचे हमने क्या खाएं क्या ना खाएं इसके बारे में विस्तार से बताया है ।

पाचन तंत्र की बीमारी में क्या खाएं

यदि आप चाहते हैं कि आपको पाचन तंत्र से संबंधित रोग ना हो तो आप हरी सब्जियां खूब खाएं ।जिनमें रेशा अधिक से अधिक मात्रा में हो आप अदरक चुकंदर तथा शकरकंद का खूब सेवन करें । गर्मियों में खीरा तथा ककड़ी खूब खाएं जिससे आपको पर्याप्त मात्रा में निशा मिलता रहे । यदि फलों की बात करें तो आप सेब, केला, खरबूजा, पपीता का खूब सेवन करें । इसके अलावा संतरा अधिक मात्रा में लें जिससे आपको पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलता रहे ।

गर्मी के दिनों में पानी खूब पिए तथा कुछ कुछ देर के बाद नींबू पानी पीते रहे यदि संभव हो तो नारियल पानी भी जरूरी है ।

पेट की बीमारी में क्या ना खाएं

बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनको खाने पर आप का पाचन तंत्र खराब हो सकता है, जैसे कि अधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थ, तेल एवं चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ, तेज मसालेदार खाद्य पदार्थ, तले भुने खाद्य पदार्थ इत्यादि । इसके अलावा अधिक मात्रा में प्याज वाला भोजन सेवन करने पर भी पाचन तंत्र पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है । यदि पेय पदार्थों की बात करे तो आप शराब का कम से कम सेवन करें ।

दोस्तों यह हमने आपको पाचन तंत्र से संबंधित जानकारी दी । यह आलेख आपको कैसा लगा कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं ।

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