धात्री आसव के फायदे नुक्सान उपयोग विधि साइड इफ़ेक्ट एवं मूल्य Dhatryasava (Dhatri asava) Uses Benefits Side Effects & Price in Hindi

By | August 16, 2020

धात्री आसव क्या है? What is Dhatryasava (Dhatri asava) in hindi

धात्री आसव (Dhatryasava (Dhatri asava)) आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से एनीमिया, पीलिया, हृदय से संबंधित समस्याएं, गठिया, मलेरिया, खांसी, लगातार हिचकी आना, एनोरेक्सिया एवं सांस लेने में दिक्कत होना जैसी समस्याओं के उपचार के लिए सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

इस सबके अलावा यह औषधि एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस, बहुत अधिक प्यास लगना, अपच, मोटापा, एडी का फट जाना एवं पुराने बुखार में भी लाभदायक होती है । यह औषधि लोहे के अवशोषण में सुधार करती है जिस कारण इस औषधि का सेवन करने से खून की कमी अर्थात एनीमिया जैसी समस्या में बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यह बहुत ही अच्छी एंटी ऑक्सीडेंट है तथा रक्त में मौजूद फ्री रेडिकल्स को दूर करती है, जिससे यह बढ़ती उम्र में आने वाली समस्याओं में फायदा पहुंचाती है ।

धात्री आसव के घटक द्रव्य Dhatryasava (Dhatri asava) ingredients in hindi

घटक मात्रा
ताजा आंवला फल 2000 फल
शहद 2000 फलों से निकाले गए आंवला जूस का 8 वा हिस्सा
पिप्पली (लंबी काली मिर्च) – पाइपर लौंगम 120 ग्राम
शकरकरा (चीनी) 3000 ग्राम

धात्री आसव को बनाने की विधि

  1. 2000 ताजे आंवला फलों से रस निकालें।
  2. 2000 फलों में से निकाला गया आंवला रस का 8 भाग शहद लें।
  3. अब, आंवले के रस में आंवले का रस, शहद, पिप्पली चूर्ण और शक्कर मिलाएं।
  4. इसे 15 दिनों के लिए असाव स्थान पर छोड़ दें।
  5. फिर तरल (धात्रासव) को क्षय करें और इसे खाद्य-ग्रेड की बोतलों में संरक्षित करें।

धात्री आसव के औषधीय गुण Dhatryasava (Dhatri asava) properties in hindi

धात्र्यवास के औषधीय गुण निम्नलिखित हैं:

  • एंटीऑक्सीडेंट
  • कार्डियक टॉनिक
  • एंटासिड
  • विरोधी गाउट
  • Antiulcerogenic
  • cardioprotective
  • cardioprotective
  • विरोधी मोटापा
  • हीमेटिनिक (हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है)
  • हेमेटोजेनिक (लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है)

धात्री आसव के दोष कर्म

हालाँकि, यह त्रिदोष को शांत करता है, लेकिन धात्री आसव की मुख्य क्रिया पित्त दोष पर देखी जाती है 

धात्री आसव के चिकित्सकीय संकेत Dhatryasava (Dhatri asava) Benefits in hindi

धात्री आसव का सेवन करने पर निम्न रोगों में लाभ होता है।

  • सामान्य दुर्बलता
  • रक्ताल्पता
  • पीलिया
  • एनोरेक्सिया
  • ईर्ष्या और अपच ( यष्टिमधु (मुलेठी ) के साथ)
  • gastritis
  • अत्यधिक प्यास
  • गाउट
  • दिल के रोग
  • खांसी
  • लगातार हिचकी आना
  • फटा एड़ी
  • अत्यधिक थकान के साथ जीर्ण निम्न-श्रेणी का बुखार

धात्री आसव के उपयोग एवं फायदे Dhatryasava (Dhatri asava) Uses in hindi

जैसा कि हमने आपको बताया कि यह औषधि विभिन्न रोगों जैसे सामान्य दुर्बलता, खून की कमी, पीलिया, एनोरेक्सिया, गठिया, खांसी, हृदय संबंधित समस्याओं एवं बुखार इत्यादि में बहुत अधिक लाभदायक होता है । इतना ही नहीं धात्री आसव वजन घटाने में भी बहुत अच्छा फायदा पहुंचाता है । धात्री आसव में आमला एवं पिपली जैसी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जो शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को जला देती हैं जिससे मोटापा एवं वजन दोनों ही कम हो जाते हैं ।

खुराक एवं मात्रा

धात्र्यसव की सामान्य खुराक इस प्रकार है।
बच्चे (5 वर्ष की आयु से ऊपर) 2.5 से 5 मिली
वयस्क 5 से 10 मिली
अधिकतम संभव खुराक 30 मिली प्रति दिन (विभाजित खुराकों में)
खुराक: दिन में दो बार पानी की बराबर मात्रा के साथ
बेस्ट टाइम टू टेक: फूड के बाद

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

धात्री आसव का किसी भी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । यह एक सुरक्षित ओषधि है ।

मतभेद

धात्री आसव का कोई ज्ञात मतभेद नहीं है ।

गर्भावस्था एवं स्तनपान

धात्री आसव को गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सेवन कराना सुरक्षित है ।

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